मानव भूगोल क्या है?
मानव भूगोल लोगों और जगहों का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग अपने आसपास की ज़मीन, पानी और जलवायु का कैसे उपयोग करते हैं और उसे कैसे बदलते हैं।
लंबे समय तक भूगोल को दो हिस्सों में बाँटा गया। एक भौतिक भूगोल (धरती, हवा, पानी), दूसरा मानव भूगोल (लोग, खेत, शहर)। इस बँटवारे को द्वैतवाद कहते हैं। आज हम जानते हैं कि दोनों जुड़े हैं: प्रकृति लोगों पर असर डालती है और लोग प्रकृति पर।
आसान परिभाषा: मानव भूगोल मनुष्य और उसके प्राकृतिक वातावरण के आपसी संबंध का अध्ययन है, और यह देखता है कि यह संबंध जगह-जगह कैसे बदलता है।
मानव का प्राकृतीकरण (पर्यावरणीय निश्चयवाद)
शुरू में लोगों के पास बहुत साधारण औज़ार थे। वे शिकार करते, फल इकट्ठा करते और गुफ़ाओं या झोपड़ियों में रहते थे। क्या खाना है, क्या पहनना है, कहाँ रहना है, सब प्रकृति तय करती थी।
जब प्रकृति लोगों पर इतना हावी हो, तो कहते हैं कि मनुष्य का प्राकृतीकरण हुआ है। 'प्रकृति ही मनुष्य का जीवन तय करती है', इस विचार को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहते हैं। निश्चय यानी तय करना।
उदाहरण: जंगल में रहने वाले लोग जो खाना, दवा और घर के लिए जंगल पर निर्भर हैं और प्रकृति को बड़ी शक्ति मानकर पूजते हैं।
प्रकृति का मानवीकरण (संभववाद)
धीरे-धीरे लोगों ने खेती, धातु के औज़ार, मशीनें, बाँध और सड़कें बनाना सीखा। प्रौद्योगिकी से उन्होंने ज़रूरत के हिसाब से प्रकृति बदली। जंगल खेत बने, नदियों पर बाँध बने, पहाड़ों में सुरंगें बनीं।
जब मनुष्य प्रकृति पर अपनी छाप छोड़ता है, उसे प्रकृति का मानवीकरण कहते हैं। 'प्रकृति कई संभावनाएँ देती है और मनुष्य उनमें से चुनता है', इस विचार को संभववाद कहते हैं।
मानवीकृत प्रकृति के निशान: पहाड़ी ढलानों पर बाग़, स्वास्थ्य रिसॉर्ट, बंदरगाह, अंतरिक्ष में उपग्रह, नहर के पानी से मरुस्थल में खेत।
नव-निश्चयवाद: रुको और जाओ
भूगोलवेत्ता ग्रिफ़िथ टेलर ने बीच का रास्ता दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रकृति बदल सकता है, पर एक सीमा तक। इसे नव-निश्चयवाद या रुको और जाओ निश्चयवाद कहते हैं।
ट्रैफ़िक सिग्नल सोचिए। हरी बत्ती: विकास करो, संसाधन इस्तेमाल करो। लाल बत्ती: जब प्रकृति सीमा दिखाए, जैसे बाढ़, भूस्खलन, वैश्विक तापन या गिरता भूजल, तब रुको। यानी न पूरी आज़ादी, न पूरी गुलामी।
समय के साथ मानव भूगोल
लोगों को पढ़ने का तरीक़ा वर्षों में बदलता रहा:
- आरंभिक उपनिवेश काल – अन्वेषण और विवरण: यात्रियों ने नए इलाक़ों, लोगों और संसाधनों का वर्णन किया।
- बाद का उपनिवेश काल – प्रादेशिक विश्लेषण: एक प्रदेश के सब हिस्सों का साथ में विस्तार से अध्ययन।
- 1930 का दशक – क्षेत्रीय विभेदन: एक प्रदेश दूसरे से अलग क्यों है, यह खोजना।
- 1950–60 का दशक – स्थानिक संगठन: आँकड़ों, कंप्यूटर और मॉडलों से पैटर्न खोजना (मात्रात्मक क्रांति)।
- 1970 का दशक – नई विचारधाराएँ: मानवतावादी (लोगों की भावनाएँ और जागरूकता), आमूलवादी (गरीबी और असमानता को मार्क्सवादी विचार से समझना), व्यवहारवादी (उम्र, जाति, लिंग, वर्ग के अनुसार लोग जगह को कैसे अनुभव करते हैं)।
- 1990 का दशक – उत्तर-आधुनिकतावाद: बड़े सामान्य सिद्धांत हर जगह फिट नहीं होते; हर स्थानीय जगह का महत्व है।
1970 के दशक की तीन विचारधाराएँ
कल्याणपरक / मानवतावादी: लोगों का सामाजिक कल्याण, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा। आमूलवादी: गरीबी और असमानता क्यों है, मार्क्सवादी विचार से। व्यवहारवादी: अलग-अलग समूह जगहों को कैसे देखते और जीते हैं।
मानव भूगोल के क्षेत्र और उप-क्षेत्र
मानव भूगोल एक बड़ा पेड़ है जिसकी कई शाखाएँ हैं। हर शाखा किसी सहयोगी विषय से जुड़ी है।
- सामाजिक भूगोल: व्यवहारवादी, सामाजिक कल्याण, अवकाश, सांस्कृतिक, लिंग, ऐतिहासिक, चिकित्सा भूगोल। साथ ही जनसंख्या भूगोल (जनांकिकी से जुड़ा) और अधिवास भूगोल (ग्रामीण-नगरीय नियोजन)।
- नगरीय अध्ययन और नियोजन: शहर और उनका विकास।
- राजनीतिक भूगोल: निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल।
- आर्थिक भूगोल: संसाधन, कृषि, उद्योग, विपणन, पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भूगोल।
सहयोगी विषय: समाजशास्त्र, मानवविज्ञान, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास, जनांकिकी, कृषि विज्ञान आदि।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मानव भूगोल = मनुष्य और प्राकृतिक वातावरण के संबंध का जगह-वार अध्ययन
- द्वैतवाद = भूगोल को भौतिक और मानव दो हिस्सों में बाँटना
- मानव का प्राकृतीकरण = प्रकृति मनुष्य को चलाती है (पर्यावरणीय निश्चयवाद)
- प्रकृति का मानवीकरण = मनुष्य तकनीक से प्रकृति बदलता है (संभववाद)
- नव-निश्चयवाद = रुको और जाओ: प्रकृति की सीमा में विकास (ग्रिफ़िथ टेलर)
- उपागमों का क्रम: अन्वेषण → प्रादेशिक विश्लेषण → क्षेत्रीय विभेदन → स्थानिक संगठन → मानवतावादी/आमूलवादी/व्यवहारवादी → उत्तर-आधुनिकतावाद
- क्षेत्र: सामाजिक, नगरीय, राजनीतिक, आर्थिक (हर एक के उप-क्षेत्र)
हल किए गए उदाहरण
1. घने जंगल में रहने वाली एक जनजाति जंगल के फल खाती है, जड़ी-बूटी से इलाज करती है और जंगल को पूजती है। कौन सा विचार?
मानव का प्राकृतीकरण (पर्यावरणीय निश्चयवाद)। उनकी तकनीक सरल है, इसलिए प्रकृति उनका जीवन तय करती है।
2. सूखे इलाक़े के किसान नहर का पानी लाकर मरुस्थल में गेहूँ उगाते हैं। कौन सा विचार?
प्रकृति का मानवीकरण (संभववाद)। लोगों ने तकनीक से प्रकृति का दिया हुआ बदला।
3. एक शहर नई इमारतों की इजाज़त देता है पर नदी के बाढ़ के मैदान में रोक लगाता है। कौन सा विचार और क्यों?
नव-निश्चयवाद (रुको और जाओ)। विकास की इजाज़त (जाओ), पर प्रकृति की सीमा, बाढ़ का मैदान, पर रुकना (रुको)।
4. एक भूगोलवेत्ता कंप्यूटर और आँकड़ों से शहर में दुकानों का पैटर्न खोजता है। कौन सा उपागम?
स्थानिक संगठन (मात्रात्मक क्रांति, 1950–60)।
5. एक अध्ययन पूछता है कि एक ही शहर में कुछ समूह गरीब क्यों रहते हैं। कौन सी विचारधारा?
आमूलवादी विचारधारा, जो मार्क्सवादी विचार से गरीबी और असमानता समझाती है।
आम गलतियाँ
- निश्चयवाद और संभववाद को एक समझना। निश्चयवाद: प्रकृति तय करती है। संभववाद: मनुष्य चुनता है।
- यह कहना कि नव-निश्चयवाद में प्रकृति की कोई भूमिका नहीं। असल में विकास प्रकृति की सीमा में ही होता है।
- उपागमों का क्रम गड़बड़ करना। अन्वेषण सबसे पहले, उत्तर-आधुनिकतावाद सबसे बाद में।
- जनसंख्या भूगोल को आर्थिक भूगोल में रखना। यह सामाजिक भूगोल का उप-क्षेत्र है और जनांकिकी से जुड़ा है।