Ukraine 11 клас Geography
अध्याय: 5
1. Introduction
Geography as a system of sciences
- भूगोल एक विषय के रूप में: भूगोल क्या और कैसे पढ़ता है – भूगोल पृथ्वी की जगहों को पढ़ता है: वहाँ क्या है, कहाँ है, वहीं क्यों है और कैसे बदल रहा है। यह भौतिकी, जीव विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र जैसे कई विषयों से विचार लेकर एक जगह के लिए जोड़ता है, इसलिए यह समाकलन (जोड़ने वाला) विषय है। यह स्थान (कहाँ) और समय (कब) दोनों साथ देखता है। इसे एक विषय पूरी दुनिया में (क्रमबद्ध उपागम) या एक प्रदेश के सारे पहलू (प्रादेशिक उपागम) के रूप में पढ़ा जाता है। मुख्य शाखाएँ हैं: भौतिक भूगोल, मानव भूगोल और जैव भूगोल।
2. Topography and cartography
Topography · Cartography
- स्थलाकृतिक मानचित्र – स्थलाकृतिक मानचित्र बृहत् मापनी के मानचित्र हैं जो छोटे क्षेत्र की प्राकृतिक और मानवीय चीज़ें तय चिह्नों और रंगों से विस्तार में दिखाते हैं। भारत में इन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीटों की एक श्रृंखला में बनाता है (1:10,00,000 → 1:2,50,000 → 1:50,000 → 1:25,000)। उच्चावच समोच्च रेखाओं से दिखता है; उनकी दूरी और आकार ढाल और भू-आकृति बताते हैं, और परिच्छेदिका उन्हें पार्श्व दृश्य में बदलती है।
- मानचित्र प्रक्षेप – मानचित्र प्रक्षेप ग्लोब के अक्षांश-देशांतर जाल (रेखाजाल) को समतल सतह पर बनाने की विधि है। कोई भी प्रक्षेप क्षेत्रफल, आकृति, दिशा और दूरी चारों सही नहीं रख सकता। प्रक्षेप सतह (बेलनाकार, शंक्वाकार, खमध्य), विधि और सही रखे गए गुण के आधार पर बाँटे जाते हैं। एक मानक अक्षांश वाला शंक्वाकार प्रक्षेप मध्य अक्षांश के संकरे क्षेत्रों के लिए ठीक है; मर्केटर बेलनाकार प्रक्षेप आकृति और दिशा सही रखता है और नौवहन में काम आता है।
3. General patterns of the geographic envelope
Earth's motions and their consequences · Geographic envelope · Geological environment of humanity · Atmosphere and Earth systems · Hydrosphere and Earth systems · Biosphere and Earth systems
- पृथ्वी का घूर्णन और परिक्रमण – पृथ्वी की दो मुख्य गतियाँ हैं। घूर्णन: यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व लगभग 24 घंटे में एक बार घूमती है — इससे दिन-रात, सूरज का रोज़ का रास्ता, स्थानीय समय (हर घंटे 15° देशांतर) और हवाओं-धाराओं का मुड़ना (कोरिओलिस प्रभाव) होता है। परिक्रमण: यह दीर्घवृत्त कक्षा में सूर्य का लगभग 365¼ दिन में एक चक्कर लगाती है। अक्ष कक्षा-तल (क्रांतिवृत्त) के लंब से 23.5° झुका है और हमेशा एक दिशा में रहता है, इसलिए सिर के ऊपर का सूरज कर्क और मकर रेखा के बीच खिसकता है, दिन की लंबाई बदलती है, और ऋतुएँ, अयनांत व विषुव होते हैं।
- पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा – पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- जल (महासागर): जलीय चक्र, महासागरीय तल, तापमान और लवणता – धरती का पानी महासागर, हवा, स्थल और जीवों के बीच लगातार घूमता है — यह जलीय चक्र है; लगभग 97% पानी महासागरों में है। महासागरीय तल के मुख्य भाग हैं — महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे समुद्री मैदान और महासागरीय गर्त (खाइयाँ) — और छोटे रूप जैसे मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला, निमग्न द्वीप (गुयॉट), अंतःसागरीय कैनियन, एटॉल और बैंक। सतह का पानी विषुवत के पास सबसे गरम और ध्रुवों की ओर ठंडा होता है; गहराई में ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) में तेज़ी से ठंडा होता है और नीचे 0–4 °C के पास रहता है। लवणता समुद्री पानी में नमक है, लगभग 35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35‰)। वाष्पीकरण से बढ़ती और बारिश, नदियों व पिघलती बर्फ़ से घटती है, इसलिए उपोष्ण क्षेत्रों और बंद गरम समुद्रों में ज़्यादा और विषुवत, ध्रुवों व नदी मुहानों के पास कम है।
- जैवमंडल (Biosphere) – जैवमंडल पृथ्वी का वह भाग है जहाँ जीवन है। यह एक पतली परत है जहाँ स्थलमंडल (चट्टान और मिट्टी), जलमंडल (पानी) और वायुमंडल (हवा) मिलते हैं, समुद्र तल से लगभग 10 km ऊपर से लगभग 11 km नीचे तक। पृथ्वी के सभी पारितंत्र मिलकर जैवमंडल बनाते हैं। इसमें ऊर्जा एक ही दिशा में बहती है: सूर्य → पौधे → जंतु → ऊष्मा, जबकि कार्बन, पानी, नाइट्रोजन जैसे पदार्थ चक्र में घूमते हैं। जीव बाकी मंडलों को भी बदलते हैं: ऑक्सीजन बनाते हैं, मिट्टी बनाते हैं, कार्बन जमा करते हैं। आज मनुष्य इसे तेज़ी से बदल रहा है, इसलिए इसकी रक्षा ज़रूरी है।
4. General socio-geographic patterns of the world
Geographic space · Demographic processes in the world system · Global economy · Political geography and geopolitics
- मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र – मानव भूगोल पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर लोग और प्रकृति एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। बहुत पहले प्रकृति लोगों को चलाती थी (मानव का प्राकृतीकरण, यानी पर्यावरणीय निश्चयवाद)। तकनीक आने पर लोग प्रकृति बदलने लगे (प्रकृति का मानवीकरण, यानी संभववाद)। नव-निश्चयवाद कहता है: प्रकृति बदलो, पर उसकी सीमा पर रुक जाओ। समय के साथ यह विषय अन्वेषण से उत्तर-आधुनिकतावाद तक कई उपागमों से गुज़रा। आज इसके कई क्षेत्र हैं, जैसे सामाजिक, नगरीय, राजनीतिक और आर्थिक भूगोल।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- राजनीतिक भूगोल: भूमि, लोग और सत्ता कैसे जुड़ते हैं – राजनीतिक भूगोल बताता है कि लोग ज़मीन को कैसे बाँटते और चलाते हैं। राज्य के लिए चार चीज़ें चाहिए: भूमि (क्षेत्र), जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। सीमाएँ नदी-पहाड़ जैसी प्राकृतिक हो सकती हैं या सीधी खींची गई कृत्रिम रेखाएँ। देश के अंदर सत्ता कई स्तरों में बँटी है। देश संगठनों में मिलकर सहयोग करते हैं, पर पानी, खनिज, ज़मीन या पहचान पर विवाद भी होते हैं। बातचीत और समझौते विवाद को सहयोग में बदलते हैं।
5. Social geography of Ukraine
The Ukrainian state · Population of Ukraine · Ukraine's economy in the international division of labour
- राजनीतिक भूगोल: भूमि, लोग और सत्ता कैसे जुड़ते हैं – राजनीतिक भूगोल बताता है कि लोग ज़मीन को कैसे बाँटते और चलाते हैं। राज्य के लिए चार चीज़ें चाहिए: भूमि (क्षेत्र), जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। सीमाएँ नदी-पहाड़ जैसी प्राकृतिक हो सकती हैं या सीधी खींची गई कृत्रिम रेखाएँ। देश के अंदर सत्ता कई स्तरों में बँटी है। देश संगठनों में मिलकर सहयोग करते हैं, पर पानी, खनिज, ज़मीन या पहचान पर विवाद भी होते हैं। बातचीत और समझौते विवाद को सहयोग में बदलते हैं।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- आर्थिक भूगोल: चीज़ें कहाँ बनती हैं और कैसे चलती हैं – आर्थिक भूगोल यह पढ़ता है कि लोग कहाँ उत्पादन, व्यापार और उपभोग करते हैं, और वहीं क्यों। काम को क्षेत्रकों में बाँटा जाता है: प्राथमिक (खेती, मछली पकड़ना, खनन), द्वितीयक (कारख़ाने, निर्माण) और तृतीयक (दुकान, परिवहन, बैंक, सॉफ़्टवेयर, पर्यटन); शोध और सूचना वाले काम को कभी-कभी चतुर्थक कहते हैं। कंपनियाँ ऐसी जगह चुनती हैं जहाँ ख़र्च कम हो और ख़रीदार पास हों: कच्चा माल, ऊर्जा, परिवहन, मज़दूर, बाज़ार, सरकारी मदद और प्रकृति, सब मायने रखते हैं। आज ज़्यादातर चीज़ें वैश्विक मूल्य शृंखला में बनती हैं, यानी कदम अलग-अलग जगह होते हैं; सबसे ज़्यादा मूल्य डिज़ाइन, ब्रांड और बिक्री में जुड़ता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और सरकारें इन स्थानों को आकार देती हैं। सामान कंटेनर और ट्रक में चलता है, जबकि पैसा, डेटा और विचार केबल से बहते हैं। उत्पादन महानगरों और तटों पर इकट्ठा होता है और जगहें कंपनियों को बुलाने की होड़ करती हैं। पुराने औद्योगिक क्षेत्र बदलते हैं (पुनर्गठन), कुछ सिकुड़ते हैं, कुछ नए उद्योग और सेवाएँ अपनाते हैं।