गतिमान आवेश पर बल: लॉरेंज़ बल
जहाँ विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B हों, वहाँ वेग v से चलते आवेश q पर बल
F = q (E + v × B)
यही लॉरेंज़ बल है। चुंबकीय भाग का परिमाण F = qvB sinθ (θ = v और B के बीच कोण)।
- आवेश रुका हो (v = 0) या B के साथ चले (θ = 0), तो चुंबकीय बल शून्य।
- चुंबकीय बल हमेशा v के लंबवत, इसलिए कोई कार्य नहीं; चाल नहीं बदलती, सिर्फ़ दिशा।
- ऋण आवेश (इलेक्ट्रॉन) पर बल उलटा।
1 टेस्ला: वह क्षेत्र जिसमें B के लंबवत 1 m/s से चलते 1 C आवेश पर 1 N बल लगे।
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति
v, B के लंबवत हो तो बल qvB हमेशा एक केंद्र की ओर है; यही अभिकेंद्र बल है:
qvB = mv²/r ⇒ r = mv / qB
एक चक्कर का समय T = 2πm / qB, आवृत्ति f = qB / 2πm। ये चाल पर निर्भर नहीं! तेज़ आवेश बड़ा वृत्त बनाता है, पर समय वही।
v और B के बीच कोई और कोण हो, तो B के साथ वाला भाग वैसा ही रहता है और लंबवत भाग घूमता है: पथ कुंडलिनी (हेलिक्स) बनता है। चूड़ी अंतराल = v cosθ × T।
परस्पर लंबवत E और B: वेग चयनक
E और B एक-दूसरे और v के लंबवत हों। विद्युत बल qE और चुंबकीय बल qvB उलटे हैं। ये कटते हैं जब
qE = qvB ⇒ v = E / B
सिर्फ़ इसी चाल वाले आवेश सीधे निकलते हैं। यह किसी भी आवेश और द्रव्यमान के लिए सही है, इसलिए एक चाल की किरण चुनने में काम आता है।
धारावाही तार पर बल
धारा यानी तार में खिसकते बहुत सारे आवेश। L लंबाई के सीधे तार के सभी आवेशों पर लॉरेंज़ बल जोड़ो:
F = I L × B, परिमाण F = BIL sinθ
θ = तार और B के बीच कोण। तार क्षेत्र के आर-पार (90°) हो तो अधिकतम, क्षेत्र के साथ हो तो शून्य। दिशा: फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम।
दो समांतर धाराओं के बीच बल; ऐम्पियर
तार 1, तार 2 पर क्षेत्र B₁ = μ₀I₁ / 2πd बनाता है। तार 2 पर F = B₁I₂L, इसलिए प्रति मीटर बल
F / L = μ₀ I₁ I₂ / 2πd
- एक ही दिशा की धाराएँ आकर्षित करती हैं।
- विपरीत दिशा की धाराएँ प्रतिकर्षित करती हैं।
- दोनों तारों पर बल बराबर और उलटे (न्यूटन का तीसरा नियम)।
ऐम्पियर
1 ऐम्पियर वह धारा है जो निर्वात में 1 m दूर रखे दो बहुत लंबे, पतले, सीधे, समांतर तारों में बहने पर हर तार की प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10⁻⁷ N बल लगाए। (2019 से SI ऐम्पियर को इलेक्ट्रॉन के आवेश से तय करता है, पर परिमाण वही है और पाठ्यक्रम यही परिभाषा माँगता है।)
एकसमान क्षेत्र में धारा लूप पर बल-आघूर्ण
आयताकार लूप (भुजाएँ a और b, N फेरे, धारा I) एकसमान क्षेत्र B में है। कुल बल शून्य, क्योंकि आमने-सामने की भुजाओं पर उलटे बल हैं। पर a भुजाओं के दो बल एक रेखा में नहीं, वे बल-युग्म बनाकर लूप घुमाते हैं।
τ = N I A B sinθ, A = ab
θ = B और लूप के अभिलंब के बीच कोण। लूप का तल B के साथ (θ = 90°) हो तो अधिकतम; तल B के आर-पार (θ = 0) हो तो शून्य, यही स्थायी स्थिति है। यह किसी भी आकार के लूप पर लागू है।
धारा लूप: चुंबकीय द्विध्रुव
लूप का चुंबकीय आघूर्ण: m = N I A, अभिलंब की दिशा में सदिश (उंगलियाँ धारा के साथ, अंगूठा m)। मात्रक A m²।
तब τ = m × B, बिल्कुल छड़ चुंबक पर बल-आघूर्ण जैसा। दूर लूप का क्षेत्र भी छड़ चुंबक जैसा (1/r³)। इसलिए धारा लूप एक चुंबकीय द्विध्रुव है: एक फलक N, दूसरा S।
नाभिक के चारों ओर घूमता इलेक्ट्रॉन भी छोटा धारा लूप है; इससे पदार्थ के चुंबकत्व की कड़ी जुड़ती है।
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर
गैल्वेनोमीटर छोटी धारा पहचानता और मापता है। भाग: हल्के फ्रेम पर बहुत फेरों की कुंडली, अवतल चुंबकीय ध्रुवों के बीच; बीच में नर्म लोहे का बेलन; स्प्रिंग; पैमाने पर सुई।
- अवतल ध्रुव और लोहे का क्रोड क्षेत्र को त्रिज्य (रेडियल) बनाते हैं: कुंडली का तल हर स्थिति में B के साथ, इसलिए sinθ = 1।
- धारा का बल-आघूर्ण τ = NIAB। स्प्रिंग का प्रत्यानयन बल-आघूर्ण kφ।
- संतुलन: NIAB = kφ ⇒ φ = (NAB / k) I। विक्षेप धारा के समानुपाती, पैमाना रैखिक।
सुग्राहिता
धारा सुग्राहिता = φ / I = NAB / k।
वोल्टता सुग्राहिता = φ / V = NAB / (kG), G = कुंडली का प्रतिरोध।
N दोगुना करने से धारा सुग्राहिता दोगुनी, पर G भी दोगुना, इसलिए वोल्टता सुग्राहिता वही रहती है।
ऐमीटर में बदलना
गैल्वेनोमीटर छोटी धारा Ig पर पूरा विक्षेप देता है। बड़ी धारा I मापने के लिए छोटा प्रतिरोध S (शंट) समांतर में जोड़ो:
Ig G = (I − Ig) S ⇒ S = IgG / (I − Ig)
ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए।
वोल्टमीटर में बदलना
बड़ा प्रतिरोध R श्रेणी में जोड़ो। V पर पूरा विक्षेप:
V = Ig(G + R) ⇒ R = V / Ig − G
वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होना चाहिए, ताकि परिपथ से धारा न खींचे।
परीक्षा के लिए
बोर्ड में अक्सर: r = mv/qB निकालो और दिखाओ कि T चाल पर निर्भर नहीं (3 अंक); समांतर धाराओं से 1 ऐम्पियर की परिभाषा (2 अंक); τ = NIAB sinθ की व्युत्पत्ति (3 अंक); गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत, त्रिज्य क्षेत्र, सुग्राहिता और रूपांतरण (3–5 अंक); शंट और श्रेणी प्रतिरोध पर प्रश्न।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लॉरेंज़ बल: F = q(E + v × B)
- चुंबकीय बल: F = qvB sinθ
- वृत्त की त्रिज्या: r = mv / qB; आवर्तकाल T = 2πm / qB
- वेग चयनक: v = E / B
- तार पर बल: F = BIL sinθ
- समांतर तार: F / L = μ₀I₁I₂ / 2πd
- लूप पर बल-आघूर्ण: τ = NIAB sinθ = m × B, m = NIA
- गैल्वेनोमीटर: φ = (NAB/k) I; धारा सुग्राहिता NAB/k; वोल्टता सुग्राहिता NAB/kG
- शंट: S = I_gG / (I − I_g); वोल्टमीटर श्रेणी R = V/I_g − G
हल किए गए उदाहरण
1. प्रोटॉन 0.5 T क्षेत्र के लंबवत 2 × 10⁶ m/s से चल रहा है। बल? (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C)
F = qvB = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 2 × 10⁶ × 0.5 = 1.6 × 10⁻¹³ N।
2. ऊपर वाले प्रोटॉन के वृत्त की त्रिज्या? (m = 1.67 × 10⁻²⁷ kg)
r = mv / qB = 1.67 × 10⁻²⁷ × 2 × 10⁶ / (1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.5) ≈ 4.2 cm।
3. वेग चयनक में E = 3 × 10⁴ V/m, B = 0.1 T। कौन-सी चाल सीधी निकलेगी?
v = E / B = 3 × 10⁵ m/s, किसी भी आवेश के लिए।
4. 0.5 m तार में 4 A धारा, 0.2 T क्षेत्र से 30° पर। बल?
F = BIL sinθ = 0.2 × 4 × 0.5 × 0.5 = 0.2 N।
5. 5 cm दूर दो लंबे समांतर तारों में 10 A और 5 A एक दिशा में। प्रति मीटर बल?
F/L = 2 × 10⁻⁷ × 10 × 5 / 0.05 = 2 × 10⁻⁴ N/m, आकर्षण।
6. 100 फेरे, क्षेत्रफल 2 × 10⁻³ m², धारा 0.5 A वाली कुंडली 0.2 T क्षेत्र में, तल क्षेत्र के साथ। m और बल-आघूर्ण?
m = NIA = 0.1 A m²। तल B के साथ, यानी m और B में 90°, τ = mB = 0.02 N m।
7. 20 Ω गैल्वेनोमीटर 5 mA पर पूरा विक्षेप देता है। (a) 1 A ऐमीटर, (b) 10 V वोल्टमीटर बनाओ।
(a) S = 0.005 × 20 / 0.995 ≈ 0.10 Ω समांतर में। (b) R = 10 / 0.005 − 20 = 1980 Ω श्रेणी में।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि चुंबकीय बल आवेश की चाल बढ़ाता है। बल v के लंबवत है, कार्य शून्य।
- τ = NIAB sinθ में लूप के तल और B के बीच का कोण लेना। θ अभिलंब (m) और B के बीच है।
- शंट को श्रेणी में या वोल्टमीटर प्रतिरोध को समांतर में लगाना।
- यह कहना कि ज़्यादा फेरे वोल्टता सुग्राहिता बढ़ाते हैं। G भी बढ़ता है, इसलिए NAB/kG वही रहता है।