चुंबकीय क्षेत्र और ऑर्स्टेड का प्रयोग
1820 में ऑर्स्टेड ने देखा कि पास के तार में धारा बहने पर कंपास की सुई घूम जाती है। यानी गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र बनाते हैं। धारा बंद करो, सुई वापस आ जाती है।
चुंबकीय क्षेत्र B बताता है कि किसी बिंदु पर चुंबक पर कितना और किस दिशा में असर होगा। SI मात्रक टेस्ला (T) है। पृथ्वी का क्षेत्र लगभग 5 × 10⁻⁵ T है।
दिशा: दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम
तार को दाएँ हाथ में ऐसे पकड़ो कि अंगूठा धारा की दिशा में हो। मुड़ी उंगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं। सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ बंद वृत्त होती हैं।
बायो-सावर्ट नियम
तार को dl लंबाई के छोटे टुकड़ों में बाँटो। धारा I वाला हर टुकड़ा r दूरी के बिंदु P पर छोटा क्षेत्र dB बनाता है:
dB = (μ₀/4π) · I dl sinθ / r² (सदिश रूप: dB = (μ₀/4π) · I dl × r̂ / r²)
- θ = dl और P को जोड़ने वाली रेखा के बीच का कोण।
- μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ = मुक्त आकाश की चुंबकशीलता।
- dB, dl और r दोनों के लंबवत है।
- यह 1/r² से घटता है (कूलॉम नियम जैसा), पर कोण पर भी निर्भर है: तार की अपनी सीध में (θ = 0) क्षेत्र शून्य।
वृत्ताकार लूप का क्षेत्र
केंद्र पर
लूप का हर टुकड़ा केंद्र से R दूरी पर है और त्रिज्या से 90° पर। सबके छोटे क्षेत्र एक ही दिशा (अक्ष) में हैं। पूरी लंबाई 2πR पर जोड़ो:
B = (μ₀/4π) · I · 2πR / R² = μ₀I / 2R। N फेरों के लिए B = μ₀NI / 2R।
अक्ष पर, केंद्र से x दूरी पर
अब हर टुकड़ा √(R² + x²) दूर है। क्षेत्रों के तिरछे (लंबवत) भाग जोड़ियों में कट जाते हैं, अक्ष के साथ वाले भाग जुड़ते हैं:
B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}
जाँच: x = 0 पर μ₀NI/2R। बहुत दूर (x ≫ R) यह 1/x³ से घटता है, बिल्कुल छोटे छड़ चुंबक जैसा।
ऐम्पियर का परिपथीय नियम और लंबा सीधा तार
किसी भी बंद रास्ते पर चलो। हर छोटे कदम पर B का कदम की दिशा वाला भाग × कदम की लंबाई, सबको जोड़ो। यह योग रास्ते से होकर जाने वाली धारा का μ₀ गुना होता है:
∮ B · dl = μ₀ Iघिरी
लंबा सीधा तार
तार को केंद्र मानकर r त्रिज्या का वृत्त लो। सममिति से B हर जगह बराबर और वृत्त के साथ है। B × 2πr = μ₀I, इसलिए
B = μ₀I / 2πr (= 2 × 10⁻⁷ I / r)
दूरी दोगुनी, B आधा। रास्ते के बाहर की धारा Iघिरी में नहीं गिनी जाती।
परिनालिका (गुणात्मक)
परिनालिका तार की पास-पास लिपटी लंबी सर्पिल कुंडली है। अंदर पड़ोसी फेरों के क्षेत्र एक ही दिशा में जुड़ते हैं; बाहर लगभग कट जाते हैं।
- लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल, एकसमान और अक्ष के साथ।
- बाहर लगभग शून्य।
- B = μ₀nI, n = प्रति मीटर फेरे। त्रिज्या पर निर्भर नहीं।
- सिरों पर क्षेत्र बीच का लगभग आधा।
- एक सिरा N, दूसरा S, छड़ चुंबक जैसा। अंदर नर्म लोहा रखो तो विद्युत चुंबक बनता है।
परीक्षा के लिए
बोर्ड में अक्सर: बायो-सावर्ट नियम लिखो (2 अंक); वृत्ताकार लूप की अक्ष पर B की व्युत्पत्ति (3–5 अंक); ऐम्पियर नियम और सीधे तार पर उपयोग (3 अंक); μ₀I/2πr और μ₀NI/2R पर संख्यात्मक प्रश्न। मात्रक टेस्ला और दिशा हमेशा लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- dB = (μ₀/4π) · I dl sinθ / r²
- लूप का केंद्र: B = μ₀NI / 2R
- लूप की अक्ष: B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}
- ऐम्पियर नियम: ∮B·dl = μ₀I_घिरी
- लंबा सीधा तार: B = μ₀I / 2πr
- लंबी परिनालिका (अंदर): B = μ₀nI, n = N/L
- μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹; μ₀/4π = 10⁻⁷; μ₀/2π = 2 × 10⁻⁷
हल किए गए उदाहरण
1. लंबे सीधे तार में 5 A धारा है। 10 cm दूर B ज्ञात करो।
B = μ₀I / 2πr = 2 × 10⁻⁷ × 5 / 0.10 = 1 × 10⁻⁵ T।
2. लंबे तार से 5 cm दूर क्षेत्र 4 × 10⁻⁶ T है। धारा ज्ञात करो।
I = B·r / (2 × 10⁻⁷) = 4 × 10⁻⁶ × 0.05 / (2 × 10⁻⁷) = 1 A।
3. 10 cm त्रिज्या के एक फेरे वाले लूप में 2 A धारा है। केंद्र पर B?
B = μ₀I / 2R = 4π × 10⁻⁷ × 2 / 0.20 = 4π × 10⁻⁶ ≈ 1.26 × 10⁻⁵ T, अक्ष के अनुदिश।
4. 50 फेरे, त्रिज्या 5 cm, धारा 1 A वाली कुंडली के केंद्र पर B?
B = μ₀NI / 2R = 4π × 10⁻⁷ × 50 × 1 / 0.10 = 2π × 10⁻⁴ ≈ 6.3 × 10⁻⁴ T।
5. 3 cm त्रिज्या का लूप। अक्ष पर केंद्र से 4 cm पर केंद्र वाले क्षेत्र का कितना भाग है?
B_अक्ष / B_केंद्र = R³ / (R² + x²)^{3/2} = 27 / 125 = 0.216, यानी लगभग 22 %।
6. लंबी परिनालिका में 1000 फेरे प्रति मीटर, धारा 2 A। अंदर B?
B = μ₀nI = 4π × 10⁻⁷ × 1000 × 2 ≈ 2.5 × 10⁻³ T।
7. 10 cm दूर दो लंबे समांतर तारों में 5 A विपरीत दिशाओं में है। ठीक बीच में B?
हर तार: 2 × 10⁻⁷ × 5 / 0.05 = 2 × 10⁻⁵ T। विपरीत धाराओं में बीच में दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में, तो B = 4 × 10⁻⁵ T। (एक दिशा की धाराओं में B = 0 होता।)
आम गलतियाँ
- सीधे तार के लिए μ₀I / 2R या लूप के लिए μ₀I / 2πr लगाना। तार में 2π, लूप के केंद्र में सिर्फ़ 2।
- r या R को cm से m में बदलना भूल जाना।
- ऐम्पियर लूप के बाहर की धारा को भी I_घिरी में गिन लेना।
- यह मानना कि परिनालिका का क्षेत्र उसकी त्रिज्या पर निर्भर है। B = μ₀nI।