तृतीयक क्रियाएँ क्या हैं?
तृतीयक क्रियाएँ सामान बनाने की जगह सेवाएँ देती हैं। प्लंबर, शिक्षक, दुकानदार और ट्रक ड्राइवर सब तृतीयक काम करते हैं। यह मशीनों या कच्चे माल से ज़्यादा कौशल और ज्ञान पर निर्भर है।
ग़रीब देशों में ज़्यादातर लोग खेती में होते हैं। देश विकसित होने पर ज़्यादा लोग सेवाओं में आते हैं। बहुत विकसित देशों में ज़्यादातर कामगार तृतीयक क्षेत्र में होते हैं।
तृतीयक क्रियाओं के प्रकार
व्यापार और वाणिज्य
सामान ख़रीदना-बेचना। ग्रामीण विपणन केंद्र आसपास के गाँवों की सेवा करते हैं; आवधिक बाज़ार (साप्ताहिक हाट) तय दिनों पर लगते हैं; नगरीय बाज़ार केंद्र विशेष सामान और सेवाएँ देते हैं। फुटकर व्यापार सीधे ग्राहक को बेचता है (दुकानें, फेरीवाले, ऑनलाइन स्टोर); थोक व्यापार उत्पादकों से बड़ी मात्रा में ख़रीदकर फुटकर विक्रेताओं को बेचता है।
परिवहन
लोगों, सामान और माल को ले जाना। भूगोलवेत्ता दूरी को किमी, समय और लागत तीनों में देखते हैं। परिवहन जाल गाँठों (मिलन बिंदु) और कड़ियों (रास्तों) से बनता है।
संचार
शब्द, संदेश और विचार भेजना: डाक, टेलीफ़ोन, रेडियो, टीवी, उपग्रह और इंटरनेट। इसने दुनिया को 'वैश्विक गाँव' बना दिया है।
सेवाएँ
सेवाएँ कई स्तरों पर मिलती हैं: निम्न स्तर (किराना, धोबी) और उच्च स्तर (लेखाकार, डॉक्टर, वकील)। सरकार सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य जैसी सेवाएँ देती है; कंपनियाँ व्यावसायिक सेवाएँ; लोग व्यक्तिगत सेवाएँ (घरेलू काम, मरम्मत)। विकासशील देशों में बहुत लोग अनौपचारिक सेवाओं में हैं।
पर्यटन
पर्यटन यानी काम के लिए नहीं, मनोरंजन के लिए यात्रा। रोज़गार और कमाई के हिसाब से यह दुनिया की सबसे बड़ी तृतीयक क्रियाओं में है। इससे होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और मनोरंजन की माँग बढ़ती है।
पर्यटकों को खींचने वाले कारक
- माँग: ज़्यादा आय और छुट्टियाँ यात्रा बढ़ाती हैं।
- परिवहन: अच्छी सड़कें और सस्ती उड़ानें नई जगहें खोलती हैं।
- जलवायु: ठंडे इलाक़ों के लोग गर्म धूप वाले समुद्र तट चाहते हैं।
- भू-दृश्य: पहाड़, झीलें, तट, जंगली इलाक़े।
- इतिहास और कला: प्राचीन स्मारक, किले, मंदिर, संग्रहालय।
- संस्कृति: स्थानीय भोजन, त्योहार, रीति-रिवाज, शिल्प।
- अर्थव्यवस्था: होम-स्टे और सस्ती सुविधाएँ।
भारत में चिकित्सा पर्यटन
जब लोग मुख्य रूप से इलाज के लिए दूसरे देश जाते हैं, उसे चिकित्सा पर्यटन कहते हैं। भारत इसका एक महत्वपूर्ण गंतव्य बन गया है।
- चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में कुशल डॉक्टर और आधुनिक निजी अस्पताल।
- कई अमीर देशों की तुलना में इलाज बहुत सस्ता।
- सर्जरी के लिए कम इंतज़ार।
- बहुत से कर्मचारी अंग्रेज़ी बोलते हैं; आयुर्वेद और योग जैसी पारंपरिक पद्धतियाँ भी आकर्षित करती हैं।
मरीज़ हृदय सर्जरी, जोड़ बदलवाने, आँखों, कैंसर आदि के इलाज के लिए आते हैं। अमीर देश स्कैन पढ़ने और मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन जैसे काम भी भारत को बाह्यस्रोत करते हैं।
चतुर्थक और पंचम क्रियाएँ
चतुर्थक क्रियाएँ ज्ञान और सूचना पर केंद्रित हैं: अनुसंधान और विकास, IT, वित्त, परामर्श, शिक्षा, आँकड़े। ये 'ज्ञान-उन्मुख' हैं और कंप्यूटर व नेटवर्क से कहीं से भी हो सकती हैं।
पंचम क्रियाएँ सबसे ऊँचा स्तर हैं: नए विचार बनाने और बड़े फ़ैसले लेने वाली सेवाएँ, जैसे वरिष्ठ व्यापार अधिकारी, सरकारी अधिकारी, शोध वैज्ञानिक, वित्तीय और क़ानूनी सलाहकार। इन्हें स्वर्ण कॉलर व्यवसायी कहते हैं।
बाह्यस्रोतन, BPO और KPO
बाह्यस्रोतन (आउटसोर्सिंग) यानी लागत घटाने के लिए काम किसी बाहरी एजेंसी को, अक्सर दूसरे देश में, देना। BPO (व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतन) कॉल सेंटर और डेटा एंट्री जैसे नियमित काम करता है। KPO (ज्ञान प्रक्रिया बाह्यस्रोतन) शोध, विश्लेषण और क़ानूनी सहायता जैसे ऊँचे कौशल वाले काम करता है। भारत दोनों का बड़ा केंद्र है।
डिजिटल (अंकीय) विभाजन
सूचना और संचार तकनीक बहुत अवसर देती है। पर सबकी पहुँच बराबर नहीं। डिजिटल विभाजन उन लोगों और जगहों के बीच का अंतर है जिनके पास कंप्यूटर, तेज़ इंटरनेट और डिजिटल कौशल है और जिनके पास नहीं।
- देशों के बीच: विकसित देश कई विकासशील देशों से बहुत आगे हैं।
- देश के अंदर: बड़े शहर अच्छी तरह जुड़े हैं; कई गाँव, दूर के पहाड़ और ग़रीब इलाक़े पीछे हैं।
- समूहों के बीच: आय, उम्र, लिंग और शिक्षा से भी अंतर बनता है।
इसे कम करने के लिए सस्ता इंटरनेट, गाँवों में टावर और केबल, और डिजिटल साक्षरता चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तृतीयक = सेवाएँ (व्यापार, परिवहन, संचार, सेवाएँ)
- फुटकर = ग्राहक को बेचना; थोक = फुटकर विक्रेताओं को बड़ी मात्रा में बेचना
- आवधिक बाज़ार = तय दिनों पर लगता है (साप्ताहिक हाट)
- निम्न स्तर सेवा (किराना) बनाम उच्च स्तर सेवा (वकील, डॉक्टर)
- पर्यटन आकर्षण: जलवायु, भू-दृश्य, इतिहास और कला, संस्कृति, अर्थव्यवस्था
- चतुर्थक = ज्ञान और सूचना; पंचम = शीर्ष फ़ैसले (स्वर्ण कॉलर)
- BPO = नियमित बाह्यस्रोत काम; KPO = ज्ञान आधारित बाह्यस्रोत काम
- डिजिटल विभाजन = डिजिटल तकनीक तक पहुँच का अंतर
हल किए गए उदाहरण
1. एक गाँव में हर मंगलवार साप्ताहिक बाज़ार लगता है। यह किस तरह का व्यापार केंद्र है?
आवधिक बाज़ार (ग्रामीण व्यापार)।
2. विदेश का एक मरीज़ घुटना बदलवाने चेन्नई आता है क्योंकि यह सस्ता है और इंतज़ार नहीं। यह क्या है?
चिकित्सा पर्यटन।
3. एक भारतीय कंपनी अमेरिकी क़ानूनी फ़र्म के लिए क़ानूनी शोध करती है। BPO या KPO?
KPO, क्योंकि इसमें विशेषज्ञ ज्ञान चाहिए।
4. एक शीर्ष सरकारी नीति सलाहकार नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना बनाता है। कौन सी क्रिया?
पंचम क्रिया (स्वर्ण कॉलर, शीर्ष फ़ैसले)।
5. एक ज़िले में 90% शहरी घरों में पर सिर्फ़ 30% गाँव के घरों में इंटरनेट है। यह क्या दिखाता है?
देश के अंदर डिजिटल विभाजन (शहर बनाम गाँव)।
आम गलतियाँ
- सभी तृतीयक कामगारों को 'सफ़ेद कॉलर' कहना। घरेलू काम या मरम्मत जैसी कई सेवाएँ अनौपचारिक और हाथ की हैं।
- चतुर्थक और पंचम को एक समझना। चतुर्थक ज्ञान संभालता है; पंचम शीर्ष फ़ैसले लेता है।
- कहना कि चिकित्सा पर्यटन का मतलब भारत से विदेश इलाज के लिए जाना है। यहाँ इसका मतलब मरीज़ों का भारत आना है।
- मानना कि डिजिटल विभाजन सिर्फ़ देशों के बीच है। यह देश के अंदर और समूहों के बीच भी है।