📘 CodingMarble Learn

प्रत्यावर्ती धारा

प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक घूमता तीर, जिसे फेज़र कहते हैं, AC की तरंग बनाता है। हर पल उसकी ऊँचाई ही वोल्टता है। वोल्टता ऊपर जाती है, नीचे आती है और दिशा बदलती है।
  2. पीली रेखा शिखर मान V₀ है। हरी रेखा rms मान है, 0.707 × V₀। घर की 230 V सप्लाई का मतलब rms 230 V; शिखर लगभग 325 V है।
  3. केवल प्रतिरोध हो तो धारा का तीर (नीला) वोल्टता के तीर (लाल) पर ही रहता है। दोनों तरंगें साथ उठती-गिरती हैं। कलांतर φ = 0।
  4. केवल प्रेरक हो तो धारा का तीर 90° पीछे है। धारा चौथाई चक्र बाद शिखर पर पहुँचती है। औसत शक्ति शून्य: वाटहीन धारा।
  5. केवल संधारित्र हो तो धारा का तीर 90° आगे है। धारा चौथाई चक्र पहले शिखर पर। औसत शक्ति फिर शून्य।
  6. अब खुद करें: R, L, C या LCR चुनें और आवृत्ति बदलें। LCR में वह आवृत्ति ढूँढें जहाँ Xʟ = Xᴄ और धारा सबसे अधिक हो: अनुनाद।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

AC बदलती रहती है, तो "230 V" क्यों कहते हैं?

230 V rms मान है: वह स्थिर DC जो हीटर को उतना ही गर्म करे। असली वोल्टता +325 V से −325 V तक झूलती है।

घूमता तीर तरंग कैसे दिखाता है?

घूमते हुए तीर की नोक की ऊँचाई sin ωt की तरह ऊपर-नीचे होती है। उस ऊँचाई को समय के साथ बनाओ तो तरंग मिलती है।

प्रेरक में धारा पीछे क्यों रहती है?

प्रेरक धारा के हर बदलाव का विरोधी emf से विरोध करता है, इसलिए धारा देर से बनती है: वोल्टता के चौथाई चक्र बाद शिखर पर।

संधारित्र में धारा आगे क्यों रहती है?

पहले धारा बहकर प्लेटों पर आवेश लाती है; तभी वोल्टता बनती है। इसलिए धारा चौथाई चक्र पहले शिखर पर।

शुद्ध L या C में शक्ति क्यों खर्च नहीं होती?

चौथाई चक्र में ऊर्जा अंदर जाती है और अगले चौथाई में लौट आती है। औसत शून्य; cos 90° = 0।

अनुनाद पर ठीक-ठीक क्या होता है?

Xʟ और Xᴄ बराबर होकर कट जाते हैं। केवल R बचता है, तो Z सबसे कम, धारा सबसे अधिक और V, I समान कला में।

केवल R में वोल्टता और धारा साथ क्यों उठती हैं?

प्रतिरोध ऊर्जा जमा नहीं करता, इसलिए धारा तुरंत वोल्टता के पीछे चलती है: हर पल I = V/R।

प्रत्यावर्ती धारा क्या है?

दिष्ट धारा (DC) एक ही दिशा में बहती है, जैसे सेल से। प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार दिशा बदलती है। भारत में यह हर सेकंड 100 बार दिशा बदलती है (50 पूरे चक्र, यानी f = 50 Hz)।

V = V₀ sin ωt और I = I₀ sin ωt लिखते हैं। V₀ और I₀ शिखर मान (सबसे बड़े मान) हैं। ω = 2πf कोणीय आवृत्ति है। एक चक्र का समय T = 1/f।

शिखर, माध्य और rms मान

एक पूरे चक्र में AC आधे समय धनात्मक और आधे समय ऋणात्मक है, इसलिए इसका औसत शून्य है। इससे कुछ काम की बात पता नहीं चलती।

इसलिए हम rms मान (वर्ग माध्य मूल) लेते हैं: मानों का वर्ग करो, औसत लो, फिर वर्गमूल। साइन तरंग के लिए: Irms = I₀/√2 ≈ 0.707 I₀ और Vrms = V₀/√2।

अर्थ: rms मान वह स्थिर DC है जो प्रतिरोध को उसी दर से गर्म करे। मीटर और बल्ब rms मान ही दिखाते हैं। आधे चक्र का माध्य 2I₀/π ≈ 0.637 I₀ है।

फेज़र: तरंग के लिए घूमता तीर

फेज़र लंबाई V₀ का एक तीर है जो कोणीय चाल ω से वामावर्त घूमता है। किसी भी समय उसका ऊर्ध्वाधर प्रक्षेप V₀ sin ωt है। इस तरह घूमता तीर तरंग बनाता है।

वोल्टता और धारा के फेज़र साथ बनाते हैं। उनके बीच का कोण कलांतर φ है।

R, L और C में AC: प्रतिघात

केवल प्रतिरोध

V और I समान कला में (φ = 0)। V₀ = I₀ R।

केवल प्रेरक

प्रेरक धारा के हर बदलाव का विरोध करता है, इसलिए धारा वोल्टता से 90° पीछे रहती है। इसका विरोध प्रेरकीय प्रतिघात Xʟ = ωL (ओम) है। आवृत्ति बढ़े → Xʟ बढ़े। DC (ω = 0) के लिए Xʟ = 0।

केवल संधारित्र

संधारित्र पहले आवेशित होता है, तब उसकी वोल्टता बनती है, इसलिए धारा 90° आगे रहती है। धारितीय प्रतिघात Xᴄ = 1/(ωC)। आवृत्ति बढ़े → Xᴄ घटे। संधारित्र DC को रोकता है (Xᴄ → ∞)।

श्रेणी LCR परिपथ और प्रतिबाधा

श्रेणी में R, L और C सबमें एक ही धारा बहती है। पहले धारा का फेज़र बनाइए। Vʀ उसी के अनुदिश, Vʟ 90° आगे, Vᴄ 90° पीछे। Vʟ और Vᴄ उल्टी दिशा में हैं, इसलिए कुछ कट जाते हैं।

V² = Vʀ² + (Vʟ − Vᴄ)², इससे प्रतिबाधा Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²)। फिर I = V/Z।

कलांतर: tan φ = (Xʟ − Xᴄ)/R। Xʟ > Xᴄ हो तो परिपथ प्रेरकीय (धारा पीछे); Xᴄ > Xʟ हो तो धारितीय (धारा आगे)।

श्रेणी LCR परिपथ में अनुनाद

आवृत्ति बदलने पर Xʟ बढ़ता है और Xᴄ घटता है। एक आवृत्ति पर दोनों बराबर हो जाते हैं: ω₀L = 1/(ω₀C), तो ω₀ = 1/√(LC) और f₀ = 1/(2π√LC)।

अनुनाद पर Z = R (सबसे कम), धारा सबसे अधिक, और V तथा I समान कला में। Vʟ और Vᴄ अलग-अलग सप्लाई से बहुत बड़े हो सकते हैं, पर आपस में कट जाते हैं।

तीक्ष्णता: कम R से ऊँचा और पतला शिखर मिलता है। गुणता गुणांक Q = ω₀L/R इसे मापता है। रेडियो को एक स्टेशन चुनने के लिए तीक्ष्ण शिखर चाहिए। अनुनाद के लिए L और C दोनों चाहिए; RL या RC में अनुनाद नहीं होता।

शक्ति और शक्ति गुणांक

AC परिपथ में औसत शक्ति: P = Vrms Irms cos φ। cos φ = R/Z को शक्ति गुणांक कहते हैं।

ऊर्जा केवल प्रतिरोध खर्च करता है। आदर्श L या C चौथाई चक्र में ऊर्जा लेकर अगले चौथाई में लौटा देते हैं।

कम शक्ति गुणांक का मतलब उतनी ही उपयोगी शक्ति के लिए ज़्यादा धारा, जिससे तारों में I²R ऊष्मा के रूप में ऊर्जा बर्बाद होती है। उचित संधारित्र लगाकर शक्ति गुणांक बढ़ाते हैं।

वाटहीन धारा

धारा के फेज़र को दो भागों में बाँटिए: वोल्टता के अनुदिश I cos φ और उससे 90° पर I sin φ।

भाग Irms sin φ कोई औसत कार्य नहीं करता, क्योंकि यह वोल्टता से 90° कला में अलग है। इसे वाटहीन धारा कहते हैं। शुद्ध प्रेरक या संधारित्र में पूरी धारा वाटहीन है। पंखे के रेगुलेटर की चोक कुंडली इसी से लगभग बिना ऊर्जा हानि के धारा घटाती है।

करके देखें: एक प्रयोग

करके देखें: 3D में "LCR श्रेणी" चुनें, 30 Hz से शुरू करें। स्लाइडर हिलाने से पहले अनुमान लगाइए: 50 Hz की ओर जाने पर धारा बढ़ेगी या घटेगी? अब धीरे-धीरे खिसकाएँ और Irms देखें। जिस आवृत्ति पर बैंगनी "अनुनाद" टैग आए उसे लिखें और f₀ = 1/(2π√LC) = 1/(2π√(0.2 × 50×10⁻⁶)) ≈ 50 Hz से मिलाएँ। फिर "केवल L" चुनकर देखें कि P = 0 W है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. मेन सप्लाई 230 V rms है। शिखर मान ज्ञात करें।

V₀ = √2 × 230 = 1.414 × 230 ≈ 325 V।

2. 100 Ω का प्रतिरोध 220 V, 50 Hz AC से जुड़ा है। I_rms, I₀ और शक्ति ज्ञात करें।

I_rms = 220/100 = 2.2 A। I₀ = √2 × 2.2 ≈ 3.11 A। P = 220 × 2.2 = 484 W (φ = 0)।

3. 50 Hz पर 0.5 H प्रेरक का प्रतिघात और 220 V से rms धारा ज्ञात करें।

Xʟ = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 0.5 ≈ 157 Ω। I_rms = 220/157 ≈ 1.4 A। शक्ति = 0 (धारा 90° पीछे)।

4. 50 Hz पर 20 µF संधारित्र का प्रतिघात ज्ञात करें।

Xᴄ = 1/(2 × 3.14 × 50 × 20 × 10⁻⁶) = 1/0.00628 ≈ 159 Ω।

5. श्रेणी LCR में R = 30 Ω, Xʟ = 80 Ω, Xᴄ = 40 Ω, V_rms = 200 V। Z, I, φ और शक्ति गुणांक ज्ञात करें।

Z = √(900 + 1600) = 50 Ω। I = 200/50 = 4 A। tan φ = 40/30, φ ≈ 53° (धारा पीछे)। cos φ = 30/50 = 0.6।

6. ऊपर के परिपथ के लिए औसत शक्ति और वाटहीन धारा ज्ञात करें।

P = 200 × 4 × 0.6 = 480 W (जाँच: I²R = 16 × 30 = 480 W)। sin φ = 0.8, वाटहीन धारा = 4 × 0.8 = 3.2 A।

7. L = 0.1 H, C = 10 µF और R = 10 Ω श्रेणी में हैं। अनुनाद आवृत्ति और 100 V से अनुनाद पर धारा ज्ञात करें।

ω₀ = 1/√(10⁻⁶) = 1000 rad/s। f₀ = 1000/(2π) ≈ 159 Hz। अनुनाद पर Z = R = 10 Ω, तो I = 10 A।

8. ऊपर के अनुनाद परिपथ के लिए Q और प्रेरक पर वोल्टता ज्ञात करें।

Q = ω₀L/R = 1000 × 0.1/10 = 10। Xʟ = 100 Ω, Vʟ = 10 × 100 = 1000 V, सप्लाई का दस गुना! Vᴄ भी 1000 V है और दोनों कट जाते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. शिखर I₀ वाली साइन AC का rms मान है:
2. शुद्ध प्रेरक में धारा:
3. श्रेणी LCR में अनुनाद पर:
4. शुद्ध धारितीय परिपथ का शक्ति गुणांक है:
5. आवृत्ति दोगुनी करने पर धारितीय प्रतिघात:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AC का rms मान क्या है?

rms मान वह DC मान है जो प्रतिरोध में उतनी ही गर्मी दे। साइन तरंग में यह शिखर ÷ √2, लगभग 0.707 × शिखर है।

प्रतिघात और प्रतिबाधा में क्या अंतर है?

प्रतिघात (Xʟ या Xᴄ) अकेले प्रेरक या संधारित्र का विरोध है। प्रतिबाधा Z, R, L और C का कुल विरोध है।

वाटहीन धारा क्या है?

AC का वह भाग जो वोल्टता से 90° कला में अलग है (I sin φ)। यह बहता है पर औसत कार्य नहीं करता।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

रोमानियाClasa a X-aProducing and using alternating current
रोमानियाClasa a XI-aElectromagnetic oscillations and waves
रोमानियाClasa a XI-aElectromagnetic oscillations and waves
स्पेन2º BachilleratoElectrical and electronic systems
यूक्रेन11 класElectromagnetic oscillations and waves
यूक्रेन11 класElectromagnetic oscillations and waves
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12विद्युत चुंबकीय प्रेरण और प्रत्यावर्ती धारा
अमेरिकाGrade 12Electromagnetic Induction
जापान高校(専門学科)1〜3年Electric Circuits
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Electromagnetic interaction
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Waves and properties of matter
रूस11 классElectromagnetic oscillations
रूस11 классOscillations and waves
चीन高二Selective 2 Ch.3 Alternating current

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी भौतिक विज्ञान पाठ