कायांतरण क्या है?
कायांतरण (काया = रूप, अंतरण = बदलना) किसी मौजूद चट्टान का गर्मी, दाब और तरलों से नई चट्टान में बदलना है, जबकि चट्टान ठोस रहती है। अंग्रेज़ी शब्द metamorphism भी इसी अर्थ का है।
शुरुआती चट्टान को मूल चट्टान (प्रोटोलिथ) कहते हैं। यह आग्नेय, अवसादी या दूसरी कायांतरित चट्टान भी हो सकती है।
कायांतरण लगभग 200 °C (इससे नीचे बस अवसाद दबकर जुड़ते हैं) से लगभग 700–850 °C (इससे ऊपर कई चट्टानें पिघलकर मैग्मा बनती हैं, जिससे आग्नेय चट्टान बनती है) के बीच होता है।
कायांतरण में:
- खनिज पुनः क्रिस्टलित होते हैं: छोटे कण बड़े बनते हैं।
- नई परिस्थितियों में स्थिर नए खनिज बनते हैं (जैसे अभ्रक, गार्नेट)।
- कण एक सीध में आ सकते हैं, जिससे नई बनावट बनती है।
कायांतरण के कारक
1. ताप
गर्मी गहराई में दबने से आती है (भूपर्पटी में हर km पर लगभग 25–30 °C बढ़ता है) या पास के मैग्मा से। गर्मी परमाणुओं को हिलने और क्रिस्टल दोबारा बनाने की ऊर्जा देती है।
2. दाब
- परिरोधी दाब: हर तरफ़ से बराबर, जैसे गोताखोर पर पानी का दबाव। चट्टान ज़्यादा ठोस होती है।
- दिशात्मक दाब: एक दिशा में ज़्यादा, जैसे दो प्लेटें आपस में धकेलें। कणों को चपटा कर सीध में लाता है।
3. रासायनिक सक्रिय तरल
घुले पदार्थों वाला गर्म पानी चट्टान से गुज़रता है, आयन लाता-ले जाता है और अभिक्रियाएँ तेज़ करता है।
4. समय
ज़्यादातर कायांतरण में लाखों साल लगते हैं।
पत्रित और अपत्रित चट्टानें
पत्रित चट्टानें
पत्रण परतदार या पट्टीदार रूप है जो तब बनता है जब चपटे या लंबे खनिज (जैसे अभ्रक) दिशात्मक दाब के आड़े सीध में आते हैं। कम से ऊँची श्रेणी (ताप और दाब की मात्रा) तक शेल ऐसे बदलती है:
- स्लेट: बहुत बारीक कण; पतली परतों में टूटती है। छत और लिखने की स्लेट में।
- फ़िलाइट: बारीक अभ्रक से रेशमी चमक।
- शिस्ट: बड़े, दिखने वाले अभ्रक के टुकड़े; अक्सर गार्नेट क्रिस्टल; चमचमाती है।
- नाइस: मोटे कण, हल्की पट्टियाँ (क्वार्ट्ज़, फ़ेल्सपार) और गहरी पट्टियाँ (अभ्रक, हॉर्नब्लेंड)।
अपत्रित चट्टानें
इनमें परतें नहीं होतीं। ये तब बनती हैं जब दाब हर तरफ़ बराबर हो या मूल चट्टान में मुख्यतः एक ही खनिज हो।
- संगमरमर: चूना पत्थर (कैल्साइट) से। तनु अम्ल डालने पर बुलबुले देता है। मूर्तियों और इमारतों में।
- क्वार्टज़ाइट: बलुआ पत्थर (क्वार्ट्ज़) से। बहुत कठोर; कणों के आर-पार टूटता है।
- हॉर्नफ़ेल्स: मैग्मा से पकी शेल, बारीक और कठोर।
अन्य जोड़ियाँ: ग्रेनाइट → नाइस, कोयला → एंथ्रेसाइट (बहुत ऊँची श्रेणी पर ग्रेफ़ाइट)।
कायांतरण के प्रकार और वे कहाँ होते हैं
क्षेत्रीय कायांतरण
बहुत बड़े क्षेत्रों (हज़ारों km²) में होता है जहाँ प्लेटें टकराती हैं और पर्वत बनते हैं। चट्टानें गहराई में धकेली और दबाई जाती हैं, इसलिए प्रायः पत्रित होती हैं। स्लेट, शिस्ट और नाइस की पट्टियाँ पुराने और नए पर्वतों के भीतरी भाग में मिलती हैं, जैसे हिमालय, आल्प्स और एपलाचियन।
संपर्क (तापीय) कायांतरण
गर्म मैग्मा पिंड के पास होता है। चट्टान मुख्यतः गर्म होती है, दबती नहीं, इसलिए प्रायः अपत्रित होती है। मैग्मा के आसपास बदले क्षेत्र को संपर्क परिवेश (ऑरिओल) कहते हैं; यह कुछ मीटर से कुछ किलोमीटर चौड़ा हो सकता है। मैग्मा के सबसे पास वाली चट्टान सबसे ज़्यादा बदलती है।
अन्य प्रकार
- अधोगमन क्षेत्र (ऊँचा दाब, कम ताप): ठंडी महासागरीय प्लेट तेज़ी से डूबती है, इसलिए दाब ताप से तेज़ बढ़ता है; ब्लूशिस्ट और एक्लोजाइट जैसी दुर्लभ चट्टानें बनती हैं।
- गतिक (भ्रंश) कायांतरण: भ्रंश पर घिसाव चट्टान को कुचलकर मायलोनाइट बनाता है।
- दफ़न कायांतरण: बेसिन में गहरी अवसाद परतों का धीमा बदलाव।
श्रेणी और सूचक खनिज
भूवैज्ञानिक सूचक खनिजों से श्रेणी पढ़ते हैं: क्लोराइट (कम), बायोटाइट, गार्नेट (मध्यम), सिलिमेनाइट (ऊँची)। इन्हें मानचित्र पर देखकर पता चलता है कि चट्टानें कभी कितनी गर्म और गहरी थीं।
शैल चक्र में कायांतरित चट्टानें
कोई भी चट्टान कायांतरित बन सकती है। और गर्म होने पर वह पिघलकर मैग्मा (आग्नेय) बनती है। ऊपर उठकर घिसने पर उसके टुकड़े अवसाद (अवसादी) बनते हैं। कायांतरित चट्टानें किसी क्षेत्र के इतिहास में हुई पुरानी प्लेट टक्करों के सुराग भी सँभाले रखती हैं।
करके देखो: एक प्रयोग
3D में: आख़िरी चरण में मूल चट्टान शेल रखो। अनुमान लगाओ कि 280 °C और तेज़ दबाव पर कौन-सी चट्टान बनेगी, फिर 650 °C पर। अब दबाव बंद करो: इसके बजाय क्या बना? फिर चूना पत्थर और बलुआ पत्थर आज़माओ।
घर पर (पत्रण का मॉडल): गूँधे आटे या प्ले-डो के गोले में कच्चे चावल या सेवइयों के छोटे टुकड़े मिलाओ ताकि वे हर दिशा में हों। गोले को दो भारी किताबों के बीच ज़ोर से दबाओ। काटकर देखो: टुकड़े अब दबाव के आड़े चपटे पड़े हैं। पत्रण ऐसे ही बनता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कायांतरण: ताप, दाब और तरलों से ठोस अवस्था में बदलाव (लगभग 200 °C से पिघलने तक)
- शेल → स्लेट → फ़िलाइट → शिस्ट → नाइस (बढ़ती श्रेणी, पत्रित)
- चूना पत्थर → संगमरमर; बलुआ पत्थर → क्वार्टज़ाइट; शेल + मैग्मा की गर्मी → हॉर्नफ़ेल्स (अपत्रित)
- ग्रेनाइट → नाइस; कोयला → एंथ्रेसाइट
- क्षेत्रीय: टक्कर, ताप + दिशात्मक दाब, पत्रित; संपर्क: मैग्मा के पास, ताप, अपत्रित
- पत्रण दिशात्मक दाब के आड़े (समकोण पर) बनता है
हल किए गए उदाहरण
1. एक चट्टान पतली सपाट परतों में टूटती है और उसके कण बहुत बारीक हैं। नाम और मूल चट्टान बताओ।
स्लेट, जो शेल से कम श्रेणी के क्षेत्रीय कायांतरण से बनी।
2. एक सफ़ेद चट्टान पर तनु अम्ल की बूँद डालने से बुलबुले बनते हैं, क्रिस्टल आपस में जुड़े हैं पर परतें नहीं। नाम बताओ।
संगमरमर। यह कैल्साइट से बना है (जो अम्ल से अभिक्रिया करता है) और चूना पत्थर से बना; अपत्रित।
3. नाइस में पट्टियाँ क्यों होती हैं पर संगमरमर में नहीं?
नाइस तेज़ दिशात्मक दाब में बनती है और उसमें कई खनिज होते हैं जो हल्की-गहरी पट्टियों में अलग हो जाते हैं। संगमरमर प्रायः लगभग शुद्ध कैल्साइट से, अक्सर बिना दिशात्मक दाब के बनता है, इसलिए पट्टी बनाने को कुछ नहीं।
4. मैग्मा बलुआ पत्थर की परत में ऊपर आता है। आसपास की चट्टान में क्या बदलाव होंगे?
मैग्मा की गर्मी बलुआ पत्थर को संपर्क परिवेश में क्वार्टज़ाइट में पका देती है। बदलाव मैग्मा के पास सबसे ज़्यादा और दूर जाकर कम होता है। क्वार्टज़ाइट अपत्रित है।
5. 15 km गहराई पर, सतह 15 °C और हर km पर 30 °C बढ़त हो तो तापमान? क्या कायांतरण संभव है?
15 + 30 × 15 = 465 °C। हाँ, यह कायांतरण की सीमा में है; दिशात्मक दाब से शेल शिस्ट बनेगी।
6. पर्वत पट्टी की शिस्ट में गार्नेट मिला। इससे भूवैज्ञानिक को क्या पता चलता है?
गार्नेट मध्यम श्रेणी का सूचक खनिज है, यानी चट्टान ने काफ़ी ऊँचा ताप और दाब झेला, शायद प्लेट टक्कर के समय।
आम गलतियाँ
- कहना कि कायांतरित चट्टानें पिघलकर बनती हैं। वे ठोस रहकर बदलती हैं; पिघलने से आग्नेय चट्टान बनती है।
- हर धारीदार चट्टान को अवसादी कह देना। नाइस की पट्टियाँ कायांतरण से बनती हैं, अवसाद की परतों से नहीं।
- क्रम स्लेट → फ़िलाइट → शिस्ट → नाइस में गड़बड़ करना।
- सोचना कि संपर्क कायांतरण पूरे क्षेत्र में होता है। यह मैग्मा के आसपास के एक घेरे (परिवेश) तक सीमित है।