अंदर की जानकारी कैसे मिलती है? प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोत
अब तक का सबसे गहरा छेद (आर्कटिक क्षेत्र में कोला) सिर्फ़ लगभग 12 किमी गया। पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6,370 किमी है। इसलिए ज़्यादातर जानकारी अप्रत्यक्ष है।
| प्रत्यक्ष स्रोत | अप्रत्यक्ष स्रोत |
|---|---|
| खानों की चट्टानें (कुछ किमी गहरी) | गहराई के साथ ताप, दबाव और घनत्व बढ़ना |
| समुद्र तल और ज़मीन पर गहरी खुदाई परियोजनाएँ | उल्कापिंड: पृथ्वी के भीतर जैसे पदार्थ से बने |
| ज्वालामुखी का लावा और गैसें | गुरुत्व में अंतर (गुरुत्व विसंगति) से भारी-हल्की चट्टानों का पता |
| चुंबकीय सर्वेक्षण | |
| भूकंपीय तरंगें: सबसे ज़रूरी सुराग |
भूकंप और भूकंपीय तरंगें
चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक निकलने से पृथ्वी का हिलना भूकंप है, जो अक्सर भ्रंश (दरार जहाँ चट्टानें खिसकती हैं) पर होता है। अंदर जहाँ ऊर्जा निकलती है वह उद्गम केंद्र है। उसके ठीक ऊपर सतह का बिंदु अधिकेंद्र है।
भूगर्भिक तरंगें (अंदर से चलती हैं)
- P-तरंगें (प्राथमिक): सबसे तेज़, पहले पहुँचती हैं। चलने की दिशा में ही चट्टान को धक्का-खिंचाव देती हैं, जैसे स्प्रिंग को एक सिरे से दबाना। ठोस, तरल, गैस सबसे गुज़रती हैं।
- S-तरंगें (द्वितीयक): धीमी। चलने की दिशा के लंब में हिलाती हैं, जैसे रस्सी को ऊपर-नीचे झटकना। सिर्फ़ ठोस से गुज़रती हैं।
धरातलीय तरंगें
भूगर्भिक तरंगें सतह पर पहुँचकर धरातलीय तरंगें बनाती हैं। ये सबसे धीमी पर ज़मीन को सबसे ज़्यादा हिलाती हैं, इसलिए सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं।
अलग घनत्व वाले पदार्थ में जाने पर तरंगों की गति बदलती है, वे मुड़ती (अपवर्तन) या टकराकर लौटती (परावर्तन) हैं। कई भूकंपलेखी (सिस्मोग्राफ़) पर समय नापकर वैज्ञानिक अंदर का नक्शा बनाते हैं।
छाया क्षेत्र
छाया क्षेत्र सतह का वह भाग है जहाँ कोई ख़ास तरंग नहीं पहुँचती।
- अधिकेंद्र से लगभग 105° तक P और S दोनों तरंगें दर्ज होती हैं।
- 105° के बाद S-तरंगें कभी नहीं पहुँचतीं। S-तरंगें तरल से नहीं गुज़रतीं, इसलिए बाहरी क्रोड तरल है। S-तरंगों की छाया पृथ्वी के 40% से ज़्यादा भाग पर है।
- लगभग 105° से 145° के बीच कोई सीधी तरंग नहीं पहुँचती: यही छाया क्षेत्र है। P-तरंगें क्रोड में मुड़कर 145° के बाद फिर दिखती हैं।
भूकंप के प्रकार, पैमाने और प्रभाव
प्रकार
- विवर्तनिक: भ्रंश पर चट्टानें खिसकती हैं (सबसे आम)।
- ज्वालामुखीजन्य: सक्रिय ज्वालामुखियों से जुड़े।
- नियात (धँसाव): भूमिगत खानों की छत गिरना।
- विस्फोट: परमाणु या रासायनिक विस्फोट से।
- बाँध जनित: बड़े बाँधों के पानी के भार से।
पैमाने
| परिमाण (रिक्टर पैमाना) | तीव्रता (मरकैली पैमाना) |
|---|---|
| निकली ऊर्जा | नुकसान और लोगों का अनुभव |
| 0 से 10 | 1 से 12 |
| एक भूकंप का एक मान | अलग जगह अलग मान |
परिमाण में हर +1 का मतलब लगभग 32 गुना ज़्यादा ऊर्जा।
प्रभाव
ज़मीन का हिलना, दरारें और धँसाव, भूस्खलन, मिट्टी का कीचड़ बनना (द्रवीकरण), हिमस्खलन, बाँध टूटने से बाढ़, आग, इमारतों का गिरना और समुद्र के नीचे भूकंप से सुनामी।
घर पर करें: ट्रे पर किताबों के ढेर रखकर पहले धीरे, फिर तेज़ हिलाइए। लंबा-पतला ढेर पहले गिरता है या छोटा-चौड़ा? इसीलिए इमारत की बनावट मायने रखती है।
पृथ्वी की संरचना
| परत | गहराई / मोटाई | तथ्य |
|---|---|---|
| भूपर्पटी | महासागरों के नीचे लगभग 5 किमी; महाद्वीपों के नीचे औसतन लगभग 30 किमी, बड़े पर्वतों के नीचे 70 किमी तक | भंगुर, ठोस। महासागरीय भूपर्पटी बेसाल्ट (भारी); महाद्वीपीय ग्रेनाइट जैसी (हल्की)। घनत्व लगभग 3 ग्राम/सेमी³। |
| मैंटल | मोहो से 2,900 किमी तक | ऊपरी भाग (लगभग 400 किमी तक) में नरम दुर्बलतामंडल, मैग्मा का मुख्य स्रोत। भूपर्पटी + ऊपरी मैंटल = स्थलमंडल (10–200 किमी)। |
| बाहरी क्रोड | 2,900 से 5,150 किमी | तरल (S-तरंगें यहाँ रुकती हैं)। निकल और लोहा (निफ़े)। |
| आंतरिक क्रोड | 5,150 से लगभग 6,370 किमी | भारी दबाव से ठोस। घनत्व लगभग 13 ग्राम/सेमी³। |
भूपर्पटी और मैंटल की सीमा मोहोरोविसिक असांतत्य (मोहो) है; मैंटल और क्रोड की सीमा गुटेनबर्ग असांतत्य।
ज्वालामुखी और ज्वालामुखी भू-आकृतियाँ
ज्वालामुखी वह जगह है जहाँ से मैग्मा, गैसें और राख बाहर आती हैं। ज़मीन के नीचे का मैग्मा सतह पर लावा कहलाता है।
ज्वालामुखी के प्रकार
- शील्ड ज्वालामुखी: पतला बेसाल्ट लावा दूर तक फैलता है, हल्की ढलान (हवाई)। सबसे बड़े ज्वालामुखी।
- मिश्रित ज्वालामुखी: गाढ़ा, चिपचिपा लावा और राख, विस्फोटक उद्गार; परतों से खड़ी शंकु।
- ज्वालामुखी कुंड (काल्डेरा): सबसे विस्फोटक; मैग्मा कक्ष ख़ाली होने पर ऊपर का भाग धँसकर बड़ा गड्ढा बनता है।
- बाढ़ बेसाल्ट प्रांत: बहुत पतला लावा दरारों से निकलकर परतों में बड़े क्षेत्र ढक लेता है, जैसे भारत का दक्कन ट्रैप।
- मध्य-महासागरीय कटक ज्वालामुखी: महासागरों के नीचे कटकों पर उद्गारों की लंबी शृंखला।
अंतर्वेधी आकृतियाँ (भूपर्पटी के अंदर मैग्मा ठंडा)
| आकृति | आकार |
|---|---|
| बैथोलिथ | गहराई में विशाल गुंबदनुमा ग्रेनाइट पिंड, ऊपर की चट्टान घिसने पर दिखता है |
| लैकोलिथ | समतल तली वाला गुंबद, नीचे से नली द्वारा जुड़ा |
| लैपोलिथ | तश्तरी जैसा (नीचे को मुड़ा) |
| फैकोलिथ | मुड़ी चट्टानों के शिखर या गर्त में लहरदार पिंड |
| सिल / शीट | समतल क्षैतिज परत (पतली हो तो शीट) |
| डाइक | दीवार जैसी, लगभग लंबवत; सतह तक लावा पहुँचाती है |
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रत्यक्ष स्रोत: खानें, खुदाई, लावा। अप्रत्यक्ष: गहराई के साथ ताप/दबाव/घनत्व, उल्का, गुरुत्व, चुंबकत्व, भूकंपीय तरंगें
- उद्गम केंद्र = अंदर का शुरुआती बिंदु; अधिकेंद्र = उसके ठीक ऊपर सतह पर
- P-तरंगें: सबसे तेज़, धक्का-खिंचाव, ठोस + तरल + गैस से गुज़रें
- S-तरंगें: धीमी, अगल-बगल, सिर्फ़ ठोस से
- S-तरंग छाया: 105° के बाद; छाया क्षेत्र: 105° से 145°
- परिमाण (रिक्टर 0–10) = ऊर्जा; तीव्रता (मरकैली 1–12) = नुकसान; +1 परिमाण ≈ 32 गुना ऊर्जा
- भूपर्पटी ≈ 5 किमी (महासागर) / 30 किमी (महाद्वीप); मैंटल 2,900 किमी तक; बाहरी क्रोड तरल; आंतरिक क्रोड ठोस
- मोहो = भूपर्पटी|मैंटल; गुटेनबर्ग = मैंटल|क्रोड
- स्थलमंडल = भूपर्पटी + ऊपरी मैंटल; दुर्बलतामंडल = नरम परत (मैग्मा स्रोत)
हल किए गए उदाहरण
1. अधिकेंद्र से 120° दूर एक भूकंपलेखी कोई सीधी तरंग दर्ज नहीं करता। क्यों?
वह छाया क्षेत्र (105°–145°) में है। S-तरंगें तरल बाहरी क्रोड में रुक जाती हैं और P-तरंगें क्रोड में मुड़कर दूर चली जाती हैं।
2. परिमाण 6 का भूकंप परिमाण 5 से कितनी गुना ज़्यादा ऊर्जा छोड़ता है?
लगभग 32 गुना, क्योंकि परिमाण में हर 1 की बढ़त लगभग 32 गुना ऊर्जा है।
3. परिमाण 7, परिमाण 5 से कितनी गुना ज़्यादा ऊर्जा वाला है?
32 × 32 ≈ 1,024, यानी लगभग 1,000 गुना।
4. S-तरंगें कैसे साबित करती हैं कि बाहरी क्रोड तरल है?
S-तरंगें तरल से नहीं गुज़रतीं। वे 105° के बाद कभी नहीं पहुँचतीं, यानी कोई तरल परत उन्हें रोकती है। वही बाहरी क्रोड है।
5. पहचानिए: चट्टान की परतों को सीधा ऊपर काटता हुआ दीवार जैसा ठंडा मैग्मा पिंड।
डाइक। (समतल क्षैतिज हो तो सिल।)
6. दक्कन ट्रैप काले बेसाल्ट की कई समतल परतों से बना है। यह कौन सा ज्वालामुखी रूप है?
बाढ़ बेसाल्ट प्रांत: बहुत पतला लावा दरारों से निकलकर परत-दर-परत बड़े क्षेत्र पर फैला।
आम गलतियाँ
- अधिकेंद्र को अंदर गहराई में बताना। उद्गम केंद्र अंदर है; अधिकेंद्र सतह पर।
- S-तरंगों को तेज़ मानना। P (प्राथमिक) तरंगें तेज़ हैं और पहले पहुँचती हैं।
- परिमाण और तीव्रता उलझाना। परिमाण = ऊर्जा (एक मान); तीव्रता = नुकसान (जगह के साथ बदले)।
- मैंटल को तरल कहना। मैंटल ठोस है पर ऊपर नरम (दुर्बलतामंडल)। सिर्फ़ बाहरी क्रोड तरल है।