भूगर्भिक संरचना: मंच
पृथ्वी की पपड़ी खंडों से बनी है। मंच (platform) बहुत पुराना, समतल और स्थिर खंड है। इसके दो भाग हैं: नीचे कठोर क्रिस्टलीय आधार, और ऊपर परतदार तलछट का आवरण। जहाँ आधार सतह तक आ जाता है, उसे ढाल (shield) कहते हैं।
- पूर्वी यूरोपीय मंच: बहुत पुराना आधार, ऊपर हल्का मैदान (रूसी मैदान)। ढाल उत्तर-पश्चिम (कोला और करेलिया) में दिखती है।
- साइबेरियाई मंच: बहुत पुराना, मध्य साइबेरियाई पठार के रूप में उठा।
- पश्चिमी साइबेरियाई प्लेट: नया मंच; इसका पुराना आधार मोटी तलछट के नीचे गहरा दबा है, इसलिए ज़मीन विशाल समतल निचला मैदान है।
पर्वत पेटियाँ और उच्चावच
जब पपड़ी के दो खंड एक-दूसरे को धकेलते हैं, तो बीच की परतें दबकर मुड़ जाती हैं। ज़मीन वलित पेटी के रूप में उठती है। वलन की आयु ऊँचाई तय करती है।
- यूराल: बहुत पुराने (पैलियोज़ोइक) वलन। घिसकर नीचे हैं (सबसे ऊँचा लगभग 1,900 मी)।
- अल्ताई और सायान, बैकाल क्षेत्र: पुराने वलन जो बाद में फिर उठे।
- वेर्खोयांस्क-चुकोत्का और प्रशांत पेटी (कमचात्का, कुरील, साखालिन): नए मेसोज़ोइक और सीनोज़ोइक वलन, ऊँचे और सक्रिय।
- काकेशस: नए आल्पीय वलन। एल्ब्रुस पर्वत (5,642 मी) सबसे ऊँची चोटी है।
यानी: मंच मैदान और पठार देते हैं; वलित पेटियाँ पर्वत देती हैं। फिर नदियाँ और बर्फ़ दोनों को आकार देती हैं।
भूकालानुक्रम (geochronology): चट्टान की आयु पढ़ना
भूकालानुक्रम पृथ्वी के इतिहास को समय की सीढ़ी पर रखता है (सबसे पुराने से सबसे नए तक):
- प्रीकैम्ब्रियन (54 करोड़ साल पहले से पहले): सबसे पुरानी कठोर चट्टानें, मंचों के आधार।
- पैलियोज़ोइक (54 से 25 करोड़ साल पहले): पुराना वलन, जैसे यूराल; कोयले के जंगल।
- मेसोज़ोइक (25 करोड़ से 6.6 करोड़ साल पहले): उत्तर-पूर्व में वलन; बहुत तलछट।
- सीनोज़ोइक (6.6 करोड़ साल पहले से अब तक): सबसे नया वलन, काकेशस और प्रशांत पेटी।
मोटा नियम: वलन जितना पुराना, पर्वत उतने नीचे और गोल।
खनिज और ख़तरे
खनिज भूगर्भ के पीछे चलते हैं।
- तलछट का आवरण: कोयला, तेल, गैस, लवण, निर्माण रेत। जैसे पश्चिमी साइबेरिया में तेल-गैस; कुज़बास और पेचोरा द्रोणी में कोयला।
- कठोर आधार: लौह अयस्क (जैसे कुर्स्क चुंबकीय विसंगति), एपेटाइट, निकल और हीरे पुरानी चट्टानों में।
- वलित पेटियाँ: धातु अयस्क (ताँबा, सोना, टिन, बहुधातु), जैसे यूराल और पूर्व में।
ख़तरे: भूकंप और ज्वालामुखी वहाँ होते हैं जहाँ पपड़ी नई और हिलती है: कमचात्का (क्ल्युचेव्स्काया सोपका जैसा ज्वालामुखी, लगभग 4,750 मी, अब भी सक्रिय है), कुरील, साखालिन, काकेशस और बैकाल क्षेत्र। मंच शांत होते हैं। पर्वतों में हिमस्खलन, भूस्खलन और कीचड़-धाराएँ भी होती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मंच = कठोर पुराना आधार + तलछट आवरण → मैदान और पठार
- वलित पेटी = दबी और मुड़ी पपड़ी → पर्वत
- आयु क्रम: प्रीकैम्ब्रियन → पैलियोज़ोइक → मेसोज़ोइक → सीनोज़ोइक
- पुराने वलन = नीचे, गोल पर्वत; नए वलन = ऊँचे, नुकीले, भूकंप ज़्यादा
हल किए गए उदाहरण
1. यूराल काकेशस से इतने नीचे क्यों हैं?
यूराल पैलियोज़ोइक में, लगभग 30 करोड़ साल पहले, मुड़े और हवा, पानी और बर्फ़ से घिस गए। काकेशस सीनोज़ोइक में मुड़ा, इसलिए नया और ऊँचा है।
2. तेल के लिए कहाँ खुदाई करोगे: मोटी तलछट वाले मंच पर या नई वलित पेटी में?
मोटी तलछट वाले मंच पर। तेल और गैस परतदार तलछट में बनते हैं, जैसे पश्चिमी साइबेरियाई प्लेट में।
3. एक मैदान समतल, पुराना है और ऊपर मोटी परतें हैं। उसके नीचे क्या है?
एक मंच: कठोर क्रिस्टलीय आधार और ऊपर तलछट का आवरण।
4. कमचात्का में ज्वालामुखी हैं पर रूसी मैदान में नहीं, क्यों?
कमचात्का प्रशांत किनारे की नई, हिलती वलित पेटी पर है। रूसी मैदान स्थिर पुराना मंच है जहाँ पपड़ी शांत है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पर्वत हमेशा सबसे पुराना भाग होते हैं। पुराने पर्वत नीचे होते हैं; नए ऊँचे।
- तेल और गैस को कठोर आधार में रखना। वे तलछट की परतों में भरे होते हैं।
- मंच (समतल, स्थिर) और वलित पेटी (सिकुड़ी, पर्वत) को मिला देना।
- भूल जाना कि भूकंप और ज्वालामुखी नई पेटियों के साथ चलते हैं, पुराने मंचों के साथ नहीं।