बँधे और खुले सिरे पर परावर्तन
तरंग-स्पंद रस्सी में ऊर्जा ले जाता है। रस्सी के सिरे पर उसे कहीं जाना है, इसलिए वह परावर्तित होता है।
- बँधा सिरा (दीवार से बँधा): सिरा हिल नहीं सकता। रस्सी दीवार को ऊपर खींचती है, दीवार रस्सी को नीचे खींचती है (न्यूटन का तीसरा नियम)। स्पंद उल्टा लौटता है, यानी π का कला-परिवर्तन।
- खुला सिरा (चिकने खंभे पर फिसलता छल्ला): सिरा और ऊपर उछलता है, फिर रस्सी को वापस खींचता है। स्पंद सीधा लौटता है।
पाइप में ध्वनि के लिए भी यही: बंद सिरा बँधे सिरे जैसा, खुला सिरा खुले सिरे जैसा।
दो माध्यमों के बीच संचरण और परावर्तन
नए माध्यम पर तरंग बँट जाती है: कुछ ऊर्जा आगे जाती है (संचरित), कुछ लौटती है (परावर्तित)।
- आवृत्ति नहीं बदलती: सीमा उसी दर से हिलती है जिस दर से तरंग आती है।
- चाल बदलती है, इसलिए तरंगदैर्घ्य बदलती है (λ = v/f)। धीमे माध्यम में स्पंद छोटा।
- हल्की (तेज़) → भारी (धीमी) रस्सी: लौटा स्पंद उल्टा।
- भारी → हल्की रस्सी: लौटा स्पंद सीधा।
- आगे गया स्पंद हमेशा सीधा।
रस्सी के लिए r = (v₂ − v₁)/(v₁ + v₂), t = 2v₂/(v₁ + v₂)। माध्यमों में जितना ज़्यादा अंतर, उतना ज़्यादा परावर्तन। इसीलिए अल्ट्रासाउंड में जेल लगाते हैं: वरना प्रोब और त्वचा के बीच की हवा पर लगभग सारी ध्वनि लौट जाती।
ध्रुवण (Polarisation)
अनुप्रस्थ तरंग में कंपन चलने की दिशा से 90° पर होता है: ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ या बीच के किसी भी कोण पर।
अध्रुवित प्रकाश (धूप, बल्ब) में सभी दिशाओं के कंपन मिले होते हैं। पोलेरॉइड सिर्फ़ एक दिशा जाने देता है। अब प्रकाश समतल-ध्रुवित है और तीव्रता आधी है।
मैलस का नियम: पहले से θ कोण पर रखा दूसरा पोलेरॉइड (विश्लेषक) पास करता है
I = I₀ cos²θ
θ = 0 पर सब, 45° पर आधा, 90° पर कुछ नहीं।
ध्वनि का ध्रुवण नहीं होता: वह अनुदैर्ध्य है। ध्रुवण साबित करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।
उपयोग: चमक-रोधी चश्मे, LCD स्क्रीन, 3D सिनेमा चश्मे, प्लास्टिक के पुर्ज़ों में तनाव जाँच।
डॉप्लर प्रभाव
स्रोत चलता है तो हर नया शिखर आगे वाले श्रोता के और पास से निकलता है। आगे शिखर पास-पास, पीछे दूर-दूर।
- पास आते हुए: ऊँची आवृत्ति (ऊँचा सुर, प्रकाश में नीलापन)।
- दूर जाते हुए: नीची आवृत्ति (नीचा सुर, लालपन)।
ध्वनि के लिए (स्थिर हवा में चाल v):
f' = f × (v + vo) / (v − vs) पास आते समय;
f' = f × (v − vo) / (v + vs) दूर जाते समय।
प्रकाश के लिए (कम चाल पर): Δf / f ≈ v / c। आकाशगंगाओं का अभिरक्त विस्थापन (redshift) बताता है कि ब्रह्मांड फैल रहा है।
करके देखो: दोस्त से कहो कि बीप बजाता फ़ोन डोरी से बाँधकर गोल घुमाए। हर चक्कर में सुर चढ़ता-उतरता सुनाई देगा।
तरंगों पर आधारित तकनीकें
उपकरण तरंगों के गुणों से सूचना और ऊर्जा भेजते, पकड़ते और सँभालते हैं:
- अल्ट्रासाउंड और सोनार: सीमा से लौटी गूँज का समय नापो; दूरी = चाल × समय ÷ 2।
- रडार गन और डॉप्लर स्कैन: गूँज की आवृत्ति के बदलाव से चाल (गाड़ी, खून का बहाव, तूफ़ान)।
- ऑप्टिकल फाइबर: पूर्ण आंतरिक परावर्तन से इंटरनेट संकेत।
- डिजिटल संकेत: सूचना चालू/बंद स्पंदों में। शोर से कम बिगड़ते हैं और बिना नुकसान कॉपी और सेव होते हैं।
- सोलर सेल, कैमरा, फ़ोन: विद्युत-चुंबकीय तरंगों को पकड़कर विद्युत संकेत बनाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- v = f λ (सीमा पर f नहीं बदलती)
- बँधा सिरा / धीमा माध्यम: परावर्तन उल्टा (π कला-परिवर्तन)
- रस्सी: r = (v₂ − v₁)/(v₁ + v₂), t = 2v₂/(v₁ + v₂)
- मैलस का नियम: I = I₀ cos²θ
- अध्रुवित प्रकाश एक पोलेरॉइड से: I = I₀ / 2
- डॉप्लर (ध्वनि): f' = f (v ± v_o)/(v ∓ v_s), पास आते समय ऊपर के चिह्न
- प्रकाश, v ≪ c: Δf / f ≈ v / c
- गूँज से दूरी d = v t / 2
हल किए गए उदाहरण
1. 50 Hz की तरंग v = 10 m/s वाली रस्सी से v = 4 m/s वाली रस्सी में जाती है। तरंगदैर्घ्य ज्ञात करो।
आवृत्ति 50 Hz ही। λ₁ = 10/50 = 0.20 m, λ₂ = 4/50 = 0.08 m।
2. 80 W/m² का अध्रुवित प्रकाश 60° पर रखे दो पोलेरॉइड से गुज़रता है। अंतिम तीव्रता?
पहले के बाद 40 W/m²। दूसरे के बाद 40 × cos²60° = 40 × 0.25 = 10 W/m²।
3. 700 Hz का सायरन 30 m/s से तुम्हारी ओर आ रहा है। ध्वनि की चाल 340 m/s। सुनी गई आवृत्ति?
f' = 700 × 340/310 ≈ 768 Hz।
4. वही सायरन 30 m/s से दूर जा रहा है। अब?
f' = 700 × 340/370 ≈ 643 Hz।
5. साइकिल सवार 10 m/s से स्थिर 500 Hz हॉर्न की ओर जा रही है। v = 340 m/s। वह क्या सुनेगी?
श्रोता चल रहा है: f' = 500 × 350/340 ≈ 515 Hz।
6. जहाज़ का सोनार स्पंद 0.80 s बाद समुद्र तल से लौटता है। समुद्री पानी में ध्वनि 1500 m/s। गहराई?
d = vt/2 = 1500 × 0.80 ÷ 2 = 600 m।
आम गलतियाँ
- सोचना कि नए माध्यम में आवृत्ति बदलती है। आवृत्ति वही, चाल और तरंगदैर्घ्य बदलते हैं।
- कहना कि ध्वनि का ध्रुवण हो सकता है। सिर्फ़ अनुप्रस्थ तरंगों का ध्रुवण होता है।
- अध्रुवित प्रकाश में पहले पोलेरॉइड पर तीव्रता आधी करना भूल जाना।
- सोचना कि डॉप्लर प्रभाव में आवाज़ तेज़ (लाउड) होती है। बदलती है आवृत्ति यानी सुर।