छड़ चुंबक: तुल्य परिनालिका
छड़ चुंबक को दो टुकड़ों में काटो, दो छोटे चुंबक मिलते हैं, हर एक का अपना N और S। कितना भी काटो, अकेला ध्रुव नहीं मिलता। क्यों? क्योंकि चुंबकत्व परमाणुओं के अंदर घूमते और चक्रण करते इलेक्ट्रॉनों के छोटे धारा लूपों से आता है।
चुंबक में ये छोटे लूप एक दिशा में होते हैं। अंदर पड़ोसियों की धाराएँ कट जाती हैं, पर बाहरी सतह पर जुड़कर छड़ के चारों ओर एक धारा बनाती हैं, बिल्कुल परिनालिका के फेरों जैसी। इसलिए छड़ चुंबक और परिनालिका का क्षेत्र-प्रतिरूप एक जैसा है।
छड़ चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण m, चुंबक के अंदर S से N की ओर (मात्रक A m²)।
छड़ चुंबक की अक्ष और निरक्ष पर क्षेत्र
छोटे चुंबक के लिए (r चुंबक से बहुत बड़ा):
- अक्ष पर (N और S से होकर जाने वाली रेखा): B = (μ₀/4π) · 2m / r³, m की दिशा में।
- निरक्ष पर (केंद्र से लंबवत रेखा): B = (μ₀/4π) · m / r³, m के उलटी दिशा में।
समान दूरी पर अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय का दोगुना। दोनों 1/r³ से घटते हैं। ये विद्युत द्विध्रुव के क्षेत्रों जैसे ही हैं, p की जगह m और 1/4πε₀ की जगह μ₀/4π।
एकसमान क्षेत्र में चुंबक पर बल-आघूर्ण
एकसमान क्षेत्र B में N सिरे पर B की दिशा में और S सिरे पर उलटा बल लगता है। दोनों बराबर और उलटे, कुल बल शून्य, पर वे बल-युग्म बनाते हैं:
τ = m × B, परिमाण τ = mB sinθ
θ = m और B के बीच कोण। बल-आघूर्ण m को B की सीध में लाना चाहता है, धारा लूप (τ = NIAB sinθ) की तरह।
ऊर्जा
स्थितिज ऊर्जा U = −mB cosθ। m, B के साथ हो तो न्यूनतम (−mB): स्थायी संतुलन। उलटा हो तो अधिकतम (+mB): अस्थायी। θ₁ से θ₂ तक घुमाने का कार्य = mB(cosθ₁ − cosθ₂)। कंपास सुई इसी बल-आघूर्ण से उत्तर दिखाती है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
क्षेत्र रेखाएँ B का चित्र हैं। नियम:
- ये बंद लूप हैं: बाहर N से S, अंदर S से N। (विद्युत रेखाएँ आवेशों पर शुरू/ख़त्म होती हैं; चुंबकीय रेखाओं का कोई आरंभ या अंत नहीं।)
- किसी बिंदु पर स्पर्श रेखा B की दिशा देती है।
- जहाँ रेखाएँ पास-पास, वहाँ क्षेत्र प्रबल।
- दो रेखाएँ कभी नहीं कटतीं, क्योंकि एक बिंदु पर B की दो दिशाएँ नहीं हो सकतीं।
- अकेला चुंबकीय ध्रुव (एकल ध्रुव) नहीं होता। इसलिए किसी भी बंद सतह से कुल फ्लक्स शून्य: चुंबकत्व का गाउस नियम, ∮B·dA = 0।
चुंबकन, चुंबकीय तीव्रता और प्रवृत्ति
चुंबकन M = प्रति एकांक आयतन कुल चुंबकीय आघूर्ण, M = mकुल / V (मात्रक A m⁻¹)। यह बताता है कि पदार्थ कितना चुंबकित हुआ।
पदार्थ को लंबी परिनालिका में रखो। अकेली कुंडली B₀ = μ₀nI देती है। चुंबकीय तीव्रता H = nI (मात्रक A m⁻¹)। पदार्थ अपना भाग जोड़ता है:
B = μ₀ (H + M)
ज़्यादातर पदार्थों में M = χH, χ = चुंबकीय प्रवृत्ति (कोई मात्रक नहीं)। तब B = μ₀(1 + χ)H = μ₀μᵣH, आपेक्षिक चुंबकशीलता μᵣ = 1 + χ।
प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ
प्रतिचुंबकीय (डायामैग्नेटिक)
परमाणुओं का स्थायी चुंबकीय आघूर्ण नहीं होता। बाहरी क्षेत्र उलटे छोटे आघूर्ण बनाता है, इसलिए पदार्थ प्रबल क्षेत्र से हल्का सा दूर धकेला जाता है। χ छोटा और ऋण (लगभग −10⁻⁵), μᵣ, 1 से थोड़ा कम। उदाहरण: बिस्मथ, ताँबा, सीसा, पानी, नाइट्रोजन। अतिचालक क्षेत्र को पूरा बाहर कर देता है (χ = −1, माइस्नर प्रभाव)।
अनुचुंबकीय (पैरामैग्नेटिक)
परमाणुओं के छोटे स्थायी आघूर्ण बेतरतीब दिशाओं में। क्षेत्र कुछ को सीधा करता है, पदार्थ हल्का खिंचता है। χ छोटा और धन (10⁻⁵ से 10⁻³), μᵣ, 1 से थोड़ा अधिक। उदाहरण: ऐलुमिनियम, सोडियम, कैल्सियम, ऑक्सीजन।
लौहचुंबकीय (फ़ेरोमैग्नेटिक)
परमाणु आघूर्ण छोटे क्षेत्रों में एक साथ सीधे रहते हैं, इन्हें डोमेन कहते हैं। क्षेत्र में B की दिशा वाले डोमेन बढ़ते हैं, पदार्थ बहुत खिंचता है। χ बहुत बड़ा (10³ या अधिक)। उदाहरण: लोहा, कोबाल्ट, निकैल, गैडोलिनियम। नर्म लौहचुंबक (नर्म लोहा) क्षेत्र हटाने पर चुंबकत्व खो देते हैं; कठोर (ऐल्निको) बनाए रखते हैं, स्थायी चुंबक बनते हैं।
| गुण | प्रति | अनु | लौह |
|---|---|---|---|
| χ | छोटा, − | छोटा, + | बहुत बड़ा, + |
| μᵣ | < 1 | > 1 (थोड़ा) | ≫ 1 |
| असमान क्षेत्र में | कमज़ोर क्षेत्र की ओर | प्रबल क्षेत्र की ओर | प्रबल क्षेत्र की ओर तेज़ी से |
ताप का प्रभाव
गर्मी से परमाणु हिलते हैं, परमाणु चुंबकों का सीधा रहना बिगड़ता है।
- प्रतिचुंबकत्व ताप से लगभग नहीं बदलता।
- अनुचुंबकत्व ताप बढ़ने पर घटता है: क्यूरी नियम χ = C / T (T केल्विन में)। केल्विन ताप दोगुना, प्रवृत्ति आधी।
- लौहचुंबकत्व क्यूरी ताप Tc से ऊपर ख़त्म: डोमेन टूट जाते हैं और पदार्थ अनुचुंबकीय बन जाता है; तब χ = C / (T − Tc)। लोहा: Tc ≈ 1043 K (770 °C); निकैल ≈ 631 K; कोबाल्ट ≈ 1394 K।
परीक्षा के लिए
बोर्ड में अक्सर: प्रति, अनु, लौह चुंबकीय पदार्थों की तुलना (3 अंक); क्षेत्र रेखाओं के गुण (2 अंक); चुंबक पर बल-आघूर्ण और स्थितिज ऊर्जा (2–3 अंक); छड़ चुंबक तुल्य परिनालिका (2 अंक); τ = mB sinθ, M = m/V, χ = M/H और क्यूरी नियम पर प्रश्न।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अक्षीय क्षेत्र (छोटा चुंबक): B = (μ₀/4π) · 2m / r³
- निरक्षीय क्षेत्र: B = (μ₀/4π) · m / r³ (m के उलटा)
- बल-आघूर्ण: τ = m × B, τ = mB sinθ
- स्थितिज ऊर्जा: U = −mB cosθ; θ₁ → θ₂ घुमाने का कार्य = mB(cosθ₁ − cosθ₂)
- चुंबकन: M = m_कुल / V (A m⁻¹)
- B = μ₀(H + M); परिनालिका में H = nI
- M = χH; μᵣ = 1 + χ; μ = μ₀μᵣ
- क्यूरी नियम (अनुचुंबक): χ = C / T; T_c से ऊपर लौह: χ = C / (T − T_c)
हल किए गए उदाहरण
1. 2 A m² आघूर्ण का चुंबक 0.3 T क्षेत्र से 30° पर है। बल-आघूर्ण?
τ = mB sinθ = 2 × 0.3 × 0.5 = 0.3 N m।
2. 0.2 T क्षेत्र से 30° पर चुंबक पर 0.06 N m बल-आघूर्ण है। चुंबकीय आघूर्ण?
m = τ / (B sinθ) = 0.06 / 0.1 = 0.6 A m²।
3. छोटे चुंबक का m = 0.5 A m²। 10 cm पर अक्ष और निरक्ष पर B?
अक्ष: 10⁻⁷ × 2 × 0.5 / 10⁻³ = 10⁻⁴ T। निरक्ष: आधा, 5 × 10⁻⁵ T, m के उलटा।
4. 0.2 T क्षेत्र में m = 1.5 A m² चुंबक को क्षेत्र की दिशा से उलटी दिशा तक घुमाने का कार्य?
W = mB(cos 0° − cos 180°) = 1.5 × 0.2 × 2 = 0.6 J।
5. 5 × 10⁻⁶ m³ आयतन की लोहे की छड़ का कुल आघूर्ण 4 A m² है। चुंबकन?
M = m / V = 8 × 10⁵ A m⁻¹।
6. H = 2000 A m⁻¹ में पदार्थ का M = 3 A m⁻¹। χ, μᵣ और प्रकार?
χ = 1.5 × 10⁻³, μᵣ = 1.0015। छोटा धन, अतः अनुचुंबकीय।
7. अनुचुंबकीय लवण का 300 K पर χ = 2.4 × 10⁻⁴। 200 K पर χ?
χ ∝ 1/T: χ₂ = 2.4 × 10⁻⁴ × 300 / 200 = 3.6 × 10⁻⁴।
8. परिनालिका (1000 फेरे/m, 2 A) में μᵣ = 400 का लोहे का क्रोड है। H, B और M?
H = nI = 2000 A m⁻¹। B = 4π × 10⁻⁷ × 400 × 2000 ≈ 1.0 T। M = (μᵣ − 1)H ≈ 8 × 10⁵ A m⁻¹।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि क्षेत्र रेखाएँ N से शुरू होकर S पर ख़त्म होती हैं। वे अंदर S से N जाकर बंद लूप बनाती हैं।
- अक्ष पर निरक्ष वाला सूत्र लगाना। अक्ष पर 2m, निरक्ष पर m।
- चिह्न में गड़बड़: प्रतिचुंबकीय χ ऋण, अनुचुंबकीय χ धन, दोनों छोटे।
- क्यूरी नियम में °C लगाना। हमेशा केल्विन: T = t + 273।