मानचित्र प्रक्षेप क्या है?
ग्लोब पर अक्षांश और देशांतर रेखाओं के जाल को रेखाजाल (ग्रैटिक्यूल) कहते हैं। मानचित्र प्रक्षेप इस जाल को समतल काग़ज़ पर बनाने की विधि है।
ग्लोब घुमावदार है। इसे बिना खिंचे या फटे समतल नहीं कर सकते। इसलिए हर समतल मानचित्र में कुछ त्रुटि रहती है।
ग्लोब चार चीज़ें सही रखता है: क्षेत्रफल, आकृति, दिशा और दूरी। प्रक्षेप एक या दो को सही रख सकता है, चारों को नहीं।
ग्लोब ही क्यों नहीं? ग्लोब ले जाना कठिन है, छोटे क्षेत्र विस्तार से नहीं दिखते, और पूरा विश्व एक बार में नहीं दिखता।
प्रक्षेप के प्रकार
सतह के आधार पर (विकासनीय पृष्ठ)
- बेलनाकार: काग़ज़ का बेलन ग्लोब को विषुवत् वृत्त पर छूता है।
- शंक्वाकार: काग़ज़ का शंकु एक अक्षांश पर छूता है।
- खमध्य (शिरोबिंदु): समतल काग़ज़ एक बिंदु, प्रायः ध्रुव, पर छूता है।
विकासनीय पृष्ठ वह है जिसे बिना खिंचे समतल खोला जा सके (बेलन, शंकु)। गोला अविकासनीय है।
विधि के आधार पर
- संदर्श: प्रकाश से जाल की छाया डालकर।
- असंदर्श: बिना प्रकाश, ज्यामिति से।
- गणितीय (रूढ़): सूत्रों से।
प्रकाश की स्थिति के आधार पर
नोमोनिक (केंद्र पर प्रकाश), त्रिविम (दूसरे छोर पर), लंबकोणीय (बहुत दूर, समांतर किरणें)।
गुण के आधार पर
- समक्षेत्र: क्षेत्रफल सही।
- शुद्ध आकृतिक (ऑर्थोमॉर्फ़िक): छोटे क्षेत्रों की आकृति सही।
- दिगंशी: केंद्र से दिशाएँ सही।
- समदूरस्थ: कुछ रेखाओं पर दूरी सही।
एक मानक अक्षांश वाला शंक्वाकार प्रक्षेप
कल्पना कीजिए काग़ज़ का शंकु ग्लोब पर इस तरह रखा है कि वह एक अक्षांश पर छूता है। यही मानक अक्षांश है। केंद्र का प्रकाश जाल को शंकु पर डालता है। शंकु खोलने पर पंखे जैसी आकृति मिलती है।
रचना (विधि की रूपरेखा)
- मापनी से छोटे ग्लोब का वृत्त बनाइए (R = पृथ्वी की त्रिज्या × RF)।
- विषुवत् वृत्त, ध्रुव अक्ष और मानक अक्षांश का कोण केंद्र से बनाइए।
- मानक अक्षांश वाले बिंदु पर स्पर्श रेखा खींचकर ध्रुव अक्ष तक बढ़ाइए। यही शंकु का शीर्ष है और मानक अक्षांश की त्रिज्या मिलती है।
- वृत्त पर अक्षांश अंतराल का चाप (अक्षांशों की दूरी) और मानक अक्षांश की लंबाई ÷ अंतराल (देशांतरों की दूरी) निकालिए।
- शीर्ष को केंद्र मानकर मानक अक्षांश का चाप खींचिए, फिर बराबर दूरी पर बाकी अक्षांश चाप।
- मानक अक्षांश पर देशांतर दूरी के निशान लगाकर शीर्ष से सीधी रेखाएँ खींचिए।
गुण
- सब अक्षांश संकेंद्री वृत्तों के चाप हैं; उनके बीच दूरी बराबर।
- सब देशांतर शीर्ष पर मिलने वाली सीधी रेखाएँ, जो अक्षांशों को समकोण पर काटती हैं।
- मानक अक्षांश और देशांतरों पर मापनी सही।
- ध्रुव बिंदु नहीं, चाप के रूप में दिखता है।
- मानक अक्षांश से दूर अक्षांश खिंचते हैं, इसलिए क्षेत्रफल और आकृति बिगड़ती है।
सीमाएँ और उपयोग
- विश्व या पूरे गोलार्ध के मानचित्र के लिए ठीक नहीं; विकृति बहुत बढ़ जाती है।
- मध्य अक्षांश के वे क्षेत्र जो पूर्व–पश्चिम में फैले और उत्तर–दक्षिण में संकरे हों, जैसे नदी घाटी, रेलमार्ग, या 30°–60° के बीच की पट्टी।
मर्केटर प्रक्षेप
गेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया। यह गणित से बना बेलनाकार, शुद्ध आकृतिक प्रक्षेप है।
रचना (रूपरेखा)
- मापनी से विषुवत् वृत्त की लंबाई (2πR) निकालिए। इसे सीधी रेखा में खींचकर देशांतर अंतराल के लिए बाँटिए।
- देशांतर बराबर दूरी पर सीधी, समांतर, खड़ी रेखाएँ।
- हर अक्षांश की ऊँचाई मर्केटर सारणी से (अक्षांश बढ़ने पर बढ़ती है: लगभग R × ln tan(45° + φ/2))।
गुण
- अक्षांश और देशांतर सीधी रेखाएँ, समकोण पर कटती हैं।
- सब अक्षांश विषुवत् वृत्त जितने लंबे, इसलिए ध्रुवों की ओर अधिक खिंचे हुए।
- अक्षांशों के बीच दूरी भी उसी अनुपात (sec φ = 1 ÷ cos φ) में बढ़ती है। इसलिए छोटे क्षेत्रों की आकृति सही रहती है।
- कहीं भी खींची सीधी रेखा स्थिर दिशा की रेखा (लोक्सोड्रोम/रम्ब रेखा) है।
- ध्रुव नहीं दिखाए जा सकते: वे अनंत दूरी पर होंगे।
सीमाएँ और उपयोग
- ऊँचे अक्षांशों पर क्षेत्रफल बहुत बढ़ा-चढ़ा: ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका जितना दिखता है।
- समुद्री और हवाई नौवहन चार्ट, और महासागरीय धाराओं, पवनों, अपवाह के विश्व मानचित्रों में, जहाँ दिशा ज़रूरी है।
दोनों की तुलना
| विशेषता | शंक्वाकार, एक मानक अक्षांश | मर्केटर |
|---|---|---|
| सतह | शंकु | बेलन |
| अक्षांश | संकेंद्री चाप | सीधी, बराबर लंबी रेखाएँ |
| देशांतर | शीर्ष से सीधी रेखाएँ | सीधी, समांतर रेखाएँ |
| सही गुण | मानक अक्षांश पर मापनी | आकृति और दिशा |
| उपयोग | मध्य अक्षांश की संकरी पट्टी | नौवहन, विश्व दिशाएँ |
करके देखें
संतरे का छिलका एक टुकड़े में उतारकर समतल दबाइए: खाली जगहें और दरारें देखिए। फिर काग़ज़ से गेंद के चारों ओर शंकु और नली बनाइए। अब अनुमान लगाइए: मर्केटर पर 60° का वर्ग कितना खिंचेगा? (1 ÷ cos 60° = हर ओर 2 गुना, क्षेत्रफल 4 गुना)। 3D के आख़िरी चरण में जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रेखाजाल = अक्षांश-देशांतर रेखाओं का जाल
- अक्षांश φ पर मर्केटर खिंचाव = sec φ = 1 ÷ cos φ
- मर्केटर पर क्षेत्रफल बढ़ोतरी = sec² φ
- छोटे ग्लोब की त्रिज्या R = पृथ्वी की त्रिज्या × RF
हल किए गए उदाहरण
1. 40° उ. से 50° उ. के बीच पूर्व–पश्चिम फैली नदी घाटी के लिए कौन सा प्रक्षेप?
एक मानक अक्षांश (लगभग 45° उ.) वाला शंक्वाकार प्रक्षेप। क्षेत्र मध्य अक्षांश, उत्तर–दक्षिण में संकरा और पूर्व–पश्चिम में फैला है।
2. मर्केटर पर ग्रीनलैंड असल से बड़ा क्यों दिखता है?
ग्रीनलैंड ऊँचे अक्षांश पर है। मर्केटर दोनों ओर 1 ÷ cos φ खींचता है, तो क्षेत्रफल 1 ÷ cos² φ गुना। 70° पर लगभग 8.5 गुना।
3. मर्केटर पर 60° अक्षांश पर लंबाई कितनी गुना होती है?
1 ÷ cos 60° = 1 ÷ 0.5 = 2। लंबाई दुगुनी, क्षेत्रफल 4 गुना।
4. नाविक मर्केटर चार्ट पर दो बंदरगाहों के बीच सीधी रेखा खींचता है। इससे क्या मिलता है?
स्थिर दिशा की रेखा (रम्ब रेखा)। नाविक पूरे रास्ते एक ही कंपास दिशा रख सकता है।
आम गलतियाँ
- शंक्वाकार प्रक्षेप को विश्व मानचित्र के लिए अच्छा बताना। यह केवल मध्य अक्षांश की संकरी पट्टी के लिए है।
- मर्केटर को समक्षेत्र मानना। यह आकृति और दिशा रखता है; ध्रुवों के पास क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है।
- शंक्वाकार प्रक्षेप में ध्रुव को बिंदु बनाना। वह चाप दिखता है।
- मर्केटर में अक्षांश बराबर दूरी पर बनाना। दूरी ध्रुवों की ओर बढ़ती है।