उद्गम से मुहाने तक नदी
नदी ऊँची ज़मीन से नीची ज़मीन की ओर एक रास्ते (वाहिका) में बहता मीठा पानी है।
- उद्गम: जहाँ नदी शुरू होती है: पहाड़ में कोई झरना, पिघलता हिमनद, झील या दलदल।
- मार्ग: नदी का रास्ता। पहाड़ में नदी तेज़ बहती है और गहरी घाटियाँ काटती है। मैदान में धीमी और चौड़ी होकर घुमावदार मोड़ (विसर्प) बनाती है।
- मुहाना: जहाँ नदी ख़त्म होती है, समुद्र, झील या बड़ी नदी में। कुछ नदियाँ मुहाने पर कई शाखाओं वाला मिट्टी का डेल्टा बनाती हैं; कुछ का मुहाना कीप जैसा चौड़ा होता है, जिसे ज्वारनदमुख (estuary) कहते हैं।
बहाव की दिशा में मुँह करके खड़े हो तो बाईं ओर बायाँ किनारा और दाईं ओर दायाँ किनारा है।
नदी तंत्र, बेसिन और जल विभाजक
जो नदी किसी बड़ी नदी में मिल जाए, वह सहायक नदी है। मुख्य नदी और उसकी सारी सहायक नदियाँ मिलकर नदी तंत्र बनाती हैं।
जितनी ज़मीन का पानी आख़िर में एक नदी में पहुँचता है, वह पूरा क्षेत्र उसका नदी बेसिन (अपवाह क्षेत्र या जलग्रहण क्षेत्र) है। दो बेसिनों को अलग करने वाली ऊँची ज़मीन जल विभाजक है। उसके एक ओर गिरी बारिश एक नदी में जाती है, दूसरी ओर की दूसरी नदी में।
नदी का प्रवाह-क्रम
साल भर में नदी का पानी कैसे घटता-बढ़ता है, इसे उसका प्रवाह-क्रम (regime) कहते हैं। बर्फ़ और हिमनद से भरने वाली नदियाँ वसंत और शुरुआती गर्मी में ऊँची होती हैं। मानसून की बारिश वाली नदियाँ बरसात में भर जाती हैं। बहुत ज़्यादा पानी से बाढ़ आती है; बहुत कम पानी नावों, मछलियों और खेतों के लिए नुकसानदेह है।
नदियाँ क्यों ज़रूरी हैं
नदियाँ पीने का पानी, खेती और कारख़ानों के लिए पानी, जलविद्युत, आने-जाने का रास्ता और मछलियों-पक्षियों का घर देती हैं। नदी घाटियाँ और आर्द्रभूमियाँ जीवों से भरी होती हैं, इसलिए कई संरक्षित हैं।
झीलें और वे कैसे बनती हैं
झील ज़मीन के गड्ढे में ठहरा पानी है। गड्ढा कैसे बना, उससे झील का नाम पड़ता है:
- हिमनद झील: बर्फ़ की चादरों और हिमनदों ने गड्ढे खुरचे, या चट्टानों की मेड़ छोड़ी जिसने पानी रोका। उत्तरी यूरोप और ऊँचे पहाड़ों में आम।
- भ्रंश (विवर्तनिक) झील: पृथ्वी की पपड़ी फटी और एक हिस्सा नीचे धँस गया। अक्सर लंबी, पतली और बहुत गहरी, जैसे बैकाल झील।
- ज्वालामुखी (क्रेटर) झील: पुराने ज्वालामुखी के मुँह में पानी भर गया।
- गोखुर झील: नदी का एक मोड़ नदी से कट गया। U आकार की।
- लैगून (तटीय झील): रेत की पट्टी ने समुद्र का हिस्सा अलग कर दिया, जैसे भारत की चिल्का झील।
- कार्स्ट झील: बारिश ने चूना पत्थर घोलकर गड्ढे बना दिए।
- जलाशय: बाँध के पीछे इंसानों की बनाई झील।
झीलें पानी जमा करती हैं, बाढ़ को शांत करती हैं, मछली और घूमने की जगह देती हैं। छोटी उथली झीलें धीरे-धीरे मिट्टी और पौधों से भरकर दलदल बन सकती हैं।
भूजल
बारिश का कुछ पानी ज़मीन में रिस जाता है। वह मिट्टी के कणों के बीच और दरार वाली चट्टान के छोटे छेदों को भर देता है। यह भूजल है। जो चट्टान बहुत पानी रखती और आगे जाने देती है (रेत, बजरी), उसे जलभृत (aquifer) कहते हैं।
भीगी परत की ऊपरी सतह भौम जलस्तर (water table) है। बारिश के बाद यह ऊपर आता है और सूखे में या बहुत ज़्यादा कुएँ-ट्यूबवेल चलाने पर नीचे चला जाता है।
जहाँ भौम जलस्तर ज़मीन की सतह से मिलता है, वहाँ पानी झरने (स्रोत) के रूप में निकलता है। झरने नदियों को पानी देते हैं, इसलिए हफ़्तों बारिश न हो तब भी नदी बहती रहती है। कुछ भूजल गरम या खनिजों से भरा होता है (गरम और खनिज झरने)।
बंद समुद्र और प्रदूषण
बाल्टिक सागर और काला सागर जैसे कुछ समुद्र लगभग बंद हैं: वे महासागर से सिर्फ़ एक पतले जलडमरूमध्य से जुड़े हैं। उनमें कई बड़ी नदियाँ गिरती हैं, इसलिए ऊपर का पानी कम खारा (खारा-मीठा मिश्रित, brackish) होता है। पानी बहुत धीरे बदलता है, तो नदियाँ जो कुछ लाती हैं, वह लंबे समय तक वहीं रहता है।
ऐसे समुद्र ख़राब क्यों होते हैं
- खाद और गंदा पानी (सीवेज) नाइट्रोजन और फ़ॉस्फ़ोरस लाते हैं। शैवाल तेज़ी से बढ़ते हैं (शैवाल प्रस्फुटन)। मरकर सड़ने पर बैक्टीरिया ऑक्सीजन ख़त्म कर देते हैं। तल के पास बड़े मृत क्षेत्र बन जाते हैं जहाँ ऑक्सीजन लगभग नहीं होती। इसे सुपोषण (eutrophication) कहते हैं।
- तेल का रिसाव, प्लास्टिक और कारख़ानों का कचरा।
- ज़रूरत से ज़्यादा मछली पकड़ना और जहाज़ों से आई बाहरी प्रजातियाँ।
उपाय: सीवेज साफ़ करना, नदियों के पास कम खाद डालना, पानी छानने वाली आर्द्रभूमियाँ बचाना, और एक बेसिन के सभी क्षेत्रों का मिलकर काम करना।
करके देखो
- एक काग़ज़ मरोड़ो, थोड़ा खोलकर ट्रे पर रखो। उस पर बारिश की तरह पानी छिड़को। बूँदें सिलवटों में जमा होकर "नदियाँ" बनाती हैं। ऊपर की धारें जल विभाजक हैं!
- गिलास में रेत भरो, फिर धीरे-धीरे पानी डालो। भौम जलस्तर कहाँ है? एक स्ट्रॉ "कुएँ" की तरह डालकर चूसो: स्तर नीचे जाता है।
- 3D के आख़िरी चरण में बारिश बहुत कम, फिर बहुत ज़्यादा करो। नदी और झील को क्या हुआ?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उद्गम → मार्ग → मुहाना
- मुख्य नदी + सहायक नदियाँ = नदी तंत्र
- नदी बेसिन = एक नदी में पानी देने वाली सारी ज़मीन; जल विभाजक = बेसिनों के बीच की ऊँची ज़मीन
- झीलों के प्रकार: हिमनद, भ्रंश, ज्वालामुखी, गोखुर, लैगून, कार्स्ट, जलाशय
- खाद → शैवाल प्रस्फुटन → सड़न → ऑक्सीजन कम (सुपोषण)
हल किए गए उदाहरण
1. बारिश एक पहाड़ी धार के सिर्फ़ एक ओर गिरी। वह किस नदी में जाएगी?
उस नदी में जिसका बेसिन उस ओर है। धार दो बेसिनों के बीच का जल विभाजक है।
2. खड़ी दरार वाली चट्टानों के बीच एक लंबी, बहुत गहरी झील है। उसका प्रकार?
भ्रंश (विवर्तनिक) झील, जो पपड़ी का हिस्सा धँसने से बनी।
3. समतल मैदान में धीमी नदी के पास U आकार की झील है। कैसे बनी?
यह गोखुर झील है: नदी ने मोड़ की गर्दन काट दी और पुराना घेरा अलग छूट गया।
4. हफ़्तों बारिश न हो तब भी नदी क्यों बहती रहती है?
भूजल झरनों और नदी तल से उसे पानी देता रहता है, और बर्फ़ या हिमनद भी पिघलकर पानी देते हैं।
5. लगभग बंद समुद्रों में मृत क्षेत्र खुले महासागर से ज़्यादा क्यों बनते हैं?
उनका पानी धीरे बदलता है, नदियों से आए पोषक तत्व जमा होते हैं, शैवाल बढ़ते हैं और सड़ते शैवाल ऑक्सीजन ख़त्म कर देते हैं।
आम गलतियाँ
- उद्गम और मुहाने को उलट देना। उद्गम शुरुआत (ऊपर) है; मुहाना अंत (नीचे)।
- बेसिन को सिर्फ़ नदी की धारा समझना। बेसिन वह पूरी ज़मीन है जिसका पानी नदी में जाता है।
- हर झील को जलाशय कहना। जलाशय बाँध के पीछे इंसानों की बनाई झील है।
- भूजल को ज़मीन के नीचे बहती नदी समझना। ज़्यादातर यह मिट्टी और चट्टान के छोटे छेदों में भरा रहता है।