गाद क्या है?
गाद बहुत बारीक मिट्टी और रेत के कण हैं। बारिश इन्हें पहाड़ियों और खेतों से बहा लाती है। नदियाँ इन्हें उठाकर ले जाती हैं। नदी के साथ बहने वाली इस सामग्री को अवसाद (सेडिमेंट) कहते हैं।
कुछ नदियों में बहुत गाद होती है। चीन की ह्वांग हो (पीली नदी) इसका प्रसिद्ध उदाहरण है, क्योंकि वह नरम और भुरभुरी मिट्टी के इलाके से बहती है। भारत की गंगा और ब्रह्मपुत्र में भी बहुत गाद आती है।
तेज़ पानी ले जाता है, धीमा पानी गिराता है
नदी तभी गाद ले जा सकती है जब वह काफ़ी तेज़ बहे। सोचिए, भीड़ रेत के कण को धक्का दे रही है। ज़ोर का धक्का उसे चलाता रहता है। कमज़ोर धक्के में वह गिर जाता है।
- तेज़ पानी: तल से गाद उठाकर आगे ले जाता है। इसे अपरदन और परिवहन कहते हैं।
- धीमा पानी: गाद को पकड़ नहीं पाता, वह बैठ जाती है। इसे निक्षेपण (जमाव) कहते हैं।
गाद जमती रहे तो नदी का तल ऊँचा हो जाता है। ऊँचे तल से बाढ़ का ख़तरा बढ़ता है।
गाद बहाने का विचार
पानी की गति इस पर निर्भर है कि कितना पानी बह रहा है और उसे कितनी जगह मिली है। उतने ही पानी के लिए:
संकरी धारा → तेज़ पानी → ज़्यादा गाद बहती है
बहुत पहले पीली नदी पर इंजीनियरों ने यह तरीक़ा अपनाया। उन्होंने मज़बूत तटबंध बनाकर नदी को संकरे रास्ते में रखा। तेज़ बहाव ने तल को खुरचा और गाद को समुद्र तक पहुँचा दिया। चीनी भाषा में इसे "शू शुई गोंग शा" कहते हैं, यानी "पानी को समेटकर रेत पर वार करो"।
सीमा: धारा बहुत संकरी हो तो पानी बहुत ऊँचा चढ़कर तटबंध तोड़ सकता है। सही चौड़ाई संतुलन से तय होती है।
करके देखिए: ट्रे का प्रयोग
चाहिए: एक ट्रे या प्लास्टिक का डिब्बा, रेत या महीन मिट्टी, पानी की बोतल और दो छोटे ब्लॉक।
- ट्रे में रेत की परत बिछाइए। ट्रे को थोड़ा झुकाइए।
- ब्लॉक दूर रखकर (चौड़ा रास्ता) ऊपर से धीरे पानी डालिए। देखिए: पानी धीमा है, रेत टिकी रहती है या जमा होती है।
- अब ब्लॉक पास लाकर संकरा रास्ता बनाइए और उतना ही पानी डालिए। देखिए: पानी तेज़ हो जाता है और रेत खुरच देता है।
पानी डालने से पहले अनुमान लगाइए: रेत कहाँ बहेगी?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पानी की गति ≈ प्रति सेकंड पानी की मात्रा ÷ धारा के मुँह का क्षेत्रफल
- उतना ही पानी + संकरी धारा = तेज़ बहाव
- तेज़ बहाव: अपरदन और परिवहन। धीमा बहाव: निक्षेपण
हल किए गए उदाहरण
1. एक नदी 6 मीटर चौड़ी धारा में प्रति सेकंड 12 इकाई पानी ले जाती है। हमारे सरल मॉडल (गति = बहाव ÷ चौड़ाई) में गति कितनी है?
गति = 12 ÷ 6 = 2 मी./से.। यह गाद उठाने की गति 3 मी./से. से कम है, इसलिए गाद बैठती है।
2. वही नदी 3 मीटर चौड़ी कर दी गई। नई गति क्या है? गाद बैठेगी या बहेगी?
गति = 12 ÷ 3 = 4 मी./से.। यह 3 मी./से. से ज़्यादा है, इसलिए पानी गाद उठाकर बहा ले जाएगा। तल साफ़ होगा।
3. इंजीनियर को 12 बहाव में कम से कम 3 मी./से. गति चाहिए। सबसे चौड़ी धारा कितनी हो सकती है?
चौड़ाई = बहाव ÷ गति = 12 ÷ 3 = 4 मीटर। इससे चौड़ी धारा बहुत धीमी होगी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि तेज़ पानी हमेशा नई गाद लाता है। तेज़ पानी अपनी गाद ले जाता है और तल से और भी उठाता है।
- यह सोचना कि संकरी धारा में पानी कम होता है। पानी की मात्रा वही रहती है, बस गति बढ़ती है।
- यह सोचना कि जितनी संकरी उतनी अच्छी। बहुत संकरी धारा से पानी तटबंध पार कर सकता है।
- अपरदन (उठाकर ले जाना) और निक्षेपण (गिराना) को आपस में मिला देना।