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ग्रीनहाउस प्रभाव

सूर्य पृथ्वी को दृश्य प्रकाश से गर्म करता है। लगभग 30% प्रकाश सीधे अंतरिक्ष में लौट जाता है (एल्बिडो ≈ 0.30)। बाक़ी ज़मीन को गर्म करता है, और गर्म ज़मीन अवरक्त विकिरण छोड़ती है। ग्रीनहाउस गैसें – जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड – दृश्य प्रकाश को जाने देती हैं, पर अवरक्त को सोखकर उसका कुछ भाग वापस नीचे भेजती हैं। पृथ्वी उस तापमान पर टिकती है जहाँ आने वाली ऊर्जा = जाने वाली ऊर्जा। इन गैसों के बिना औसत तापमान लगभग −18 °C होता; इनके साथ लगभग +15 °C है। ईंधन जलाने, खेती और कूड़े के ढेरों से CO₂ और CH₄ बढ़ने पर यह प्रभाव तेज़ होता है और धरती गर्म होती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. सूर्य पृथ्वी को दृश्य प्रकाश के रूप में ऊर्जा भेजता है। हवा इस प्रकाश को आसानी से गुज़रने देती है।
  2. हर 100 इकाई में से लगभग 30 बादलों, बर्फ़ और चमकीली ज़मीन से सीधे अंतरिक्ष में लौट जाती हैं। यही एल्बिडो है।
  3. बाक़ी 70 इकाई ज़मीन को गर्म करती हैं। गर्म ज़मीन ऊपर की ओर अदृश्य अवरक्त किरणें छोड़ती है।
  4. ग्रीनहाउस गैसें अवरक्त को सोखती हैं, दृश्य प्रकाश को नहीं। वे उसका कुछ भाग वापस नीचे भेजती हैं, इसलिए ज़मीन ज़्यादा गर्म रहती है।
  5. पृथ्वी वहाँ टिकती है जहाँ आने वाली ऊर्जा = जाने वाली ऊर्जा। इन गैसों के कारण तापमान −18 °C नहीं, लगभग +15 °C है।
  6. खुद करके देखिए: CO₂ की मात्रा और एल्बिडो बदलिए, और नया संतुलन तापमान देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

जब प्रकाश हवा से गुज़रता है, तो हवा पहले गर्म क्यों नहीं होती?

हवा दृश्य प्रकाश के लिए लगभग पारदर्शी है, इसलिए प्रकाश पहले ज़मीन तक पहुँचता है। फिर ज़मीन हवा को नीचे से गर्म करती है।

परावर्तित प्रकाश कहाँ जाता है?

सीधे अंतरिक्ष में, पृथ्वी को गर्म किए बिना। इसीलिए सफ़ेद बर्फ़ और बादल पृथ्वी को ठंडा रखते हैं।

पृथ्वी प्रकाश नहीं, अवरक्त क्यों छोड़ती है?

विकिरण का प्रकार तापमान पर निर्भर है। लगभग 5 500 °C का सूर्य दृश्य प्रकाश से चमकता है; लगभग 15 °C की पृथ्वी केवल अवरक्त में 'चमकती' है।

CO₂ और मीथेन गर्मी रोकती हैं, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन क्यों नहीं?

तीन या ज़्यादा परमाणुओं वाले अणु अवरक्त आवृत्ति पर मुड़-खिंच सकते हैं, इसलिए अवरक्त सोखते हैं। O₂ और N₂ ऐसा नहीं कर सकतीं।

क्या रुकी गर्मी हमेशा जमा होती रहती है?

नहीं। पृथ्वी गर्म होने पर ज़्यादा अवरक्त छोड़ती है, जब तक जाने वाली ऊर्जा फिर आने वाली के बराबर न हो जाए। फिर तापमान नए, ऊँचे स्तर पर टिक जाता है।

CO₂ दोगुनी करने से तापमान दोगुना हो जाता है?

नहीं। हर बार दोगुना करने पर लगभग उतनी ही अतिरिक्त गर्मी जुड़ती है (लघुगणक जैसा असर), और बर्फ़ पिघलने व जलवाष्प जैसे फ़ीडबैक और जोड़ते हैं। 280, 560 और 1120 ppm आज़माइए।

प्रकाश अंदर, अवरक्त बाहर

हर गर्म वस्तु विकिरण छोड़ती है। जितनी गर्म, उतनी छोटी तरंगदैर्ध्य। सूर्य (लगभग 5 500 °C) मुख्यतः दृश्य प्रकाश देता है। पृथ्वी की सतह (लगभग 15 °C) मुख्यतः अवरक्त (इन्फ़्रारेड) देती है, जिसे हम देख नहीं सकते पर गर्मी के रूप में महसूस करते हैं।

वायुमंडल के ऊपर हर वर्ग मीटर पर औसतन लगभग 340 W सूर्य-ऊर्जा पहुँचती है (1 361 W/m² सौर स्थिरांक का एक-चौथाई, क्योंकि पृथ्वी गोल है और घूमती है)।

ऊर्जा संतुलन: अगर पृथ्वी जितनी ऊर्जा छोड़ती है उससे ज़्यादा लेती है, तो वह तब तक गर्म होती है जब तक छोड़ी गई ऊर्जा बराबर न हो जाए। आने वाली = जाने वाली ऊर्जा से औसत तापमान तय होता है।

एल्बिडो: लौट जाने वाला हिस्सा

एल्बिडो वह भाग है जो कोई सतह सूर्य-प्रकाश में से परावर्तित करती है। 0 = सब सोख लेना; 1 = सब लौटा देना।

पृथ्वी का औसत एल्बिडो लगभग 0.30 है। बर्फ़ पिघलने पर सफ़ेद बर्फ़ की जगह गहरा समुद्र आता है, एल्बिडो घटता है, ज़्यादा प्रकाश सोखा जाता है और ज़्यादा बर्फ़ पिघलती है। इसे पुनर्निवेश चक्र (फ़ीडबैक लूप) कहते हैं।

कुछ गैसें ही अवरक्त क्यों रोकती हैं (चयनात्मक अवशोषण)

नाइट्रोजन (N₂) और ऑक्सीजन (O₂) हवा का 99% हैं, पर ये अवरक्त नहीं सोखतीं। तीन या ज़्यादा परमाणुओं वाले अणु (या दो अलग परमाणुओं वाले) ऐसे मुड़ और खिंच सकते हैं कि ख़ास तरंगदैर्ध्य का अवरक्त सोख लें। यही ग्रीनहाउस गैसें हैं:

यही चयनात्मक अवशोषण है: गैसें दृश्य प्रकाश के लिए लगभग पारदर्शी, पर अवरक्त को सोखने वाली। सोखने के बाद अणु हर दिशा में अवरक्त छोड़ता है, लगभग आधा नीचे जाता है, और ज़मीन को अतिरिक्त गर्मी मिलती है।

प्राकृतिक और बढ़ा हुआ प्रभाव

प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को रहने लायक रखता है (−18 °C की जगह +15 °C)। बढ़ा हुआ प्रभाव इंसानों द्वारा जोड़ी गई गैसों से आई अतिरिक्त गर्मी है: CO₂ 1800 से पहले लगभग 280 ppm थी, आज 420 ppm से ज़्यादा है।

कार्बन के ऑक्साइड, मीथेन और कार्बन चक्र

कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सामान्य मात्रा में ज़हरीली नहीं है और पौधों को इसकी ज़रूरत है। यह जलवायु गर्म करती है और समुद्र को अधिक अम्लीय बनाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) अलग है: ऑक्सीजन कम होने पर ईंधन के अधूरे जलने से बनती है, गंधहीन और ज़हरीली है, क्योंकि यह ख़ून को ऑक्सीजन ले जाने से रोकती है। बंद कमरे में अँगीठी या जनरेटर कभी न चलाएँ।

कार्बन चक्र

कार्बन घूमता रहता है: पौधे प्रकाश-संश्लेषण में CO₂ लेते हैं → जंतु पौधे खाते हैं → श्वसन और सड़न से CO₂ लौटती है → समुद्र CO₂ घोलते हैं → कुछ कार्बन लाखों साल के लिए कोयला, तेल, गैस बनकर दब जाता है। जीवाश्म ईंधन जलाने से यह पुराना कार्बन इतनी तेज़ी से हवा में लौटता है कि पौधे और समुद्र उसे हटा नहीं पाते।

मीथेन: ईंधन भी, ग्रीनहाउस गैस भी

मीथेन (CH₄) प्राकृतिक गैस और बायोगैस का मुख्य भाग है। ईंधन की तरह जलने पर CO₂ और पानी बनते हैं (CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O)। बिना जले रिसने पर यह ताक़तवर ग्रीनहाउस गैस है। गोबर और कचरे से बायोगैस संयंत्र (भारत के गाँवों में आम) में मीथेन पकड़ने से खाना पकाने का ईंधन भी मिलता है और गैस हवा में नहीं जाती। डीकार्बनाइज़ेशन यानी कार्बन उत्सर्जन घटाना: नवीकरणीय ऊर्जा, दक्षता, इलेक्ट्रिक परिवहन, जंगल।

खुद करके देखिए: धूप में दो जार

दो काँच के जार में दो थर्मामीटर रखकर धूप में रखिए। एक जार को प्लास्टिक की पन्नी से ढक दीजिए। 30 मिनट तक हर 5 मिनट पर दोनों पढ़िए। ढका जार ज़्यादा गर्म होता है क्योंकि गर्म हवा निकल नहीं पाती। (असली वायुमंडल हवा नहीं, अवरक्त रोकता है, पर गर्मी का निकलना धीमा करने का विचार वही है।) फिर 3D में CO₂ को 840 ppm कीजिए और संतुलन तापमान बढ़ता देखिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 340 W/m² सूर्य-प्रकाश में से 102 W/m² परावर्तित होता है। एल्बिडो ज्ञात कीजिए।

एल्बिडो = 102 ÷ 340 = 0.30।

2. एल्बिडो 0.30 हो तो 340 W/m² में से कितना सोखा जाएगा?

सोखा गया = (1 − 0.30) × 340 = 0.70 × 340 = 238 W/m²।

3. समुद्री बर्फ़ (एल्बिडो 0.8) पिघलकर समुद्र (एल्बिडो 0.06) बन जाती है। 200 W/m² प्रकाश में कितना अधिक सोखा जाएगा?

बर्फ़: 0.2 × 200 = 40 W/m²। समुद्र: 0.94 × 200 = 188 W/m²। अतिरिक्त = 148 W/m², इसलिए पिघलना गर्मी को और तेज़ करता है।

4. O₂ ग्रीनहाउस गैस क्यों नहीं है, जबकि CO₂ है?

O₂ में दो एक जैसे परमाणु हैं, वह ऐसे मुड़-खिंच नहीं सकती कि अवरक्त सोखे। CO₂ में तीन परमाणु हैं, वह मुड़ सकती है, इसलिए अवरक्त सोखती है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. ग्रीनहाउस गैसें मुख्यतः सोखती हैं:
2. पृथ्वी का औसत एल्बिडो लगभग है:
3. इनमें से कौन ग्रीनहाउस गैस नहीं है?
4. ग्रीनहाउस प्रभाव न हो तो पृथ्वी का औसत तापमान लगभग होगा:
5. बर्फ़ पिघलने से गर्मी तेज़ क्यों होती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीनहाउस प्रभाव आसान शब्दों में क्या है?

हवा की कुछ गैसें सूर्य-प्रकाश को अंदर आने देती हैं, पर पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी (अवरक्त) का कुछ भाग रोक लेती हैं, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है।

कौन-सी गैसें ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती हैं?

मुख्यतः जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड। हवा का ज़्यादातर भाग बनाने वाली नाइट्रोजन और ऑक्सीजन नहीं।

क्या ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग एक ही हैं?

नहीं। ग्रीनहाउस प्रभाव प्राकृतिक है और जीवन के लिए ज़रूरी है। ग्लोबल वार्मिंग इंसानों द्वारा जोड़ी गई अतिरिक्त गैसों से हुई अतिरिक्त गर्मी है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन8 класGases of the environment
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Precipitation and atmospheric motion
फ्रांसPremièreThe Sun, our energy source

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