जैव विविधता और भारत हॉटस्पॉट क्यों है
जैव विविधता का मतलब है किसी जगह के जीवों की विविधता: पौधे, जंतु, कवक और छोटे सूक्ष्मजीव। अब तक लगभग 17 से 20 लाख जातियों के नाम रखे गए हैं। बहुत सी अभी अनजानी हैं।
जाति (स्पीशीज़) ऐसे जीवों का समूह है जो एक जैसे दिखते हैं और आपस में प्रजनन करके ऐसी संतान पैदा करते हैं जो खुद भी प्रजनन कर सके।
भारत एक महाविविधता वाला देश है। इसके पास दुनिया की लगभग 2.4% ज़मीन है, पर लगभग 7–8% ज्ञात जातियाँ। क्यों? यहाँ हर तरह का घर है: गर्म रेगिस्तान, बर्फ़ीले पहाड़, वर्षा वन, घास के मैदान, मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति और लंबे तट।
जैव विविधता हॉटस्पॉट वह क्षेत्र है जहाँ (1) ऐसी बहुत सी जातियाँ हैं जो और कहीं नहीं मिलतीं, और (2) प्राकृतिक आवरण का बड़ा हिस्सा पहले ही नष्ट हो चुका है, यानी ख़तरा है। भारत से चार हॉटस्पॉट जुड़े हैं: हिमालय, पश्चिमी घाट और श्रीलंका, इंडो-बर्मा (पूर्वोत्तर), और सुंडालैंड (निकोबार द्वीप)। उदाहरण: पश्चिमी घाट का शेर-पूँछ वाला बंदर (लायन-टेल्ड मकाक), पूर्वोत्तर के कई मेंढक और ऑर्किड।
हम जीवों का वर्गीकरण क्यों करते हैं?
वर्गीकरण का मतलब है साझा गुणों के आधार पर जीवों को समूहों में रखना। इससे:
- कुछ समूह पढ़कर लाखों जीवों को समझ सकते हैं;
- समूह जानकर ही जीव के बारे में बहुत कुछ पता चलता है (हर स्तनधारी बच्चे को दूध पिलाता है);
- पता चलता है कि समूह आपस में कैसे जुड़े हैं और एक ही पूर्वज से कैसे विकसित हुए।
वर्गीकरण का आधार
हम शरीर के गुण (लक्षण) देखते हैं। सबसे बुनियादी सवाल पहले आते हैं, क्योंकि वे कई और गुण तय करते हैं:
- कोशिका: क्या झिल्ली वाला असली केंद्रक है? नहीं = प्रोकैरियोट। हाँ = यूकैरियोट।
- शरीर: एककोशिकी या बहुकोशिकी?
- कोशिका भित्ति: है या नहीं? किससे बनी?
- भोजन: खुद बनाता है (स्वपोषी) या दूसरों को खाता है (परपोषी)?
- शरीर की बनावट: पौधों और जंतुओं में शरीर कितना संगठित है?
जो गुण जीवन के इतिहास में पहले आए, उन्हें आदिम (निम्न) कहते हैं। बाद में आए गुण उन्नत (उच्च) कहलाते हैं।
पाँच जगत
रॉबर्ट व्हिटेकर (1959) ने सभी कोशिकीय जीवों को पाँच जगत में बाँटा:
- मोनेरा: प्रोकैरियोट, असली केंद्रक नहीं, एक कोशिका। कुछ भोजन बनाते हैं, कुछ खाते हैं। उदाहरण: जीवाणु, नीला-हरा शैवाल (सायनोबैक्टीरिया)।
- प्रोटिस्टा: यूकैरियोट, एक कोशिका। कई बाल जैसे पक्ष्माभ (सिलिया) या चाबुक जैसे कशाभ (फ्लैजेला) से चलते हैं। उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डायटम।
- कवक (फंजाई): यूकैरियोट, भोजन नहीं बना सकते। सड़ी-गली चीज़ों से भोजन सोखते हैं (मृतजीवी)। भित्ति काइटिन की। उदाहरण: यीस्ट, मशरूम, ब्रेड की फफूँद (राइज़ोपस)। कुछ शैवाल के साथ मिलकर लाइकेन बनाते हैं।
- पादप: बहुकोशिकी, सेलुलोस की भित्ति; प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं। उदाहरण: स्पाइरोगायरा, मॉस, फ़र्न, चीड़, आम।
- जंतु: बहुकोशिकी, भित्ति नहीं, दूसरे जीवों को खाते हैं। ज़्यादातर चल-फिर सकते हैं। उदाहरण: स्पंज, केंचुआ, मेंढक, बाघ।
पादप जगत संक्षेप में
पौधों को तीन सवालों से बाँटते हैं: क्या शरीर जड़, तना, पत्ती में बँटा है? क्या पानी ले जाने वाली नलियाँ (संवहन ऊतक) हैं? क्या बीज बनते हैं, और क्या बीज फल के अंदर हैं?
- थैलोफ़ाइटा (शैवाल): शरीर बँटा नहीं; स्पाइरोगायरा, अल्वा।
- ब्रायोफ़ाइटा (मॉस): शरीर बँटा पर पानी की नलियाँ नहीं; "पादप जगत के उभयचर"।
- टेरिडोफ़ाइटा (फ़र्न): जड़, तना, पत्ती और नलियाँ, पर बीज नहीं।
- अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म): नग्न बीज, जैसे चीड़, देवदार।
- आवृतबीजी (एंजियोस्पर्म): बीज फल के अंदर; फूल वाले पौधे। एकबीजपत्री (मक्का) और द्विबीजपत्री (मटर)।
जंतुओं के मुख्य समूह
पहला बड़ा सवाल: क्या रीढ़ की हड्डी (कशेरुक दंड) है?
अकशेरुकी (रीढ़ नहीं)
- पोरीफ़ेरा (स्पंज): शरीर में छेद ही छेद; एक जगह टिके।
- सीलेंटरेटा/निडेरिया (हाइड्रा, जेलीफ़िश): खोखला शरीर, डंक वाले स्पर्शक।
- प्लेटीहेल्मिन्थीज़ (चपटे कृमि, जैसे फ़ीताकृमि, प्लेनेरिया) और निमेटोडा (गोल कृमि, जैसे एस्केरिस)।
- एनेलिडा (केंचुआ, जोंक): शरीर छल्लों जैसे खंडों में।
- आर्थ्रोपोडा (कीट, मकड़ी, केकड़ा, झींगा): जुड़े हुए पैर और सख़्त बाहरी खोल। जंतुओं का सबसे बड़ा समूह।
- मोलस्का (घोंघा, ऑक्टोपस): नरम शरीर, अक्सर खोल के अंदर।
- इकाइनोडर्मेटा (तारामीन, समुद्री अर्चिन): काँटेदार त्वचा; केवल समुद्र में।
कशेरुकी (रीढ़ है)
ये संघ कॉर्डेटा में आते हैं। पाँच वर्ग:
- मत्स्य (पिसीज़): गलफड़े, पंख (फ़िन), शल्क; असमतापी।
- उभयचर (एम्फ़ीबिया) (मेंढक): नम त्वचा, पानी और ज़मीन दोनों पर; असमतापी।
- सरीसृप (रेप्टीलिया) (छिपकली, साँप, कछुआ): सूखी शल्क वाली त्वचा, खोल वाले अंडे; असमतापी।
- पक्षी (एवीज़): पर (फ़ेदर), चोंच, अंडे; समतापी।
- स्तनधारी (मैमेलिया) (गाय, चमगादड़, व्हेल, मनुष्य): बाल, बच्चों को दूध; समतापी।
असमतापी (ठंडे खून वाले) का मतलब शरीर का तापमान आसपास के साथ बदलता है। समतापी (गर्म खून वाले) का तापमान लगभग एक जैसा रहता है।
पदानुक्रम और द्विनाम नामकरण पद्धति
छोटे समूह बड़े समूहों के अंदर होते हैं। इस क्रम को वर्गीकरण का पदानुक्रम कहते हैं: जगत → संघ (पौधों में प्रभाग) → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति। नीचे जाते हुए हर समूह में जीव कम होते हैं और उनके गुण ज़्यादा मिलते हैं।
स्थानीय नाम जगह-जगह बदलते हैं: एक ही फल आम, मामिडी और मैंगो कहलाता है। इसलिए वैज्ञानिक हर जगह एक नाम इस्तेमाल करते हैं। कार्ल लीनियस ने द्विनाम पद्धति दी:
- पहला शब्द = वंश, बड़े (कैपिटल) अक्षर से।
- दूसरा शब्द = जाति, छोटे अक्षर से।
- छपाई में तिरछे (इटैलिक) अक्षर; हाथ से लिखें तो दोनों शब्दों के नीचे अलग-अलग रेखा।
उदाहरण: बाघ Panthera tigris, शेर Panthera leo (एक ही वंश, इसलिए निकट संबंधी), मनुष्य Homo sapiens, आम Mangifera indica, मोर Pavo cristatus।
वायरस: कोशिका नहीं
वायरस (विषाणु) जीवाणु से भी बहुत छोटा है। इसमें कोशिका नहीं: न कोशिका झिल्ली, न कोशिकाद्रव्य, न राइबोसोम। बस आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) एक प्रोटीन के खोल में बंद। यह अकोशिकीय है, इसलिए पाँचों में से किसी जगत में नहीं आता।
जीवित कोशिका के बाहर वायरस कुछ नहीं करता; नमक की तरह क्रिस्टल भी बना सकता है। मेज़बान कोशिका में घुसकर वह कोशिका की मशीनरी पर कब्ज़ा करता है और अपनी सैकड़ों प्रतियाँ बनाता है। इसलिए वायरस सजीव और निर्जीव की सीमा पर है।
वायरस से होने वाले रोग: सर्दी-ज़ुकाम, फ़्लू, खसरा, चेचक (चिकनपॉक्स), पोलियो, डेंगू, कोविड-19, HIV-एड्स। एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करते; कई वायरस रोगों से टीके बचाते हैं।
करके देखें: अपनी रसोई छाँटिए
रसोई या बगीचे से 8 चीज़ें लें: एक पत्ती, एक मशरूम (या सूखा यीस्ट), दही (इसमें जीवाणु हैं), दीवार से मॉस, एक चींटी, चावल का दाना, एक पंख, मछली का शल्क। 3D वाले सवाल पूछें: केंद्रक वाली कोशिकाएँ? भोजन खुद बनाता है? रीढ़ है? हर चीज़ को सही काग़ज़ी "अलमारी" पर रखें। फिर 3D का चरण 6 खोलकर अपने जवाब जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पाँच जगत: मोनेरा → प्रोटिस्टा → कवक → पादप → जंतु
- पदानुक्रम: जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति
- वैज्ञानिक नाम = वंश (बड़ा अक्षर) + जाति (छोटा अक्षर), इटैलिक में
- प्रोकैरियोट = झिल्ली वाला केंद्रक नहीं; यूकैरियोट = असली केंद्रक
- वायरस = DNA या RNA + प्रोटीन खोल, कोशिका नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. एक जीव एक कोशिका का है, असली केंद्रक है और चाबुक जैसे कशाभ से चलता है। कौन सा जगत?
चरण 1: असली केंद्रक → यूकैरियोट, तो मोनेरा नहीं। चरण 2: एक कोशिका → प्रोटिस्टा (कवक, पादप, जंतु ज़्यादातर बहुकोशिकी)। उत्तर: प्रोटिस्टा (जैसे यूग्लीना)।
2. मशरूम और पौधे दोनों में भित्ति है, फिर भी मशरूम पादप क्यों नहीं?
पौधे प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं और भित्ति सेलुलोस की होती है। मशरूम भोजन नहीं बनाता, सड़ी चीज़ों से सोखता है, और भित्ति काइटिन की है। भोजन का तरीका और भित्ति अलग → अलग जगत, कवक।
3. शेर का वैज्ञानिक नाम सही लिखें और हर भाग का अर्थ बताएँ।
Panthera leo (इटैलिक में)। 'Panthera' वंश है (बड़ा P); 'leo' जाति है (छोटा l)। बाघ Panthera tigris भी इसी वंश में है, इसलिए दोनों निकट संबंधी हैं।
4. चमगादड़ उड़ता है और कबूतर भी। क्या दोनों एक वर्ग में हैं?
नहीं। मुख्य सवाल पूछें: चमगादड़ के बाल हैं और वह बच्चों को दूध पिलाता है → स्तनधारी। कबूतर के पर हैं और वह अंडे देता है → पक्षी। उड़ना आधार नहीं है; शरीर के गुण आधार हैं।
5. सबसे बड़े समूह से सबसे छोटे तक लगाएँ: वंश, जगत, कुल, जाति, वर्ग।
जगत → वर्ग → कुल → वंश → जाति। बड़े समूहों में जीव ज़्यादा होते हैं पर साझा गुण कम।
आम गलतियाँ
- नीले-हरे शैवाल को 'पौधा' कहना। इनमें असली केंद्रक नहीं, इसलिए ये मोनेरा (सायनोबैक्टीरिया) हैं।
- जाति का नाम बड़े अक्षर से लिखना, जैसे 'Homo Sapiens'। सही: Homo sapiens — वंश बड़ा, जाति छोटा, इटैलिक में।
- व्हेल को मछली और चमगादड़ को पक्षी मानना। शरीर के गुणों से छाँटें: दोनों के बाल हैं और दूध पिलाते हैं, इसलिए स्तनधारी।
- यह सोचना कि एंटीबायोटिक वायरल बुखार ठीक करती है। एंटीबायोटिक केवल जीवाणु पर काम करती है; वायरस में कोशिका के वे भाग ही नहीं।