प्राकृतिक संकट क्या है?
प्राकृतिक संकट वह प्राकृतिक घटना है जो नुकसान कर सकती है। ख़ाली रेगिस्तान में भूकंप भी संकट है, पर किसी को चोट नहीं लगती। आपदा तब होती है जब संकट ऐसी जगह आता है जहाँ लोग तैयार नहीं और अपने बल पर संभल नहीं पाते।
संकट इसलिए आते हैं क्योंकि धरती हमेशा सक्रिय है: प्लेटें खिसकती हैं, पानी घूमता है, सूरज हवा को असमान गर्म करता है।
भूगर्भीय संकट
भूकंप
प्लेटें एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं। तनाव बढ़ता है, फिर चट्टान टूटकर खिसकती है और तरंगें ज़मीन को हिलाती हैं। अंदर जहाँ शुरू होता है वह उद्गम केंद्र (focus) है। उसके ठीक ऊपर सतह पर अधिकेंद्र (epicentre) है। ताक़त को परिमाण (magnitude) कहते हैं। हर 1 बढ़ने पर ऊर्जा लगभग 32 गुना।
ज्वालामुखी
मैग्मा कमज़ोर जगहों से, ज़्यादातर प्लेटों के किनारों पर, ऊपर आता है। लावा, राख और गैस निकलती है।
भूस्खलन और मलबा-प्रवाह
खड़ी ढलानों पर मिट्टी और चट्टान नीचे खिसकती है, अक्सर भारी बारिश या भूकंप के बाद। मलबा-प्रवाह कीचड़ और पत्थर की तेज़ बहती धारा है।
सुनामी
समुद्र के नीचे भूकंप तल को उठा देता है। इससे लंबी तेज़ लहर बनती है जो तट के पास बहुत ऊँची हो जाती है।
मौसमी संकट
उष्णकटिबंधीय चक्रवात (कहीं हरिकेन या टाइफ़ून) लगभग 26 °C से गर्म समुद्र पर बनते हैं। ये तेज़ हवा, भारी बारिश और तूफ़ानी लहर (storm surge) लाते हैं।
बाढ़ भारी बारिश, बर्फ़ पिघलने या तूफ़ानी लहर से आती है। सूखा लंबे समय तक बारिश न होना है। लू, शीत लहर, ओले, बवंडर भी मौसमी संकट हैं। बदलती जलवायु कुछ संकटों को बढ़ा रही है।
असर: एक ही संकट कहीं ज़्यादा नुकसान क्यों करता है?
नुकसान तीन बातों पर निर्भर है: संकट कितना बड़ा है, कितने लोग रास्ते में हैं (अनावरण), और वे कितने कमज़ोर हैं (सुभेद्यता): कच्चे मकान, चेतावनी न होना, ग़रीबी, भीड़ वाली ढलानें।
जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता। असर प्राथमिक (मकान गिरना, चोट) या द्वितीयक (बीमारी, आग, रोज़गार और भोजन की कमी) होते हैं।
आपदा की तैयारी और न्यूनीकरण
भूकंप या चक्रवात को रोक नहीं सकते, पर उसे आपदा बनने से रोक सकते हैं। चक्र है: तैयारी → चेतावनी → राहत-बचाव → पुनर्निर्माण।
- निगरानी और चेतावनी: भूकंपमापी, मौसम उपग्रह, रडार, ज्वार-मापी और समुद्री बॉय फ़ोन और सायरन तक सूचना भेजते हैं।
- मज़बूत निर्माण: भूकंपरोधी ढाँचे, बाढ़ क्षेत्र में ऊँचे मकान, चक्रवात आश्रय।
- भूमि उपयोग योजना: कमज़ोर ढलान और नदी तल पर निर्माण नहीं; मैंग्रोव और जंगल प्राकृतिक ढाल हैं।
- लोग: मॉक ड्रिल, प्राथमिक चिकित्सा, आपात किट, परिवार की योजना।
- राहत: बचाव दल, राहत शिविर, फिर पहले से मज़बूत पुनर्निर्माण।
घर पर करके देखो: परिवार की आपात किट की सूची बनाओ (पानी, टॉर्च, दवा-पट्टी, ज़रूरी काग़ज़ों की कॉपी, चार्जर) और मिलने की एक सुरक्षित जगह तय करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संकट (hazard): प्राकृतिक घटना जो नुकसान कर सकती है
- आपदा (disaster): संकट जो ऐसे लोगों पर पड़े जो संभल न पाएँ
- जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता
- अधिकेंद्र: उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर सतह का बिंदु
- परिमाण: भूकंप की ऊर्जा का माप (हर +1 ≈ 32 गुना ऊर्जा)
हल किए गए उदाहरण
1. परिमाण 6 का भूकंप ख़ाली रेगिस्तान में, और उतना ही भूकंप कमज़ोर मकानों वाले भीड़ भरे शहर में। आपदा कौन-सी है?
दोनों संकट बराबर हैं। आपदा सिर्फ़ शहर वाली है, क्योंकि वहाँ बहुत लोग हैं और मकान कमज़ोर हैं। रेगिस्तान में किसी को नुकसान नहीं।
2. इन्हें भूगर्भीय या मौसमी में बाँटो: भूस्खलन, चक्रवात, सुनामी, सूखा, ज्वालामुखी, बाढ़।
भूगर्भीय: भूस्खलन, सुनामी, ज्वालामुखी। मौसमी: चक्रवात, सूखा, बाढ़।
3. एक तटीय गाँव में बार-बार तूफ़ानी लहर आती है। जोखिम घटाने के तीन उपाय बताओ।
1) चक्रवात चेतावनी से जोड़ो: सायरन और फ़ोन संदेश। 2) ऊँचा चक्रवात आश्रय बनाओ और मैंग्रोव लगाओ। 3) लोगों को ड्रिल से प्रशिक्षित करो और आपात किट रखो।
आम गलतियाँ
- संकट और आपदा को एक समझना। संकट तभी आपदा बनता है जब लोग नुकसान झेलें और संभल न पाएँ।
- अधिकेंद्र को ज़मीन के अंदर मानना। अंदर उद्गम केंद्र है; अधिकेंद्र सतह पर है।
- परिमाण 8 को परिमाण 4 का दोगुना समझना। हर एक कदम पर ऊर्जा लगभग 32 गुना बढ़ती है।
- यह सोचना कि कुछ नहीं हो सकता। संकट रुकते नहीं, पर चेतावनी, मज़बूत मकान और योजना से जानें बचती हैं।