South 고등학교 2학년 Earth Science
अध्याय: 3
1. Atmosphere-ocean interaction
Physical and chemical properties of seawater · Deep ocean circulation · Mid-latitude cyclones and anticyclones · Typhoons · El Niño and La Niña · Causes of climate change
- जल (महासागर): जलीय चक्र, महासागरीय तल, तापमान और लवणता – धरती का पानी महासागर, हवा, स्थल और जीवों के बीच लगातार घूमता है — यह जलीय चक्र है; लगभग 97% पानी महासागरों में है। महासागरीय तल के मुख्य भाग हैं — महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त (खाइयाँ) — और छोटे रूप जैसे मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला, निमग्न द्वीप (गुयॉट), अंतःसागरीय कैनियन, एटॉल और बैंक। सतह का पानी विषुवत के पास सबसे गरम और ध्रुवों की ओर ठंडा होता है; गहराई में ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) में तेज़ी से ठंडा होता है और नीचे 0–4 °C के पास रहता है। लवणता समुद्री पानी में नमक है, लगभग 35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35‰)। वाष्पीकरण से बढ़ती और बारिश, नदियों व पिघलती बर्फ़ से घटती है, इसलिए उपोष्ण क्षेत्रों और बंद गरम समुद्रों में ज़्यादा और विषुवत, ध्रुवों व नदी मुहानों के पास कम है।
- महासागरीय जल संचलन: तरंगें, ज्वार-भाटा और धाराएँ – महासागर का पानी तीन तरह से चलता है। तरंगें (लहरें) ज़्यादातर पवन से बनती हैं: ऊर्जा आगे जाती है जबकि पानी का हर कण छोटे वृत्त में घूमता है; उथले पानी में लहरें धीमी होकर टूटती हैं। ज्वार-भाटा समुद्र का नियमित चढ़ना-उतरना है, आमतौर पर दिन में दो बार, जो चंद्रमा (और सूर्य) के खिंचाव और पृथ्वी-चंद्रमा के घूमने से होता है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में हों (अमावस्या, पूर्णिमा) तो बहुत ऊँचे दीर्घ ज्वार; समकोण पर हों (अष्टमी) तो कमज़ोर लघु ज्वार। महासागरीय धाराएँ तय दिशा में बहती पानी की विशाल नदियाँ हैं, जिन्हें पवनें, गर्मी, गुरुत्व, लवणता और घनत्व का अंतर चलाते हैं और कोरिऑलिस बल मोड़ता है। गरम धाराएँ विषुवत से ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ ध्रुवों से विषुवत की ओर बहती हैं। धाराएँ तटों की जलवायु, मछली, कोहरा और जहाज़रानी बदलती हैं।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- पृथ्वी का भूगोल और जलवायु: वृष्टि छाया, एल नीनो और ला नीना – जलवायु भूगोल पर निर्भर है। अक्षांश तय करता है कितनी धूप पहुँचे; भूमध्य रेखा पर उठती और लगभग 30° पर उतरती हवा वर्षावन और रेगिस्तान बनाती है (हैडली कोष्ठ)। ऊँचाई पर हवा हर km पर लगभग 6.5 °C ठंडी होती है। महासागर धीरे गर्म-ठंडे होते हैं, इसलिए तटों की जलवायु नरम है, और धाराएँ गर्मी ढोती हैं। पहाड़ नम हवा को ऊपर उठाते हैं: हवा की ओर बारिश, पीछे सूखी वृष्टि छाया। एल नीनो में प्रशांत की व्यापारिक पवनें कमज़ोर होती हैं और गर्म पानी पूर्व की ओर फैलता है, जिससे दुनिया भर में बारिश खिसकती है; ला नीना उल्टा है — तेज़ पवनें और ठंडा पूर्वी प्रशांत।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
2. Earth history and rocks of the Korean Peninsula
Relative dating of strata · Geological periods · Magma and igneous rocks · Metamorphism · Korea's geoparks
- आग्नेय चट्टानें: गरम मैग्मा से ठोस पत्थर तक – पिघली हुई चट्टान ठंडी होकर जम जाए तो आग्नेय चट्टान बनती है। ज़मीन के अंदर पिघली चट्टान को मैग्मा और बाहर आने पर लावा कहते हैं। मैग्मा वहाँ बनता है जहाँ गर्मी बढ़े, दबाव घटे या पानी मिल जाए, ज़्यादातर प्लेटों की सीमाओं और हॉट स्पॉट पर। मैग्मा ठोस चट्टान से हल्का है, इसलिए ऊपर उठता है। अंदर धीरे ठंडा हो तो बड़े क्रिस्टल बनते हैं (अंतर्वेधी: ग्रेनाइट, गैब्रो)। सतह पर जल्दी ठंडा हो तो छोटे क्रिस्टल या काँच बनता है (बहिर्वेधी: बेसाल्ट, रायोलाइट, ओब्सीडियन, प्यूमिस)। सिलिका कम हो तो मैग्मा गहरा, गरम और पतला होता है और शांत बहता है; सिलिका ज़्यादा हो तो हल्का रंग, गाढ़ा, गैस फँसती है और विस्फोट होता है।
- कायांतरित चट्टानें और कायांतरण – कायांतरित चट्टानें तब बनती हैं जब कोई पहले से मौजूद चट्टान (मूल चट्टान) ऊँचे तापमान, ऊँचे दाब और गर्म तरलों से बदलती है, पर ठोस बनी रहती है। खनिज बढ़ते, बदलते और एक सीध में आते हैं। दिशात्मक दाब से पत्रित चट्टानें बनती हैं (स्लेट, फ़िलाइट, शिस्ट, नाइस); बिना दबाव की गर्मी से अपत्रित चट्टानें (संगमरमर, क्वार्टज़ाइट, हॉर्नफ़ेल्स)। क्षेत्रीय कायांतरण वहाँ होता है जहाँ प्लेटें टकराती हैं; संपर्क कायांतरण गर्म मैग्मा के पास।
3. Solar system bodies, stars and cosmic evolution
Eclipses in the Sun-Earth-Moon system · Spectral classes of stars · Stellar evolution by mass · Hubble's galaxy classification · Hubble-Lemaître law
- तारे: रंग, चमक, दूरी और H-R आरेख – तारा गर्म गैस का विशाल गोला है जो नाभिकीय संलयन से चमकता है। उसका रंग सतह का ताप बताता है: लाल तारे ठंडे, नीले तारे गर्म (वीन का नियम: λmax × T = 2.9 × 10⁻³ m K)। तारों को वर्णक्रमीय वर्गों O B A F G K M में बाँटा जाता है, सबसे गर्म से सबसे ठंडे तक। तारा कितना चमकीला दिखता है (आभासी कांतिमान), यह उसकी असली शक्ति (ज्योति) और दूरी पर निर्भर है, क्योंकि रोशनी 1/d² से घटती है। पास के तारों की दूरी लंबन से: d (पारसेक) = 1/p (आर्कसेकंड)। ज्योति आकार और ताप पर निर्भर है (L = 4πR²σT⁴)। H-R आरेख ज्योति को ताप के सामने दिखाता है: मुख्य अनुक्रम, दानव तारे और श्वेत वामन।
- तारे और आकाशगंगाएँ: तारे की रोशनी से बिग बैंग तक – तारों के बारे में हम जो भी जानते हैं, वह उनकी रोशनी से आता है। तारे के प्रकाश को स्पेक्ट्रम में तोड़ने पर काली रेखाएँ दिखती हैं, जो बताती हैं कि तारे में कौन-से तत्व हैं। रंग से ताप पता चलता है (नीला = गर्म, लाल = ठंडा), और तारों को O B A F G K M वर्गों में बाँटा जाता है। H-R आरेख में असली चमक को ताप के सामने दिखाते हैं: सूर्य समेत ज़्यादातर तारे मुख्य अनुक्रम पर हैं, दानव तारे ऊपर दाएँ और श्वेत वामन नीचे बाएँ। तारा नीहारिका में जन्म लेता है और द्रव्यमान उसका जीवन तय करता है: सूर्य जैसा तारा लाल दानव, फिर श्वेत वामन बनता है; लगभग 8 सूर्य से भारी तारा महादानव बनकर सुपरनोवा में फटता है और न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल छोड़ता है। तारे आकाशगंगाओं में रहते हैं, जो सर्पिल, दीर्घवृत्ताकार या अनियमित होती हैं। दूरियाँ बहुत बड़ी हैं, इसलिए खगोलीय इकाई, प्रकाश वर्ष और पारसेक काम आते हैं। आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, दूर वाली और तेज़ (हबल नियम)। यह और कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) मिलकर बताते हैं कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले बिग बैंग हुआ।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।