तीन नदियों का उद्गम
यह कहाँ है?
- सानच्यांगयुआन दक्षिणी छिंगहाई प्रांत में, छिंगहाई-तिब्बत पठार के उत्तर-पूर्वी भाग में है। ज़मीन ज़्यादातर समुद्र तल से 4,000 m से ऊँची है।
- क्षेत्रफल लगभग 3,60,000 वर्ग km है (जर्मनी से अधिक)।
यह एक साथ ठंडा और हरा-गीला क्यों है?
- हर 1,000 m ऊपर चढ़ने पर तापमान लगभग 6.5 °C घटता है। 4,000 m पर समुद्र तल से लगभग 26 °C ठंडा होता है, इसलिए बर्फ़ और हिमनद टिके रहते हैं और बर्फ़ धीरे-धीरे पिघलकर धाराएँ बनाती है।
- ठंडी हवा में वाष्पीकरण कम होता है, इसलिए झीलें और गीले घास-मैदान (आर्द्रभूमि) पानी को लंबे समय तक रोकते हैं।
तीन नदियाँ
- पीली नदी (लगभग 5,460 km): ऊपरी धाराएँ झीलों और दलदलों में जमा होती हैं; इसका लगभग आधा पानी यहीं से शुरू होता है।
- यांग्त्सी (लगभग 6,300 km, एशिया की सबसे लंबी): हिमनदों की छोटी धाराओं से शुरू; इसका लगभग चौथाई पानी यहीं से शुरू।
- लानछांग (चीन से निकलकर मेकांग कहलाती है): चीन में इसके लगभग 15 % पानी का आरंभ यहीं। यह छह देशों से गुज़रती है।
बहुत लोग इसके पानी पर निर्भर हैं, इसलिए इस क्षेत्र को एशिया का "जल-स्तंभ" (या "चीन की पानी की टंकी") कहते हैं।
प्रकृति
- घास-मैदान और आर्द्रभूमि जंगली याक, तिब्बती हिरण, जंगली गधे, हिम तेंदुए और कई पक्षियों का घर हैं।
पारिस्थितिकी संरक्षण
समस्याएँ
- अतिचारण: बहुत सारी भेड़, बकरी और याक घास को उगने से तेज़ खा जाते हैं।
- गरमाती जलवायु: हिमनद सिकुड़ते हैं, स्थायी हिमाच्छादित भूमि (पर्माफ्रॉस्ट) पिघलती है, कुछ जगह झीलें और आर्द्रभूमि सूखती हैं।
- घास-मैदान का क्षरण: हरा मैदान नंगे "काली-मिट्टी के धब्बों" और रेत में बदलता है; हवा-पानी मिट्टी बहा ले जाते हैं; पानी कम जमा होता है, इसलिए नदियाँ कम ले जा पाती हैं।
संरक्षण के कदम
- सानच्यांगयुआन राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया (2016 से प्रायोगिक, 2021 में औपचारिक) ताकि भूमि एक संरक्षित क्षेत्र की तरह प्रबंधित हो।
- कम पशु और चराई में विश्राम: चरवाहे चराई की सीमा मानते हैं और कुछ बारी-बारी से चराते हैं जबकि घास लौटती है।
- चरवाहे रक्षक बनते हैं: कई परिवारों को गश्त, कचरा चुनने और वन्यजीव की रखवाली के लिए भुगतान मिलता है।
- घास और आर्द्रभूमि की बहाली: नंगे धब्बों में बीज बोना, घेराबंदी और छोटे नालों को रोकना।
- बेहतर विज्ञान: उपग्रह और मौसम-केंद्र हिमनद, झील और घास को ट्रैक करते हैं।
याद रखने का नियम: स्रोत की रक्षा नीचे के हर नगर की रक्षा है।
स्रोत की रक्षा नीचे के लिए क्यों ज़रूरी है
- पीली नदी, यांग्त्सी और मेकांग के किनारे के खेत, शहर, बिजलीघर और मछली-पालन उसी पानी का उपयोग करते हैं जो यहाँ से शुरू हुआ।
- स्वस्थ स्रोत सूखे महीनों में स्थिर पानी देता है; क्षतिग्रस्त स्रोत का अर्थ है वर्षा-ऋतु में अधिक बाढ़ और सूखे में कम पानी।
- मेकांग अंतर्राष्ट्रीय नदी है, इसलिए स्रोत-क्षेत्र दूसरे देशों के लिए भी मायने रखता है।
करके देखो: स्पंज और खाली थाली
- सपाट थाली पर पानी डालो: वह तुरंत बह जाता है (नंगी ज़मीन)।
- उतना ही पानी थाली पर रखे गीले स्पंज पर डालो: वह रुकता है और धीरे-धीरे निकलता है (घास-मैदान और आर्द्रभूमि)।
- स्पंज को थोड़ा-थोड़ा दबाओ। यह सूखे मौसम में बहती नदी जैसा है।
- अब स्पंज का आधा भाग फाड़ दो। "नदी" कैसे बदली? यही घास-मैदान की हानि है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उद्गम: वह स्थान जहाँ नदी शुरू होती है
- पठार: ऊँची समतल-शीर्ष भूमि (छिंगहाई-तिब्बत, 4,000 m से अधिक)
- हर 1,000 m ऊँचाई पर तापमान लगभग 6.5 °C घटता है
- आर्द्रभूमि: पानी से भीगी भूमि जो पानी जमा करके धीरे-धीरे छोड़ती है
- यहाँ से हिस्सा: पीली नदी लगभग 49 %, यांग्त्सी लगभग 25 %, लानछांग लगभग 15 %
- अतिचारण: घास की क्षमता से अधिक पशु
- पर्माफ्रॉस्ट: ज़मीन जो वर्षों तक जमी रहती है
हल किए गए उदाहरण
1. समुद्र तल पर हवा 20 °C है। 4,000 m पर तापमान क्या होगा (6.5 °C प्रति 1,000 m लो)?
गिरावट = 4 × 6.5 = 26 °C। तापमान = 20 - 26 = -6 °C। इसीलिए पठार पर बर्फ़ टिकती है।
2. सूखे महीनों में आर्द्रभूमि नदी की मदद कैसे करती है?
आर्द्रभूमि स्पंज की तरह वर्षा और पिघली बर्फ़ सोखती है और धीरे-धीरे छोड़ती है, इसलिए कम वर्षा में भी नदी बहती रहती है।
3. एक घास-मैदान 100 याक का पेट भर सकता है पर वहाँ 150 चरते हैं। अतिभार कितने प्रतिशत है और घास का क्या होता है?
(150 - 100) ÷ 100 × 100 = 50 %। घास उगने से तेज़ खाई जाती है, जड़ें कमज़ोर होती हैं, नंगे धब्बे बनते हैं और मिट्टी बह जाती है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि तीनों नदियाँ एक ही ओर बहती हैं। वे अलग दिशाओं में जाती हैं और लानछांग विदेश में मेकांग बन जाती है।
- पठार को गर्म, नीचा मैदान समझना। यह ठंडा और ऊँचा है, ज़्यादातर 4,000 m से अधिक।
- यह सोचना कि क्षतिग्रस्त स्रोत केवल वहाँ रहने वालों को प्रभावित करता है। यह नीचे सबको प्रभावित करता है।
- यह मानना कि संरक्षण का अर्थ है वहाँ कोई इंसान नहीं। चरवाहे रह सकते हैं, कम चरा सकते हैं और रक्षक बन सकते हैं।