वायुमंडलीय दाब क्या है?
हवा भी पदार्थ है, इसलिए उसका द्रव्यमान और भार होता है। पृथ्वी के चारों ओर हवा की मोटी चादर को वायुमंडल कहते हैं। इसका भार नीचे की हर चीज़ पर पड़ता है।
दाब = बल ÷ क्षेत्रफल। किसी जगह का वायुमंडलीय दाब वह बल है जो ऊपर की हवा हर वर्ग मीटर पर लगाती है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 300 Pa (101.3 kPa) है। इसे 1 वायुमंडल (1 atm) कहते हैं।
हवा का दाब सभी दिशाओं में लगता है — नीचे, ऊपर और बगल में भी। हम पिचकते नहीं, क्योंकि हमारे शरीर के अंदर की हवा और द्रव भी उतने ही दाब से बाहर की ओर धकेलते हैं।
हवा धक्का देती है — इसके प्रमाण
- स्ट्रॉ: चूसने से स्ट्रॉ के अंदर दाब घटता है; बाहर की हवा पेय को ऊपर धकेलती है।
- गिलास पर कार्ड: गिलास पानी से भरें, कार्ड रखें, उलट दें। हवा कार्ड को ऊपर की ओर इतना धकेलती है कि पानी नहीं गिरता।
- डिब्बा पिचकना: खुले डिब्बे में थोड़ा पानी गरम करें, फिर उसे उल्टा ठंडे पानी में डालें। भाप फिर पानी बन जाती है, अंदर दाब घटता है और बाहर की हवा डिब्बे को पिचका देती है।
- सक्शन हुक: दबाने पर अंदर की हवा निकल जाती है; बाहर की हवा उसे दीवार से चिपकाए रखती है।
- मैगडेबर्ग गोलार्ध (1654): हवा निकाले गए दो धातु के आधे गोलों को घोड़ों की टीमें भी अलग नहीं कर पाईं।
दाब नापना: बैरोमीटर
1643 में इवांजेलिस्टा टॉरिसेली ने लगभग 1 m लंबी काँच की नली पारे से भरकर पारे की कटोरी में उलटी खड़ी की। पारा नीचे उतरा और लगभग 760 mm पर रुक गया; ऊपर निर्वात बचा। कटोरी पर हवा का धक्का ही इस स्तंभ को टिकाए रखता है।
द्रव स्तंभ का दाब: p = ρ g h। पारे के लिए: 13 600 × 9.8 × 0.76 ≈ 101 000 Pa। पानी (ρ = 1000 kg/m³) से यही करें तो स्तंभ लगभग 10.3 m ऊँचा चाहिए — इसीलिए पारा लिया जाता है।
निर्द्रव (एनेरॉइड) बैरोमीटर में कोई द्रव नहीं होता: एक पतली बंद धातु की डिबिया दाब बदलने पर दबती या फूलती है और सुई दाब दिखाती है। हवाई जहाज़ का ऊँचाईमापी (altimeter) भी ऐसा ही बैरोमीटर है जिस पर मीटर लिखे होते हैं।
ऊँचाई के साथ दाब घटता है
ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। हवा भी पतली (कम घनी) होती जाती है, इसलिए शुरू में दाब तेज़ी से घटता है और ऊपर धीरे। मोटे तौर पर हर 5.5 km पर दाब आधा हो जाता है।
| जगह | ऊँचाई | दाब |
|---|---|---|
| समुद्र तल | 0 km | ≈ 101 kPa |
| लेह, लद्दाख | 3.5 km | ≈ 66 kPa |
| एवरेस्ट की चोटी | 8.8 km | ≈ 33 kPa |
| हवाई जहाज़ की उड़ान | 11 km | ≈ 23 kPa |
असर: पहाड़ों पर पानी 100 °C से कम पर उबलता है (खाना देर से पकता है, प्रेशर कुकर मदद करता है), हर साँस में कम ऑक्सीजन मिलती है, लिफ़्ट और जहाज़ में कान "पॉप" होते हैं, और बंद पैकेट फूलते हैं।
द्रवस्थैतिक संतुलन
शांत हवा की एक पतली परत सोचिए — मोटाई Δz, क्षेत्रफल A। उस पर तीन बल लगते हैं:
- नीचे से ऊपर दाब का धक्का: p × A
- ऊपर से नीचे दाब का धक्का: (p + Δp) × A
- उसका भार: ρ g A Δz
अगर परत ऊपर-नीचे नहीं हिलती, तो ये संतुलित हैं, जिससे Δp / Δz = − ρ g मिलता है। ऊँचाई के साथ दाब हवा के घनत्व × g की दर से घटता है। इसे द्रवस्थैतिक संतुलन (hydrostatic balance) कहते हैं। ज़मीन के पास ρ ≈ 1.2 kg/m³, इसलिए हर मीटर ऊपर जाने पर दाब लगभग 12 Pa घटता है (लगभग 8 m पर 1 hPa)।
मौसम विज्ञान में इसका उपयोग होता है: ठंडी, घनी हवा के स्तंभ में ऊँचाई के साथ दाब गरम स्तंभ से ज़्यादा तेज़ी से घटता है।
वायुदाब और पवन
समुद्र तल पर भी हर जगह दाब ठीक बराबर नहीं होता। गरम हवा ऊपर उठती है और ज़मीन के पास निम्न दाब छोड़ती है; ठंडी हवा नीचे बैठती है और उच्च दाब बनाती है। हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है — यही पवन है। दूरी के साथ दाब का अंतर (दाब प्रवणता) जितना बड़ा, पवन उतनी तेज़।
बराबर दाब वाली जगहों को जोड़ने वाली रेखाएँ समदाब रेखाएँ (isobars) हैं। पास-पास रेखाएँ यानी तेज़ हवा। निम्न दाब अक्सर बादल और वर्षा लाता है; उच्च दाब साफ़, शांत मौसम। समुद्री समीर और मानसून कम दाब की ओर बहती हवा के बड़े उदाहरण हैं। मौसम में दाब अक्सर हेक्टोपास्कल में बताया जाता है: 1013 hPa = 101.3 kPa।
करके देखें: पहले अंदाज़ा, फिर जाँच
गिलास पर कार्ड। अंदाज़ा लगाइए: गिलास उलटने पर पानी गिरेगा? गिलास पूरा भरें, ऊपर पोस्टकार्ड रखें, हाथ से दबाकर सिंक के ऊपर उलटें और हाथ हटा लें। फिर "हवा हर दिशा में धक्का देती है" से समझाइए।
3D में: स्लाइडर 5.5 km पर ले जाने से पहले दाब का अंदाज़ा लगाइए। फिर जाँचिए — यह 101 kPa के लगभग आधे के पास होना चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दाब p = F / A (मात्रक: पास्कल, 1 Pa = 1 N/m²)
- द्रव स्तंभ: p = ρ g h
- 1 atm ≈ 101 300 Pa = 1013 hPa = 760 mm पारा
- द्रवस्थैतिक संतुलन: Δp / Δz = − ρ g
- पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है
हल किए गए उदाहरण
1. वायुमंडलीय दाब 101 000 Pa है। 1.5 m² क्षेत्रफल वाली मेज़ की सतह पर हवा कितना बल लगाती है?
F = p × A = 101 000 × 1.5 = 151 500 N। मेज़ नहीं टूटती क्योंकि नीचे से हवा लगभग उतना ही धक्का ऊपर देती है।
2. 101 000 Pa को संतुलित करने वाले पारे के स्तंभ की ऊँचाई ज्ञात करें। (ρ = 13 600 kg/m³, g = 9.8 m/s²)
h = p / (ρ g) = 101 000 / (13 600 × 9.8) = 101 000 / 133 280 ≈ 0.758 m ≈ 758 mm।
3. इसी दाब पर पानी का बैरोमीटर कितना ऊँचा होगा? (ρ = 1000 kg/m³)
h = 101 000 / (1000 × 9.8) ≈ 10.3 m। प्रयोगशाला के लिए बहुत ऊँचा, इसलिए पारा लेते हैं।
4. ज़मीन के पास हवा का घनत्व 1.2 kg/m³ है। 50 m ऊँची इमारत पर चढ़ने पर दाब कितना घटेगा?
Δp = ρ g Δz = 1.2 × 9.8 × 50 ≈ 588 Pa। छत पर दाब लगभग 0.6 kPa कम होगा।
5. एक दिन बैरोमीटर 740 mm पारा और कुछ दिन बाद 770 mm दिखाता है। किस दिन वर्षा की संभावना ज़्यादा थी?
740 mm वाले दिन: कम दाब का संबंध उठती हवा, बादल और वर्षा से है। 770 mm वाला दिन शायद साफ़ था।
6. जगह A पर 1020 hPa और 100 km दूर B पर 1004 hPa है। हवा किस ओर बहेगी, और दाब प्रवणता क्या है?
A (उच्च) से B (निम्न) की ओर। प्रवणता = 16 hPa प्रति 100 km = 0.16 hPa/km।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि हवा का भार नहीं होता। हवा हल्की है, पर 1 m² का हवा-स्तंभ लगभग 10 टन का है।
- कहना कि स्ट्रॉ पेय को "खींचती" है। आप बस अंदर का दाब घटाते हैं; बाहर की हवा पेय को ऊपर धकेलती है।
- सोचना कि दाब सिर्फ़ नीचे की ओर लगता है। किसी बिंदु पर हवा का दाब हर दिशा में बराबर लगता है।
- सोचना कि हर किलोमीटर पर दाब बराबर घटता है। ज़मीन के पास तेज़ी से घटता है और ऊपर धीरे, क्योंकि हवा पतली होती जाती है।