United Grade 12 Physics
अध्याय: 4
1. Forces and interactions
Newton's second law · Conservation of momentum · Designing collision-safety devices · Gravitation and Coulomb’s law · Electric currents and magnetic fields
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र: बायो-सावर्ट नियम और ऐम्पियर नियम – धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (ऑर्स्टेड, 1820)। बायो-सावर्ट नियम तार के छोटे टुकड़े का क्षेत्र देता है: dB = (μ₀/4π)·I dl sinθ / r²। वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀NI / 2R और अक्ष पर B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}। ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮B·dl = μ₀I लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I / 2πr देता है। लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल और एकसमान है: B = μ₀nI।
2. Energy
Computing energy changes in systems · Energy as motion and fields at the macro scale · Designing energy-conversion devices · Thermal energy transfer and the second law · Energy stored in fields
- निकाय में ऊर्जा और विद्युत शक्ति – निकाय (system) वे चीज़ें हैं जिन्हें हम अध्ययन के लिए चुनते हैं। निकाय की कुल ऊर्जा तभी बदलती है जब ऊर्जा कार्य, ऊष्मा या विकिरण बनकर उसकी सीमा पार करे: ΔE = W + Q। अंदर ऊर्जा एक भंडार से दूसरे में जाती है, जैसे गतिज, गुरुत्वीय स्थितिज, प्रत्यास्थ, तापीय, रासायनिक और विद्युत। शक्ति ऊर्जा बदलने की दर है, P = E/t, मात्रक वाट। परिपथ में P = IV, और प्रतिरोध के लिए P = I²R = V²/R। असली उपकरण कुछ ऊर्जा ऊष्मा में गँवाते हैं, इसलिए दक्षता η = उपयोगी ÷ कुल हमेशा 100% से कम होती है।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
- क्षेत्र और बल – कुछ बलों के लिए छूना ज़रूरी है, जैसे हाथ से धक्का। पर कुछ बल खाली जगह के पार भी लगते हैं: गुरुत्व, विद्युत बल और चुंबकीय बल। इन्हें समझाने के लिए हम क्षेत्र (field) की बात करते हैं: किसी वस्तु के चारों ओर वह जगह जहाँ दूसरी वस्तु बल महसूस करती है। द्रव्यमान से गुरुत्वीय क्षेत्र, आवेश से विद्युत क्षेत्र और चुंबक या धारा से चुंबकीय क्षेत्र बनता है। क्षेत्र रेखाओं का तीर बल की दिशा बताता है; पास-पास रेखाएँ मतलब तेज़ क्षेत्र। गुरुत्व और विद्युत बल व्युत्क्रम वर्ग नियम मानते हैं: दूरी दोगुनी, बल चौथाई। क्षेत्र ऊर्जा भी जमा करते हैं। प्रकृति के सारे बल चार मूल बलों से आते हैं।
3. Waves and electromagnetic radiation
Wave speed, frequency and wavelength · Digital information transmission · Wave and particle models of light · Effects of EM radiation on matter · Wave technologies
- प्रगामी तरंगें: प्रकार, चाल और समीकरण – तरंग ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, पदार्थ को नहीं। अनुप्रस्थ तरंग में कण तरंग की दिशा के लंबवत हिलते हैं; अनुदैर्ध्य में उसी दिशा में। चाल v = fλ। डोरी पर v = √(T/μ); गैस में ध्वनि के लिए v = √(γP/ρ)। +x की ओर जाती तरंग y = A sin(kx − ωt), जहाँ k = 2π/λ और ω = 2πf।
- डेटा निरूपण: कंप्यूटर संख्या, अक्षर, चित्र और आवाज़ कैसे रखता है – डेटा कच्चे तथ्य हैं; अर्थ मिलने पर वह सूचना (information) बनता है; जिस सूचना से हम काम ले सकें वह ज्ञान है। कंप्यूटर सारा डेटा बिट (0 या 1) में रखता है। 8 बिट = 1 बाइट; 1 kB = 1000 बाइट, 1 MB = 1000 kB, 1 GB = 1000 MB, 1 TB = 1000 GB। संख्याएँ बाइनरी में रहती हैं, जहाँ स्थानीय मान दोगुने होते जाते हैं: 1, 2, 4, 8… अक्षरों के लिए कैरेक्टर सेट होता है: ASCII में 'A' = 65; यूनिकोड में हर लिपि है। बिटमैप चित्र पिक्सेल का जाल है; साइज़ = चौड़ाई × ऊँचाई × कलर डेप्थ। ध्वनि के सैंपल लिए जाते हैं: साइज़ = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × सेकंड। वेक्टर चित्र पिक्सेल की जगह आकृतियाँ रखता है। कम्प्रेशन फ़ाइल छोटी करता है: लॉसलेस हर बिट बचाता है, लॉसी कुछ बारीकी हटा देता है।
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- पदार्थ पर विद्युतचुंबकीय विकिरण के प्रभाव – विद्युतचुंबकीय विकिरण छोटे-छोटे पैकेटों में आता है जिन्हें फोटॉन कहते हैं। हर फोटॉन की ऊर्जा E = hf होती है, यानी ऊँची आवृत्ति पर हर फोटॉन में ज़्यादा ऊर्जा। कम ऊर्जा वाली रेडियो और माइक्रोवेव अणुओं को हिलाती हैं (ऊष्मा), दृश्य प्रकाश इलेक्ट्रॉनों को ऊँचे स्तर पर उठाता है (रंग, दृष्टि, प्रकाश-संश्लेषण), पराबैंगनी रासायनिक बंध तोड़ सकती है, और एक्स-किरण व गामा किरणें इलेक्ट्रॉन को परमाणु से बाहर निकाल देती हैं (आयनकारी)। नुकसान फोटॉन ऊर्जा, तीव्रता और संपर्क के समय पर निर्भर करता है।
- सीमा पर तरंगें, ध्रुवण और डॉप्लर प्रभाव – तरंग जब माध्यम के सिरे पर पहुँचती है तो परावर्तित होती है। बँधे सिरे पर स्पंद उल्टा लौटता है (आधे चक्र का कला-परिवर्तन), खुले सिरे पर सीधा। दो माध्यमों की सीमा पर कुछ तरंग लौटती है, कुछ आगे जाती है। आगे गई तरंग कभी उल्टी नहीं होती; लौटी तरंग तभी उल्टी होती है जब दूसरा माध्यम धीमा (सघन) हो। सीमा पर आवृत्ति नहीं बदलती, चाल और तरंगदैर्घ्य बदलते हैं। ध्रुवण का मतलब है अनुप्रस्थ तरंग का कंपन एक ही दिशा में होना। पोलेरॉइड अध्रुवित प्रकाश का आधा पास करता है, और θ कोण पर दूसरा पोलेरॉइड I = I₀ cos²θ (मैलस का नियम)। ध्वनि अनुदैर्ध्य है, उसका ध्रुवण नहीं होता। डॉप्लर प्रभाव: स्रोत या श्रोता के चलने से सुनी गई आवृत्ति बदलती है, f' = f (v ± v_o)/(v ∓ v_s)। अल्ट्रासाउंड, सोनार, रडार, ऑप्टिकल फाइबर और LCD स्क्रीन इन्हीं विचारों पर चलते हैं।
4. Common course additions
1D and 2D kinematics · Circuits and Ohm’s law
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- ओम का नियम, प्रतिरोधकता और ताप का प्रभाव – अपवाह वेग से V = IR मिलता है, जहाँ R = ml/(ne²τA) = ρl/A. प्रतिरोधकता ρ = m/(ne²τ) सिर्फ़ पदार्थ और ताप पर निर्भर है; चालकता σ = 1/ρ. सदिश रूप: j = σE. धातु के तार और प्रतिरोधक सीधी V–I रेखा देते हैं (ओमीय); बल्ब, डायोड और GaAs जैसे युक्तियाँ मुड़ा या एकदिशीय ग्राफ़ देती हैं (अनओमीय)। धातुओं में ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है: ρT = ρ0[1 + α(T − T0)]; नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं में बहुत कम बदलता है; अर्धचालकों में ρ घटता है।