आर्द्रता
आर्द्रता हवा में मौजूद जलवाष्प है। यह आयतन के हिसाब से लगभग 0 से 4% तक होती है।
- निरपेक्ष आर्द्रता: हवा के एक इकाई आयतन में वाष्प का असली वज़न, जैसे ग्राम प्रति घन मीटर (g/m³)।
- सापेक्ष आर्द्रता (RH): उस तापमान पर हवा जितनी वाष्प रख सकती है, उसकी तुलना में मौजूद वाष्प का प्रतिशत। RH = (असली वाष्प ÷ संतृप्ति पर वाष्प) × 100।
- संतृप्त हवा: जितनी वाष्प रख सकती है, सब रखे हुए (RH = 100%)।
- ओसांक: वह तापमान जिस पर ठंडी होकर हवा संतृप्त हो जाती है।
गरम हवा ज़्यादा वाष्प रख सकती है। इसलिए हवा बिना वाष्प खोए ठंडी हो तो RH बढ़ता है। महासागरों पर RH ज़्यादा, महाद्वीपों और मरुस्थलों पर कम।
वाष्पीकरण और संघनन
वाष्पीकरण पानी का वाष्प बनना है। इसके लिए गर्मी चाहिए: वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा। गर्मी, सूखी हवा और चलती पवन में यह तेज़ होता है (पवन नम हवा को हटा देती है)।
संघनन वाष्प का फिर पानी बनना है। यह हवा के ओसांक तक ठंडा होने पर होता है, और वाष्प को बैठने के लिए छोटे कण चाहिए (आर्द्रताग्राही नाभिक: धूल, धुआँ, नमक)। संघनन रखी हुई गुप्त ऊष्मा छोड़ता है, जो हवा को गरम करके तूफ़ानों को ताकत देती है।
हवा ठंडी होती है: ऊपर उठकर फैलने से (बादलों का मुख्य तरीका), ठंडी सतह छूने से, या ठंडी हवा से मिलने से।
संघनन के रूप: ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा और बादल
- ओस: घास-पत्तों जैसी ठंडी सतहों पर पानी की बूँदें। अनुकूल: साफ़ आसमान, शांत हवा, ऊँची RH, ठंडी लंबी रातें; ओसांक 0 °C से ऊपर।
- तुषार (पाला): जब ओसांक 0 °C से नीचे हो, तो ठंडी सतहों पर सीधे बर्फ़ के कण।
- कोहरा और कुहासा: ज़मीन छूता बादल, धूल-धुएँ पर बनी छोटी बूँदें। कोहरा घना (1 km से कम दिखे); कुहासा पतला और ज़्यादा नम। धुआँ + कोहरा = धूम कोहरा (स्मॉग)।
- बादल: ज़मीन से ऊपर छोटी बूँदों या बर्फ़ के कणों का ढेर। चार मुख्य प्रकार:
- पक्षाभ (सिरस): ऊँचे (8–12 km), पतले, पंख जैसे, सफ़ेद।
- कपासी (क्यूम्यलस): रुई जैसे फूले, सपाट तल; 4–7 km पर साफ़ मौसम के बादल।
- स्तरी (स्ट्रेटस): आसमान ढकने वाली परतदार चादर; धूसर।
- वर्षा मेघ (निम्बस): काले, घने, नीचे वाले बरसने वाले बादल।
वर्षण और वर्षा के प्रकार
संघनन के बाद ज़मीन पर गिरने वाला पानी वर्षण है। रूप:
- वर्षा: पानी की बूँदें।
- हिमपात: 0 °C से नीचे बर्फ़ के फाहे।
- सहिम वृष्टि: जमी हुई बूँदें, या बारिश-बर्फ़ मिली।
- ओले (करकापात): ऊँचे गरज वाले बादलों में बूँदें ऊपर-नीचे होकर बर्फ़ की परतें जोड़ती हैं।
वर्षा के प्रकार (हवा किससे उठी)
- संवहनीय वर्षा: गरम ज़मीन से हवा गरम होकर उठती, ठंडी होकर कपासी-वर्षी बादल बनाती है; दोपहर को गरज के साथ भारी बौछार। विषुवतीय क्षेत्रों और गर्मी में आम।
- पर्वतीय वर्षा: नम पवन पहाड़ से टकराकर ऊपर उठती है। पवनमुखी ढाल पर भारी बारिश; पवनविमुखी ढाल पर कम: वृष्टि छाया क्षेत्र।
- चक्रवाती (वाताग्री) वर्षा: वाताग्र या चक्रवात में गरम हवा ठंडी हवा पर उठती है।
विश्व में वर्षा का वितरण
- वर्षा सामान्यतः विषुवत से ध्रुवों की ओर घटती है।
- 200 cm से ज़्यादा: विषुवतीय पेटी और नम पवनों वाले तटों के पहाड़ों की पवनमुखी ढालें (जैसे मानसूनी तट)।
- कम (50 cm से कम): 30° के पास उपोष्ण मरुस्थल (बैठती सूखी हवा), समुद्र से दूर महाद्वीपों के भीतरी भाग, वृष्टि छाया क्षेत्र और ध्रुवीय प्रदेश।
- तटों पर भीतरी भागों से ज़्यादा। 35°–40° उ./द. के बीच पूर्वी तट ज़्यादा गीले; 45° के पार पश्चिमी तट (पछुआ पवनें)।
- महासागरों पर स्थल से ज़्यादा।
- ऋतु के अनुसार: कुछ जगह सालभर (विषुवतीय), कुछ मुख्यतः गर्मी में (मानसूनी), कुछ मुख्यतः सर्दी में (भूमध्यसागरीय प्रकार)।
घर पर करके देखें
उमस भरे दिन बर्फ़ के पानी वाला स्टील का गिलास बाहर रखिए। एक मिनट में बाहर छोटी बूँदें आ जाती हैं। गिलास ने पास की हवा को ओसांक से नीचे ठंडा किया: संघनन। ठंडे शीशे पर साँस छोड़िए: वही बात। साफ़, शांत रात में एक सपाट प्लेट बाहर रखें और सुबह ओस देखें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सापेक्ष आर्द्रता (%) = (असली वाष्प ÷ उस तापमान पर अधिकतम वाष्प) × 100
- संतृप्त हवा: RH = 100%; ओसांक = जिस तापमान पर हवा संतृप्त हो
- वाष्पीकरण गुप्त ऊष्मा लेता है; संघनन उसे छोड़ता है
- बादल: पक्षाभ (ऊँचे, पंख), कपासी (रुई), स्तरी (परत), वर्षा मेघ (बारिश)
- वर्षा के प्रकार: संवहनीय, पर्वतीय (पवनमुखी गीला, पवनविमुखी वृष्टि छाया), चक्रवाती/वाताग्री
हल किए गए उदाहरण
1. 30 °C पर हवा में 15 g/m³ वाष्प है। उस तापमान पर वह 30 g/m³ रख सकती है। सापेक्ष आर्द्रता निकालिए।
RH = 15 ÷ 30 × 100 = 50%।
2. वही हवा 20 °C तक ठंडी होती है, जहाँ वह केवल 17 g/m³ रख सकती है। नई RH? क्या ओस बनेगी?
RH = 15 ÷ 17 × 100 ≈ 88%। अभी 100% नहीं, इसलिए ओस नहीं; उसे ओसांक तक और ठंडा होना होगा।
3. हवा में 12 g/m³ वाष्प है। 10 °C पर अधिकतम 9 g/m³ रख सकती है। 10 °C तक ठंडी हो तो क्या होगा?
वह केवल 9 रख सकती है, तो 12 − 9 = 3 g प्रति m³ पानी संघनित होकर बूँदें (ओस, कोहरा या बादल) बनेगा।
4. मानसून में मुंबई को पुणे से बहुत ज़्यादा बारिश क्यों मिलती है?
नम दक्षिण-पश्चिमी पवनें पश्चिमी घाट पर उठकर ज़्यादातर बारिश पवनमुखी (मुंबई) ओर गिरा देती हैं। पवनविमुखी (पुणे) ओर उतरती हवा गरम और सूखी होती है: वृष्टि छाया।
5. सहारा बहुत गरम है, फिर भी वहाँ बादल क्यों कम हैं?
यह उपोष्ण उच्च दाब के नीचे है जहाँ हवा नीचे बैठती है। बैठती हवा गरम होकर RH घटाती है, ओसांक तक नहीं पहुँचती, और नमी भी कम है।
आम गलतियाँ
- सापेक्ष आर्द्रता को हवा में पानी की मात्रा समझना। यह प्रतिशत है कि हवा कितनी भरी है।
- ओस और तुषार को मिलाना: तुषार तब बनता है जब ओसांक 0 °C से नीचे हो, ओस जमने से नहीं।
- कोहरे और बादल को अलग चीज़ें मानना। कोहरा ज़मीन पर बादल है।
- कहना कि पहाड़ की पवनविमुखी ढाल पर सबसे ज़्यादा बारिश होती है। पवनमुखी पर होती है; पवनविमुखी वृष्टि छाया है।