धरातलीय जल और भौम जल
भारत में हर साल लगभग 4,000 घन किमी वर्षा और हिमपात होता है, पर उसका कुछ हिस्सा ही उपयोग हो पाता है। धरातलीय जल नदियों, झीलों, तालाबों में है। नदियों में लगभग 1,869 घन किमी बहता है, पर ढलान, बाढ़ और असमान बहाव के कारण सिर्फ़ लगभग 690 घन किमी उपयोग हो पाता है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक में इसका बड़ा हिस्सा है।
भौम जल वह वर्षा है जो मिट्टी में रिसकर चट्टानों की दरारों में भरती है। हर साल लगभग 432 घन किमी की पुनःपूर्ति होती है। उत्तर-पश्चिम और दक्षिण के कुछ भागों में इसका बहुत ज़्यादा उपयोग है और जल स्तर तेज़ी से गिर रहा है। गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान में अभी भी बड़ा भंडार है।
लैगून और पश्चजल
लैगून उथला खारा पानी है जिसे रेत की पट्टी समुद्र से अलग कर देती है। भारत के लंबे तट पर, ख़ासकर केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में, कई लैगून और झीलें हैं। इनका पानी खारा है इसलिए पीने लायक नहीं, पर मछली पकड़ने, कुछ तरह के धान और नारियल उगाने और केरल के पश्चजल (बैकवाटर) में नाव पर्यटन के काम आता है।
जल की माँग और उपयोग
भारत कृषि प्रधान देश है, इसलिए सबसे ज़्यादा पानी सिंचाई में जाता है: धरातलीय जल का लगभग 89% और भौम जल का 92%। उद्योग धरातलीय जल का लगभग 2% और भौम जल का 5% लेते हैं; घरेलू उपयोग 9% और 3% है। उद्योग और शहरों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
सिंचाई क्यों ज़रूरी है
- वर्षा कुछ ही महीनों में होती है।
- कुछ इलाक़े सूखे हैं।
- अधिक उपज वाले बीजों को नियमित पानी चाहिए।
- सिंचाई से साल में एक से ज़्यादा फ़सल होती है।
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ज़्यादा पंपिंग से जल स्तर गिरा है; राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ भागों में फ़्लोराइड और पश्चिम बंगाल व बिहार में भौम जल में आर्सेनिक पाया गया है।
जल गुणवत्ता और उसमें गिरावट
जल गुणवत्ता का मतलब है पानी कितना शुद्ध है, हानिकारक गंदगी, कीटाणु और रसायन के बिना। जब शहर सीवेज, कारख़ाने रसायन डालते हैं और खेतों की खाद बहकर नदी में आती है, तो पानी प्रदूषित होता है। ऐसा पानी बीमारी फैलाता है और मछलियों को मारता है। बड़े शहरों के पास गंगा और यमुना के हिस्से बहुत प्रदूषित हैं। जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 जैसे क़ानून हैं, पर इन्हें सख़्ती से लागू करना और लोगों में जागरूकता ज़रूरी है।
जल संरक्षण और प्रबंधन
मीठा पानी सीमित है, इसलिए इसका संरक्षण ज़रूरी है। तरीक़े: टपक और फव्वारा सिंचाई, रिसाव रोकना, घरों और कारख़ानों में कम उपयोग, और शोधित गंदे पानी का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग (फ्लशिंग, बाग़, कारख़ानों में ठंडा करने, आग बुझाने में)। जलाशयों को प्रदूषण से बचाना चाहिए। गाँवों में पुराने तालाब फिर से बनाए जा सकते हैं।
वर्षा जल संग्रहण
वर्षा जल संग्रहण का मतलब है बारिश को वहीं पकड़ना जहाँ वह गिरे, और उसे जमा करना या ज़मीन में भेजना। छत को टंकी से जोड़ा जा सकता है; गड्ढे, खाइयाँ और पुराने कुएँ भौम जल भरते हैं। यह सस्ता है, जल स्तर उठाता है, फ़्लोराइड और नमक घटाता है, गलियों में बाढ़ कम करता है और सूखे महीनों में पानी देता है। पारंपरिक तरीक़े: दक्षिण के तालाब, राजस्थान के जोहड़ और कुंड। कई शहरों में नई इमारतों में यह ज़रूरी है। अनुमान: सालाना लीटर ≈ छत (वर्ग मी) × वर्षा (मिमी) × 0.8।
जलसंभर प्रबंधन
जलसंभर वह ज़मीन है जिसकी सारी बारिश बहकर एक धारा या नदी में जाती है। जलसंभर प्रबंधन उस इलाक़े के धरातलीय और भौम जल को बचाना और समझदारी से उपयोग करना है: चेक डैम और रिसाव तालाब बनाना, पेड़ लगाना, समोच्च मेड़ बनाना और बहाव रोकना। इससे मिट्टी, खेती, जंगल और लोगों की आय एक साथ सुधरती है।
उदाहरण: हरियाली, केंद्र सरकार की योजना जिसमें ग्राम पंचायतें जलसंभर संभालती हैं; आंध्र प्रदेश का नीरू-मीरू (जल और आप); और अलवर (राजस्थान) की अरवारी पानी संसद, जहाँ गाँव वालों ने जोहड़ बनाए और पानी बाँटने के नियम बनाए। सफलता की कुंजी लोगों की भागीदारी है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपयोग योग्य जल ≈ 690 घन किमी (धरातलीय) + 432 घन किमी (भौम) ≈ 1,122 घन किमी प्रति वर्ष
- सिंचाई का हिस्सा: धरातलीय जल का लगभग 89%, भौम जल का 92%
- संग्रहित वर्षा (लीटर) ≈ छत का क्षेत्रफल (वर्ग मी) × वर्षा (मिमी) × 0.8
- 1 वर्ग मी पर 1 मिमी वर्षा = 1 लीटर
- लैगून: रेत की पट्टी से समुद्र से अलग हुआ उथला खारा पानी
- जलसंभर: वह ज़मीन जिसका पानी एक धारा में जाता है
हल किए गए उदाहरण
1. धरातलीय जल 690 और भौम जल 432 घन किमी हो तो कुल उपयोग योग्य जल कितना?
690 + 432 = 1,122 घन किमी प्रति वर्ष।
2. स्कूल की छत 100 वर्ग मी है और शहर में 600 मिमी वर्षा होती है। कितना पानी जमा होगा (गुणक 0.8)?
100 × 600 × 0.8 = 48,000 लीटर प्रति वर्ष।
3. एक परिवार रोज़ 400 लीटर उपयोग करता है। 48,000 लीटर कितने दिन चलेगा?
48,000 ÷ 400 = 120 दिन।
4. केरल के पश्चजल का पानी पीने में क्यों नहीं लिया जाता?
यह समुद्र के पानी से मिला खारा पानी है। यह मछली, धान, नारियल और नाव पर्यटन के काम आता है।
5. पंजाब और हरियाणा में जल स्तर सबसे तेज़ क्यों गिर रहा है?
किसान ज़्यादा पानी वाली चावल-गेहूँ की फ़सलें उगाते हैं और नलकूपों से बारिश की पुनःपूर्ति से कहीं ज़्यादा पानी खींचते हैं।
6. अरवारी पानी संसद ने अलवर में पानी कैसे बचाया?
गाँव वालों ने छोटे मिट्टी के बाँध (जोहड़) बनाए और 'पानी संसद' बनाकर नदी के पानी के उपयोग के नियम तय किए। नदी फिर बहने लगी और कुएँ भर गए।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि नदी का सारा पानी उपयोग हो सकता है। 1,869 में से सिर्फ़ लगभग 690 घन किमी उपयोग योग्य है।
- यह सोचना कि उद्योग सबसे ज़्यादा पानी लेते हैं। सबसे ज़्यादा खेती लेती है।
- लैगून को मीठे पानी की झील कहना। लैगून का पानी खारा होता है।
- जलसंभर प्रबंधन को सिर्फ़ बाँध बनाना मानना। इसमें पेड़, मिट्टी, खेती और लोगों की भागीदारी भी है।