Romania Clasa a IX-a Geography
अध्याय: 8
1. Geography – the science of Earth's space
Geography today and mapping space · GIS, satellite images and GPS
- मानचित्र का परिचय – मानचित्र पूरी पृथ्वी या उसके किसी भाग का ऊपर से देखा गया, मापनी के अनुसार बनाया गया छोटा, समतल चित्र है। हर मानचित्र में शीर्षक, मापनी, दिशा (उत्तर तीर), संकेत-सूची व चिह्न और प्रक्षेप पर बना ग्रिड होना चाहिए। मानचित्र मापनी (बृहत् या लघु) और कार्य (भौतिक या सांस्कृतिक) के आधार पर बाँटे जाते हैं।
- स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी: जीआईएस (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस) एक कंप्यूटर तंत्र है जो स्थानों के आँकड़ों को संग्रहित करता, जोड़ता, विश्लेषित करता और दिखाता है। यह संसार को परतों में रखता है। इसके लिए हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आँकड़े, लोग और विधियाँ चाहिए। स्थानिक आँकड़े रेखापुंज (कोशिकाओं का जाल) और सदिश (बिंदु, रेखा, बहुभुज) प्रारूपों में होते हैं। आँकड़े अंकीकरण, स्कैनिंग, जीपीएस या उपग्रह चित्रों से डाले जाते हैं और गुण सारणियों से जोड़े जाते हैं। अध्यारोपण परतों को मिलाकर शर्तें पूरी होने की जगह खोजता है; बफ़र किसी वस्तु के चारों ओर तय दूरी का क्षेत्र बनाता है।
2. Earth as a cosmic body
Earth in the Universe · Earth's motions and their effects
- सूर्य–पृथ्वी–चंद्रमा तंत्र – सूर्य एक तारा है; पृथ्वी उसके चारों ओर लगभग 365¼ दिन में चक्कर लगाती है और रोज़ एक बार अपनी धुरी पर घूमती है। चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर 27.3 दिन में लगाता है। सूर्य हमेशा चंद्रमा का आधा हिस्सा रोशन करता है; चंद्रमा के घूमने से हमें उस रोशन आधे का घटता-बढ़ता हिस्सा दिखता है – यही कलाएँ हैं, जो 29.5 दिन में दोहराती हैं। चंद्रमा एक चक्कर में एक बार ही घूमता है, इसलिए उसका एक ही चेहरा दिखता है। उसका (और सूर्य का) गुरुत्व समुद्र में दो उभार बनाता है – दिन में दो बार ज्वार; अमावस्या-पूर्णिमा पर दीर्घ ज्वार, चतुर्थांश पर लघु ज्वार। सूर्य ग्रहण में चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है (अमावस्या), चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की छाया में जाता है (पूर्णिमा)। चंद्रमा की कक्षा 5° झुकी होने से हर महीने ग्रहण नहीं होता। सूर्य से सही दूरी, द्रव जल, वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी को जीवन के योग्य बनाते हैं।
- पृथ्वी का घूर्णन और परिक्रमण – पृथ्वी की दो मुख्य गतियाँ हैं। घूर्णन: यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व लगभग 24 घंटे में एक बार घूमती है — इससे दिन-रात, सूरज का रोज़ का रास्ता, स्थानीय समय (हर घंटे 15° देशांतर) और हवाओं-धाराओं का मुड़ना (कोरिओलिस प्रभाव) होता है। परिक्रमण: यह दीर्घवृत्त कक्षा में सूर्य का लगभग 365¼ दिन में एक चक्कर लगाती है। अक्ष कक्षा-तल (क्रांतिवृत्त) के लंब से 23.5° झुका है और हमेशा एक दिशा में रहता है, इसलिए सिर के ऊपर का सूरज कर्क और मकर रेखा के बीच खिसकता है, दिन की लंबाई बदलती है, और ऋतुएँ, अयनांत व विषुव होते हैं।
3. Geology: internal dynamics, resources and risks
Earth's interior, minerals and rocks · Internal dynamics and geological time · Endogenous hazards
- पृथ्वी की आंतरिक संरचना: भूकंपीय तरंगें, परतें और ज्वालामुखी – कोई पृथ्वी के केंद्र तक खोद नहीं सकता, इसलिए हम अंदर की जानकारी प्रत्यक्ष स्रोतों (खानों की चट्टान, गहरी खुदाई, लावा) और अप्रत्यक्ष स्रोतों (गहराई के साथ ताप और दबाव, उल्कापिंड, गुरुत्व, चुंबकत्व और सबसे बढ़कर भूकंपीय तरंगें) से लेते हैं। P-तरंगें ठोस और तरल दोनों से गुज़रती हैं; S-तरंगें सिर्फ़ ठोस से। जहाँ तरंगें नहीं पहुँचतीं, वहाँ छाया क्षेत्र बनता है, जो बताता है कि बाहरी क्रोड तरल है। भूकंप परिमाण (रिक्टर) और तीव्रता (मरकैली) से मापा जाता है। पृथ्वी में पतली भूपर्पटी, नरम दुर्बलतामंडल वाला मोटा मैंटल, तरल बाहरी क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड है। सतह तक पहुँचा मैग्मा ज्वालामुखी बनाता है; अंदर ठंडा हुआ मैग्मा बैथोलिथ, सिल, डाइक जैसी अंतर्वेधी आकृतियाँ बनाता है।
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
4. Relief – support for human society
Major landforms and shaping processes · Relief types and habitability
- भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ: बल धरातल को कैसे बनाते और घिसते हैं – पृथ्वी की सतह को दो तरह के बल आकार देते हैं। अंतर्जनित बल अंदर से आते हैं, पृथ्वी की भीतरी गर्मी से: पटल विरूपण (वलन, भ्रंशन, उत्थान, धँसाव) और ज्वालामुखीयता ज़मीन ऊपर बनाते हैं। बहिर्जनिक बल बाहर से आते हैं, सूर्य और गुरुत्व से: अपक्षय चट्टान को उसी जगह तोड़ता है, बृहत् संचलन उसे ढलान से नीचे ले जाता है, और बहता पानी, हवा, हिमनद और लहरें अपरदन और निक्षेपण करके ऊँची ज़मीन को धीरे-धीरे नीचा करते हैं। टूटी चट्टान में पौधे और सूक्ष्म जीव लंबे समय में मिट्टी बनाते हैं। मूल चट्टान, जलवायु, उच्चावच, जीव और समय तय करते हैं कि कैसी मिट्टी बनेगी।
- भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास: बहते जल और पवन का काम – बहता जल और पवन भू-आकृतियाँ काटने और बनाने वाले दो बड़े कारक हैं। नदी अपने खड़े ऊपरी भाग में गहरी V-आकार घाटियाँ, गॉर्ज, कैनियन, जलप्रपात और जलगर्तिकाएँ काटती है, और धीमी होने पर जलोढ़ पंख, डेल्टा, बाढ़ के मैदान, प्राकृतिक तटबंध और बिंदु बार बनाती है। उसके मोड़ (विसर्प) बढ़कर कट जाते हैं और गोखुर झील बनती है। मरुस्थल में पवन ढीली रेत उड़ाती है (अपवाहन), रेत से चट्टान रगड़ती है (अपघर्षण) और छत्रक शिला बनाती है, और परत बाढ़ के साथ ज़मीन को पेडीमेंट, पेडीप्लेन और इंसेलबर्ग में बदलती है; रेत को बरखान, परवलयिक, सीफ़, अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ टिब्बों के रूप में जमा करती है। भू-आकृतियाँ जीवों की तरह युवा, प्रौढ़ और वृद्ध अवस्था से गुज़रती हैं।
5. Atmosphere and climate change
Atmosphere and climate · Climate change and climate hazards
- वायुमंडल का संघटन तथा संरचना – वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा की मोटी चादर है, जिसे गुरुत्व पकड़े रखता है। इसमें ज़्यादातर नाइट्रोजन (78%) और ऑक्सीजन (21%) है; थोड़ी आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओज़ोन, जलवाष्प और धूल भी है। इसकी पाँच परतें हैं: क्षोभमंडल (मौसम यहीं), समतापमंडल (ओज़ोन परत), मध्यमंडल (सबसे ठंडा), तापमंडल (आयनमंडल) और बहिर्मंडल। मौसम थोड़े समय की हालत है, जलवायु लगभग 30 साल का औसत। दोनों के तत्व एक ही हैं: तापमान, दाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षण।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
6. Hydrosphere – a dynamic system
World ocean and inland waters
- जल (महासागर): जलीय चक्र, महासागरीय तल, तापमान और लवणता – धरती का पानी महासागर, हवा, स्थल और जीवों के बीच लगातार घूमता है — यह जलीय चक्र है; लगभग 97% पानी महासागरों में है। महासागरीय तल के मुख्य भाग हैं — महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त (खाइयाँ) — और छोटे रूप जैसे मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला, निमग्न द्वीप (गुयॉट), अंतःसागरीय कैनियन, एटॉल और बैंक। सतह का पानी विषुवत के पास सबसे गरम और ध्रुवों की ओर ठंडा होता है; गहराई में ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) में तेज़ी से ठंडा होता है और नीचे 0–4 °C के पास रहता है। लवणता समुद्री पानी में नमक है, लगभग 35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35‰)। वाष्पीकरण से बढ़ती और बारिश, नदियों व पिघलती बर्फ़ से घटती है, इसलिए उपोष्ण क्षेत्रों और बंद गरम समुद्रों में ज़्यादा और विषुवत, ध्रुवों व नदी मुहानों के पास कम है।
7. Biosphere and soils – geographic diversity
Biosphere and soils
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
8. Natural environments of the Earth
Natural environments and their degradation
- बायोम और वन: पृथ्वी पर जीवन – बायोम एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें जलवायु, पौधे और जीव मिलते-जुलते हैं, जैसे टुंड्रा, टैगा, घास का मैदान, मरुस्थल, सवाना और उष्णकटिबंधीय वर्षावन। वर्षा और तापमान तय करते हैं कि कौन-सा बायोम बनेगा। भारत ख़ास क्षेत्रों को जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र बनाकर बचाता है, जिनमें कोर, बफ़र और संक्रमण क्षेत्र होते हैं। वनवासी जंगल पर निर्भर हैं और उसे नुक़सान पहुँचाए बिना उपयोग करना जानते हैं; इको-पर्यटन उन्हें कमाई दे सकता है। हम राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, क़ानून और चिपको जैसे जन आंदोलनों से जंगल और वन्यजीव बचाते हैं, और हमें जंगल की आग रोकनी चाहिए।