प्रकाश अंदर, अवरक्त बाहर
हर गर्म वस्तु विकिरण छोड़ती है। जितनी गर्म, उतनी छोटी तरंगदैर्ध्य। सूर्य (लगभग 5 500 °C) मुख्यतः दृश्य प्रकाश देता है। पृथ्वी की सतह (लगभग 15 °C) मुख्यतः अवरक्त (इन्फ़्रारेड) देती है, जिसे हम देख नहीं सकते पर गर्मी के रूप में महसूस करते हैं।
वायुमंडल के ऊपर हर वर्ग मीटर पर औसतन लगभग 340 W सूर्य-ऊर्जा पहुँचती है (1 361 W/m² सौर स्थिरांक का एक-चौथाई, क्योंकि पृथ्वी गोल है और घूमती है)।
ऊर्जा संतुलन: अगर पृथ्वी जितनी ऊर्जा छोड़ती है उससे ज़्यादा लेती है, तो वह तब तक गर्म होती है जब तक छोड़ी गई ऊर्जा बराबर न हो जाए। आने वाली = जाने वाली ऊर्जा से औसत तापमान तय होता है।
एल्बिडो: लौट जाने वाला हिस्सा
एल्बिडो वह भाग है जो कोई सतह सूर्य-प्रकाश में से परावर्तित करती है। 0 = सब सोख लेना; 1 = सब लौटा देना।
- ताज़ा बर्फ़: लगभग 0.8–0.9
- बादल: लगभग 0.4–0.8
- रेगिस्तान की रेत: लगभग 0.3–0.4
- जंगल: लगभग 0.1–0.2
- समुद्र: लगभग 0.06
पृथ्वी का औसत एल्बिडो लगभग 0.30 है। बर्फ़ पिघलने पर सफ़ेद बर्फ़ की जगह गहरा समुद्र आता है, एल्बिडो घटता है, ज़्यादा प्रकाश सोखा जाता है और ज़्यादा बर्फ़ पिघलती है। इसे पुनर्निवेश चक्र (फ़ीडबैक लूप) कहते हैं।
कुछ गैसें ही अवरक्त क्यों रोकती हैं (चयनात्मक अवशोषण)
नाइट्रोजन (N₂) और ऑक्सीजन (O₂) हवा का 99% हैं, पर ये अवरक्त नहीं सोखतीं। तीन या ज़्यादा परमाणुओं वाले अणु (या दो अलग परमाणुओं वाले) ऐसे मुड़ और खिंच सकते हैं कि ख़ास तरंगदैर्ध्य का अवरक्त सोख लें। यही ग्रीनहाउस गैसें हैं:
- जलवाष्प (H₂O) – सबसे बड़ा हिस्सा, पर यह तापमान के साथ घटती-बढ़ती है;
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) – कोयला, तेल, गैस जलाने और जंगल काटने से;
- मीथेन (CH₄) – मवेशी, धान के खेत, कूड़े के ढेर, गैस रिसाव; 20 साल में CO₂ से लगभग 80 गुना ताक़तवर;
- नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) – उर्वरकों से।
यही चयनात्मक अवशोषण है: गैसें दृश्य प्रकाश के लिए लगभग पारदर्शी, पर अवरक्त को सोखने वाली। सोखने के बाद अणु हर दिशा में अवरक्त छोड़ता है, लगभग आधा नीचे जाता है, और ज़मीन को अतिरिक्त गर्मी मिलती है।
प्राकृतिक और बढ़ा हुआ प्रभाव
प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को रहने लायक रखता है (−18 °C की जगह +15 °C)। बढ़ा हुआ प्रभाव इंसानों द्वारा जोड़ी गई गैसों से आई अतिरिक्त गर्मी है: CO₂ 1800 से पहले लगभग 280 ppm थी, आज 420 ppm से ज़्यादा है।
कार्बन के ऑक्साइड, मीथेन और कार्बन चक्र
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सामान्य मात्रा में ज़हरीली नहीं है और पौधों को इसकी ज़रूरत है। यह जलवायु गर्म करती है और समुद्र को अधिक अम्लीय बनाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) अलग है: ऑक्सीजन कम होने पर ईंधन के अधूरे जलने से बनती है, गंधहीन और ज़हरीली है, क्योंकि यह ख़ून को ऑक्सीजन ले जाने से रोकती है। बंद कमरे में अँगीठी या जनरेटर कभी न चलाएँ।
कार्बन चक्र
कार्बन घूमता रहता है: पौधे प्रकाश-संश्लेषण में CO₂ लेते हैं → जंतु पौधे खाते हैं → श्वसन और सड़न से CO₂ लौटती है → समुद्र CO₂ घोलते हैं → कुछ कार्बन लाखों साल के लिए कोयला, तेल, गैस बनकर दब जाता है। जीवाश्म ईंधन जलाने से यह पुराना कार्बन इतनी तेज़ी से हवा में लौटता है कि पौधे और समुद्र उसे हटा नहीं पाते।
मीथेन: ईंधन भी, ग्रीनहाउस गैस भी
मीथेन (CH₄) प्राकृतिक गैस और बायोगैस का मुख्य भाग है। ईंधन की तरह जलने पर CO₂ और पानी बनते हैं (CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O)। बिना जले रिसने पर यह ताक़तवर ग्रीनहाउस गैस है। गोबर और कचरे से बायोगैस संयंत्र (भारत के गाँवों में आम) में मीथेन पकड़ने से खाना पकाने का ईंधन भी मिलता है और गैस हवा में नहीं जाती। डीकार्बनाइज़ेशन यानी कार्बन उत्सर्जन घटाना: नवीकरणीय ऊर्जा, दक्षता, इलेक्ट्रिक परिवहन, जंगल।
खुद करके देखिए: धूप में दो जार
दो काँच के जार में दो थर्मामीटर रखकर धूप में रखिए। एक जार को प्लास्टिक की पन्नी से ढक दीजिए। 30 मिनट तक हर 5 मिनट पर दोनों पढ़िए। ढका जार ज़्यादा गर्म होता है क्योंकि गर्म हवा निकल नहीं पाती। (असली वायुमंडल हवा नहीं, अवरक्त रोकता है, पर गर्मी का निकलना धीमा करने का विचार वही है।) फिर 3D में CO₂ को 840 ppm कीजिए और संतुलन तापमान बढ़ता देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊर्जा संतुलन: सोखी गई ऊर्जा = छोड़ी गई ऊर्जा
- सोखा गया सूर्य-प्रकाश = (1 − एल्बिडो) × आने वाला प्रकाश
- एल्बिडो = परावर्तित ÷ आने वाला
- मीथेन का दहन: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
- ग्रीनहाउस गैसों के बिना ≈ −18 °C; आज ≈ +15 °C (ग्रीनहाउस गर्मी ≈ 33 °C)
हल किए गए उदाहरण
1. 340 W/m² सूर्य-प्रकाश में से 102 W/m² परावर्तित होता है। एल्बिडो ज्ञात कीजिए।
एल्बिडो = 102 ÷ 340 = 0.30।
2. एल्बिडो 0.30 हो तो 340 W/m² में से कितना सोखा जाएगा?
सोखा गया = (1 − 0.30) × 340 = 0.70 × 340 = 238 W/m²।
3. समुद्री बर्फ़ (एल्बिडो 0.8) पिघलकर समुद्र (एल्बिडो 0.06) बन जाती है। 200 W/m² प्रकाश में कितना अधिक सोखा जाएगा?
बर्फ़: 0.2 × 200 = 40 W/m²। समुद्र: 0.94 × 200 = 188 W/m²। अतिरिक्त = 148 W/m², इसलिए पिघलना गर्मी को और तेज़ करता है।
4. O₂ ग्रीनहाउस गैस क्यों नहीं है, जबकि CO₂ है?
O₂ में दो एक जैसे परमाणु हैं, वह ऐसे मुड़-खिंच नहीं सकती कि अवरक्त सोखे। CO₂ में तीन परमाणु हैं, वह मुड़ सकती है, इसलिए अवरक्त सोखती है।
आम गलतियाँ
- ग्रीनहाउस प्रभाव को अपने आप में बुरा मानना। प्राकृतिक प्रभाव जीवन के लिए ज़रूरी गर्मी देता है; समस्या अतिरिक्त (बढ़ा हुआ) प्रभाव है।
- कहना कि ग्रीनहाउस गैसें सूर्य-प्रकाश रोकती हैं। वे दृश्य प्रकाश को आने देती हैं; बाहर जाने वाले अवरक्त को सोखती हैं।
- ओज़ोन छिद्र और ग्रीनहाउस प्रभाव को एक समझना। ओज़ोन घटने से ज़्यादा UV आता है; वह अलग समस्या है।
- CO और CO₂ को एक समझना। CO साँस में ज़हरीली है; CO₂ मुख्यतः गर्मी बढ़ाती है।