हम कितना पानी उपयोग कर सकते हैं?
धरती का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा पानी से ढका है, पर लगभग 96.5% खारा समुद्री पानी है। मीठा पानी सिर्फ़ लगभग 2.5% है, और उसका ज़्यादातर हिस्सा बर्फ़ और गहरे भूजल में है। जल चक्र पानी को नया करता रहता है, पर तभी जब हम उसे बर्बाद या गंदा न करें।
जल दुर्लभता
जल दुर्लभता यानी सबकी ज़रूरत के लिए अच्छा पानी काफ़ी न होना। कारण:
- ज़्यादा लोग, ज़्यादा पानी और ज़्यादा अनाज की ज़रूरत।
- खेती सबसे ज़्यादा पानी लेती है; कुएँ-नलकूप भूजल ज़्यादा खींचते हैं।
- उद्योग और शहर बहुत पानी और बिजली (जलविद्युत) लेते हैं।
- प्रदूषण: पानी हो तब भी सीवेज, रसायनों और कारखानों के कचरे से असुरक्षित हो सकता है।
बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ
बहुउद्देशीय परियोजना ऐसा बाँध है जो एक साथ कई काम करे: सिंचाई, बिजली, घरों-उद्योगों को पानी, बाढ़ नियंत्रण, मछली पालन, नौकायन और पर्यटन। जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को "आधुनिक भारत के मंदिर" कहा। उदाहरण: भाखड़ा नांगल (सतलुज), हीराकुड (महानदी), सरदार सरोवर (नर्मदा), नागार्जुन सागर (कृष्णा)।
प्राचीन भारत में भी जल-व्यवस्थाएँ थीं: प्रयागराज के पास श्रृंगवेरपुर का तालाब, भोपाल झील और दिल्ली का हौज़ ख़ास।
बड़े बाँधों की समस्याएँ
- नदी का प्राकृतिक बहाव रुकता है; गाद खेतों तक पहुँचने के बजाय जलाशय में जमा होती है।
- मछलियाँ और जलीय जीव आ-जा नहीं पाते।
- बड़े वन और गाँव डूबते हैं; बहुत लोग विस्थापित होते हैं।
- सिंचाई से ज़्यादा पानी वाली फ़सलें बढ़ीं, मिट्टी नमकीन हुई।
- कभी ज़्यादा पानी छोड़ने से बाँध ख़ुद बाढ़ लाते हैं।
इससे नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी बाँध आंदोलन हुए।
वर्षा जल संग्रहण
- गुल और कुल: पश्चिमी हिमालय में खेतों तक पानी ले जाने वाली नालियाँ।
- छत वर्षा जल संग्रहण: राजस्थान में ज़मीन के नीचे टाँके में पीने का पानी।
- खादिन और जोहड़: राजस्थान में खेतों पर बारिश रोककर मिट्टी नम रखना।
- बाढ़ जल वाहिकाएँ: पश्चिम बंगाल के बाढ़ के मैदानों में।
- बाँस ड्रिप सिंचाई: मेघालय में बाँस की नलियाँ झरने का पानी बूँद-बूँद पहाड़ से नीचे लाती हैं।
- गेंडाथुर गाँव (कर्नाटक) और तमिलनाडु (छत संग्रहण अनिवार्य) आधुनिक उदाहरण हैं।
करके देखें
3D का आख़िरी चरण लीजिए। 50 m² की छत और 600 mm बारिश = 50 × 600 = 30,000 लीटर साल में। अगर परिवार रोज़ 100 लीटर पीने का पानी ले, तो कितने दिन चलेगा? (300 दिन।) अपने स्कूल की छत नापकर देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जमा पानी (लीटर) = छत का क्षेत्रफल (m²) × वर्षा (mm)
- उपयोग लायक मीठा पानी कुल का लगभग 1% है
- बहुउद्देशीय परियोजना = सिंचाई + बिजली + बाढ़ नियंत्रण + जल आपूर्ति + मछली + पर्यटन
हल किए गए उदाहरण
1. छत 80 m² है और साल की बारिश 500 mm है। कितना पानी जमा हो सकता है?
80 × 500 = 40,000 लीटर।
2. स्कूल की 200 m² छत पर 1,200 mm बारिश होती है। 80% जमा हो तो कितने लीटर?
200 × 1,200 = 2,40,000 L; 80% = 1,92,000 लीटर।
3. नदी किनारे बसे शहर में भी पानी की कमी क्यों होती है?
नदी का पानी सीवेज और कारखानों से प्रदूषित हो सकता है, इसलिए उपयोग लायक नहीं रहता। दुर्लभता अच्छे पानी की भी होती है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि जल दुर्लभता सिर्फ़ रेगिस्तान में होती है। नदी वाले शहरों में भी प्रदूषण और ज़्यादा उपयोग से होती है।
- कहना कि बाँधों का कोई नुकसान नहीं। वे लोगों को विस्थापित करते, गाद रोकते और मछलियों को नुकसान पहुँचाते हैं।
- टाँका (राजस्थान) और कुल (हिमालय की नाली) को मिलाना।
- इकाई भूलना: m² × mm = लीटर, घन मीटर नहीं।