खनिज और उनकी पहचान
खनिज प्राकृतिक, निर्जीव और ठोस होता है, उसकी रासायनिक बनावट तय होती है और परमाणु व्यवस्थित क्रिस्टल में सजे होते हैं। क्वार्ट्ज़ (SiO2), हेलाइट (NaCl) और कैल्साइट (CaCO3) खनिज हैं। चट्टान खनिजों का मिश्रण है: ग्रेनाइट = क्वार्ट्ज़ + फ़ेल्डस्पार + अभ्रक।
पहचान के परीक्षण
- रंग: आसान पर धोखा दे सकता है (अशुद्धियाँ रंग बदलती हैं)।
- धारी (streak): टाइल पर रगड़ने से बने चूर्ण का रंग।
- चमक (lustre): धात्विक, काँच जैसी, फीकी।
- कठोरता: मोह्स पैमाना 1 (टैल्क) से 10 (हीरा); कठोर खनिज नरम को खरोंचता है।
- विदलन (cleavage): समतल सतहों पर टूटना (अभ्रक पतली परतों में उतरता है)।
- घनत्व और क्रिस्टल आकार।
भूवैज्ञानिक चट्टान की बहुत पतली परत काटकर ध्रुवण सूक्ष्मदर्शी (polarising microscope) से देखते हैं; ध्रुवित प्रकाश में हर खनिज अपने रंग दिखाता है।
चट्टान बनाने वाले खनिज और उपयोग
क्वार्ट्ज़ (काँच, इलेक्ट्रॉनिक्स), फ़ेल्डस्पार (चीनी मिट्टी), अभ्रक (विद्युत रोधन), कैल्साइट (सीमेंट), हेमेटाइट जैसे लौह अयस्क (इस्पात), बॉक्साइट (एल्युमिनियम)।
आग्नेय चट्टानें
पृथ्वी के अंदर गहराई में चट्टान पिघलकर मैग्मा बन सकती है। मैग्मा के ठंडा होकर जमने से आग्नेय चट्टान बनती है (अग्नि से बना नाम)।
- अंतर्वेधी (पातालीय): भूपर्पटी के अंदर धीरे ठंडी → बड़े क्रिस्टल। उदाहरण: ग्रेनाइट।
- बहिर्वेधी (ज्वालामुखीय): लावा सतह पर तेज़ ठंडा → छोटे क्रिस्टल या काँच। उदाहरण: बेसाल्ट, प्यूमिस (गैस के छेदों से भरा, पानी पर तैरता है), ऑब्सीडियन।
ज्वालामुखी और भूकंप पृथ्वी के अंदर की शक्तियों (अंतर्जात बल) से होते हैं, जो मैग्मा को भी ऊपर लाती हैं।
अवसादी और कायांतरित चट्टानें
अवसादी चट्टानें: अपक्षय चट्टानों को तोड़ता है; पानी, हवा और बर्फ़ कणों को बहा ले जाते हैं (अपरदन) और परतों में जमा करते हैं (निक्षेपण)। समय के साथ परतें दबती (संहनन) और जुड़ती (सीमेंटीकरण) हैं। उदाहरण: बलुआ पत्थर, शेल, चूना पत्थर, कोयला (पौधों के अवशेष से)। पुरानी परतें नीचे, नई ऊपर होती हैं, और कई में जीवाश्म होते हैं।
कायांतरित चट्टानें: गहराई की गरमी और दबाव खनिजों और बनावट को बिना पिघलाए बदल देते हैं। शेल → स्लेट, चूना पत्थर → संगमरमर, बलुआ पत्थर → क्वार्टज़ाइट, ग्रेनाइट → नीस। खनिज अक्सर पट्टियों में सज जाते हैं।
शैल चक्र और पृथ्वी की संरचना
पृथ्वी की पतली चट्टानी भूपर्पटी, गरम मैंटल और लोहे-निकल का क्रोड है। भूपर्पटी प्लेटों में बँटी है जो साल में कुछ सेंटीमीटर खिसकती हैं। जहाँ वे टकराती, खिंचती या सरकती हैं, वहाँ चट्टानें पिघलती हैं, पहाड़ बनकर उठती हैं या दब जाती हैं।
शैल चक्र: आग्नेय → अपक्षय और निक्षेपण → अवसादी → गरमी और दबाव → कायांतरित → पिघलना → मैग्मा → ठंडा होना → आग्नेय। छोटे रास्ते भी हैं: आग्नेय सीधे कायांतरित हो सकती है और कोई भी चट्टान घिस सकती है। खनिज संसाधन (अयस्क, कोयला, इमारती पत्थर) वहाँ मिलते हैं जहाँ इन प्रक्रियाओं ने उन्हें इकट्ठा किया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खनिज: तय बनावट और क्रिस्टल संरचना वाला प्राकृतिक, अकार्बनिक ठोस
- चट्टान: एक या अधिक खनिजों का प्राकृतिक मिश्रण
- आग्नेय: ठंडा मैग्मा/लावा (ग्रेनाइट, बेसाल्ट)
- अवसादी: दबी परतें (बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल, कोयला)
- कायांतरित: गरमी + दबाव से बदली (संगमरमर, स्लेट, नीस, क्वार्टज़ाइट)
- मोह्स पैमाना: टैल्क 1, जिप्सम 2, कैल्साइट 3, फ़्लोराइट 4, ऐपेटाइट 5, फ़ेल्डस्पार 6, क्वार्ट्ज़ 7, टोपाज़ 8, कोरंडम 9, हीरा 10
हल किए गए उदाहरण
1. एक खनिज काँच (कठोरता 5.5) को खरोंचता है पर टोपाज़ (8) से खरोंच जाता है। यह क्या हो सकता है?
चरण 1: यह 5.5 से कठोर है। चरण 2: 8 से नरम है। चरण 3: मोह्स पैमाने पर फ़ेल्डस्पार (6) या क्वार्ट्ज़ (7) फ़िट होते हैं। आगे का परीक्षण (विदलन, क्रिस्टल आकार) तय करता है: क्वार्ट्ज़ में विदलन नहीं और छह-फलकी क्रिस्टल होते हैं।
2. बेसाल्ट के दो नमूने: एक में क्रिस्टल दिखते नहीं, दूसरे में स्पंज जैसे छेद हैं। समझाइए।
दोनों लावा के सतह पर तेज़ ठंडा होने से बने, इसलिए क्रिस्टलों को बढ़ने का समय नहीं मिला। छेद वाला नमूना तब ठंडा हुआ जब लावा से गैस के बुलबुले निकल रहे थे।
3. समुद्र तल से 100 मीटर ऊँची चट्टान में सीपियों वाली परतें हैं। इससे क्या पता चलता है?
चरण 1: सीपियाँ और परतें बताती हैं कि अवसादी चट्टान समुद्र के नीचे बनी। चरण 2: सबसे नीचे की परतें सबसे पुरानी हैं। चरण 3: अब चट्टान ऊँचाई पर है, यानी बनने के बाद प्लेटों की हलचल ने उसे ऊपर उठाया।
आम गलतियाँ
- 'चट्टान' और 'खनिज' को एक ही समझना। चट्टान मिश्रण है; खनिज की बनावट तय होती है।
- यह मानना कि कायांतरित चट्टान पिघलकर बनती है। वह ठोस रहते हुए बदलती है; पिघलने से मैग्मा बनता है।
- सिर्फ़ रंग से खनिज पहचानना। धारी और कठोरता ज़्यादा भरोसेमंद हैं।
- कहना कि जीवाश्म आग्नेय चट्टान में मिलते हैं। वे लगभग हमेशा अवसादी चट्टान में होते हैं।