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चुंबकत्व एवं द्रव्य

छड़ चुंबक परिनालिका जैसा व्यवहार करता है: इसके अंदर इलेक्ट्रॉनों के छोटे धारा लूप एक दिशा में होते हैं। समान दूरी पर अक्ष पर क्षेत्र निरक्ष (विषुवत) पर क्षेत्र का दोगुना और उलटी दिशा में होता है। एकसमान क्षेत्र में चुंबक पर बल-आघूर्ण τ = m × B लगता है। क्षेत्र रेखाएँ बंद लूप हैं, कभी नहीं कटतीं। प्रतिचुंबकीय पदार्थ क्षेत्र से बाहर धकेले जाते हैं (χ छोटा ऋण), अनुचुंबकीय थोड़े खिंचते हैं (χ छोटा धन), लौहचुंबकीय बहुत खिंचते हैं (χ बहुत बड़ा)। चुंबकन M = प्रति एकांक आयतन चुंबकीय आघूर्ण; B = μ₀(H + M), χ = M/H, μᵣ = 1 + χ। ताप बढ़ने पर चुंबकत्व घटता है: क्यूरी नियम χ = C/T; क्यूरी ताप से ऊपर लौहचुंबक अनुचुंबक बन जाता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. बाईं ओर छड़ चुंबक, दाईं ओर धारा वाली परिनालिका। क्षेत्र रेखाएँ देखो, बिल्कुल एक जैसी! छड़ चुंबक छोटे धारा लूपों से बनी परिनालिका जैसा है।
  2. क्षेत्र रेखाएँ N से निकलकर मुड़ती हैं, S में घुसती हैं और अंदर से वापस N तक जाती हैं। ये बंद लूप हैं, दो रेखाएँ कभी नहीं कटतीं।
  3. समान दूरी पर दो बिंदु रखो: एक अक्ष पर, एक निरक्ष पर। अक्ष पर क्षेत्र दोगुना है और उलटी दिशा में।
  4. अब चुंबक को एकसमान क्षेत्र में तिरछा रखो। उस पर घुमाने वाला बल-आघूर्ण τ = mB sinθ लगता है और वह B की सीध में आ जाता है।
  5. क्षेत्र में तीन छड़ें रखो। प्रतिचुंबकीय: रेखाएँ बाहर धकेली जाती हैं। अनुचुंबकीय: थोड़ी अंदर खिंचती हैं। लौहचुंबकीय: बहुत सारी अंदर घुसती हैं और छोटे परमाणु चुंबक सीधे हो जाते हैं।
  6. खुद खेलो: स्लाइडर से छड़ों को गरम करो। छोटे चुंबक हिलने लगते हैं, क्रम टूटता है। क्यूरी ताप से ऊपर लोहा लौहचुंबकीय नहीं रहता।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

बिना तार के छड़ चुंबक परिनालिका जैसा कैसे?

परमाणुओं में घूमते और चक्रण करते इलेक्ट्रॉन छोटे धारा लूप हैं। चुंबक में सब एक दिशा में, इसलिए उनके किनारे जुड़कर सतह पर एक धारा बनाते हैं, परिनालिका के फेरों जैसी।

क्षेत्र रेखाएँ क्यों नहीं कटतीं?

कटान बिंदु पर B की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है। एक बिंदु पर क्षेत्र एक ही तीर है।

अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय का दोगुना क्यों?

अक्ष पर दोनों ध्रुवों का असर एक ही रेखा में जुड़ता है। निरक्ष पर असर तिरछे हैं, छोटा भाग जुड़ता है और उलटी दिशा में।

N और S पर बल बराबर हैं तो चुंबक घूमता क्यों है?

दो बराबर बल अलग-अलग बिंदुओं पर उलटी दिशा में लगते हैं: बल-युग्म। यह बिना खिसकाए घुमाता है।

प्रतिचुंबक चुंबक से दूर क्यों धकेला जाता है?

क्षेत्र हर परमाणु में उलटे छोटे आघूर्ण बनाता है (लेंज़ नियम जैसा)। उलटे आघूर्ण प्रबल क्षेत्र से दूर धकेले जाते हैं।

गरम कील चुंबक से क्यों नहीं चिपकती?

गर्मी परमाणु चुंबकों को बेतरतीब कर देती है। क्यूरी ताप से ऊपर डोमेन टूट जाते हैं और लोहा सिर्फ़ हल्का अनुचुंबकीय रह जाता है।

छड़ चुंबक: तुल्य परिनालिका

छड़ चुंबक को दो टुकड़ों में काटो, दो छोटे चुंबक मिलते हैं, हर एक का अपना N और S। कितना भी काटो, अकेला ध्रुव नहीं मिलता। क्यों? क्योंकि चुंबकत्व परमाणुओं के अंदर घूमते और चक्रण करते इलेक्ट्रॉनों के छोटे धारा लूपों से आता है।

चुंबक में ये छोटे लूप एक दिशा में होते हैं। अंदर पड़ोसियों की धाराएँ कट जाती हैं, पर बाहरी सतह पर जुड़कर छड़ के चारों ओर एक धारा बनाती हैं, बिल्कुल परिनालिका के फेरों जैसी। इसलिए छड़ चुंबक और परिनालिका का क्षेत्र-प्रतिरूप एक जैसा है।

छड़ चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण m, चुंबक के अंदर S से N की ओर (मात्रक A m²)।

छड़ चुंबक की अक्ष और निरक्ष पर क्षेत्र

छोटे चुंबक के लिए (r चुंबक से बहुत बड़ा):

समान दूरी पर अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय का दोगुना। दोनों 1/r³ से घटते हैं। ये विद्युत द्विध्रुव के क्षेत्रों जैसे ही हैं, p की जगह m और 1/4πε₀ की जगह μ₀/4π।

एकसमान क्षेत्र में चुंबक पर बल-आघूर्ण

एकसमान क्षेत्र B में N सिरे पर B की दिशा में और S सिरे पर उलटा बल लगता है। दोनों बराबर और उलटे, कुल बल शून्य, पर वे बल-युग्म बनाते हैं:

τ = m × B, परिमाण τ = mB sinθ

θ = m और B के बीच कोण। बल-आघूर्ण m को B की सीध में लाना चाहता है, धारा लूप (τ = NIAB sinθ) की तरह।

ऊर्जा

स्थितिज ऊर्जा U = −mB cosθ। m, B के साथ हो तो न्यूनतम (−mB): स्थायी संतुलन। उलटा हो तो अधिकतम (+mB): अस्थायी। θ₁ से θ₂ तक घुमाने का कार्य = mB(cosθ₁ − cosθ₂)। कंपास सुई इसी बल-आघूर्ण से उत्तर दिखाती है।

चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ

क्षेत्र रेखाएँ B का चित्र हैं। नियम:

चुंबकन, चुंबकीय तीव्रता और प्रवृत्ति

चुंबकन M = प्रति एकांक आयतन कुल चुंबकीय आघूर्ण, M = mकुल / V (मात्रक A m⁻¹)। यह बताता है कि पदार्थ कितना चुंबकित हुआ।

पदार्थ को लंबी परिनालिका में रखो। अकेली कुंडली B₀ = μ₀nI देती है। चुंबकीय तीव्रता H = nI (मात्रक A m⁻¹)। पदार्थ अपना भाग जोड़ता है:

B = μ₀ (H + M)

ज़्यादातर पदार्थों में M = χH, χ = चुंबकीय प्रवृत्ति (कोई मात्रक नहीं)। तब B = μ₀(1 + χ)H = μ₀μᵣH, आपेक्षिक चुंबकशीलता μᵣ = 1 + χ।

प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ

प्रतिचुंबकीय (डायामैग्नेटिक)

परमाणुओं का स्थायी चुंबकीय आघूर्ण नहीं होता। बाहरी क्षेत्र उलटे छोटे आघूर्ण बनाता है, इसलिए पदार्थ प्रबल क्षेत्र से हल्का सा दूर धकेला जाता है। χ छोटा और ऋण (लगभग −10⁻⁵), μᵣ, 1 से थोड़ा कम। उदाहरण: बिस्मथ, ताँबा, सीसा, पानी, नाइट्रोजन। अतिचालक क्षेत्र को पूरा बाहर कर देता है (χ = −1, माइस्नर प्रभाव)।

अनुचुंबकीय (पैरामैग्नेटिक)

परमाणुओं के छोटे स्थायी आघूर्ण बेतरतीब दिशाओं में। क्षेत्र कुछ को सीधा करता है, पदार्थ हल्का खिंचता है। χ छोटा और धन (10⁻⁵ से 10⁻³), μᵣ, 1 से थोड़ा अधिक। उदाहरण: ऐलुमिनियम, सोडियम, कैल्सियम, ऑक्सीजन।

लौहचुंबकीय (फ़ेरोमैग्नेटिक)

परमाणु आघूर्ण छोटे क्षेत्रों में एक साथ सीधे रहते हैं, इन्हें डोमेन कहते हैं। क्षेत्र में B की दिशा वाले डोमेन बढ़ते हैं, पदार्थ बहुत खिंचता है। χ बहुत बड़ा (10³ या अधिक)। उदाहरण: लोहा, कोबाल्ट, निकैल, गैडोलिनियम। नर्म लौहचुंबक (नर्म लोहा) क्षेत्र हटाने पर चुंबकत्व खो देते हैं; कठोर (ऐल्निको) बनाए रखते हैं, स्थायी चुंबक बनते हैं।

गुणप्रतिअनुलौह
χछोटा, −छोटा, +बहुत बड़ा, +
μᵣ< 1> 1 (थोड़ा)≫ 1
असमान क्षेत्र मेंकमज़ोर क्षेत्र की ओरप्रबल क्षेत्र की ओरप्रबल क्षेत्र की ओर तेज़ी से

ताप का प्रभाव

गर्मी से परमाणु हिलते हैं, परमाणु चुंबकों का सीधा रहना बिगड़ता है।

परीक्षा के लिए

बोर्ड में अक्सर: प्रति, अनु, लौह चुंबकीय पदार्थों की तुलना (3 अंक); क्षेत्र रेखाओं के गुण (2 अंक); चुंबक पर बल-आघूर्ण और स्थितिज ऊर्जा (2–3 अंक); छड़ चुंबक तुल्य परिनालिका (2 अंक); τ = mB sinθ, M = m/V, χ = M/H और क्यूरी नियम पर प्रश्न।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 2 A m² आघूर्ण का चुंबक 0.3 T क्षेत्र से 30° पर है। बल-आघूर्ण?

τ = mB sinθ = 2 × 0.3 × 0.5 = 0.3 N m।

2. 0.2 T क्षेत्र से 30° पर चुंबक पर 0.06 N m बल-आघूर्ण है। चुंबकीय आघूर्ण?

m = τ / (B sinθ) = 0.06 / 0.1 = 0.6 A m²।

3. छोटे चुंबक का m = 0.5 A m²। 10 cm पर अक्ष और निरक्ष पर B?

अक्ष: 10⁻⁷ × 2 × 0.5 / 10⁻³ = 10⁻⁴ T। निरक्ष: आधा, 5 × 10⁻⁵ T, m के उलटा।

4. 0.2 T क्षेत्र में m = 1.5 A m² चुंबक को क्षेत्र की दिशा से उलटी दिशा तक घुमाने का कार्य?

W = mB(cos 0° − cos 180°) = 1.5 × 0.2 × 2 = 0.6 J।

5. 5 × 10⁻⁶ m³ आयतन की लोहे की छड़ का कुल आघूर्ण 4 A m² है। चुंबकन?

M = m / V = 8 × 10⁵ A m⁻¹।

6. H = 2000 A m⁻¹ में पदार्थ का M = 3 A m⁻¹। χ, μᵣ और प्रकार?

χ = 1.5 × 10⁻³, μᵣ = 1.0015। छोटा धन, अतः अनुचुंबकीय।

7. अनुचुंबकीय लवण का 300 K पर χ = 2.4 × 10⁻⁴। 200 K पर χ?

χ ∝ 1/T: χ₂ = 2.4 × 10⁻⁴ × 300 / 200 = 3.6 × 10⁻⁴।

8. परिनालिका (1000 फेरे/m, 2 A) में μᵣ = 400 का लोहे का क्रोड है। H, B और M?

H = nI = 2000 A m⁻¹। B = 4π × 10⁻⁷ × 400 × 2000 ≈ 1.0 T। M = (μᵣ − 1)H ≈ 8 × 10⁵ A m⁻¹।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. समान दूरी पर छोटे चुंबक का अक्षीय क्षेत्र, निरक्षीय क्षेत्र का:
2. प्रतिचुंबकीय पदार्थ की प्रवृत्ति:
3. एकसमान क्षेत्र में चुंबक पर बल-आघूर्ण शून्य जब θ:
4. क्यूरी ताप से ऊपर लौहचुंबक बन जाता है:
5. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रति, अनु और लौह चुंबकीय में क्या अंतर है?

प्रतिचुंबकीय क्षेत्र से हल्का बाहर धकेले जाते हैं (χ < 0), अनुचुंबकीय हल्का खिंचते हैं (छोटा χ > 0), लौहचुंबकीय डोमेन के कारण बहुत खिंचते हैं (χ बहुत बड़ा)।

क्यूरी नियम क्या है?

अनुचुंबक की प्रवृत्ति केल्विन ताप के व्युत्क्रमानुपाती है: χ = C/T।

क्या पृथ्वी का चुंबकत्व (दिक्पात, नति) 2026-27 CBSE कक्षा 12 पाठ्यक्रम में है?

नहीं। 2026-27 सूची में छड़ चुंबक-परिनालिका, अक्षीय-निरक्षीय क्षेत्र, बल-आघूर्ण, क्षेत्र रेखाएँ, प्रति/अनु/लौह पदार्थ, चुंबकन और ताप का प्रभाव है, जो इस पाठ में है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन11 класElectrodynamics
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव और चुंबकत्व
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Electricity and magnetism
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Matter and electromagnetic fields
रूस11 классMagnetic field

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