South 고등학교 3학년 Earth Science II
अध्याय: 7
1. Earth's formation and fields
Formation of Earth · Internal energy · Interior from seismic waves · Standard gravity · Geomagnetism
- पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास: धूल के बादल से जीवित ग्रह तक – पुराने विचारकों ने कहा कि ग्रह युवा सूर्य के चारों ओर घूमते गैस के बादल से बने (निहारिका परिकल्पना) या पास से गुज़रते तारे ने सूर्य से पदार्थ खींचा। आज वैज्ञानिक ब्रह्मांड को बिग बैंग से समझाते हैं: लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले सब कुछ एक छोटे बिंदु से शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है। गैस के गुच्छों से तारे बने; सूर्य के चारों ओर की धूल से ग्रह बने। लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी पृथ्वी गरम और पिघली थी; भारी लोहा डूबकर क्रोड बना और हल्की चट्टान से भूपर्पटी बनी। ज्वालामुखियों की गैसों से शुरुआती हवा बनी, जलवाष्प बरसकर महासागर बनी, और लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले महासागरों में जीवन शुरू हुआ।
- पृथ्वी की आंतरिक संरचना: भूकंपीय तरंगें, परतें और ज्वालामुखी – कोई पृथ्वी के केंद्र तक खोद नहीं सकता, इसलिए हम अंदर की जानकारी प्रत्यक्ष स्रोतों (खानों की चट्टान, गहरी खुदाई, लावा) और अप्रत्यक्ष स्रोतों (गहराई के साथ ताप और दबाव, उल्कापिंड, गुरुत्व, चुंबकत्व और सबसे बढ़कर भूकंपीय तरंगें) से लेते हैं। P-तरंगें ठोस और तरल दोनों से गुज़रती हैं; S-तरंगें सिर्फ़ ठोस से। जहाँ तरंगें नहीं पहुँचतीं, वहाँ छाया क्षेत्र बनता है, जो बताता है कि बाहरी क्रोड तरल है। भूकंप परिमाण (रिक्टर) और तीव्रता (मरकैली) से मापा जाता है। पृथ्वी में पतली भूपर्पटी, नरम दुर्बलतामंडल वाला मोटा मैंटल, तरल बाहरी क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड है। सतह तक पहुँचा मैग्मा ज्वालामुखी बनाता है; अंदर ठंडा हुआ मैग्मा बैथोलिथ, सिल, डाइक जैसी अंतर्वेधी आकृतियाँ बनाता है।
- गुरुत्व – गुरुत्व वह खिंचाव है जो हर द्रव्यमान दूसरे द्रव्यमान पर लगाता है। पृथ्वी हर वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है। मुक्त रूप से गिरती वस्तु की गति हर सेकंड लगभग 9.8 मी/से बढ़ती है (g), और यह उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं। भार = द्रव्यमान × g, इसलिए भार हर ग्रह पर बदलता है, द्रव्यमान नहीं। बगल से बहुत तेज़ फेंकी गेंद पृथ्वी का चक्कर लगाती है (लगभग 7.9 km/s) और 11.2 km/s पर बाहर निकल जाती है।
- पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र (भू-चुम्बकत्व) – पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र एक तिरछे छड़ चुम्बक जैसा है। इसे बाहरी कोर का बहता तरल लोहा बनाता है (डायनमो)। चुम्बकीय और भौगोलिक उत्तर के बीच का कोण विचलन है; क्षेत्र और ज़मीन के बीच का कोण नमन है (विषुवत पर 0°, चुम्बकीय ध्रुवों पर 90°)। यह क्षेत्र चुम्बकमंडल की ढाल बनाकर सौर पवन को मोड़ता है। कुछ कण ध्रुवों पर उतरकर ओरोरा बनाते हैं।
2. Earth materials and resources
Silicate minerals · Polarising microscope · Forming mineral deposits · Minerals in daily life · Ocean resources
- सिलिकेट खनिज: एक छोटी ईंट से बनी पृथ्वी की पपड़ी – सिलिकेट खनिज सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बने खनिज हैं। इनकी मूल ईंट SiO₄ चतुष्फलक है: बीच में 1 सिलिकॉन और चारों ओर 4 ऑक्सीजन। ये ईंटें अकेली रह सकती हैं या ऑक्सीजन साझा करके चेन, परत या 3D ढाँचा बना सकती हैं। जुड़ने का तरीका खनिज का आकार, विदलन (क्लीवेज) और कठोरता तय करता है। पृथ्वी की पपड़ी का 90% से ज़्यादा हिस्सा सिलिकेट है।
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
- प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) – प्राकृतिक संसाधन वे उपयोगी चीज़ें हैं जो हम प्रकृति से लेते हैं: धूप, पवन, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, तेल, गैस और कोयला। नवीकरणीय संसाधन इंसान के जीवनकाल में फिर बन जाते हैं; अनवीकरणीय बनने में करोड़ों साल लगे और उपयोग से ख़त्म होते हैं। संसाधन असमान रूप से बँटे हैं क्योंकि वे वहीं बने जहाँ अतीत में ख़ास भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ हुईं (पुराने समुद्र, ज्वालामुखी, पर्वत बनना)। इनके उपयोग से ऊर्जा, रोज़गार और सामग्री जैसे लाभ हैं, पर प्रदूषण, आवास का नुकसान और ख़तरे जैसी लागत भी, इसलिए समाज दोनों को तौलकर सतत उपयोग की कोशिश करता है।
3. Geology of the Korean Peninsula
Reading geological maps · Geological history from data · Structural features · Precambrian basement
- भूवैज्ञानिक मानचित्र: ऊपर से चट्टानें पढ़ना – भूवैज्ञानिक मानचित्र रंगों और चिह्नों से बताता है कि ज़मीन की सतह पर कौन-सी चट्टान है। परतें एक के ऊपर एक जमती हैं, इसलिए नीचे की परत आमतौर पर पुरानी होती है (अध्यारोपण का नियम)। झुकी परत को नति-लंब (strike, परत पर समतल रेखा की दिशा) और नति (dip, झुकाव का कोण और दिशा) से बताते हैं। भ्रंश (fault) वह दरार है जहाँ चट्टान खिसकी है। अनुप्रस्थ काट ज़मीन को केक की तरह काटकर अंदर दिखाता है, और स्तरिक स्तंभ परतों को उम्र के क्रम में दिखाता है।
- भूवैज्ञानिक संरचनाएँ: वलन, भ्रंश और संधि – चट्टानों की परतें शुरू में समतल होती हैं। भूपर्पटी के बल उन्हें दबाते, खींचते या फिसलाते हैं। दबाव से परतें मुड़कर वलन बनाती हैं: मेहराब अपनति और गर्त अभिनति है। तेज़ बल से चट्टान टूटकर भ्रंश बनती है: खिंचाव से सामान्य भ्रंश (ऊपरी खंड नीचे), दबाव से उत्क्रमित भ्रंश (ऊपरी खंड ऊपर), और आड़ा फिसलन से नतिलंब भ्रंश। किसी क्षेत्र के वलन और भ्रंश अक्सर एक ही दिशा में होते हैं, जिसे संरचनात्मक प्रवृत्ति कहते हैं।
4. Ocean motion and circulation
Hydrostatic pressure · Geostrophic currents · Ocean waves · Storm surges and tsunamis · Tides
- जल (महासागर): जलीय चक्र, महासागरीय तल, तापमान और लवणता – धरती का पानी महासागर, हवा, स्थल और जीवों के बीच लगातार घूमता है — यह जलीय चक्र है; लगभग 97% पानी महासागरों में है। महासागरीय तल के मुख्य भाग हैं — महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त (खाइयाँ) — और छोटे रूप जैसे मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला, निमग्न द्वीप (गुयॉट), अंतःसागरीय कैनियन, एटॉल और बैंक। सतह का पानी विषुवत के पास सबसे गरम और ध्रुवों की ओर ठंडा होता है; गहराई में ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) में तेज़ी से ठंडा होता है और नीचे 0–4 °C के पास रहता है। लवणता समुद्री पानी में नमक है, लगभग 35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35‰)। वाष्पीकरण से बढ़ती और बारिश, नदियों व पिघलती बर्फ़ से घटती है, इसलिए उपोष्ण क्षेत्रों और बंद गरम समुद्रों में ज़्यादा और विषुवत, ध्रुवों व नदी मुहानों के पास कम है।
- महासागर: समुद्र तल, चलता पानी और जीवन – महासागर पृथ्वी का लगभग 71% भाग ढकते हैं। उनके तल पर उथला महाद्वीपीय शेल्फ़, खड़ी ढलान, गहरा मैदान, पानी के नीचे कटक और बहुत गहरी खाइयाँ हैं। पानी तीन तरह चलता है: लहरें (हवा से), ज्वार-भाटा (चंद्रमा के खिंचाव से) और धाराएँ (समुद्र की नदियाँ, गरम और ठंडी)। महासागर मछली, नमक, तेल-गैस और व्यापार मार्ग देते हैं और करोड़ों लोगों की रोज़ी हैं। चक्रवात और सुनामी समुद्री आपदाएँ हैं; पहले की चेतावनी जान बचाती है। अंतरराष्ट्रीय नियम (UNCLOS) तय करते हैं कि देश के समुद्री अधिकार कहाँ तक हैं: 12 समुद्री मील प्रादेशिक सागर और 200 मील का अनन्य आर्थिक क्षेत्र।
- एकमान परिवहन और भूविक्षेपी धाराएँ – पवन समुद्र की सतह को खींचती है और पृथ्वी का घूमना हर जल-परत को (उत्तर में) दाएँ मोड़ता है। सबको जोड़ने पर पानी पवन से 90 डिग्री दाएँ चलता है: एकमान परिवहन। इससे समुद्री बेसिन के बीच पानी की एक नीची पहाड़ी बनती है। उस पहाड़ी के चारों ओर बहता पानी भूविक्षेपी धारा है, जो बड़े महासागरीय गायरों का इंजन है।
- महासागरीय जल संचलन: तरंगें, ज्वार-भाटा और धाराएँ – महासागर का पानी तीन तरह से चलता है। तरंगें (लहरें) ज़्यादातर पवन से बनती हैं: ऊर्जा आगे जाती है जबकि पानी का हर कण छोटे वृत्त में घूमता है; उथले पानी में लहरें धीमी होकर टूटती हैं। ज्वार-भाटा समुद्र का नियमित चढ़ना-उतरना है, आमतौर पर दिन में दो बार, जो चंद्रमा (और सूर्य) के खिंचाव और पृथ्वी-चंद्रमा के घूमने से होता है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में हों (अमावस्या, पूर्णिमा) तो बहुत ऊँचे दीर्घ ज्वार; समकोण पर हों (अष्टमी) तो कमज़ोर लघु ज्वार। महासागरीय धाराएँ तय दिशा में बहती पानी की विशाल नदियाँ हैं, जिन्हें पवनें, गर्मी, गुरुत्व, लवणता और घनत्व का अंतर चलाते हैं और कोरिऑलिस बल मोड़ता है। गरम धाराएँ विषुवत से ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ ध्रुवों से विषुवत की ओर बहती हैं। धाराएँ तटों की जलवायु, मछली, कोहरा और जहाज़रानी बदलती हैं।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
5. Atmospheric motion
Adiabatic processes · Stability · Hydrostatic balance · Geostrophic and gradient winds · Westerly waves · Scales of motion
- वायुमंडलीय स्थिरता और रुद्धोष्म प्रक्रियाएँ – जब हवा का एक पार्सल ऊपर उठता है, आसपास का दाब घटता है, तो वह फैलता है और बिना ऊष्मा लिए या दिए ठंडा होता है: रुद्धोष्म (adiabatic) शीतलन। सूखी (असंतृप्त) हवा हर km पर 10 °C ठंडी होती है (शुष्क रुद्धोष्म ह्रास दर)। ओसांक पर पहुँचकर वाष्प संघनित होकर बादल बनाती है और गुप्त ऊष्मा छोड़ती है, इसलिए अब यह सिर्फ़ लगभग 4 से 7 °C प्रति km ठंडी होती है (आर्द्र/संतृप्त रुद्धोष्म ह्रास दर, लगभग 6)। आसपास की हवा की अपनी पर्यावरणीय ह्रास दर होती है (औसत 6.5 °C प्रति km)। उठता पार्सल आसपास से ठंडा हो जाए तो भारी होकर रुक जाता है: स्थिर हवा, चपटे बादल, कोहरा, स्मॉग। गर्म रहे तो उठता रहता है: अस्थिर हवा, ऊँचे कपासी बादल और आँधी-तूफ़ान। दोनों दरों के बीच हवा सशर्त अस्थिर होती है। प्रतिलोमन (ऊपर हवा गर्म) बहुत स्थिर होता है।
- वायुमंडलीय दाब – हवा का भी भार होता है। किसी सतह के ऊपर खड़ा हवा का पूरा स्तंभ उस पर दबाव डालता है; हर वर्ग मीटर पर यह धक्का ही वायुमंडलीय दाब है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 kPa है — 760 mm पारे के स्तंभ या लगभग 10 m पानी के बराबर। ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। शांत हवा में किसी परत का भार नीचे से ऊपर लगने वाले दाब से संतुलित रहता है (द्रवस्थैतिक संतुलन)। हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर बहती है — यही पवन है।
- भूविक्षेपी और प्रवणता पवन – दाब प्रवणता बल हवा को उच्च दाब से निम्न दाब की ओर धकेलता है। चलते ही पृथ्वी का घूमना (कोरिऑलिस बल) उसे मोड़ने लगता है। ज़मीन से ऊपर दोनों बल बराबर हो जाते हैं और हवा समदाब रेखाओं के साथ बहती है: यह भूविक्षेपी पवन है। मुड़ी रेखाओं पर यही प्रवणता पवन कहलाती है।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
6. Planetary motion
Horizon coordinates · Apparent motion of planets · Geocentric vs heliocentric · Synodic period · Kepler's laws
- खगोलीय निर्देशांक: आकाश में कोई भी तारा ढूँढना – खगोलशास्त्री आकाश को दर्शक के चारों ओर एक बड़े खगोलीय गोले की तरह मानते हैं। क्षितिज पद्धति में तारे की जगह उन्नतांश (क्षितिज से ऊपर का कोण) और दिगंश (उत्तर से पूर्व की ओर कोण) से बताते हैं; पृथ्वी घूमने से ये बदलते रहते हैं। विषुवत पद्धति में क्रांति (खगोलीय विषुवत से कोण, अक्षांश जैसा) और विषुवांश (♈ बिंदु से पूर्व की ओर घंटों में, देशांतर जैसा) लगभग स्थिर रहते हैं, इसलिए तारा मानचित्र इन्हें उपयोग करते हैं। खगोलीय ध्रुव का उन्नतांश = दर्शक का अक्षांश। चमक कांतिमान से बताते हैं: छोटी संख्या = ज़्यादा चमकीला।
- सौरमंडल – सौरमंडल = सूर्य और वह सब कुछ जिसे उसका गुरुत्व थामे रखता है: 8 ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और धूल। भीतरी चार ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) छोटे और चट्टानी हैं। क्षुद्रग्रह पट्टी के बाद विशाल ग्रह: गैस दानव बृहस्पति और शनि, हिम दानव यूरेनस और नेपच्यून। गुरुत्व ग्रहों को सूर्य की ओर खींचता है जबकि वे बगल में चलते हैं, इसलिए वे कक्षा में घूमते हैं; पास वाले तेज़ चलते हैं और उनका वर्ष छोटा होता है। यह सब लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमते बादल से बना।
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
7. Our galaxy and cosmic structure
Cluster colour-magnitude diagrams · Clusters and nebulae · Interstellar extinction · 21 cm hydrogen line · Rotation curve · Galaxy groups and clusters · Large-scale structure
- तारा-गुच्छ: खुला, गोलाकार और आयु कैसे पता चलती है – तारा-गुच्छ तारों का ऐसा समूह है जो एक ही गैस के बादल से साथ-साथ जन्मा हो, इसलिए सबकी उम्र एक जैसी और बनावट लगभग एक जैसी होती है। खुला गुच्छ ढीला, युवा और नीला होता है; गोलाकार गुच्छ घना, पुराना और लालिमा लिए होता है। हर तारे की चमक को उसके रंग के सामने रखें तो मुख्य अनुक्रम का वक्र बनता है। जहाँ यह वक्र मुड़ता है (टर्न-ऑफ़), वहीं से गुच्छ की आयु पता चलती है: टर्न-ऑफ़ जितना नीचे, गुच्छ उतना पुराना।
- अंतरतारकीय माध्यम: तारों के बीच की गैस, धूल और अणु – अंतरतारकीय माध्यम (ISM) वह बहुत हल्की गैस और धूल है जो तारों के बीच की जगह में फैली है। इसका लगभग 99% भाग गैस (ज़्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम) और लगभग 1% सूक्ष्म ठोस धूल-कण हैं। ठंडे, घने बादलों में परमाणु जुड़कर H₂ और CO जैसे अणु बनाते हैं। धूल तारे की रोशनी को सोखती और बिखेरती है, नीली को लाल से ज़्यादा, इसलिए धूल के पीछे का तारा फीका (विलोपन) और ज़्यादा लाल (रक्तिमा) दिखता है।
- आकाशगंगा (मिल्की वे): हमारा घर – आकाशगंगा (मिल्की वे) एक छड़दार सर्पिल मंदाकिनी है जिसमें लगभग 100–400 अरब तारे हैं और यह लगभग 1,00,000 प्रकाश-वर्ष चौड़ी है। इसमें सर्पिल भुजाओं वाली पतली चकती, बीच में उभार और छड़, और चारों ओर पुराने गोलाकार तारागुच्छों वाला धुँधला प्रभामंडल है। सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश-वर्ष दूर ओरायन भुजा में है और लगभग 230 km/s से घूमकर करीब 23 करोड़ वर्ष में एक चक्कर लगाता है। धूल के कारण भुजाओं का नक्शा हाइड्रोजन की 21 cm रेडियो तरंगों से बनाते हैं। केंद्र में लगभग 40 लाख सौर द्रव्यमान का ब्लैक होल Sgr A* है। सपाट घूर्णन वक्र बताता है कि दिखने से कहीं ज़्यादा द्रव्यमान है: डार्क मैटर।
- डार्क मैटर: आकाशगंगाओं को बाँधे रखने वाला अदृश्य द्रव्यमान – आकाशगंगा के केंद्र से दूर के तारे लगभग उतनी ही तेज़ी से घूमते हैं जितनी तेज़ी से पास के तारे। अगर केवल दिखने वाला पदार्थ खींचता, तो दूर के तारे धीमे होने चाहिए थे। यह समतल घूर्णन वक्र बताता है कि अतिरिक्त, अदृश्य द्रव्यमान है: डार्क मैटर (श्याम पदार्थ)। वह न चमकता है, न रोशनी रोकता है, पर उसका गुरुत्व असली है। ब्रह्मांड का आज का सबसे अच्छा चित्र है: लगभग 5% साधारण पदार्थ, 27% डार्क मैटर और 68% डार्क एनर्जी, जो फैलाव को तेज़ करती है।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।