China 八年级(初二) Geography
अध्याय: 12
1. Ch.1 China from a world view
Territory overview and administrative divisions (34 provincial units) · Population · Ethnic groups
- क्षेत्र और प्रशासनिक विभाजन: देश कहाँ है और कैसे बँटा है – देश की स्थिति बताने के लिए उसके गोलार्ध और उसके पड़ोसी देखे जाते हैं: भूमि पड़ोसी और समुद्री पड़ोसी। बड़े देश को चलाने के लिए सरकार उसे प्रांतों या राज्यों जैसी छोटी इकाइयों में बाँटती है और हर इकाई को और छोटे हिस्सों में। चीन में 34 प्रांतीय स्तर की इकाइयाँ हैं और भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- जातीय समूह: एक देश में कई समुदाय – जातीय समूह उन लोगों का समुदाय है जिनका इतिहास, भाषा, रीति-रिवाज या त्योहार साझे होते हैं। ज़्यादातर देशों में एक से अधिक समूह होते हैं। आमतौर पर एक समूह बहुत बड़ा और बाक़ी छोटे होते हैं। वे अक्सर मिल-जुलकर रहते हैं और कुछ छोटे समूह किसी ख़ास इलाके में इकट्ठे बसते हैं। समानता और सम्मान उन्हें जोड़कर रखते हैं।
2. Ch.2 Natural environment
Landforms and terrain · Climate and its influences · Rivers and lakes (Yangtze, Yellow River) · Interdisciplinary: silt-flushing principle
- किसी देश का उच्चावच: पर्वत, पठार, मैदान और डेल्टा – उच्चावच का मतलब है ज़मीन की ऊँचाई-निचाई। किसी देश का उच्चावच अक्सर पट्टियों में सजा होता है: ऊँचे पर्वत, फिर पहाड़ियाँ और पठार, फिर निचले मैदान, और अंत में नदी का डेल्टा या समुद्र। पट्टियाँ ऊँचाई, चट्टान और बनने के ढंग से जुड़ी हैं। रोमानिया साफ़ उदाहरण है: कार्पेथियन चाप, उसके अंदर ट्रांसिल्वेनिया बेसिन, चारों ओर पहाड़ियाँ और पठार, दक्षिण में रोमानियाई मैदान और काला सागर के पास डेन्यूब डेल्टा।
- विश्व के जलवायु प्रदेश – किसी जगह के लगभग 30 साल के मौसम का औसत उसकी जलवायु है। यह मुख्य रूप से अक्षांश (सूरज कितना ऊँचा चढ़ता है), ऊँचाई (हर 1 km पर लगभग 6.5 °C ठंडा), समुद्र से दूरी, पवनों और महासागरीय धाराओं पर निर्भर करती है। कोपेन ने दुनिया को पाँच समूहों में बाँटा: A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C शीतोष्ण, D महाद्वीपीय और E ध्रुवीय, साथ में ऊँचे पहाड़ों पर पर्वतीय (H) जलवायु। मानसून जलवायु में पवनें मौसम के साथ दिशा बदलती हैं।
- नदी: उद्गम से समुद्र तक – नदी मीठा पानी है जो एक नाली (चैनल) में ऊँची ज़मीन (उद्गम) से समुद्र, झील या बड़ी नदी (मुहाना) तक बहता है। रास्ते में वह चट्टान को काटती (अपरदन), ढोती (परिवहन) और जमा करती (निक्षेपण) है। ऊपरी भाग तेज़ ढलान वाला है: V घाटी और जलप्रपात। मध्य भाग में विसर्प (मोड़) बनते हैं। निचला भाग समतल है: बाढ़ का मैदान, तटबंध और डेल्टा। तेज़ बारिश से बाढ़ आती है; उसे कठोर (बाँध, तटबंध) और नरम (पेड़, ज़ोनिंग) उपायों से संभालते हैं।
- गाद बहाने का सिद्धांत: तेज़ पानी गाद क्यों बहा ले जाता है – गाद नदी के पानी में मिट्टी के बहुत छोटे कण हैं। धीमा पानी इन्हें नदी के तल पर गिरा देता है। तेज़ पानी इन्हें उठाकर आगे ले जाता है। उतना ही पानी संकरी धारा में आए तो उसकी गति बढ़ जाती है और तल साफ़ हो जाता है।
3. Ch.3 Natural resources
Land resources · Water resources · Mineral resources · Marine resources · Interdisciplinary: world irrigation heritage
- भूमि उपयोग: समुदाय कैसे तय करते हैं कि कौन-सी ज़मीन किस काम की – भूमि उपयोग यानी इंसान ज़मीन से क्या काम लेता है: घर, दुकानें, कारख़ाने, स्कूल, सड़कें, पार्क, खेत और जंगल। प्राकृतिक पर्यावरण (नदी, ढलान, मिट्टी, जलवायु) पहली सीमा तय करता है। फिर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारक — ज़मीन की क़ीमत, नौकरी, परिवहन, ज़ोनिंग नियम — नक़्शा बनाते हैं, अक्सर शहर-केंद्र के चारों ओर छल्लों में। शहर बढ़ते हुए बाहर फैल सकते हैं या ऊपर की ओर सघन बन सकते हैं। भूमि उपयोग बदलने से पारितंत्र बदलता है, इसलिए योजना और संरक्षण ज़रूरी हैं।
- जल संसाधन और जलमंडल – पृथ्वी का लगभग सारा पानी खारा समुद्री पानी है। सिर्फ़ करीब 1% ही आसानी से इस्तेमाल होने वाला मीठा पानी है: भूजल, नदियाँ और झीलें। लोग अक्सर प्रकृति के भरने से तेज़ पानी निकालते हैं: भूजल गिरता है, नदियाँ सूखती हैं। टिकाऊ प्रबंधन का मतलब है पुनर्भरण से ज़्यादा न निकालना, पानी बराबर बाँटना और साफ़ रखना। समुद्र तापमान और नमक के अंतर से तापलवणीय परिसंचरण द्वारा गर्मी को धरती भर में घुमाता है। गंदा पानी छलनी, जमाव, फ़िल्टर और कीटाणुनाशन से साफ़ होता है। नए स्रोत हैं विलवणीकरण, पुनः उपयोग और वर्षा जल संग्रह; बचत माँग घटाती है।
- भारत के खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (कक्षा 12) – खनिज निश्चित बनावट वाला प्राकृतिक पदार्थ है। भारत के ज़्यादातर खनिज पुरानी पठारी चट्टानों में तीन पेटियों में हैं: उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण-पश्चिमी पठार और उत्तर-पश्चिमी पेटी। लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट और ताँबा धात्विक हैं; अभ्रक अधात्विक है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा हैं जो ख़त्म हो जाएँगी। परमाणु, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा गैर-परंपरागत और साफ़ हैं। खनिज अनवीकरणीय हैं, इसलिए कम उपयोग, पुनर्चक्रण और विकल्प ज़रूरी हैं।
- खनिज संसाधन – खनिज धरती के अंदर बना प्राकृतिक ठोस पदार्थ है, जो अक्सर चट्टान में मिला मिलता है। काम के खनिज खनिज संसाधन कहलाते हैं। मुख्य समूह हैं: धातु (लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम), ईंधन (कोयला, तेल, गैस) और निर्माण या अन्य खनिज (रेत, चूना-पत्थर, नमक)। इन्हें खुली खदान या शाफ्ट खनन से निकालते हैं, फिर अयस्क को कूटकर और गलाकर धातु बनाते हैं। खनिज बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए इन्हें समझदारी से इस्तेमाल करें: कम करें, दोबारा काम में लें और रीसायकल करें।
- महासागर: समुद्र तल, चलता पानी और जीवन – महासागर पृथ्वी का लगभग 71% भाग ढकते हैं। उनके तल पर उथला महाद्वीपीय शेल्फ़, खड़ी ढलान, गहरा मैदान, पानी के नीचे कटक और बहुत गहरी खाइयाँ हैं। पानी तीन तरह चलता है: लहरें (हवा से), ज्वार-भाटा (चंद्रमा के खिंचाव से) और धाराएँ (समुद्र की नदियाँ, गरम और ठंडी)। महासागर मछली, नमक, तेल-गैस और व्यापार मार्ग देते हैं और करोड़ों लोगों की रोज़ी हैं। चक्रवात और सुनामी समुद्री आपदाएँ हैं; पहले की चेतावनी जान बचाती है। अंतरराष्ट्रीय नियम (UNCLOS) तय करते हैं कि देश के समुद्री अधिकार कहाँ तक हैं: 12 समुद्री मील प्रादेशिक सागर और 200 मील का अनन्य आर्थिक क्षेत्र।
- विश्व सिंचाई विरासत – सिंचाई का मतलब है नहरों, नालियों या सुरंगों से फ़सलों तक पानी पहुँचाना। कुछ प्राचीन व्यवस्थाएँ दो हज़ार साल से ज़्यादा बाद भी चल रही हैं। दुजियांगयान में मछली-मुँह जैसा टापू नदी को बाँटता है, संकरी गर्दन से सीमित पानी नहर में आता है, बाढ़ का अतिरिक्त पानी स्पिलवे से लौट जाता है और मोड़ रेत को बाहर फेंक देता है, इसलिए ऊँचे बाँध की ज़रूरत नहीं पड़ती। अन्य विरासत व्यवस्थाओं में सूखे इलाकों की करेज सुरंगें, दक्षिण एशिया के नदी-बैराज और गाँव के तालाब, और दक्षिण-पूर्व एशिया की सीढ़ीदार खेतों में पानी बाँटने की रीति शामिल हैं।
4. Ch.4 Economic development
Agriculture · Industry · Transport (highways, high-speed rail)
- कृषि की मूल बातें: खेती कैसे शुरू हुई, बदली और दुनिया का पेट भरती है – कृषि का अर्थ है जानबूझकर फ़सल उगाना और पशु पालना। यह लगभग 10,000–12,000 साल पहले कई अलग-अलग उद्गम-केंद्रों में शुरू हुई, जहाँ लोगों ने जंगली पौधों और जानवरों का पालतूकरण किया; फिर यह प्रसार से फैली। दूसरी कृषि क्रांति (लगभग 1700–1900) बेहतर औज़ार, फ़सल-चक्र और मशीनें लाई, तो कम किसान ज़्यादा लोगों का पेट भरने लगे। हरित क्रांति (1960 के दशक से) ने अधिक उपज वाले बीज, सिंचाई और उर्वरक अपनाए। खेती निर्वाह या वाणिज्यिक, सघन या विस्तृत हो सकती है। फ़ॉन थ्यूनेन मॉडल बताता है कि बाज़ार के चारों ओर भूमि-उपयोग छल्ले क्यों बनाता है। आज कृषि एक वैश्विक तंत्र है जिसके सामने टिकाऊपन, जलवायु, ज़मीन, खाद्य सुरक्षा और महिलाओं की बराबर भूमिका की चुनौतियाँ हैं।
- विनिर्माण उद्योग – विनिर्माण कच्चे माल को ज़्यादा क़ीमती चीज़ों में बदलता है। यह रोज़गार देता है, खेती पर निर्भरता घटाता है और निर्यात से पैसा कमाता है। उद्योगों को कच्चे माल, भूमिका, पूँजी, स्वामित्व और भार के आधार पर बाँटा जाता है। उनकी जगह कच्चे माल, बिजली, श्रम, पूँजी, परिवहन और बाज़ार पर निर्भर है। उद्योग हवा, पानी, ज़मीन को प्रदूषित करते और शोर करते हैं, पर इसे रोका जा सकता है।
- राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ – परिवहन, संचार और व्यापार उत्पादकों को उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं और देश को एक करते हैं, जैसे शरीर में नसें। भारत में सड़कें, रेल, पाइपलाइन, जलमार्ग, पत्तन और वायुमार्ग हैं। संचार संदेश पहुँचाता है; व्यापार देश के अंदर और देशों के बीच सामान का लेन-देन है। पर्यटन भी एक व्यापार है जो पैसा और रोज़गार देता है।
5. Ch.5 Building a beautiful China
Natural hazards and disaster reduction · Environmental protection and development
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
- पर्यावरणीय समस्याएँ: कारण, प्रभाव और समाधान – पर्यावरणीय समस्याएँ हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों में होने वाले हानिकारक बदलाव हैं, जो ज़्यादातर इंसानों के कामों से होते हैं। मुख्य समस्याएँ हैं: वायु, जल और भूमि प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल। ये लोगों की संख्या और हर व्यक्ति की खपत (पारिस्थितिक पदचिह्न) के साथ बढ़ती हैं। साफ़ ऊर्जा, बचत, रीसाइक्लिंग, गंदे पानी की सफ़ाई, जंगलों की रक्षा और अच्छे कानूनों से हम इन्हें घटा सकते हैं।
6. Ch.6 Geographic differences
Four major regions; Qinling–Huaihe line · Interdisciplinary: 24 solar terms
- प्रादेशिक भूगोल: हम दुनिया को प्रदेशों में कैसे बाँटते हैं – प्रदेश (region) वह क्षेत्र है जिसमें एक या अधिक लक्षण साझा हों, जो उसे आसपास के क्षेत्रों से अलग बनाएँ। औपचारिक (एकरूप) प्रदेश अंदर से एक जैसे होते हैं, जैसे कोई मैदान या धान पट्टी। क्रियात्मक (नोडल) प्रदेश किसी केंद्र से जुड़ाव से बनते हैं, जैसे शहर और वहाँ आने-जाने वाले गाँव। बोधगम्य प्रदेश लोगों के मन में होते हैं। प्रदेशों के किनारे आम तौर पर संक्रमण क्षेत्र होते हैं, और प्रदेश लोगों, सामान, पानी और विचारों के प्रवाह से एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
- 24 सौर पर्व (24 Solar Terms) – 24 सौर पर्व प्राचीन चीन में किसानों के लिए बना कैलेंडर है। किसान सूरज और डंडे की दोपहर की छाया देखते थे। उन्होंने साल को लगभग 15-15 दिन के 24 हिस्सों में बाँटा। हर हिस्से का नाम बताता है कि मौसम और खेत में क्या हो रहा है। चार हिस्से ऋतुएँ शुरू करते हैं, दो अयनांत हैं और दो विषुव। यह कैलेंडर सूरज के हिसाब से चलता है, इसलिए तारीखें हर साल लगभग वही रहती हैं।
7. Ch.7 Northern region
Natural features and agriculture · Northeast provinces · Loess Plateau · Beijing, the capital
- प्राकृतिक विशेषताएँ और कृषि – किसान क्या उगा सकता है, यह चार प्राकृतिक बातों पर निर्भर है: उच्चावच (ज़मीन की बनावट), तापमान, पानी और मिट्टी। ठंडे, कम नम मैदान शुष्क खेती (गेहूँ, मक्का) के लिए ठीक हैं; गर्म, नम निचले इलाके धान के लिए; शुष्क इलाकों में खेती केवल मरूद्यान और नहरों के पास होती है और बाकी जगह चरागाह है; ठंडे ऊँचे पठारों पर मज़बूत फ़सलें, सीढ़ीदार खेत और याक या भेड़ पालन होता है।
- पूर्वोत्तर चीन: काली मिट्टी, अनाज और भारी उद्योग – पूर्वोत्तर चीन (लियाओनिंग, जिलिन और हेइलोंगच्यांग) में सर्दी लंबी और ठंडी तथा गर्मी छोटी और गरम होती है। इसके समतल मैदानों में ह्यूमस से भरी गहरी काली मिट्टी है, इसलिए यह मक्का, चावल और सोयाबीन का बड़ा अनाज भंडार है। खिंगान और छांगबाई की पहाड़ियों पर घने जंगल हैं। कोयला, लोहा और तेल से इस्पात, मशीनें और गाड़ियों जैसे भारी उद्योग बने। आज यह क्षेत्र पुराने कारखाने नए कर रहा है और काली मिट्टी को बचा रहा है।
- लोएस पठार (Loess Plateau) – उत्तरी चीन का लोएस पठार लोएस की बहुत मोटी परत से ढका है: महीन, पीली, हवा की लाई धूल। बारिश इस ढीली मिट्टी को खाइयों में काट देती है और बीच में समतल टेबललैंड, लंबी कटकें और गोल पहाड़ियाँ बचती हैं। गर्मी की भारी बारिश और कम पौधों से मृदा अपरदन (कटाव) बहुत होता है और कीचड़ पीली नदी को पीला कर देता है। घास-पेड़ लगाने, सीढ़ीदार खेत और रोक-बाँध बनाने तथा नरमी से खेती करने से कटाव घटा है और ज़मीन हरी हुई है।
- बीजिंग, चीन की राजधानी – बीजिंग चीन की राजधानी है। यह उत्तर चीन के मैदान के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर है, उत्तर और पश्चिम में पहाड़ और दक्षिण-पूर्व में समुद्र। राजधानी के चार काम होते हैं: शासन, संस्कृति, दूसरे देशों से संपर्क, और नए विचार व विज्ञान। बीजिंग एक सीधी केंद्रीय धुरी पर बसाया गया और यहाँ बहुत सी पुरानी इमारतें हैं। बढ़ते हुए इसने भीड़ से निपटने के लिए रिंग रोड, मेट्रो और उप-केंद्र बनाए।
8. Ch.8 Southern region
Natural features and agriculture · Yangtze River Delta · Hong Kong and Macao SARs · Taiwan Province (physical geography, economy) · Interdisciplinary: origins of place names
- प्राकृतिक विशेषताएँ और कृषि – किसान क्या उगा सकता है, यह चार प्राकृतिक बातों पर निर्भर है: उच्चावच (ज़मीन की बनावट), तापमान, पानी और मिट्टी। ठंडे, कम नम मैदान शुष्क खेती (गेहूँ, मक्का) के लिए ठीक हैं; गर्म, नम निचले इलाके धान के लिए; शुष्क इलाकों में खेती केवल मरूद्यान और नहरों के पास होती है और बाकी जगह चरागाह है; ठंडे ऊँचे पठारों पर मज़बूत फ़सलें, सीढ़ीदार खेत और याक या भेड़ पालन होता है।
- यांग्त्ज़े नदी डेल्टा – यांग्त्ज़े नदी डेल्टा वह समतल ज़मीन है जहाँ चीन की सबसे लंबी नदी पूर्वी चीन सागर में मिलती है। नदी की लाई गाद ने यह ज़मीन बनाई। इसमें नहरें हैं, पुराने जल-नगर, चावल और मछली। नदी के मुहाने पर शंघाई, एक विशाल बंदरगाह और वित्त नगर है, और पास में सूज़ौ, नानजिंग, हांगज़ौ और निंगबो जैसे शहर हैं। तेज़ रेल और सड़कें उन्हें शहर-समूह में जोड़ती हैं, जो चीन के सबसे धनी क्षेत्रों में है।
- हांगकांग और मकाओ: दो विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (SAR) – हांगकांग और मकाओ चीन के दक्षिणी तट पर एक बड़ी नदी के मुहाने पर दो छोटे तटीय स्थान हैं। दोनों को विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (SAR) कहते हैं। हांगकांग पहाड़ी है, गहरा बंदरगाह है और वह मुख्यतः वित्त, व्यापार और जहाज़रानी से कमाता है। मकाओ बहुत छोटा और घना बसा है और मुख्यतः पर्यटन और होटलों से कमाता है। पुल, रेल, पानी की पाइपें और व्यापार दोनों को मुख्य भूमि से जोड़ते हैं।
- ताइवान: द्वीप की भू-आकृति, जलवायु, उत्पाद और अर्थव्यवस्था – ताइवान पश्चिमी प्रशांत में एक लंबा द्वीप है, लगभग 36,000 वर्ग km, मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्वी तट के पार ताइवान जलडमरूमध्य (130 से 180 km चौड़ा) में। उत्तर से दक्षिण एक पर्वत-श्रृंखला है और यूशान (3,952 m) सबसे ऊँची चोटी है। मैदान पश्चिम में हैं, पूर्वी तट खड़ा है। कर्क रेखा इसे पार करती है, इसलिए यह गर्म और नम है, टाइफून आते हैं। यहाँ चावल, चाय और फल उगते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कंप्यूटर चिप के लिए प्रसिद्ध है। व्यापार और यात्रा इसे मुख्य भूमि से जोड़ते हैं।
- स्थानों के नामों की उत्पत्ति: नाम कैसे शुरू होते और कैसे बदलते हैं – हर स्थान का नाम इतिहास का एक छोटा टुकड़ा है। कई नाम ज़मीन का वर्णन करते हैं (पहाड़ी, नदी, झील), कुछ दिशा बताते हैं (नदी के उत्तर में), कुछ लोगों या घटनाओं का सम्मान करते हैं और कुछ बताते हैं कि वहाँ क्या प्रसिद्ध था (चाय का बाज़ार)। नाम तब भी बदलते हैं जब शासक बदलें, स्थानीय भाषा लौटे, नई वर्तनी-प्रणाली आए या नगर मिलें। नाम का अध्ययन करने के लिए मानचित्र, पुराने अभिलेख, भाषा और बुज़ुर्गों की स्मृति का उपयोग करो।
9. Ch.9 Northwest region
Natural features and agriculture · Tarim Basin
- प्राकृतिक विशेषताएँ और कृषि – किसान क्या उगा सकता है, यह चार प्राकृतिक बातों पर निर्भर है: उच्चावच (ज़मीन की बनावट), तापमान, पानी और मिट्टी। ठंडे, कम नम मैदान शुष्क खेती (गेहूँ, मक्का) के लिए ठीक हैं; गर्म, नम निचले इलाके धान के लिए; शुष्क इलाकों में खेती केवल मरूद्यान और नहरों के पास होती है और बाकी जगह चरागाह है; ठंडे ऊँचे पठारों पर मज़बूत फ़सलें, सीढ़ीदार खेत और याक या भेड़ पालन होता है।
- तारिम बेसिन: मरुस्थल और मरूद्यान, तेल-गैस और पारिस्थितिकी संरक्षण – तारिम बेसिन उत्तर-पश्चिम चीन का विशाल आंतरिक कटोरा है, 5,00,000 वर्ग km से अधिक, जिसके चारों ओर तियानशान, कुनलुन और पामीर पर्वत हैं। बीच में तकलामकान है, चलती रेत का मरुस्थल जहाँ साल भर में 100 mm से कम वर्षा होती है। पर्वतों की बर्फ़ से बनी नदियाँ तलहटी में हरे मरूद्यान बनाती हैं जहाँ कपास और फल उगते हैं। रेत के नीचे तेल और गैस है, जो पाइपलाइन से पूर्व जाती है। नदी का बहुत पानी लेने से निचली तारिम नदी सूख जाती है, इसलिए पानी की बचत, रक्षक वृक्ष-पट्टियाँ और सावधान बँटवारा भूमि की रक्षा करते हैं।
10. Ch.10 Qinghai–Tibet region
Natural features and agriculture · Sanjiangyuan (source of three rivers)
- प्राकृतिक विशेषताएँ और कृषि – किसान क्या उगा सकता है, यह चार प्राकृतिक बातों पर निर्भर है: उच्चावच (ज़मीन की बनावट), तापमान, पानी और मिट्टी। ठंडे, कम नम मैदान शुष्क खेती (गेहूँ, मक्का) के लिए ठीक हैं; गर्म, नम निचले इलाके धान के लिए; शुष्क इलाकों में खेती केवल मरूद्यान और नहरों के पास होती है और बाकी जगह चरागाह है; ठंडे ऊँचे पठारों पर मज़बूत फ़सलें, सीढ़ीदार खेत और याक या भेड़ पालन होता है।
- सानच्यांगयुआन: पीली नदी, यांग्त्सी और लानछांग का उद्गम क्षेत्र – सानच्यांगयुआन का अर्थ है "तीन नदियों का उद्गम"। यह ऊँचे छिंगहाई-तिब्बत पठार पर है, ज़्यादातर 4,000 m से ऊपर। बर्फ़ीली चोटियाँ, हिमनद, झीलें और गीले घास-मैदान स्पंज की तरह काम करते हैं और पीली नदी, यांग्त्सी और लानछांग (नीचे मेकांग) को जन्म देते हैं। पीली नदी का लगभग आधा पानी और यांग्त्सी का चौथाई यहीं से शुरू होता है, इसलिए इसे "जल-स्तंभ" कहते हैं। बहुत अधिक चरते पशु और गरमाती जलवायु घास और आर्द्रभूमि घटाते हैं, इसलिए अब राष्ट्रीय उद्यान और सावधान चराई इसकी रक्षा करते हैं।
11. Ch.11 China making progress
Regional development overview
- क्षेत्रीय विकास – क्षेत्रीय विकास का अर्थ है देश के अलग-अलग स्थानों की अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर को सुधारना। निवेश, रोज़गार और लोग कुछ बड़े केंद्रों में जमा हो जाते हैं, जबकि छोटे कस्बे अपने युवा और सेवाएँ खो देते हैं। इससे केंद्र में भीड़, ऊँचा किराया और टकराव होता है और बाकी जगह गिरावट। नए विकास केंद्र, बेहतर सड़कें और स्थानीय रोज़गार जैसी नीतियाँ संतुलित विकास का प्रयास करती हैं।
12. Geographic tools and fieldwork
Globe and maps (latitude, longitude, contour maps, digital maps, satellite navigation) · Experiments, surveys, fieldwork · Home region study
- मानचित्र कौशल: नक्शे पढ़ना और इस्तेमाल करना – मानचित्र (map) किसी जगह का ठीक ऊपर से देखा गया, छोटा किया गया चपटा चित्र है। इसे पढ़ने के लिए चाहिए: संकेत-सूची (चिह्न), मापनी (दूरी नापने के लिए), दिशा (दिशा-बिंदु और दिकमान), ग्रिड संदर्भ (जगह ढूँढने और बताने के लिए) और समोच्च रेखाएँ (ऊँचाई और ढलान देखने के लिए)। आज GPS उपग्रहों से हमारी जगह बताता है, और GIS कंप्यूटर पर आँकड़ों की कई परतें जोड़कर जगहों के बारे में सवालों के जवाब देता है।
- भौगोलिक जाँच और क्षेत्र कार्य – भौगोलिक जाँच (enquiry) किसी असली जगह के बारे में एक छोटा शोध प्रोजेक्ट है। इसके साफ़ कदम हैं: सवाल पूछो और परिकल्पना लिखो; सही नमूना विधि से प्राथमिक आँकड़े (अपने माप और सर्वे) और द्वितीयक आँकड़े (जनगणना, नक्शे, वेबसाइट) जुटाओ; आँकड़ों को सही ग्राफ़ और नक्शों में दिखाओ; ढाँचा समझो और निष्कर्ष निकालो; फिर जाँचो कि नतीजे कितने भरोसेमंद हैं। यही कौशल फ़ैसले लेने में काम आते हैं: सबूतों से विकल्प तौलो और सबसे अच्छे को कारण सहित चुनो। बड़ी कक्षाओं में छात्र अपने सवाल, प्राथमिक-द्वितीयक आँकड़ों, विश्लेषण और निष्कर्ष के साथ एक लंबी स्वतंत्र जाँच लिखते हैं।
- स्थानीय भूगोल: अपने इलाक़े का अध्ययन – स्थानीय भूगोल उस जगह का अध्ययन है जहाँ आप रहते हैं: आपका कस्बा, ज़िला या गृह-क्षेत्र। पूरा विवरण छह सवालों के जवाब देता है: यह कहाँ है (स्थिति), प्रकृति इसे क्या देती है (उच्चावच, जलवायु, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, संरक्षित क्षेत्र), यहाँ कौन और कैसे रहता है (जनसंख्या और बस्तियाँ), लोग कैसे कमाते हैं (अर्थव्यवस्था, रोज़गार, सेवाएँ), पर्यावरण कैसा है और उसकी निगरानी कैसे होती है, और समय के साथ यह सब कैसे बदला। भूगोलवेत्ता ये जवाब क्षेत्र-अध्ययन से ढूँढते हैं: सवाल पूछो, देखकर, नापकर और बातचीत करके आँकड़े जुटाओ, उन्हें नक्शे-चित्र और ग्राफ़ में दिखाओ, और ताक़त, समस्याएँ और सुझाव लिखो।