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भारत के जल संसाधन (कक्षा 12 भूगोल)

दुनिया का लगभग 4% पानी भारत में है पर आबादी 16% है। हर साल लगभग 1,122 घन किमी पानी उपयोग योग्य है: 690 धरातल से और 432 भूमि के नीचे से। केरल जैसे तटों पर लैगून और पश्चजल मछली, धान और पर्यटन के काम आते हैं। सबसे ज़्यादा पानी कृषि लेती है: धरातलीय जल का लगभग 89% और भौम जल का 92%। सीवेज, कारख़ानों का कचरा और खेती के रसायन पानी गंदा करते हैं। कम उपयोग, शोधन और पुनः उपयोग, वर्षा जल संग्रहण और जलसंभर प्रबंधन (हरियाली, नीरू-मीरू, अरवारी पानी संसद) से पानी बचता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. भारत हर साल लगभग 1,122 घन किमी पानी उपयोग कर सकता है। ब्लॉक गिनिए: 690 नदियों-झीलों से, 432 ज़मीन के नीचे से।
  2. धरातलीय जल नदियों, झीलों और तालाबों में बहता है। कुछ वर्षा ज़मीन में रिसकर चट्टानों में भर जाती है। यह भौम जल है। कुएँ और नलकूप इसे निकालते हैं।
  3. तट पर रेत की पट्टी समुद्र का कुछ पानी अलग कर देती है। यह लैगून है। केरल के पश्चजल में मछली, धान और नाव पर्यटन होता है।
  4. पानी कौन लेता है? खेती हर 10 में से लगभग 9 लीटर लेती है। घर और कारख़ाने बहुत कम। धरातलीय और भौम जल की तुलना के लिए टैप कीजिए।
  5. शहर और कारख़ानों का कचरा नदी को गंदा करता है। गंदा पानी बीमारी फैलाता है। स्लाइडर से कचरा पहले साफ़ कीजिए, नदी साफ़ हो जाएगी।
  6. करके देखें: छत से वर्षा जल इकट्ठा कीजिए और जलसंभर पर चेक डैम व पेड़ों से बारिश रोकिए। छत और वर्षा चुनकर बचाए गए लीटर देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

इतनी बारिश होती है तो उपयोग योग्य पानी कम क्यों?

बहुत पानी बाढ़ में तेज़ी से बह जाता है या ऐसी जगह बहता है जहाँ उपयोग कठिन है। सिर्फ़ लगभग 1,122 घन किमी उपयोग योग्य है; चरण 1 के ब्लॉक गिनिए।

बारिश भौम जल कैसे बनती है?

वह मिट्टी से रिसकर चट्टानों की दरारों में भरती है, जैसे चरण 2 की गिरती बूँदें दिखाती हैं।

क्या लैगून और झील एक ही हैं?

नहीं। लैगून उथला खारा पानी है जो रेत की पट्टी से समुद्र से कटा हो। चरण 3 की रेत पट्टी देखिए।

खेती को इतना पानी क्यों चाहिए?

चावल, गन्ना जैसी फ़सलों को बहुत पानी चाहिए और बारिश कुछ महीने ही होती है, इसलिए सिंचाई करनी पड़ती है। चरण 4 के खंभे देखिए।

क्या गंदी नदी फिर साफ़ हो सकती है?

हाँ, अगर सीवेज और कारख़ानों का कचरा नदी में जाने से पहले साफ़ हो। चरण 5 का स्लाइडर चलाइए।

एक छत सचमुच कितना पानी बचा सकती है?

800 मिमी वर्षा में 50 वर्ग मी की छत साल में लगभग 32,000 लीटर बचाती है। चरण 6 में दूसरे मान आज़माइए।

धरातलीय जल और भौम जल

भारत में हर साल लगभग 4,000 घन किमी वर्षा और हिमपात होता है, पर उसका कुछ हिस्सा ही उपयोग हो पाता है। धरातलीय जल नदियों, झीलों, तालाबों में है। नदियों में लगभग 1,869 घन किमी बहता है, पर ढलान, बाढ़ और असमान बहाव के कारण सिर्फ़ लगभग 690 घन किमी उपयोग हो पाता है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक में इसका बड़ा हिस्सा है।

भौम जल वह वर्षा है जो मिट्टी में रिसकर चट्टानों की दरारों में भरती है। हर साल लगभग 432 घन किमी की पुनःपूर्ति होती है। उत्तर-पश्चिम और दक्षिण के कुछ भागों में इसका बहुत ज़्यादा उपयोग है और जल स्तर तेज़ी से गिर रहा है। गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान में अभी भी बड़ा भंडार है।

लैगून और पश्चजल

लैगून उथला खारा पानी है जिसे रेत की पट्टी समुद्र से अलग कर देती है। भारत के लंबे तट पर, ख़ासकर केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में, कई लैगून और झीलें हैं। इनका पानी खारा है इसलिए पीने लायक नहीं, पर मछली पकड़ने, कुछ तरह के धान और नारियल उगाने और केरल के पश्चजल (बैकवाटर) में नाव पर्यटन के काम आता है।

जल की माँग और उपयोग

भारत कृषि प्रधान देश है, इसलिए सबसे ज़्यादा पानी सिंचाई में जाता है: धरातलीय जल का लगभग 89% और भौम जल का 92%। उद्योग धरातलीय जल का लगभग 2% और भौम जल का 5% लेते हैं; घरेलू उपयोग 9% और 3% है। उद्योग और शहरों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

सिंचाई क्यों ज़रूरी है

पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ज़्यादा पंपिंग से जल स्तर गिरा है; राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ भागों में फ़्लोराइड और पश्चिम बंगाल व बिहार में भौम जल में आर्सेनिक पाया गया है।

जल गुणवत्ता और उसमें गिरावट

जल गुणवत्ता का मतलब है पानी कितना शुद्ध है, हानिकारक गंदगी, कीटाणु और रसायन के बिना। जब शहर सीवेज, कारख़ाने रसायन डालते हैं और खेतों की खाद बहकर नदी में आती है, तो पानी प्रदूषित होता है। ऐसा पानी बीमारी फैलाता है और मछलियों को मारता है। बड़े शहरों के पास गंगा और यमुना के हिस्से बहुत प्रदूषित हैं। जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 जैसे क़ानून हैं, पर इन्हें सख़्ती से लागू करना और लोगों में जागरूकता ज़रूरी है।

जल संरक्षण और प्रबंधन

मीठा पानी सीमित है, इसलिए इसका संरक्षण ज़रूरी है। तरीक़े: टपक और फव्वारा सिंचाई, रिसाव रोकना, घरों और कारख़ानों में कम उपयोग, और शोधित गंदे पानी का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग (फ्लशिंग, बाग़, कारख़ानों में ठंडा करने, आग बुझाने में)। जलाशयों को प्रदूषण से बचाना चाहिए। गाँवों में पुराने तालाब फिर से बनाए जा सकते हैं।

वर्षा जल संग्रहण

वर्षा जल संग्रहण का मतलब है बारिश को वहीं पकड़ना जहाँ वह गिरे, और उसे जमा करना या ज़मीन में भेजना। छत को टंकी से जोड़ा जा सकता है; गड्ढे, खाइयाँ और पुराने कुएँ भौम जल भरते हैं। यह सस्ता है, जल स्तर उठाता है, फ़्लोराइड और नमक घटाता है, गलियों में बाढ़ कम करता है और सूखे महीनों में पानी देता है। पारंपरिक तरीक़े: दक्षिण के तालाब, राजस्थान के जोहड़ और कुंड। कई शहरों में नई इमारतों में यह ज़रूरी है। अनुमान: सालाना लीटर ≈ छत (वर्ग मी) × वर्षा (मिमी) × 0.8।

जलसंभर प्रबंधन

जलसंभर वह ज़मीन है जिसकी सारी बारिश बहकर एक धारा या नदी में जाती है। जलसंभर प्रबंधन उस इलाक़े के धरातलीय और भौम जल को बचाना और समझदारी से उपयोग करना है: चेक डैम और रिसाव तालाब बनाना, पेड़ लगाना, समोच्च मेड़ बनाना और बहाव रोकना। इससे मिट्टी, खेती, जंगल और लोगों की आय एक साथ सुधरती है।

उदाहरण: हरियाली, केंद्र सरकार की योजना जिसमें ग्राम पंचायतें जलसंभर संभालती हैं; आंध्र प्रदेश का नीरू-मीरू (जल और आप); और अलवर (राजस्थान) की अरवारी पानी संसद, जहाँ गाँव वालों ने जोहड़ बनाए और पानी बाँटने के नियम बनाए। सफलता की कुंजी लोगों की भागीदारी है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. धरातलीय जल 690 और भौम जल 432 घन किमी हो तो कुल उपयोग योग्य जल कितना?

690 + 432 = 1,122 घन किमी प्रति वर्ष।

2. स्कूल की छत 100 वर्ग मी है और शहर में 600 मिमी वर्षा होती है। कितना पानी जमा होगा (गुणक 0.8)?

100 × 600 × 0.8 = 48,000 लीटर प्रति वर्ष।

3. एक परिवार रोज़ 400 लीटर उपयोग करता है। 48,000 लीटर कितने दिन चलेगा?

48,000 ÷ 400 = 120 दिन।

4. केरल के पश्चजल का पानी पीने में क्यों नहीं लिया जाता?

यह समुद्र के पानी से मिला खारा पानी है। यह मछली, धान, नारियल और नाव पर्यटन के काम आता है।

5. पंजाब और हरियाणा में जल स्तर सबसे तेज़ क्यों गिर रहा है?

किसान ज़्यादा पानी वाली चावल-गेहूँ की फ़सलें उगाते हैं और नलकूपों से बारिश की पुनःपूर्ति से कहीं ज़्यादा पानी खींचते हैं।

6. अरवारी पानी संसद ने अलवर में पानी कैसे बचाया?

गाँव वालों ने छोटे मिट्टी के बाँध (जोहड़) बनाए और 'पानी संसद' बनाकर नदी के पानी के उपयोग के नियम तय किए। नदी फिर बहने लगी और कुएँ भर गए।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. भारत में हर साल लगभग कितना भौम जल उपयोग योग्य है?
2. भारत में सबसे ज़्यादा पानी कौन-सा क्षेत्र लेता है?
3. पश्चजल (बैकवाटर) कहाँ प्रसिद्ध हैं?
4. नीरू-मीरू किस राज्य का जलसंभर कार्यक्रम है?
5. वर्षा जल संग्रहण मुख्य रूप से:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धरातलीय जल और भौम जल में क्या अंतर है?

धरातलीय जल नदियों, झीलों, तालाबों में है; भौम जल ज़मीन के नीचे मिट्टी-चट्टानों में जमा रहता है और कुओं से निकलता है।

जलसंभर प्रबंधन क्या है?

एक धारा में पानी भेजने वाले इलाक़े के पानी, मिट्टी और पौधों का समुदाय की मदद से समझदारी से उपयोग और बचाव।

क्या जल संसाधन CBSE कक्षा 12 भूगोल परीक्षा में आता है?

हाँ। यह 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' में संसाधन एवं विकास इकाई का अध्याय है; संरक्षण और जलसंभर कार्यक्रमों पर 3 और 5 अंक के प्रश्न आते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12संसाधन एवं विकास

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