डॉप्लर प्रभाव क्या है?
तरंग की आवृत्ति f (हर सेकंड भेजे गए शिखर) और तरंगदैर्घ्य λ (दो शिखरों के बीच की दूरी) होती है। ध्वनि में ज़्यादा आवृत्ति ऊँचे तारत्व (pitch) जैसी सुनाई देती है।
डॉप्लर प्रभाव वह बदलाव है जो प्रेक्षक को आवृत्ति में महसूस होता है जब स्रोत और प्रेक्षक एक-दूसरे की ओर या दूर चलते हैं। ओर आने पर ज़्यादा आवृत्ति, दूर जाने पर कम। यह नाम क्रिश्चियन डॉप्लर पर है, जिन्होंने 1842 में इसे समझाया।
स्रोत ख़ुद नहीं बदलता। सायरन वही सुर बजाता है। बदलता केवल वह है जो तुम तक पहुँचता है।
ऐसा क्यों होता है: शिखर दबते और फैलते हैं
चलता हुआ स्रोत
हवा में ध्वनि की चाल v लगभग 340 m/s है। स्रोत हर 1/f सेकंड में एक शिखर भेजता है। अगर स्रोत vs चाल से आगे बढ़े, तो वह अपने ही शिखरों के पीछे दौड़ता है। हर नया शिखर पिछले के थोड़ा पास से शुरू होता है। तो आगे: λ′ = (v − vs) ÷ f, छोटी। पीछे: λ′ = (v + vs) ÷ f, बड़ी। ध्वनि की चाल वही है, इसलिए सुनी गई आवृत्ति f′ = v ÷ λ′ बदल जाती है।
चलता हुआ प्रेक्षक
अगर स्रोत रुका है और तुम vo चाल से उसकी ओर चलो, तो तरंगदैर्घ्य नहीं बदलती, पर तुम शिखरों से जल्दी मिलते हो: f′ = f × (v + vo) ÷ v। दूर जाने पर f′ = f × (v − vo) ÷ v।
केवल स्रोत और प्रेक्षक को जोड़ने वाली रेखा की दिशा में गति मायने रखती है।
ध्वनि के लिए डॉप्लर सूत्र
f′ = f × (v ± vo) ÷ (v ∓ vs)
- f = भेजी गई आवृत्ति, f′ = सुनी गई आवृत्ति
- v = माध्यम में ध्वनि की चाल (हवा ≈ 340 m/s)
- vo = प्रेक्षक की चाल, vs = स्रोत की चाल
चिह्न का नियम: वह चिह्न लो जिससे पास आने पर f′ बड़ी हो। पास आने पर ऊपर वाले (+vo, −vs), दूर जाने पर नीचे वाले (−vo, +vs)।
3D से मिलाओ: सायरन 120 m/s, f = 500 Hz। आगे f′ = 500 × 340 ÷ 220 ≈ 773 Hz। पीछे f′ = 500 × 340 ÷ 460 ≈ 370 Hz।
सीमाएँ: अगर vs, v के बराबर हो जाए तो शिखर एक के ऊपर एक जमा होकर आघात तरंग (shock wave) बनाते हैं, जैसे जेट का सोनिक बूम। सूत्र मानता है कि हवा स्थिर है; हवा चले तो उत्तर बदलता है।
प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव: रेड शिफ्ट और ब्लू शिफ्ट
प्रकाश भी तरंग है। जब कोई तारा या आकाशगंगा हमसे दूर जाती है, उसका प्रकाश लंबी तरंगदैर्घ्य की ओर खिंच जाता है: रेड शिफ्ट (अभिरक्त विस्थापन)। पास आने पर ब्लू शिफ्ट। प्रकाश की चाल c से बहुत कम चाल के लिए Δλ ÷ λ ≈ v ÷ c। खगोलविद इससे तारों की चाल नापते हैं, तारे को डगमगाने वाले ग्रह खोजते हैं, और दिखाते हैं कि दूर की आकाशगंगाएँ दूर जा रही हैं (फैलता ब्रह्मांड)।
डॉप्लर प्रभाव के उपयोग
- स्पीड गन और रडार: रेडियो तरंगें गाड़ी या क्रिकेट गेंद से टकराकर लौटती हैं; आवृत्ति के बदलाव से गति पता चलती है।
- मौसम रडार: बताता है बादल पास आ रहे हैं या दूर जा रहे हैं, और घूमते तूफ़ान पकड़ता है।
- अल्ट्रासाउंड (डॉप्लर स्कैन): चलती रक्त कोशिकाओं से लौटी ध्वनि खून के बहाव की गति और दिशा, और गर्भ में शिशु की धड़कन दिखाती है।
- चमगादड़ और डॉल्फ़िन: गूँज के डॉप्लर बदलाव से चलता शिकार पकड़ते हैं।
- उपग्रह और GPS: आवृत्ति के बदलाव से उपग्रहों का पता रखते हैं।
- खगोल विज्ञान: रेड शिफ्ट, ब्लू शिफ्ट और ग्रहों की खोज।
घर पर करके देखो
फ़ोन पर स्थिर बीप (टोन जनरेटर ऐप, 1000 Hz) चलाकर उसे मोज़े में रखो और धागे से गोल घुमाओ, लोगों से दूर, सावधानी से। कुछ मीटर दूर खड़ा दोस्त हर चक्कर में सुर ऊपर-नीचे होते सुनेगा। या सड़क किनारे गुज़रती गाड़ी का हॉर्न सुनो। पहले अनुमान लगाओ: सुर सबसे ऊँचा कब होगा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- f′ = f × (v ± vo) ÷ (v ∓ vs) (ऊपर वाले चिह्न: एक-दूसरे की ओर)
- स्रोत रुके प्रेक्षक की ओर: f′ = f × v ÷ (v − vs)
- स्रोत दूर जाता हुआ: f′ = f × v ÷ (v + vs)
- प्रेक्षक रुके स्रोत की ओर: f′ = f × (v + vo) ÷ v
- चलते स्रोत के आगे तरंगदैर्घ्य: λ′ = (v − vs) ÷ f
- प्रकाश (v ≪ c): Δλ ÷ λ ≈ Δf ÷ f ≈ v ÷ c
हल किए गए उदाहरण
1. एंबुलेंस का सायरन 700 Hz है। वह 20 m/s से तुम्हारी ओर आ रही है। v = 340 m/s। क्या सुनाई देगा?
f′ = f × v ÷ (v − vs) = 700 × 340 ÷ 320 = 743.75 ≈ 744 Hz (ऊँचा)।
2. वही एंबुलेंस 20 m/s से दूर जा रही है। क्या सुनाई देगा?
f′ = 700 × 340 ÷ 360 ≈ 661 Hz (नीचा)।
3. तुम 10 m/s से साइकिल चलाकर रुके हुए 510 Hz के फ़ैक्टरी हूटर की ओर जा रहे हो। v = 340 m/s।
f′ = f × (v + vo) ÷ v = 510 × 350 ÷ 340 = 525 Hz।
4. 500 Hz का स्रोत 40 m/s से तुम्हारी ओर आ रहा है। उसके आगे तरंगदैर्घ्य निकालो। v = 340 m/s।
λ′ = (v − vs) ÷ f = 300 ÷ 500 = 0.60 m। बिना गति के यह 340 ÷ 500 = 0.68 m होती।
5. ट्रेन गुज़रने से पहले हॉर्न 600 Hz और गुज़रने के बाद 500 Hz सुनाई देता है। ट्रेन की चाल निकालो। v = 340 m/s।
600 = f × 340 ÷ (340 − vs) और 500 = f × 340 ÷ (340 + vs)। भाग दो: 1.2 = (340 + vs) ÷ (340 − vs)। 408 − 1.2vs = 340 + vs → 68 = 2.2vs → vs ≈ 30.9 m/s।
6. कार (स्रोत, 400 Hz) 30 m/s से और बाइक (प्रेक्षक) 10 m/s से एक-दूसरे की ओर आ रहे हैं। v = 340 m/s।
f′ = f × (v + vo) ÷ (v − vs) = 400 × 350 ÷ 310 ≈ 452 Hz।
आम गलतियाँ
- सोचना कि स्रोत सच में सुर बदलता है। सायरन वही है; केवल तुम तक पहुँचने वाली आवृत्ति बदलती है।
- सोचना कि स्रोत की चाल से ध्वनि की चाल बदल जाती है। हवा में ध्वनि की चाल v ही रहती है; तरंगदैर्घ्य (या मिलने की दर) बदलती है।
- चिह्न उलट देना। हमेशा जाँचो: पास आने पर f′ बड़ी, दूर जाने पर छोटी होनी चाहिए।
- प्रबलता (loudness) को डॉप्लर समझना। आवाज़ तेज़ होना डॉप्लर प्रभाव नहीं है; डॉप्लर प्रभाव तारत्व (आवृत्ति) का बदलाव है।