South 고등학교 3학년 Earth Science I
अध्याय: 6
1. Changes in the geosphere
From drift to plate tectonics · Continents through time · Mantle convection and plumes · Magma at plate boundaries
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- आग्नेय चट्टानें: गरम मैग्मा से ठोस पत्थर तक – पिघली हुई चट्टान ठंडी होकर जम जाए तो आग्नेय चट्टान बनती है। ज़मीन के अंदर पिघली चट्टान को मैग्मा और बाहर आने पर लावा कहते हैं। मैग्मा वहाँ बनता है जहाँ गर्मी बढ़े, दबाव घटे या पानी मिल जाए, ज़्यादातर प्लेटों की सीमाओं और हॉट स्पॉट पर। मैग्मा ठोस चट्टान से हल्का है, इसलिए ऊपर उठता है। अंदर धीरे ठंडा हो तो बड़े क्रिस्टल बनते हैं (अंतर्वेधी: ग्रेनाइट, गैब्रो)। सतह पर जल्दी ठंडा हो तो छोटे क्रिस्टल या काँच बनता है (बहिर्वेधी: बेसाल्ट, रायोलाइट, ओब्सीडियन, प्यूमिस)। सिलिका कम हो तो मैग्मा गहरा, गरम और पतला होता है और शांत बहता है; सिलिका ज़्यादा हो तो हल्का रंग, गाढ़ा, गैस फँसती है और विस्फोट होता है।
2. Earth's history
Sedimentary structures · Geological structures · Relative dating · Absolute dating · Geological periods
- अवसादी चट्टानें: परत दर परत पत्थर बनना – अवसादी चट्टानें पृथ्वी की सतह पर पुरानी चट्टानों के टुकड़ों, पानी से निकले खनिजों या जीवों के अवशेषों से बनती हैं। अपक्षय चट्टान को अवसाद में तोड़ता है; नदी, हवा, बर्फ़ और लहरें उसे ले जाती हैं (अपरदन व परिवहन); बहाव धीमा होने पर अवसाद परतों (स्तर) में जमता है, आमतौर पर समुद्र, झील, नदी और रेगिस्तान में। सबसे नीचे की परत सबसे पुरानी (अध्यारोपण का नियम)। प्रसंघनन (diagenesis) ढीले अवसाद को चट्टान बनाता है: संघनन (ऊपर की परतों का भार दानों को दबाता और पानी निकालता है) और सीमेंटीकरण (कैल्साइट, सिलिका, आयरन ऑक्साइड जैसे खनिज दानों के बीच जमकर उन्हें जोड़ते हैं)। खंडज (clastic) चट्टानों के नाम दानों के आकार से: कॉन्ग्लोमरेट और ब्रेशिया (बजरी), बलुआ पत्थर (रेत), सिल्टस्टोन, शेल/मडस्टोन (मिट्टी)। रासायनिक चट्टानें पानी से खनिज निकलने पर: सेंधा नमक, जिप्सम, कुछ चूना पत्थर, चर्ट। जैविक चट्टानें जीवों के अवशेष से: कोयला, खड़िया, सीपियों वाला चूना पत्थर। ये ज़मीन की लगभग 75% सतह ढकती हैं, लगभग सभी जीवाश्म, तेल, गैस, कोयला और भूजल इन्हीं में है, और इनकी संरचनाएँ (परतें, तिरछी परतें, तरंग चिह्न, पंक दरारें, क्रमिक परतें) पुराने वातावरण की कहानी बताती हैं।
- भूवैज्ञानिक संरचनाएँ: वलन, भ्रंश और संधि – चट्टानों की परतें शुरू में समतल होती हैं। भूपर्पटी के बल उन्हें दबाते, खींचते या फिसलाते हैं। दबाव से परतें मुड़कर वलन बनाती हैं: मेहराब अपनति और गर्त अभिनति है। तेज़ बल से चट्टान टूटकर भ्रंश बनती है: खिंचाव से सामान्य भ्रंश (ऊपरी खंड नीचे), दबाव से उत्क्रमित भ्रंश (ऊपरी खंड ऊपर), और आड़ा फिसलन से नतिलंब भ्रंश। किसी क्षेत्र के वलन और भ्रंश अक्सर एक ही दिशा में होते हैं, जिसे संरचनात्मक प्रवृत्ति कहते हैं।
- रेडियोमीट्रिक काल-निर्धारण (Radiometric Dating) – सापेक्ष काल-निर्धारण चट्टानों और जीवाश्मों का क्रम बताता है (नीचे की परत आमतौर पर पुरानी)। निरपेक्ष (रेडियोमीट्रिक) काल-निर्धारण वर्षों में आयु देता है। क्रिस्टल बनते समय रेडियोधर्मी जनक परमाणु फँस जाते हैं, जो तय दर से संतति परमाणुओं में बदलते हैं। हर अर्ध-आयु में आधे जनक बचते हैं। आयु t = T½ × log₂(1 + D/P)।
3. Atmosphere and ocean change
Passing weather systems · Typhoons · Severe weather · Seawater properties
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- चरम मौसम – चरम मौसम वह है जो सामान्य से बहुत अलग हो: लू, शीत लहर, भारी बारिश और बाढ़, सूखा, चक्रवात, आँधी-तूफ़ान, ओले, भारी बर्फ़बारी और धूल भरी आँधी। गर्म होती दुनिया मौसम के पूरे ढेर को खिसका देती है, इसलिए बहुत गरम दिन और भारी बारिश ज़्यादा होने लगती हैं।
- जल (महासागर): जलीय चक्र, महासागरीय तल, तापमान और लवणता – धरती का पानी महासागर, हवा, स्थल और जीवों के बीच लगातार घूमता है — यह जलीय चक्र है; लगभग 97% पानी महासागरों में है। महासागरीय तल के मुख्य भाग हैं — महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त (खाइयाँ) — और छोटे रूप जैसे मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला, निमग्न द्वीप (गुयॉट), अंतःसागरीय कैनियन, एटॉल और बैंक। सतह का पानी विषुवत के पास सबसे गरम और ध्रुवों की ओर ठंडा होता है; गहराई में ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) में तेज़ी से ठंडा होता है और नीचे 0–4 °C के पास रहता है। लवणता समुद्री पानी में नमक है, लगभग 35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35‰)। वाष्पीकरण से बढ़ती और बारिश, नदियों व पिघलती बर्फ़ से घटती है, इसलिए उपोष्ण क्षेत्रों और बंद गरम समुद्रों में ज़्यादा और विषुवत, ध्रुवों व नदी मुहानों के पास कम है।
4. Atmosphere-ocean interaction
General circulation and surface currents · Deep ocean circulation · El Niño and upwelling · Causes of climate change
- महासागरीय जल संचलन: तरंगें, ज्वार-भाटा और धाराएँ – महासागर का पानी तीन तरह से चलता है। तरंगें (लहरें) ज़्यादातर पवन से बनती हैं: ऊर्जा आगे जाती है जबकि पानी का हर कण छोटे वृत्त में घूमता है; उथले पानी में लहरें धीमी होकर टूटती हैं। ज्वार-भाटा समुद्र का नियमित चढ़ना-उतरना है, आमतौर पर दिन में दो बार, जो चंद्रमा (और सूर्य) के खिंचाव और पृथ्वी-चंद्रमा के घूमने से होता है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में हों (अमावस्या, पूर्णिमा) तो बहुत ऊँचे दीर्घ ज्वार; समकोण पर हों (अष्टमी) तो कमज़ोर लघु ज्वार। महासागरीय धाराएँ तय दिशा में बहती पानी की विशाल नदियाँ हैं, जिन्हें पवनें, गर्मी, गुरुत्व, लवणता और घनत्व का अंतर चलाते हैं और कोरिऑलिस बल मोड़ता है। गरम धाराएँ विषुवत से ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ ध्रुवों से विषुवत की ओर बहती हैं। धाराएँ तटों की जलवायु, मछली, कोहरा और जहाज़रानी बदलती हैं।
- पृथ्वी का भूगोल और जलवायु: वृष्टि छाया, एल नीनो और ला नीना – जलवायु भूगोल पर निर्भर है। अक्षांश तय करता है कितनी धूप पहुँचे; भूमध्य रेखा पर उठती और लगभग 30° पर उतरती हवा वर्षावन और रेगिस्तान बनाती है (हैडली कोष्ठ)। ऊँचाई पर हवा हर km पर लगभग 6.5 °C ठंडी होती है। महासागर धीरे गर्म-ठंडे होते हैं, इसलिए तटों की जलवायु नरम है, और धाराएँ गर्मी ढोती हैं। पहाड़ नम हवा को ऊपर उठाते हैं: हवा की ओर बारिश, पीछे सूखी वृष्टि छाया। एल नीनो में प्रशांत की व्यापारिक पवनें कमज़ोर होती हैं और गर्म पानी पूर्व की ओर फैलता है, जिससे दुनिया भर में बारिश खिसकती है; ला नीना उल्टा है — तेज़ पवनें और ठंडा पूर्वी प्रशांत।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
5. Stars and exoplanet systems
Temperature and size from spectra · The H-R diagram · Evolution of Sun-like stars · Energy in main-sequence stars · Exoplanet detection · Life elsewhere
- तारे: रंग, चमक, दूरी और H-R आरेख – तारा गर्म गैस का विशाल गोला है जो नाभिकीय संलयन से चमकता है। उसका रंग सतह का ताप बताता है: लाल तारे ठंडे, नीले तारे गर्म (वीन का नियम: λmax × T = 2.9 × 10⁻³ m K)। तारों को वर्णक्रमीय वर्गों O B A F G K M में बाँटा जाता है, सबसे गर्म से सबसे ठंडे तक। तारा कितना चमकीला दिखता है (आभासी कांतिमान), यह उसकी असली शक्ति (ज्योति) और दूरी पर निर्भर है, क्योंकि रोशनी 1/d² से घटती है। पास के तारों की दूरी लंबन से: d (पारसेक) = 1/p (आर्कसेकंड)। ज्योति आकार और ताप पर निर्भर है (L = 4πR²σT⁴)। H-R आरेख ज्योति को ताप के सामने दिखाता है: मुख्य अनुक्रम, दानव तारे और श्वेत वामन।
- नाभिकीय संलयन – नाभिकीय संलयन में हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं और ऊर्जा निकलती है। सूर्य के क्रोड में लगभग 1.5 करोड़ °C पर चार हाइड्रोजन नाभिक चरणों में (प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला) जुड़कर एक हीलियम नाभिक बनाते हैं। हीलियम का द्रव्यमान चार हाइड्रोजन से लगभग 0.7% कम होता है; वह खोया द्रव्यमान E = mc² से ऊर्जा बन जाता है। गुरुत्व का अंदर दबाना और संलयन की गर्मी का बाहर धकेलना तारे को अरबों साल स्थिर रखता है।
- बाह्य ग्रह: दूसरे तारों के ग्रह कैसे खोजते हैं? – बाह्य ग्रह (exoplanet) वह ग्रह है जो हमारे सूर्य के अलावा किसी दूसरे तारे का चक्कर लगाता है। तारे के पास ग्रह बहुत छोटा और धुँधला होता है, इसलिए हम ज़्यादातर सुराग से उसे खोजते हैं। पारगमन विधि में ग्रह तारे के सामने से गुज़रता है और तारे की रोशनी लगभग (ग्रह का आकार / तारे का आकार) के वर्ग जितनी घटती है। त्रिज्य वेग (डगमगाहट) विधि में ग्रह के खिंचाव से तारा छोटे घेरे में हिलता है और उसकी रोशनी नीली-लाल खिसकती है। दो गिरावटों के बीच का समय ग्रह का साल बताता है। सीधा चित्र लेना और सूक्ष्म-लेंसन भी तरीके हैं। 5,000 से ज़्यादा बाह्य ग्रह मिल चुके हैं।
- खगोल-जीवविज्ञान: क्या पृथ्वी के बाहर जीवन है? – खगोल-जीवविज्ञान (astrobiology) वह विज्ञान है जो पूछता है कि क्या पृथ्वी के बाहर जीवन है। जैसा जीवन हम जानते हैं, उसे द्रव पानी, ऊर्जा और कार्बन रसायन चाहिए। वासयोग्य (गोल्डीलॉक्स) क्षेत्र तारे से दूरी का वह हिस्सा है जहाँ ग्रह पर पानी द्रव रह सके। वैज्ञानिक मंगल, यूरोपा और एन्सेलेडस जैसे बर्फ़ीले उपग्रहों और हज़ारों बाह्य ग्रहों में खोज करते हैं, उनकी हवा में जैव-संकेत ढूँढते हैं और संकेत सुनते हैं (SETI)। ड्रेक समीकरण बात करने वाली सभ्यताओं की संख्या का अनुमान लगाता है; फ़र्मी विरोधाभास पूछता है कि फिर कोई सुनाई क्यों नहीं देता।
6. Galaxies and cosmic expansion
Galaxy types · Big Bang evidence · Dark matter and dark energy
- तारे और आकाशगंगाएँ: तारे की रोशनी से बिग बैंग तक – तारों के बारे में हम जो भी जानते हैं, वह उनकी रोशनी से आता है। तारे के प्रकाश को स्पेक्ट्रम में तोड़ने पर काली रेखाएँ दिखती हैं, जो बताती हैं कि तारे में कौन-से तत्व हैं। रंग से ताप पता चलता है (नीला = गर्म, लाल = ठंडा), और तारों को O B A F G K M वर्गों में बाँटा जाता है। H-R आरेख में असली चमक को ताप के सामने दिखाते हैं: सूर्य समेत ज़्यादातर तारे मुख्य अनुक्रम पर हैं, दानव तारे ऊपर दाएँ और श्वेत वामन नीचे बाएँ। तारा नीहारिका में जन्म लेता है और द्रव्यमान उसका जीवन तय करता है: सूर्य जैसा तारा लाल दानव, फिर श्वेत वामन बनता है; लगभग 8 सूर्य से भारी तारा महादानव बनकर सुपरनोवा में फटता है और न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल छोड़ता है। तारे आकाशगंगाओं में रहते हैं, जो सर्पिल, दीर्घवृत्ताकार या अनियमित होती हैं। दूरियाँ बहुत बड़ी हैं, इसलिए खगोलीय इकाई, प्रकाश वर्ष और पारसेक काम आते हैं। आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, दूर वाली और तेज़ (हबल नियम)। यह और कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) मिलकर बताते हैं कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले बिग बैंग हुआ।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।
- डार्क मैटर: आकाशगंगाओं को बाँधे रखने वाला अदृश्य द्रव्यमान – आकाशगंगा के केंद्र से दूर के तारे लगभग उतनी ही तेज़ी से घूमते हैं जितनी तेज़ी से पास के तारे। अगर केवल दिखने वाला पदार्थ खींचता, तो दूर के तारे धीमे होने चाहिए थे। यह समतल घूर्णन वक्र बताता है कि अतिरिक्त, अदृश्य द्रव्यमान है: डार्क मैटर (श्याम पदार्थ)। वह न चमकता है, न रोशनी रोकता है, पर उसका गुरुत्व असली है। ब्रह्मांड का आज का सबसे अच्छा चित्र है: लगभग 5% साधारण पदार्थ, 27% डार्क मैटर और 68% डार्क एनर्जी, जो फैलाव को तेज़ करती है।