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लॉरेंज़ बल, धारा लूप पर बल-आघूर्ण और चल कुंडली गैल्वेनोमीटर

वेग v से चलते आवेश q पर बल F = q(E + v × B) लगता है, यही लॉरेंज़ बल है। चुंबकीय भाग qvB sinθ हमेशा v के लंबवत है, इसलिए पथ वृत्त बन जाता है (r = mv/qB) और चाल नहीं बदलती। तार पर F = IL × B। एक दिशा की समांतर धाराएँ आकर्षित करती हैं: F/L = μ₀I₁I₂/2πd। क्षेत्र में लूप पर बल-आघूर्ण τ = m × B, m = NIA, यानी लूप चुंबकीय द्विध्रुव है। गैल्वेनोमीटर में विक्षेप φ = (NAB/k)I। छोटा शंट ऐमीटर बनाता है, बड़ा श्रेणी प्रतिरोध वोल्टमीटर।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक धन आवेश चुंबकीय क्षेत्र B (बैंगनी, नीचे की ओर) में चल रहा है। बल हमेशा वेग के लंबवत है, इसलिए यह वृत्त में घूमता है।
  2. अब विद्युत क्षेत्र E भी जोड़ो। विद्युत बल और चुंबकीय बल उलटी दिशा में हैं। जब v = E/B हो, दोनों कट जाते हैं और आवेश सीधा निकल जाता है।
  3. तार बहते आवेशों की नदी है। इसे क्षेत्र के आर-पार रखो, हर आवेश पर बल, तो पूरे तार पर बल: F = BIL sinθ। तार घुमाओ: θ = 0 पर बल शून्य।
  4. दो समांतर तार। हर तार दूसरे के क्षेत्र में है। एक दिशा की धाराएँ पास खिंचती हैं; उलटी धाराएँ दूर धकेलती हैं।
  5. क्षेत्र में एक लूप: दो भुजाओं पर उलटे बल, तो लूप घूमता है। बल-आघूर्ण NIAB sinθ है। लूप m = NIA वाले छोटे चुंबक जैसा है।
  6. खुद खेलो: चल कुंडली गैल्वेनोमीटर। धारा कुंडली घुमाती है, स्प्रिंग रोकती है, सुई धारा दिखाती है। शंट या श्रेणी प्रतिरोध लगाकर ऐमीटर या वोल्टमीटर बनाओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

बल लगातार लग रहा है, फिर चाल क्यों नहीं बढ़ती?

बल हमेशा गति के 90° पर है। लंबवत धक्का सिर्फ़ रास्ता मोड़ता है, जैसे पत्थर घुमाती रस्सी। कार्य शून्य, गतिज ऊर्जा वही।

तेज़ आवेश बड़ा वृत्त क्यों बनाता है?

r = mv/qB। ज़्यादा चाल को ज़्यादा अभिकेंद्र बल चाहिए; mv²/r, v² से बढ़ता है पर qvB सिर्फ़ v से, इसलिए r बढ़ता है।

वेग चयनक को द्रव्यमान या आवेश से फ़र्क क्यों नहीं पड़ता?

qE और qvB दोनों में q है, कट जाता है; द्रव्यमान संतुलन में आता ही नहीं। सिर्फ़ v = E/B।

तार क्षेत्र के साथ हो तो बल क्यों नहीं?

तब आवेश B के साथ चलते हैं, हर एक के लिए v × B = 0।

एक दिशा की धाराएँ आकर्षित क्यों करती हैं, जबकि समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं?

यह बल चुंबकीय है, विद्युत नहीं। हर तार दूसरे के क्षेत्र में है, और एक दिशा की धाराओं में I L × B दूसरे तार की ओर है।

लूप पर कुल बल शून्य है, फिर घूमता क्यों है?

दोनों बल बराबर और उलटे हैं पर एक रेखा में नहीं। ऐसा युग्म बिना खिसकाए घुमाता है।

गैल्वेनोमीटर में त्रिज्य क्षेत्र क्यों?

त्रिज्य क्षेत्र में कुंडली का तल हर कोण पर B के साथ रहता है, τ = NIAB हर जगह। तब φ ∝ I और पैमाना बराबर बँटा।

ऐमीटर का प्रतिरोध कम और वोल्टमीटर का ज़्यादा क्यों?

ऐमीटर श्रेणी में लगता है, धारा न घटाए इसलिए कम प्रतिरोध। वोल्टमीटर समांतर में लगता है, धारा न खींचे इसलिए ज़्यादा प्रतिरोध।

गतिमान आवेश पर बल: लॉरेंज़ बल

जहाँ विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B हों, वहाँ वेग v से चलते आवेश q पर बल

F = q (E + v × B)

यही लॉरेंज़ बल है। चुंबकीय भाग का परिमाण F = qvB sinθ (θ = v और B के बीच कोण)।

1 टेस्ला: वह क्षेत्र जिसमें B के लंबवत 1 m/s से चलते 1 C आवेश पर 1 N बल लगे।

एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति

v, B के लंबवत हो तो बल qvB हमेशा एक केंद्र की ओर है; यही अभिकेंद्र बल है:

qvB = mv²/r ⇒ r = mv / qB

एक चक्कर का समय T = 2πm / qB, आवृत्ति f = qB / 2πm। ये चाल पर निर्भर नहीं! तेज़ आवेश बड़ा वृत्त बनाता है, पर समय वही।

v और B के बीच कोई और कोण हो, तो B के साथ वाला भाग वैसा ही रहता है और लंबवत भाग घूमता है: पथ कुंडलिनी (हेलिक्स) बनता है। चूड़ी अंतराल = v cosθ × T।

परस्पर लंबवत E और B: वेग चयनक

E और B एक-दूसरे और v के लंबवत हों। विद्युत बल qE और चुंबकीय बल qvB उलटे हैं। ये कटते हैं जब

qE = qvB ⇒ v = E / B

सिर्फ़ इसी चाल वाले आवेश सीधे निकलते हैं। यह किसी भी आवेश और द्रव्यमान के लिए सही है, इसलिए एक चाल की किरण चुनने में काम आता है।

धारावाही तार पर बल

धारा यानी तार में खिसकते बहुत सारे आवेश। L लंबाई के सीधे तार के सभी आवेशों पर लॉरेंज़ बल जोड़ो:

F = I L × B, परिमाण F = BIL sinθ

θ = तार और B के बीच कोण। तार क्षेत्र के आर-पार (90°) हो तो अधिकतम, क्षेत्र के साथ हो तो शून्य। दिशा: फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम।

दो समांतर धाराओं के बीच बल; ऐम्पियर

तार 1, तार 2 पर क्षेत्र B₁ = μ₀I₁ / 2πd बनाता है। तार 2 पर F = B₁I₂L, इसलिए प्रति मीटर बल

F / L = μ₀ I₁ I₂ / 2πd

ऐम्पियर

1 ऐम्पियर वह धारा है जो निर्वात में 1 m दूर रखे दो बहुत लंबे, पतले, सीधे, समांतर तारों में बहने पर हर तार की प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10⁻⁷ N बल लगाए। (2019 से SI ऐम्पियर को इलेक्ट्रॉन के आवेश से तय करता है, पर परिमाण वही है और पाठ्यक्रम यही परिभाषा माँगता है।)

एकसमान क्षेत्र में धारा लूप पर बल-आघूर्ण

आयताकार लूप (भुजाएँ a और b, N फेरे, धारा I) एकसमान क्षेत्र B में है। कुल बल शून्य, क्योंकि आमने-सामने की भुजाओं पर उलटे बल हैं। पर a भुजाओं के दो बल एक रेखा में नहीं, वे बल-युग्म बनाकर लूप घुमाते हैं।

τ = N I A B sinθ, A = ab

θ = B और लूप के अभिलंब के बीच कोण। लूप का तल B के साथ (θ = 90°) हो तो अधिकतम; तल B के आर-पार (θ = 0) हो तो शून्य, यही स्थायी स्थिति है। यह किसी भी आकार के लूप पर लागू है।

धारा लूप: चुंबकीय द्विध्रुव

लूप का चुंबकीय आघूर्ण: m = N I A, अभिलंब की दिशा में सदिश (उंगलियाँ धारा के साथ, अंगूठा m)। मात्रक A m²।

तब τ = m × B, बिल्कुल छड़ चुंबक पर बल-आघूर्ण जैसा। दूर लूप का क्षेत्र भी छड़ चुंबक जैसा (1/r³)। इसलिए धारा लूप एक चुंबकीय द्विध्रुव है: एक फलक N, दूसरा S।

नाभिक के चारों ओर घूमता इलेक्ट्रॉन भी छोटा धारा लूप है; इससे पदार्थ के चुंबकत्व की कड़ी जुड़ती है।

चल कुंडली गैल्वेनोमीटर

गैल्वेनोमीटर छोटी धारा पहचानता और मापता है। भाग: हल्के फ्रेम पर बहुत फेरों की कुंडली, अवतल चुंबकीय ध्रुवों के बीच; बीच में नर्म लोहे का बेलन; स्प्रिंग; पैमाने पर सुई।

सुग्राहिता

धारा सुग्राहिता = φ / I = NAB / k।

वोल्टता सुग्राहिता = φ / V = NAB / (kG), G = कुंडली का प्रतिरोध।

N दोगुना करने से धारा सुग्राहिता दोगुनी, पर G भी दोगुना, इसलिए वोल्टता सुग्राहिता वही रहती है।

ऐमीटर में बदलना

गैल्वेनोमीटर छोटी धारा Ig पर पूरा विक्षेप देता है। बड़ी धारा I मापने के लिए छोटा प्रतिरोध S (शंट) समांतर में जोड़ो:

Ig G = (I − Ig) S ⇒ S = IgG / (I − Ig)

ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए।

वोल्टमीटर में बदलना

बड़ा प्रतिरोध R श्रेणी में जोड़ो। V पर पूरा विक्षेप:

V = Ig(G + R) ⇒ R = V / Ig − G

वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होना चाहिए, ताकि परिपथ से धारा न खींचे।

परीक्षा के लिए

बोर्ड में अक्सर: r = mv/qB निकालो और दिखाओ कि T चाल पर निर्भर नहीं (3 अंक); समांतर धाराओं से 1 ऐम्पियर की परिभाषा (2 अंक); τ = NIAB sinθ की व्युत्पत्ति (3 अंक); गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत, त्रिज्य क्षेत्र, सुग्राहिता और रूपांतरण (3–5 अंक); शंट और श्रेणी प्रतिरोध पर प्रश्न।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. प्रोटॉन 0.5 T क्षेत्र के लंबवत 2 × 10⁶ m/s से चल रहा है। बल? (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C)

F = qvB = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 2 × 10⁶ × 0.5 = 1.6 × 10⁻¹³ N।

2. ऊपर वाले प्रोटॉन के वृत्त की त्रिज्या? (m = 1.67 × 10⁻²⁷ kg)

r = mv / qB = 1.67 × 10⁻²⁷ × 2 × 10⁶ / (1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.5) ≈ 4.2 cm।

3. वेग चयनक में E = 3 × 10⁴ V/m, B = 0.1 T। कौन-सी चाल सीधी निकलेगी?

v = E / B = 3 × 10⁵ m/s, किसी भी आवेश के लिए।

4. 0.5 m तार में 4 A धारा, 0.2 T क्षेत्र से 30° पर। बल?

F = BIL sinθ = 0.2 × 4 × 0.5 × 0.5 = 0.2 N।

5. 5 cm दूर दो लंबे समांतर तारों में 10 A और 5 A एक दिशा में। प्रति मीटर बल?

F/L = 2 × 10⁻⁷ × 10 × 5 / 0.05 = 2 × 10⁻⁴ N/m, आकर्षण।

6. 100 फेरे, क्षेत्रफल 2 × 10⁻³ m², धारा 0.5 A वाली कुंडली 0.2 T क्षेत्र में, तल क्षेत्र के साथ। m और बल-आघूर्ण?

m = NIA = 0.1 A m²। तल B के साथ, यानी m और B में 90°, τ = mB = 0.02 N m।

7. 20 Ω गैल्वेनोमीटर 5 mA पर पूरा विक्षेप देता है। (a) 1 A ऐमीटर, (b) 10 V वोल्टमीटर बनाओ।

(a) S = 0.005 × 20 / 0.995 ≈ 0.10 Ω समांतर में। (b) R = 10 / 0.005 − 20 = 1980 Ω श्रेणी में।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल द्वारा किया गया कार्य:
2. क्षेत्र B में आवेश के वृत्त की त्रिज्या:
3. विपरीत दिशा की धाराओं वाले दो समांतर तार:
4. गैल्वेनोमीटर को ऐमीटर बनाने के लिए जोड़ो:
5. गैल्वेनोमीटर में क्षेत्र त्रिज्य इसलिए बनाते हैं ताकि:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लॉरेंज़ बल आसान भाषा में क्या है?

विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र मिलकर गतिमान आवेश पर जो कुल बल लगाते हैं: F = q(E + v × B)। चुंबकीय भाग गति के बगल में धक्का देता है।

गैल्वेनोमीटर को ऐमीटर में कैसे बदलते हैं?

समांतर में छोटा शंट S = I_gG / (I − I_g) जोड़कर, ताकि ज़्यादातर धारा कुंडली से बाहर-बाहर निकल जाए।

क्या साइक्लोट्रॉन 2026-27 CBSE कक्षा 12 पाठ्यक्रम में है?

साइक्लोट्रॉन सूचीबद्ध उपविषयों में नहीं है, पर चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति, लंबवत क्षेत्र, गैल्वेनोमीटर और उसका रूपांतरण हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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