Italy Scuola secondaria di primo grado – classe 3ª Science
अध्याय: 3
1. Physics and chemistry
Basic physical quantities · Energy · Chemical changes
- मूल भौतिक राशियाँ – भौतिक राशि वह चीज़ है जिसे हम संख्या और मात्रक से नाप सकते हैं: चाल, आयतन, भार, घनत्व, दाब, ताप, ऊष्मा और विद्युत आवेश। हर राशि का एक सूत्र या एक यंत्र होता है, और वह रोज़ की बातों से जुड़ी है, जैसे तैरना, ढलान, थर्मामीटर या सर्किट में बल्ब।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- भौतिक और रासायनिक परिवर्तन – भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का आकार, माप या अवस्था बदलती है, पर कोई नया पदार्थ नहीं बनता; कण वही रहते हैं। रासायनिक परिवर्तन में परमाणु नए ढंग से जुड़कर एक या ज़्यादा नए पदार्थ बनाते हैं। संकेत: गैस, रंग बदलना, ऊष्मा या प्रकाश, अवक्षेप और नई गंध। दोनों में कुल द्रव्यमान वही रहता है।
2. Astronomy and Earth science
Sky and Earth motions · Rocks and Earth structure
- पृथ्वी का घूर्णन और परिक्रमण – पृथ्वी की दो मुख्य गतियाँ हैं। घूर्णन: यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व लगभग 24 घंटे में एक बार घूमती है — इससे दिन-रात, सूरज का रोज़ का रास्ता, स्थानीय समय (हर घंटे 15° देशांतर) और हवाओं-धाराओं का मुड़ना (कोरिओलिस प्रभाव) होता है। परिक्रमण: यह दीर्घवृत्त कक्षा में सूर्य का लगभग 365¼ दिन में एक चक्कर लगाती है। अक्ष कक्षा-तल (क्रांतिवृत्त) के लंब से 23.5° झुका है और हमेशा एक दिशा में रहता है, इसलिए सिर के ऊपर का सूरज कर्क और मकर रेखा के बीच खिसकता है, दिन की लंबाई बदलती है, और ऋतुएँ, अयनांत व विषुव होते हैं।
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
3. Biology
Diversity and evolution of living things · Cells and body functions · Heredity · Health and environment
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
- स्वच्छता और सफ़ाई (Hygiene and Sanitation) – स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ़ बीमारी न होना नहीं, बल्कि शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों में ठीक रहना है। स्वास्थ्य के संकेत (indicators) हैं: उम्र के हिसाब से वज़न, ऊर्जा, अच्छी नींद और कम बीमार पड़ना। ग़लत खान-पान से कुपोषण होता है: अल्पपोषण (कम खाना या पोषक तत्व) या अतिपोषण (बहुत ज़्यादा, जिससे मोटापा)। स्वच्छता (hygiene) यानी साफ़ आदतें जो कीटाणु रोकें: व्यक्तिगत, भोजन और पर्यावरण स्वच्छता। सफ़ाई व्यवस्था (sanitation) यानी कचरे और गंदे पानी को सुरक्षित हटाना। पीने का पानी उबालकर, छानकर, क्लोरीन या दूसरे तरीकों से सुरक्षित बनाना चाहिए।