सागर
रूस का तट तीन महासागरों के कई सागरों से लगा है। आर्कटिक महासागर के सागर (बैरेंट्स, श्वेत, कारा, लाप्तेव, पूर्वी साइबेरियाई, चुकची) साल के ज़्यादातर समय बर्फ़ीले रहते हैं। प्रशांत के सागर (बेरिंग, ओखोत्स्क, जापान) पूर्व में हैं। अटलांटिक द्रोणी के सागर (बाल्टिक, काला, आज़ोव) पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में हैं। कैस्पियन सागर महासागर से जुड़ा नहीं है: यह खारे पानी का सबसे बड़ा बंद जलाशय है, इसलिए इसे सागर या झील कहते हैं। सागर मछली, बंदरगाह और व्यापार-मार्ग देते हैं, पर बर्फ़ से उत्तर का उपयोग कठिन है।
नदियाँ
नदी स्रोत (सोता, झील या हिमनद) से शुरू होकर धारा में बहती है, सहायक नदियों से पानी लेती है और मुहाने (सागर या झील) पर ख़त्म होती है। जिस ज़मीन का पानी एक नदी-तंत्र में आता है, वह उसकी द्रोणी (बेसिन) है।
- ओब-इरतिश, येनिसेई, लेना उत्तर की ओर आर्कटिक महासागर में बहती हैं। ये महीनों जमी रहती हैं।
- अमूर पूर्व की ओर प्रशांत में बहती है।
- वोल्गा, यूरोप की सबसे लंबी नदी (लगभग 3,500 किमी), दक्षिण में कैस्पियन सागर में गिरती है। यह मुख्य जलमार्ग है।
नदियों को पानी बर्फ़ पिघलने (बसंत की बाढ़), बारिश और भूजल से मिलता है। यहाँ ज़्यादातर नदियाँ सर्दी में जम जाती हैं और बसंत में उफनती हैं।
झीलें, दलदल और भूजल
झीलें गड्ढों में भरती हैं: हिमनदों से बने (लाडोगा, यूरोप की सबसे बड़ी झील), पपड़ी की दरार से बने (बैकाल) या नदी की बाढ़ से। बैकाल झील धरती की सबसे गहरी झील है (लगभग 1,640 मी) और दुनिया के तरल मीठे सतही पानी का लगभग पाँचवाँ हिस्सा रखती है।
दलदल समतल, ठंडी, गीली ज़मीन पर बनते हैं जहाँ पानी बह नहीं पाता, जैसे पश्चिमी साइबेरिया का निचला मैदान। पौधे आधे सड़कर पीट (peat) बनाते हैं। दलदल पानी रोकते हैं और धीरे-धीरे छोड़ते हैं।
भूजल वह बारिश और पिघला पानी है जो चट्टानों की खाली जगह में रिसता है। गीली परत का ऊपरी भाग जल-स्तर (water table) है। कुएँ और सोते उसे बाहर लाते हैं। गहरी परतों (आर्टीज़ियन द्रोणियों) में खनिज जल भी हो सकता है।
हिमनद और पर्माफ़्रॉस्ट
हिमनद बर्फ़ के विशाल पिंड हैं जो ढलान पर धीरे-धीरे खिसकते हैं। पर्वतीय हिमनद (काकेशस, अल्ताई, कमचात्का) और आर्कटिक द्वीपों (नोवाया ज़ेम्ल्या, सेवेरनाया ज़ेम्ल्या) पर बर्फ़ की टोपियाँ हैं। हिमनद बहुत पानी जमा रखते हैं और पिघलने पर नदियाँ भरते हैं।
पर्माफ़्रॉस्ट वह ज़मीन है जो कम से कम दो साल, और अक्सर हज़ारों साल, जमी रहती है। यह देश के लगभग दो-तिहाई हिस्से में है, ज़्यादातर पूर्व और उत्तर में। गर्मी में सिर्फ़ ऊपरी पतली परत पिघलती है (सक्रिय परत)। इमारतें खंभों पर बनाते हैं ताकि उनकी गर्मी ज़मीन न पिघलाए। गर्माहट से पर्माफ़्रॉस्ट पिघलता है, जिससे सड़कें धँस सकती हैं और गैसें निकल सकती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पानी की कड़ी: हिमनद / सोता → नदी → झील या दलदल → सागर
- बारिश → रिसाव → भूजल (जल-स्तर) → कुआँ या सोता
- गर्मी: हिमनद सिकुड़ता, नदी का बहाव बढ़ता, पर्माफ़्रॉस्ट पिघलता। ठंड: उल्टा।
- पर्माफ़्रॉस्ट: 2 या ज़्यादा साल जमी ज़मीन; देश के लगभग 2/3 भाग में
हल किए गए उदाहरण
1. ओब, येनिसेई और लेना तीनों उत्तर की ओर बहती हैं। वे किस महासागर तक पहुँचती हैं?
आर्कटिक महासागर। उनके मुहाने साल में कई महीने जमे रहते हैं।
2. पर्माफ़्रॉस्ट इलाकों में घर खंभों पर क्यों बनाते हैं?
ज़मीन पर बना घर मिट्टी को गर्म करके उसकी बर्फ़ पिघला देता है और ज़मीन धँस जाती है। खंभे घर के नीचे हवा छोड़ते हैं ताकि ज़मीन जमी रहे।
3. बसंत में कई नदियाँ क्यों उफनती हैं?
सर्दी की बर्फ़ पिघलती है और पिघला पानी एक साथ नदियों में आता है। यह बसंत की बाढ़ है।
4. बैकाल झील ख़ास क्यों है?
यह धरती की सबसे गहरी झील है (लगभग 1,640 मी) और दुनिया के तरल मीठे सतही पानी का लगभग 20% रखती है।
आम गलतियाँ
- कैस्पियन को सिर्फ़ सागर कहना। यह बंद खारा जलाशय है; कुछ लोग इसे सबसे बड़ी झील कहते हैं।
- यह सोचना कि पर्माफ़्रॉस्ट सिर्फ़ सर्दी में जमा रहता है। वह साल भर जमा रहता है; सिर्फ़ ऊपरी पतली परत पिघलती है।
- दलदल और झील को मिला देना। झील खुला पानी है; दलदल पौधों वाली गीली ज़मीन है।
- भूल जाना कि सारे जल आपस में जुड़े हैं। बर्फ़, बारिश, नदियाँ और भूजल आपस में पानी बदलते हैं।