अवसादी चट्टानें क्या हैं?
अवसाद यानी नीचे बैठने वाले कण: कंकड़, रेत, कीचड़, सीपियाँ, या पानी से निकले खनिज। जब अवसाद जमा होकर सख़्त हो जाता है तो अवसादी चट्टान बनती है।
ये पृथ्वी की सतह पर या उसके पास, सामान्य तापमान पर बनती हैं। यह आग्नेय चट्टानों (पिघली चट्टान के ठंडा होने से) और कायांतरित चट्टानों (ताप और दाब से बदली) से बिल्कुल अलग है।
मुख्य बातें:
- भूपर्पटी के आयतन का सिर्फ़ ~5% हैं, पर पतली परत की तरह ज़मीन की लगभग 75% सतह ढकती हैं।
- ये आमतौर पर परतों में होती हैं, जिन्हें संस्तर या स्तर (strata) कहते हैं।
- सिर्फ़ इन्हीं में आमतौर पर जीवाश्म मिलते हैं।
- दुनिया का ज़्यादातर कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और बहुत-सा भूजल इन्हीं में है; बलुआ पत्थर, चूना पत्थर (सीमेंट के लिए) और मिट्टी जैसी निर्माण सामग्री भी।
अवसाद चट्टान कैसे बनता है: अपक्षय से प्रसंघनन तक
- अपक्षय (weathering): चट्टान अपनी जगह टूटती है। भौतिक: दरारों में पानी जमना, गरम-ठंडा होना, जड़ें। रासायनिक: बारिश का पानी (हल्का अम्ल) खनिज घोलता या बदलता है, जैसे फ़ेल्डस्पार से मिट्टी बनना।
- अपरदन और परिवहन: नदी, हवा, हिमनद, लहरें और गुरुत्व टुकड़ों को ले जाते हैं। रास्ते में दाने गोल होते हैं और आकार के अनुसार छँटते हैं (तेज़ पानी बड़े दाने ले जाता है, धीमा सिर्फ़ बारीक)।
- निक्षेपण (deposition): पानी या हवा धीमी होते ही दाने बैठते हैं। बड़े पहले, कीचड़ आख़िर में। परत पर परत बनती है।
- प्रसंघनन (diagenesis), यानी कम तापमान पर अवसाद को चट्टान बनाने वाले सारे बदलाव:
- संघनन (compaction): ऊपर की परतों का भार दानों को दबाता है। रिक्त स्थान और पानी घटते हैं; कीचड़ का आयतन आधे से भी कम हो सकता है।
- सीमेंटीकरण (cementation): छिद्रों में बहता पानी खनिज छोड़ता है, मुख्यतः कैल्साइट, सिलिका (क्वार्ट्ज़) और आयरन ऑक्साइड (जो चट्टान को लाल रंग देता है)। ये क्रिस्टल दानों को जोड़ते हैं। इसे शिलीभवन (lithification) कहते हैं।
अगर चट्टान और गहरी दबे और ज़्यादा गरम हो (लगभग 200 °C से ऊपर), तो प्रसंघनन ख़त्म होकर कायांतरण शुरू होता है।
अवसादी चट्टानों के प्रकार
1. खंडज (clastic) चट्टानें: टूटे टुकड़ों से
| दाने का आकार | अवसाद | चट्टान |
|---|---|---|
| > 2 mm | बजरी, कंकड़ | कॉन्ग्लोमरेट (गोल), ब्रेशिया (नुकीले) |
| 1/16 – 2 mm | रेत | बलुआ पत्थर |
| 1/256 – 1/16 mm | गाद (silt) | सिल्टस्टोन |
| < 1/256 mm | मिट्टी, कीचड़ | शेल (पतली परतों में टूटे), मडस्टोन |
2. रासायनिक चट्टानें: पानी से निकले खनिज
पानी भाप बने या उसका रसायन बदले, तो घुले खनिज अवक्षेपित होते हैं: समुद्र या खारी झील सूखने पर सेंधा नमक (हैलाइट) और जिप्सम (वाष्पज चट्टानें); कैल्शियम कार्बोनेट से कुछ चूना पत्थर और ट्रैवर्टीन; सिलिका से चर्ट और फ़्लिंट।
3. जैविक चट्टानें: जीवों से
कोयला दलदल में दबे पौधों से बनता है (पीट → लिग्नाइट → बिटुमिनस कोयला)। खड़िया (chalk) और सीपियों वाला चूना पत्थर समुद्री जीवों के खोल और कंकाल से; प्रवाल भित्तियाँ भी चूना पत्थर बनाती हैं।
निक्षेपण का वातावरण
चट्टान का प्रकार बताता है कि वह कहाँ बनी:
- पहाड़ी नदी, जलोढ़ पंख: तेज़ पानी, मोटी बजरी → कॉन्ग्लोमरेट, ब्रेशिया।
- नदी और डेल्टा: रेत और कीचड़ → बलुआ पत्थर और शेल।
- समुद्र तट: अच्छी तरह छँटी गोल रेत → साफ़ बलुआ पत्थर।
- रेगिस्तान: हवा से उड़ी रेत, बड़े टीले → बड़ी तिरछी परतों वाला लाल बलुआ पत्थर।
- झील और गहरा समुद्र: शांत पानी, बारीक कीचड़ → शेल; गहरे समुद्र का पंक → खड़िया, चर्ट।
- गरम उथला समुद्र, प्रवाल: सीपियाँ और प्रवाल → चूना पत्थर।
- गरम सूखे लैगून, खारी झील: वाष्पन → सेंधा नमक, जिप्सम।
- दलदल: पौधे → कोयला।
- हिमनद: बिना छँटा बोल्डर-मिट्टी मिश्रण → टिलाइट।
अवसादी संरचनाएँ: अतीत को पढ़ना
अवसादी परतें पत्थर में लिखी डायरी जैसी हैं:
- संस्तरण (bedding): परतें, हर परत निक्षेपण का एक समय। अध्यारोपण के नियम से, बिना छेड़ी परतों में सबसे पुरानी नीचे और सबसे नई ऊपर। परतें समतल बिछती हैं; झुकी या मुड़ी परतें बाद में हिलीं।
- तरंग चिह्न (ripple marks): रेत पर पानी या हवा से बनी छोटी लहरदार धारियाँ। सममित तरंगें आगे-पीछे चलती लहरों से (समुद्र तट, झील किनारा); असममित तरंगें एक दिशा की धारा से, जिनकी खड़ी ढलान धारा की दिशा में होती है, इसलिए वे बहाव की दिशा बताती हैं।
- तिरछी परतें (cross-bedding): परत के अंदर पतली ढलवाँ परतें, चलते टीलों या रेत के टापुओं से। ढलान हवा या पानी की दिशा बताती है।
- क्रमिक संस्तरण (graded bedding): नीचे मोटे दाने, ऊपर बारीक, धीमे होते बहाव से (जैसे पानी के नीचे कीचड़ का बहाव)। इससे पता चलता है कि 'ऊपर' कौन-सी दिशा थी।
- पंक दरारें (mud cracks): गीला कीचड़ धूप में सूखने से बहुभुज दरारें: सूखे किनारे या झील का संकेत।
- जीवाश्म और बारिश की बूँदों के निशान: पुराना जीवन और जलवायु।
करके देखो: बोतल में परतें बनाओ
एक पारदर्शी बोतल में मुट्ठी भर छोटे कंकड़, रेत और मिट्टी डालो, पानी भरो, ढक्कन लगाकर ज़ोर से हिलाओ। रखकर 10 मिनट देखो, फिर रात भर छोड़ दो। पहले कंकड़, फिर रेत, फिर ऊपर बारीक कीचड़ बैठेगा: क्रमिक संस्तरण। पानी को एक दिशा में धीरे घुमाओ और रेत पर तरंगें देखो। फिर एक कप में गीली रेत और मिट्टी की परतों पर वज़न रखो और पानी निकलते देखो (संघनन)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अपक्षय → अपरदन/परिवहन → निक्षेपण → संघनन → सीमेंटीकरण = अवसादी चट्टान
- प्रसंघनन = संघनन + सीमेंटीकरण (+ कम ताप के दूसरे बदलाव)
- दाने: बजरी > 2 mm, रेत 1/16–2 mm, गाद 1/256–1/16 mm, मिट्टी < 1/256 mm
- अध्यारोपण का नियम: नीचे की परत = पुरानी (अगर उलटी न हो)
- तेज़ पानी → बड़े दाने जमते हैं; धीमा पानी → बारीक दाने
हल किए गए उदाहरण
1. एक चट्टान में 1–3 cm के गोल कंकड़ रेतीले सीमेंट में जुड़े हैं। नाम और संभावित वातावरण बताओ।
2 mm से बड़े गोल दाने सीमेंट में = कॉन्ग्लोमरेट। गोलाई का मतलब तेज़ पानी में लंबा सफ़र, जैसे पहाड़ी नदी या कंकड़ों वाला तट।
2. शेल की परत बलुआ पत्थर पर है, और बलुआ पत्थर कॉन्ग्लोमरेट पर (उलटी नहीं)। सबसे पुरानी कौन-सी है, और पानी समय के साथ कैसे बदला?
नीचे का कॉन्ग्लोमरेट सबसे पुराना (अध्यारोपण)। ऊपर की ओर दाने कंकड़ से रेत से कीचड़ होते गए, यानी पानी समय के साथ शांत होता गया, जैसे समुद्र-तल बढ़ना या नदी का धीमा होना।
3. 60% पानी वाली 10 m मोटी कीचड़ की परत 10% पानी वाले शेल में बदलती है। सिर्फ़ पानी निकले तो नई मोटाई का अनुमान लगाओ।
ठोस भाग = 10 m का 40% = 4 m। शेल में ठोस 90% है, तो मोटाई ≈ 4 ÷ 0.9 ≈ 4.4 m। संघनन ने इसे आधे से भी कम कर दिया।
4. कैसे पता करें कि पुराने तरंग चिह्न लहरों से बने या नदी की धारा से?
लहरों के तरंग चिह्न सममित, नुकीले शिखर वाले (आगे-पीछे गति)। धारा के तरंग चिह्न असममित: ऊपर की ओर धीमी ढलान, नीचे की ओर खड़ी ढलान, जिससे धारा की दिशा भी पता चलती है।
5. कुछ रेगिस्तानों के नीचे सैकड़ों मीटर मोटी सेंधा नमक और जिप्सम की परतें क्यों मिलती हैं?
ये वाष्पज चट्टानें हैं। गरम जलवायु में एक उथला समुद्र या खारी झील बार-बार भरती और सूखती रही; हर बार घुले लवण अवक्षेपित हुए। मोटी परतें बताती हैं कि यह बहुत लंबे समय तक दोहराया गया।
आम गलतियाँ
- सोचना कि अवसादी चट्टान ठंडे मैग्मा से बनती है। वह आग्नेय चट्टान है; अवसादी चट्टान सतह पर अवसाद से बनती है।
- सोचना कि सिर्फ़ संघनन से हर चट्टान बनती है। रेत को सीमेंटीकरण भी चाहिए; संघनन मुख्यतः कीचड़ को सख़्त करता है।
- सोचना कि ऊपर की परत सबसे पुरानी है। बिना छेड़ी परतों में नीचे वाली सबसे पुरानी (अध्यारोपण)।
- सोचना कि हर चूना पत्थर रासायनिक है। बहुत-सा चूना पत्थर जैविक है, सीपियों और प्रवाल से बना।