सबसे बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड
ब्रह्मांड विज्ञान पूरे ब्रह्मांड का अध्ययन है। दूरियाँ बहुत बड़ी हैं, इसलिए ख़ास इकाइयाँ लेते हैं:
- प्रकाश-वर्ष (ly): प्रकाश एक साल में जितनी दूरी तय करता है, लगभग 9.46 × 10¹⁵ m।
- पारसेक (pc): लगभग 3.26 ly = 3.09 × 10¹⁶ m। मेगापारसेक (Mpc) = दस लाख पारसेक।
तारे मिलकर आकाशगंगा बनाते हैं; हमारी मंदाकिनी (मिल्की वे) में कुछ सौ अरब तारे हैं। आकाशगंगाएँ समूहों (दसियों, जैसे एंड्रोमेडा वाला हमारा स्थानीय समूह) और गुच्छों (सैकड़ों से हज़ारों, गुरुत्व से बँधे) में रहती हैं। गुच्छे लंबे तंतुओं और चादरों के साथ महागुच्छ बनाते हैं, जिनके बीच लगभग ख़ाली रिक्तियाँ हैं। स्पंज जैसा यह ढाँचा कॉस्मिक वेब है। सबसे बड़े पैमाने (सैकड़ों Mpc) पर ब्रह्मांड हर जगह और हर दिशा में लगभग एक-सा दिखता है: यह ब्रह्मांडीय सिद्धांत है।
रेडशिफ़्ट और हबल का नियम
परमाणु तय तरंगदैर्ध्यों पर प्रकाश देते हैं (स्पेक्ट्रमी रेखाएँ)। दूर की आकाशगंगाओं के प्रकाश में ये रेखाएँ लंबी तरंगदैर्ध्य पर, लाल की ओर खिसकी दिखती हैं। यही अभिरक्त विस्थापन (रेडशिफ़्ट) है:
z = Δλ / λ₀, और प्रकाश से बहुत कम चाल के लिए z ≈ v / c।
1929 में एडविन हबल ने (वेस्टो स्लाइफ़र, हेनरिएटा लेविट और जॉर्ज लमैत्र के काम पर आगे बढ़कर) पाया कि आकाशगंगा जितनी दूर, रेडशिफ़्ट उतना बड़ा। यह हबल का नियम है:
v = H₀ d
H₀ हबल स्थिरांक है, लगभग 70 km s⁻¹ Mpc⁻¹: हर मेगापारसेक दूरी पर आकाशगंगा लगभग 70 km/s ज़्यादा तेज़ी से दूर जाती है। (अलग तरीकों से 67 से 73 के बीच मान मिलते हैं; वैज्ञानिक अभी इसका कारण खोज रहे हैं।)
सबसे अच्छी व्याख्या: अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। आकाशगंगाएँ किसी एक केंद्र से अंतरिक्ष में भाग नहीं रहीं; उनके बीच का अंतरिक्ष बढ़ रहा है, जैसे फूलते गुब्बारे पर बिंदु। उस अंतरिक्ष से गुज़रता प्रकाश भी खिंचता है: यही ब्रह्मांडीय रेडशिफ़्ट है। पास की आकाशगंगाएँ (जैसे एंड्रोमेडा) हमारी ओर भी आ सकती हैं क्योंकि कम दूरी पर गुरुत्व जीतता है।
बिग बैंग और उसके प्रमाण
अगर आज सब दूर जा रहा है तो पहले पास था। काफ़ी पीछे जाओ तो ब्रह्मांड अत्यंत गर्म और घना था। उस अवस्था से फैलाव ही बिग बैंग है। यह अंतरिक्ष के किसी एक बिंदु पर धमाका नहीं था; यह हर जगह एक साथ हुआ।
आयु का अनुमान: अगर आकाशगंगाएँ हमेशा एक ही चाल से चलतीं, तो साथ होने के बाद से समय t = d / v = 1 / H₀। H₀ = 70 km s⁻¹ Mpc⁻¹ से यह लगभग 14 अरब साल आता है। आधुनिक सटीक माप 13.8 अरब साल देते हैं।
तीन मुख्य प्रमाण:
- आकाशगंगाओं का रेडशिफ़्ट (हबल का नियम): ब्रह्मांड फैल रहा है।
- कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB): 1965 में पेंज़ियास और विल्सन ने खोजा। यह हर दिशा से आता हल्का माइक्रोवेव विकिरण है, लगभग 2.7 K के कृष्णिका (ब्लैक बॉडी) जैसा। यह बिग बैंग के लगभग 3,80,000 साल बाद छूटा प्रकाश है, जब ब्रह्मांड इतना ठंडा हुआ कि परमाणु बन सके; फिर फैलाव ने उसे माइक्रोवेव तक खींच दिया। इसकी छोटी-छोटी लहरें आज की आकाशगंगाओं के बीज थीं।
- हल्के तत्व: शुरू के कुछ मिनट नाभिकीय संलयन लायक गर्म थे, जिससे द्रव्यमान से लगभग 75% हाइड्रोजन और 25% हीलियम बनी, ठीक वैसा जैसा सबसे पुराने तारों और गैस बादलों में दिखता है।
छोटी समयरेखा: बिग बैंग → पहले सेकंड: कण → लगभग 3 मिनट: हाइड्रोजन और हीलियम नाभिक → लगभग 3,80,000 साल: परमाणु, CMB छूटा → लगभग 20–50 करोड़ साल: पहले तारे और आकाशगंगाएँ → 9.2 अरब साल: सूर्य और पृथ्वी → आज।
डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड का भविष्य
डार्क मैटर (अदृश्य द्रव्य): आकाशगंगा के किनारे के तारे दिखने वाले द्रव्य के गुरुत्व से जितना होना चाहिए, उससे बहुत तेज़ घूमते हैं (सपाट घूर्णन वक्र)। गुच्छे भी अपने दिखने वाले द्रव्यमान से ज़्यादा प्रकाश मोड़ते हैं (गुरुत्वीय लेंसिंग)। तो कोई अतिरिक्त अदृश्य द्रव्यमान होना चाहिए जो प्रकाश नहीं देता। यह क्या है, अभी पता नहीं।
डार्क एनर्जी: 1998 में दूर के टाइप Ia सुपरनोवा (जानी हुई चमक वाले फटते तारे) के अध्ययन से पता चला कि फैलाव तेज़ हो रहा है। इसका जो भी कारण है उसे डार्क एनर्जी कहते हैं।
आज ब्रह्मांड की रेसिपी (लगभग): सामान्य द्रव्य 5%, डार्क मैटर 27%, डार्क एनर्जी 68%।
ब्लैक होल ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ गुरुत्व इतना तेज़ है कि प्रकाश भी नहीं निकल सकता। सूर्य से लाखों-अरबों गुना भारी महाविशाल ब्लैक होल ज़्यादातर बड़ी आकाशगंगाओं के केंद्र में हैं, हमारी में भी।
भविष्य गुरुत्व और डार्क एनर्जी के संतुलन पर निर्भर है। मापी गई डार्क एनर्जी के साथ ब्रह्मांड शायद हमेशा फैलता रहेगा और ठंडा व अँधेरा होता जाएगा ('बिग फ़्रीज़')।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रेडशिफ़्ट: z = Δλ / λ₀ = (λ_देखी − λ₀) / λ₀
- v ≪ c के लिए: z ≈ v / c (c = 3.00 × 10⁵ km/s)
- हबल का नियम: v = H₀ d, H₀ ≈ 70 km s⁻¹ Mpc⁻¹
- हबल समय (आयु का अनुमान): t ≈ 1 / H₀ ≈ 977.8 / H₀ अरब वर्ष (H₀ km s⁻¹ Mpc⁻¹ में)
- 1 pc = 3.26 ly = 3.09 × 10¹⁶ m; 1 Mpc = 3.09 × 10²² m
- CMB के लिए वीन का नियम: λ_max = 2.9 × 10⁻³ m K / T
हल किए गए उदाहरण
1. एक आकाशगंगा 200 Mpc दूर है। H₀ = 70 km s⁻¹ Mpc⁻¹ लेकर उसकी दूर जाने की चाल निकालो।
v = H₀ d = 70 × 200 = 14 000 km/s।
2. एक आकाशगंगा 7 000 km/s से दूर जा रही है। वह कितनी दूर है (H₀ = 70)?
d = v / H₀ = 7 000 / 70 = 100 Mpc।
3. हाइड्रोजन की रेखा सामान्यतः 656.3 nm पर है पर 669.4 nm पर दिखती है। z और चाल निकालो।
Δλ = 13.1 nm। z = 13.1 / 656.3 ≈ 0.020। v ≈ z c = 0.020 × 3.00 × 10⁵ ≈ 6 000 km/s।
4. H₀ = 70 km s⁻¹ Mpc⁻¹ से ब्रह्मांड की आयु का अनुमान लगाओ।
1 Mpc = 3.09 × 10¹⁹ km। H₀ = 70 / 3.09 × 10¹⁹ = 2.27 × 10⁻¹⁸ s⁻¹। t = 1 / H₀ = 4.4 × 10¹⁷ s। एक साल = 3.16 × 10⁷ s से भाग दो: लगभग 1.4 × 10¹⁰ साल = 14 अरब साल।
5. CMB का ताप 2.7 K है। वह किस तरंगदैर्ध्य पर सबसे चमकीला है?
λ_max = 2.9 × 10⁻³ / 2.7 ≈ 1.1 × 10⁻³ m ≈ 1.1 mm: माइक्रोवेव।
6. अगर H₀ 70 की जगह 50 km s⁻¹ Mpc⁻¹ हो, तो अनुमानित आयु बढ़ेगी या घटेगी? कितनी?
t ≈ 977.8 / H₀। 50 पर लगभग 19.6 अरब साल; 70 पर लगभग 14.0 अरब साल। कम H₀ यानी धीमा फैलाव, तो ज़्यादा आयु (लगभग 5.6 अरब साल ज़्यादा)।
आम गलतियाँ
- बिग बैंग को ख़ाली अंतरिक्ष में एक बिंदु से धमाका समझना। अंतरिक्ष ख़ुद हर जगह एक साथ फैला।
- सब हमसे दूर जा रहे हैं, इसलिए हम केंद्र हैं, ऐसा सोचना। हर आकाशगंगा यही देखती है; कोई केंद्र नहीं।
- हबल के नियम में इकाइयाँ भूलना। H₀ km s⁻¹ Mpc⁻¹ में हो तो d को Mpc में रखो; आयु के लिए Mpc को km में बदलो।
- बहुत बड़े रेडशिफ़्ट पर z ≈ v/c लगाना। यह तभी ठीक है जब v, c से बहुत कम हो (z लगभग 0.1 से कम)।