Spain 2º Bachillerato Geology and Environmental Sciences
अध्याय: 7
1. Experimentation in Geology and Environmental Sciences
Geological and environmental information sources · Instruments for geological fieldwork · Science communication and collaboration · Representing geological information · Geological and environmental heritage · Scientists and their contributions · History of geological science
- मानचित्र कौशल: नक्शे पढ़ना और इस्तेमाल करना – मानचित्र (map) किसी जगह का ठीक ऊपर से देखा गया, छोटा किया गया चपटा चित्र है। इसे पढ़ने के लिए चाहिए: संकेत-सूची (चिह्न), मापनी (दूरी नापने के लिए), दिशा (दिशा-बिंदु और दिकमान), ग्रिड संदर्भ (जगह ढूँढने और बताने के लिए) और समोच्च रेखाएँ (ऊँचाई और ढलान देखने के लिए)। आज GPS उपग्रहों से हमारी जगह बताता है, और GIS कंप्यूटर पर आँकड़ों की कई परतें जोड़कर जगहों के बारे में सवालों के जवाब देता है।
- प्रयोगशाला सुरक्षा और सुरक्षित प्रयोग – सुरक्षा पहनावा (गॉगल्स, कोट, बंद जूते, बँधे बाल)। लेबल और ख़तरा चिह्न पढ़ें। परखनली का मुँह दूर रखकर धीरे गरम करें। अम्ल को पानी में डालें, गंध हवा करके लें, कभी न चखें। हर दुर्घटना तुरंत बताएँ। प्रयोग की योजना बनाएँ, पहले जोखिम आँकें और कचरा सही जगह डालें।
- विज्ञान संचार: वैज्ञानिक नतीजे बताना और परखना – विज्ञान संचार का मतलब है खोजों को साफ़ और ईमानदारी से बताना, और दूसरों के दावों को परखना। संदेश को श्रोता के हिसाब से ढालिए, पर तथ्य मत बदलिए। रिपोर्ट और पोस्टर का क्रम होता है: प्रश्न, विधि, नतीजे, सीमाओं के साथ निष्कर्ष, संदर्भ। ग्राफ़ में शीर्षक, नाम लिखे अक्ष और इकाइयाँ चाहिए। प्रदर्शन और प्रदर्शनी में विचार को चलता हुआ दिखाइए और सवाल बुलाइए। मीडिया में दावे अक्सर सबूत से बड़े हो जाते हैं, और सिद्धांत जैसे रोज़ के शब्दों का विज्ञान में अलग अर्थ है। स्रोत, सबूत, नमूने का आकार और दूसरों की पुष्टि जाँचिए।
- भूवैज्ञानिक मानचित्र: ऊपर से चट्टानें पढ़ना – भूवैज्ञानिक मानचित्र रंगों और चिह्नों से बताता है कि ज़मीन की सतह पर कौन-सी चट्टान है। परतें एक के ऊपर एक जमती हैं, इसलिए नीचे की परत आमतौर पर पुरानी होती है (अध्यारोपण का नियम)। झुकी परत को नति-लंब (strike, परत पर समतल रेखा की दिशा) और नति (dip, झुकाव का कोण और दिशा) से बताते हैं। भ्रंश (fault) वह दरार है जहाँ चट्टान खिसकी है। अनुप्रस्थ काट ज़मीन को केक की तरह काटकर अंदर दिखाता है, और स्तरिक स्तंभ परतों को उम्र के क्रम में दिखाता है।
- विज्ञान की प्रकृति: वैज्ञानिक ज्ञान कैसे बनता और बदलता है – विज्ञान जानने का एक तरीका है जो ऐसे साक्ष्य पर टिका है जिसे कोई भी जाँच सकता है। वैज्ञानिक प्रेक्षण करते हैं, अनुमान लगाते हैं, ऐसे विचार परखते हैं जो गलत भी साबित हो सकें, और दूसरे विशेषज्ञों से अपना काम जँचवाते हैं। नियम बताते हैं क्या होता है; सिद्धांत बताते हैं क्यों। वैज्ञानिक ज्ञान भरोसेमंद है पर हमेशा बदलाव के लिए खुला, और कभी-कभी देखने का पूरा ढाँचा (प्रतिमान) ही बदल जाता है।
2. Plate tectonics and internal geodynamics
Internal geodynamics and plate tectonics · The Wilson cycle · Present-day internal geodynamics · Rock deformation · Internal processes and natural hazards
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
3. External geological processes
External geological processes · Landforms and their controls · External processes and natural hazards
- भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ: बल धरातल को कैसे बनाते और घिसते हैं – पृथ्वी की सतह को दो तरह के बल आकार देते हैं। अंतर्जनित बल अंदर से आते हैं, पृथ्वी की भीतरी गर्मी से: पटल विरूपण (वलन, भ्रंशन, उत्थान, धँसाव) और ज्वालामुखीयता ज़मीन ऊपर बनाते हैं। बहिर्जनिक बल बाहर से आते हैं, सूर्य और गुरुत्व से: अपक्षय चट्टान को उसी जगह तोड़ता है, बृहत् संचलन उसे ढलान से नीचे ले जाता है, और बहता पानी, हवा, हिमनद और लहरें अपरदन और निक्षेपण करके ऊँची ज़मीन को धीरे-धीरे नीचा करते हैं। टूटी चट्टान में पौधे और सूक्ष्म जीव लंबे समय में मिट्टी बनाते हैं। मूल चट्टान, जलवायु, उच्चावच, जीव और समय तय करते हैं कि कैसी मिट्टी बनेगी।
- स्थलरूप: पृथ्वी की सतह कैसे बनती है – पृथ्वी की परतें हैं: भूपर्पटी, मैंटल, बाहरी कोर और आंतरिक कोर। भूपर्पटी प्लेटों में टूटी है जो धीरे-धीरे खिसकती हैं। प्लेटें धकेलें, खिंचें या सरकें तो पर्वत, घाटियाँ, भूकंप और ज्वालामुखी बनते हैं। सतह पर अपक्षय चट्टानें तोड़ता है और नदी, हवा, हिमनद, लहरें जैसे कारक टुकड़ों को ले जाते (अपरदन) और छोड़ते (निक्षेपण) हैं। भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन, GLOF और धूल भरी आँधी प्राकृतिक आपदाएँ हैं जिनके लिए हम तैयारी कर सकते हैं।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
4. Minerals, the components of rocks
Concept of mineral · Chemical-structural classification of minerals · Identifying minerals by physical properties · Phase diagrams of minerals
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
- सिलिकेट खनिज: एक छोटी ईंट से बनी पृथ्वी की पपड़ी – सिलिकेट खनिज सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बने खनिज हैं। इनकी मूल ईंट SiO₄ चतुष्फलक है: बीच में 1 सिलिकॉन और चारों ओर 4 ऑक्सीजन। ये ईंटें अकेली रह सकती हैं या ऑक्सीजन साझा करके चेन, परत या 3D ढाँचा बना सकती हैं। जुड़ने का तरीका खनिज का आकार, विदलन (क्लीवेज) और कठोरता तय करता है। पृथ्वी की पपड़ी का 90% से ज़्यादा हिस्सा सिलिकेट है।
5. Igneous, sedimentary and metamorphic rocks
Concept of rock · Classifying rocks by origin · Identifying rocks · Magmas and volcanism · Diagenesis and sedimentary rocks · Metamorphic rocks · The rock cycle
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
- आग्नेय चट्टानें: गरम मैग्मा से ठोस पत्थर तक – पिघली हुई चट्टान ठंडी होकर जम जाए तो आग्नेय चट्टान बनती है। ज़मीन के अंदर पिघली चट्टान को मैग्मा और बाहर आने पर लावा कहते हैं। मैग्मा वहाँ बनता है जहाँ गर्मी बढ़े, दबाव घटे या पानी मिल जाए, ज़्यादातर प्लेटों की सीमाओं और हॉट स्पॉट पर। मैग्मा ठोस चट्टान से हल्का है, इसलिए ऊपर उठता है। अंदर धीरे ठंडा हो तो बड़े क्रिस्टल बनते हैं (अंतर्वेधी: ग्रेनाइट, गैब्रो)। सतह पर जल्दी ठंडा हो तो छोटे क्रिस्टल या काँच बनता है (बहिर्वेधी: बेसाल्ट, रायोलाइट, ओब्सीडियन, प्यूमिस)। सिलिका कम हो तो मैग्मा गहरा, गरम और पतला होता है और शांत बहता है; सिलिका ज़्यादा हो तो हल्का रंग, गाढ़ा, गैस फँसती है और विस्फोट होता है।
- अवसादी चट्टानें: परत दर परत पत्थर बनना – अवसादी चट्टानें पृथ्वी की सतह पर पुरानी चट्टानों के टुकड़ों, पानी से निकले खनिजों या जीवों के अवशेषों से बनती हैं। अपक्षय चट्टान को अवसाद में तोड़ता है; नदी, हवा, बर्फ़ और लहरें उसे ले जाती हैं (अपरदन व परिवहन); बहाव धीमा होने पर अवसाद परतों (स्तर) में जमता है, आमतौर पर समुद्र, झील, नदी और रेगिस्तान में। सबसे नीचे की परत सबसे पुरानी (अध्यारोपण का नियम)। प्रसंघनन (diagenesis) ढीले अवसाद को चट्टान बनाता है: संघनन (ऊपर की परतों का भार दानों को दबाता और पानी निकालता है) और सीमेंटीकरण (कैल्साइट, सिलिका, आयरन ऑक्साइड जैसे खनिज दानों के बीच जमकर उन्हें जोड़ते हैं)। खंडज (clastic) चट्टानों के नाम दानों के आकार से: कॉन्ग्लोमरेट और ब्रेशिया (बजरी), बलुआ पत्थर (रेत), सिल्टस्टोन, शेल/मडस्टोन (मिट्टी)। रासायनिक चट्टानें पानी से खनिज निकलने पर: सेंधा नमक, जिप्सम, कुछ चूना पत्थर, चर्ट। जैविक चट्टानें जीवों के अवशेष से: कोयला, खड़िया, सीपियों वाला चूना पत्थर। ये ज़मीन की लगभग 75% सतह ढकती हैं, लगभग सभी जीवाश्म, तेल, गैस, कोयला और भूजल इन्हीं में है, और इनकी संरचनाएँ (परतें, तिरछी परतें, तरंग चिह्न, पंक दरारें, क्रमिक परतें) पुराने वातावरण की कहानी बताती हैं।
- कायांतरित चट्टानें और कायांतरण – कायांतरित चट्टानें तब बनती हैं जब कोई पहले से मौजूद चट्टान (मूल चट्टान) ऊँचे तापमान, ऊँचे दाब और गर्म तरलों से बदलती है, पर ठोस बनी रहती है। खनिज बढ़ते, बदलते और एक सीध में आते हैं। दिशात्मक दाब से पत्रित चट्टानें बनती हैं (स्लेट, फ़िलाइट, शिस्ट, नाइस); बिना दबाव की गर्मी से अपत्रित चट्टानें (संगमरमर, क्वार्टज़ाइट, हॉर्नफ़ेल्स)। क्षेत्रीय कायांतरण वहाँ होता है जहाँ प्लेटें टकराती हैं; संपर्क कायांतरण गर्म मैग्मा के पास।
6. The fluid layers of the Earth
Atmosphere and hydrosphere · Air and water pollution
- वायुमंडल का संघटन तथा संरचना – वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा की मोटी चादर है, जिसे गुरुत्व पकड़े रखता है। इसमें ज़्यादातर नाइट्रोजन (78%) और ऑक्सीजन (21%) है; थोड़ी आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओज़ोन, जलवाष्प और धूल भी है। इसकी पाँच परतें हैं: क्षोभमंडल (मौसम यहीं), समतापमंडल (ओज़ोन परत), मध्यमंडल (सबसे ठंडा), तापमंडल (आयनमंडल) और बहिर्मंडल। मौसम थोड़े समय की हालत है, जलवायु लगभग 30 साल का औसत। दोनों के तत्व एक ही हैं: तापमान, दाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षण।
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
7. Resources and their sustainable management
Geological and biological resources · Resource, deposit and reserve · Impacts of resource exploitation · Water resources · Soil properties and importance · Soil and water degradation · Exploiting rocks, minerals and energy · Waste prevention and management · Measures against resource impacts
- संसाधन एवं विकास – संसाधन प्रकृति की वह चीज़ है जिसे लोग तकनीक की मदद से उपयोग कर सकें। संसाधनों को उत्पत्ति, ख़त्म होने, स्वामित्व और विकास के आधार पर बाँटा जाता है। भारत को संसाधनों का नियोजन करना, ज़मीन की देखभाल करना और मिट्टी को बहने से बचाना ज़रूरी है।
- भारत के खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (कक्षा 12) – खनिज निश्चित बनावट वाला प्राकृतिक पदार्थ है। भारत के ज़्यादातर खनिज पुरानी पठारी चट्टानों में तीन पेटियों में हैं: उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण-पश्चिमी पठार और उत्तर-पश्चिमी पेटी। लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट और ताँबा धात्विक हैं; अभ्रक अधात्विक है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा हैं जो ख़त्म हो जाएँगी। परमाणु, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा गैर-परंपरागत और साफ़ हैं। खनिज अनवीकरणीय हैं, इसलिए कम उपयोग, पुनर्चक्रण और विकल्प ज़रूरी हैं।
- जल संसाधन – धरती का लगभग सारा पानी खारा समुद्री पानी है; उपयोग लायक मीठा पानी बहुत थोड़ा है। बढ़ती आबादी, खेती, उद्योग और प्रदूषण से जल दुर्लभता होती है। बहुउद्देशीय बाँध कई कामों के लिए पानी रोकते हैं पर समस्याएँ भी लाते हैं। वर्षा जल संग्रहण पानी बचाने का पुराना और आसान तरीका है।
- मृदा: कैसे बनती है, उसकी परतें और उसे कैसे बचाएँ – मृदा (मिट्टी) ज़मीन की ऊपरी, ढीली और पतली परत है जिसमें पौधे उगते हैं। इसमें लगभग 45% चट्टान के कण, 5% जैविक पदार्थ (ह्यूमस), 25% पानी और 25% हवा होती है। जब अपक्षय जनक चट्टान को तोड़ता है और जीव ह्यूमस जोड़ते हैं, तब बहुत धीरे-धीरे मृदा बनती है। इसके पाँच कारक हैं: जनक चट्टान, जलवायु, जीव, उच्चावच (ढाल) और समय। ज़मीन को काटकर देखें तो परतें दिखती हैं, जिन्हें संस्तर कहते हैं: O (पत्तियाँ और ह्यूमस), A (ऊपरी मृदा), B (अवमृदा), C (टूटी चट्टान) और R (आधार शैल)। मृदा का गठन रेत, गाद और चिकनी मिट्टी के हिस्से पर निर्भर है। मृदा भोजन उगाती है, पानी जमा और साफ़ करती है, कार्बन रखती है और अनगिनत जीवों का घर है, पर अपरदन, लवण और प्रदूषण इसे बनने से कहीं तेज़ी से नष्ट कर सकते हैं।
- ओज़ोन परत का क्षय और कचरा प्रबंधन – ऊपर आसमान में ओज़ोन (O₃) हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को रोकती है, पर CFC इसे पतला कर देते हैं; ज़मीन पर जैव निम्नीकरणीय कचरा अपने-आप टूट जाता है और अजैव निम्नीकरणीय कचरा सालों पड़ा रहता है, इसलिए कम करें, दोबारा इस्तेमाल करें, पुनः चक्रण करें और कचरा अलग-अलग रखें।