South 고등학교 2학년 Electromagnetism and Quantum
अध्याय: 3
1. Electromagnetic interaction
Electric fields quantitatively · Induction and dielectric polarisation · Magnetic fields of currents · Lorentz force · Faraday's law · R, C, L in circuits · Diodes and transistors
- वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र – आवेश दो तरह का होता है, संरक्षित रहता है और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C के पूरे पैकेटों में आता है। दो बिंदु आवेश F = kq₁q₂/r² बल से धकेलते या खींचते हैं (k = 9 × 10⁹ N m² C⁻²)। कई आवेशों के बल और क्षेत्र सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)। बिंदु आवेश का क्षेत्र E = kq/r² है। द्विध्रुव (±q, दूरी 2a) का आघूर्ण p = q·2a है; एकसमान क्षेत्र में उस पर कुल बल शून्य पर बल-आघूर्ण τ = pE sinθ होता है। फ्लक्स Φ = E·A, और गाउस नियम: किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स = अंदर का आवेश/ε₀। इससे तार (λ/2πε₀r), समतल चादर (σ/2ε₀) और पतले गोलीय कोश (बाहर kq/r², अंदर 0) का क्षेत्र मिलता है।
- स्थिर विद्युतिकी: प्रेरण, ध्रुवण और आवेश का बँटवारा – स्थिर विद्युतिकी रुके हुए आवेशों का अध्ययन है। वस्तुएँ घर्षण (रगड़), चालन (छूकर) या प्रेरण (बिना छुए पास लाकर) से आवेशित होती हैं। चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन चलते हैं: पास का आवेश उन्हें एक तरफ़ धकेलता है (प्रेरण), और भू-संपर्क करने पर चालक पर उल्टा आवेश रह जाता है। कुचालक (परावैद्युत) में इलेक्ट्रॉन घूम नहीं सकते, पर हर अणु खिंचकर छोटा द्विध्रुव बन जाता है (ध्रुवण); इसीलिए आवेशित कंघी कागज़ खींचती है। आवेशित चालकों को तार से जोड़ने पर आवेश तब तक बहता है जब तक विभव बराबर न हो। दूर रखे गोलों के लिए V = kq/r, इसलिए q₁/q₂ = r₁/r₂, और छोटे गोले का पृष्ठ आवेश घनत्व ज़्यादा होता है। कुल आवेश हमेशा संरक्षित रहता है।
- धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र: बायो-सावर्ट नियम और ऐम्पियर नियम – धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (ऑर्स्टेड, 1820)। बायो-सावर्ट नियम तार के छोटे टुकड़े का क्षेत्र देता है: dB = (μ₀/4π)·I dl sinθ / r²। वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀NI / 2R और अक्ष पर B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}। ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮B·dl = μ₀I लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I / 2πr देता है। लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल और एकसमान है: B = μ₀nI।
- लॉरेंज़ बल, धारा लूप पर बल-आघूर्ण और चल कुंडली गैल्वेनोमीटर – वेग v से चलते आवेश q पर बल F = q(E + v × B) लगता है, यही लॉरेंज़ बल है। चुंबकीय भाग qvB sinθ हमेशा v के लंबवत है, इसलिए पथ वृत्त बन जाता है (r = mv/qB) और चाल नहीं बदलती। तार पर F = IL × B। एक दिशा की समांतर धाराएँ आकर्षित करती हैं: F/L = μ₀I₁I₂/2πd। क्षेत्र में लूप पर बल-आघूर्ण τ = m × B, m = NIA, यानी लूप चुंबकीय द्विध्रुव है। गैल्वेनोमीटर में विक्षेप φ = (NAB/k)I। छोटा शंट ऐमीटर बनाता है, बड़ा श्रेणी प्रतिरोध वोल्टमीटर।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण – जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें emf पैदा होता है: ε = −N dΦ/dt (फैराडे)। ऋण चिह्न लेन्ज़ का नियम है: प्रेरित धारा हमेशा उस बदलाव का विरोध करती है जिससे वह बनी। चुंबकीय क्षेत्र में छड़ चलाने पर गतिक emf ε = Blv मिलता है। बदलती धारा अपनी ही कुंडली में (स्वप्रेरण, L) और पास की कुंडली में (अन्योन्य प्रेरण, M) emf बनाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- प्रत्यावर्ती धारा – प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
2. Light and communication
Interference, diffraction, holograms · Optical instruments · Polarisation · Photoelectric effect · Lasers
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
- प्रकाशिक यंत्र: सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शक – कोई चीज़ कितनी बड़ी दिखती है, यह आँख पर बने कोण पर निर्भर है। सरल सूक्ष्मदर्शी (एक उत्तल लेंस) m = 1 + D/f (प्रतिबिंब D पर) या D/f (अनंत पर) देता है। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में छोटी फोकस दूरी का अभिदृश्यक और नेत्रिका: m = mₒ × mₑ ≈ (L/fₒ)(D/fₑ)। खगोलीय दूरदर्शक में लंबी फोकस दूरी का अभिदृश्यक और छोटी की नेत्रिका: सामान्य समायोजन में m = fₒ/fₑ, नली की लंबाई fₒ + fₑ। परावर्ती दूरदर्शक में अभिदृश्यक अवतल दर्पण होता है।
- प्रकाश का ध्रुवण (Polarisation) – प्रकाश एक अनुप्रस्थ (transverse) तरंग है: इसका विद्युत क्षेत्र चलने की दिशा के लंबवत कंपन करता है। साधारण प्रकाश में यह कंपन हर दिशा में होता है। पोलेरॉइड केवल एक दिशा का कंपन आगे जाने देता है, इसलिए प्रकाश समतल ध्रुवित हो जाता है और उसकी तीव्रता आधी रह जाती है। दूसरा पोलेरॉइड कोण θ पर हो तो I = I₀cos²θ (मैलस का नियम)।
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- लेज़र: उद्दीप्त उत्सर्जन से प्रकाश की किरण कैसे बनती है – LASER का पूरा नाम है Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation, यानी विकिरण के उद्दीप्त उत्सर्जन से प्रकाश का प्रवर्धन। पंप परमाणुओं को ऊँचे ऊर्जा स्तर पर पहुँचाता है। सही ऊर्जा का फ़ोटॉन उत्तेजित परमाणु के पास से गुज़रे तो परमाणु एक बिल्कुल एक-जैसा दूसरा फ़ोटॉन छोड़ता है। जब उत्तेजित परमाणु ज़्यादा हों (समष्टि प्रतिलोमन) और दोनों सिरों पर दर्पण हों, तो प्रकाश बढ़ते-बढ़ते पतली, एक रंग की, कला-संबद्ध किरण बन जाता है। X-किरणें भी ऊँची ऊर्जा का प्रकाश हैं, जो तेज़ इलेक्ट्रॉनों के धातु से टकराने पर बनती हैं।
3. Quantum and the micro world
Single-quantum double-slit experiment · Superposition and measurement · Tunnelling · Modern atomic model and uncertainty · Nuclear fusion in stars
- क्वांटम भौतिकी की मूल बातें: द्वि-झिरी, अध्यारोपण और मापन – फोटॉन और इलेक्ट्रॉन जैसी बहुत छोटी चीज़ें "क्वांटम वस्तुएँ" हैं। हर एक पर्दे पर एक बिंदु बनाती है (कण जैसा), पर बिंदु कहाँ गिरेंगे, यह प्रायिकता तरंग तय करती है, जिससे धारियाँ बनती हैं। मापने से पहले वस्तु कई संभावनाओं के मिश्रण (अध्यारोपण) में रह सकती है। अगर हम पता कर लें कि कण किस झिरी से गया, तो धारियाँ गायब हो जाती हैं।
- नाभिकीय संलयन – नाभिकीय संलयन में हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं और ऊर्जा निकलती है। सूर्य के क्रोड में लगभग 1.5 करोड़ °C पर चार हाइड्रोजन नाभिक चरणों में (प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला) जुड़कर एक हीलियम नाभिक बनाते हैं। हीलियम का द्रव्यमान चार हाइड्रोजन से लगभग 0.7% कम होता है; वह खोया द्रव्यमान E = mc² से ऊर्जा बन जाता है। गुरुत्व का अंदर दबाना और संलयन की गर्मी का बाहर धकेलना तारे को अरबों साल स्थिर रखता है।