United Grade 12 AP Environmental Science
अध्याय: 9
1. The Living World: Ecosystems
Introduction to ecosystems · Terrestrial biomes · Aquatic biomes · The carbon cycle · The nitrogen cycle · The phosphorus cycle · The hydrologic (water) cycle · Primary productivity · Trophic levels · Energy flow and the 10% rule · Food chains and food webs
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
- पारितंत्र गहराई से: बायोम, पोषक चक्र और गड़बड़ी – बायोम बड़े क्षेत्र हैं जिनकी जलवायु और जीवन मिलते-जुलते हैं। ज़मीन पर तापमान और वर्षा बायोम तय करते हैं; पानी में खारापन, गहराई, रोशनी और बहाव क्षेत्र तय करते हैं। पदार्थ पारितंत्र में घूमता है: नाइट्रोजन स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण, स्वांगीकरण, अमोनीकरण और विनाइट्रीकरण से हवा, मिट्टी, जीवों के बीच घूमकर लौटती है; फ़ॉस्फ़ोरस चट्टान, मिट्टी, पानी, जीव और तलछट के बीच धीरे घूमता है, बिना गैस चरण के। अपघटक ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) या बिना (अवायवीय) पदार्थ लौटाते हैं। उर्वरक बहाव, आवास-नाश, आक्रामक प्रजातियाँ और जलवायु परिवर्तन इन तंत्रों को बिगाड़ते हैं; पारितंत्र प्रतिरोध और लचीलेपन से जवाब देते हैं।
- कार्बन चक्र: कार्बन कहाँ रहता है और कैसे घूमता है – कार्बन हवा, जीवों, मिट्टी, महासागर और चट्टानों के बीच घूमता रहता है। इन जगहों को भंडार कहते हैं और कार्बन के आने-जाने को प्रवाह। प्रकाश संश्लेषण हवा से कार्बन डाइऑक्साइड निकालता है; श्वसन, अपघटन और दहन उसे वापस देते हैं। महासागर बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन लेता और छोड़ता है। लाखों सालों में कार्बन चट्टानों और जीवाश्म ईंधन में बंद हो जाता है, और ज्वालामुखी व अपक्षय उसे धीरे-धीरे लौटाते हैं। आज मनुष्य ईंधन जलाकर और जंगल काटकर इतना कार्बन जोड़ रहे हैं कि प्राकृतिक भंडार उसे सोख नहीं पाते, इसलिए हवा में CO₂ बढ़ रही है और पृथ्वी गरम हो रही है।
- वायुमंडल में जल – हवा में हमेशा कुछ पानी अदृश्य वाष्प के रूप में होता है; इसकी मात्रा आर्द्रता है। निरपेक्ष आर्द्रता हवा के आयतन में वाष्प का असली वज़न है; सापेक्ष आर्द्रता बताती है कि उस तापमान पर जितनी वाष्प रख सकती है उसकी तुलना में हवा कितनी भरी है। पानी वाष्पीकरण से वाष्प बनता है (गर्मी लेता है) और हवा ओसांक तक ठंडी होने पर संघनन से फिर पानी (गर्मी देता है)। ज़मीन के पास संघनन से ओस, तुषार, कुहासा और कोहरा; ऊपर बादल बनते हैं: पक्षाभ, कपासी, स्तरी और वर्षा मेघ। बूँदें भारी होकर वर्षण बनकर गिरती हैं: बारिश, हिम, सहिम वृष्टि या ओले। वर्षा तीन तरह से होती है: संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती (वाताग्री)। वर्षा विषुवत और पवनमुखी तटों पर सबसे ज़्यादा, और उपोष्ण मरुस्थलों, महाद्वीपों के भीतर और ध्रुवों पर सबसे कम है।
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
2. The Living World: Biodiversity
Introduction to biodiversity · Ecosystem services · Island biogeography · Ecological tolerance · Natural disruptions to ecosystems · Adaptations · Ecological succession
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
3. Populations
Generalist and specialist species · K-selected and r-selected species · Survivorship curves · Carrying capacity · Population growth and resource availability · Age structure diagrams · Total fertility rate · Human population dynamics · Demographic transition
- जनसंख्या पारिस्थितिकी: r और K जातियाँ, उत्तरजीविता और मानव जनसंख्या – हर जाति की जीवन-योजना अलग होती है। r-चयनित जातियाँ बहुत सारे छोटे बच्चे पैदा करती हैं और देखभाल नहीं करतीं; K-चयनित जातियाँ कम पर बड़े बच्चे पैदा करती हैं और उनकी देखभाल करती हैं। उत्तरजीविता वक्र बताते हैं कि मौत किस उम्र में ज़्यादा होती है (टाइप I देर से, टाइप II बराबर, टाइप III जल्दी)। सामान्यवादी बहुत से संसाधन इस्तेमाल करते हैं, विशेषज्ञ एक ही पर निर्भर रहते हैं। मनुष्यों में आयु पिरामिड, कुल प्रजनन दर (प्रतिस्थापन लगभग 2.1) और जनसांख्यिकीय संक्रमण के चार चरण बताते हैं कि जनसंख्या कैसे बढ़ती, थमती या घटती है।
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
4. Earth Systems and Resources
Plate tectonics · Soil formation and erosion · Soil composition and properties · Earth's atmosphere · Global wind patterns · Watersheds · Solar radiation and seasons · Earth's geography and climate · El Nino and La Nina
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- मिट्टी, जलग्रहण क्षेत्र, सौर विकिरण और ऋतुएँ – मिट्टी धीरे-धीरे बनती है जब चट्टान टूटती है और जीव जैविक पदार्थ जोड़ते हैं; जलवायु, जीव, ढलान, मूल पदार्थ और समय इसे तय करते हैं। इसमें परतें (संस्तर) बनती हैं: O, A, E, B, C, R। गठन (रेत, गाद, मृत्तिका) से सरंध्रता, पारगम्यता और जल-धारण तय होता है। हवा और पानी मिट्टी बहाते हैं, खासकर नंगी और खड़ी ज़मीन पर। जलग्रहण क्षेत्र वह सारी ज़मीन है जिसका पानी एक निकास तक जाता है, और इसे जल-विभाजक घेरता है। पृथ्वी का 23.5° झुकाव साल भर सूर्य का कोण और दिन की लंबाई बदलता है — इसी से ऋतुएँ।
- वायुमंडल का संघटन तथा संरचना – वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा की मोटी चादर है, जिसे गुरुत्व पकड़े रखता है। इसमें ज़्यादातर नाइट्रोजन (78%) और ऑक्सीजन (21%) है; थोड़ी आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओज़ोन, जलवाष्प और धूल भी है। इसकी पाँच परतें हैं: क्षोभमंडल (मौसम यहीं), समतापमंडल (ओज़ोन परत), मध्यमंडल (सबसे ठंडा), तापमंडल (आयनमंडल) और बहिर्मंडल। मौसम थोड़े समय की हालत है, जलवायु लगभग 30 साल का औसत। दोनों के तत्व एक ही हैं: तापमान, दाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षण।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- पृथ्वी का भूगोल और जलवायु: वृष्टि छाया, एल नीनो और ला नीना – जलवायु भूगोल पर निर्भर है। अक्षांश तय करता है कितनी धूप पहुँचे; भूमध्य रेखा पर उठती और लगभग 30° पर उतरती हवा वर्षावन और रेगिस्तान बनाती है (हैडली कोष्ठ)। ऊँचाई पर हवा हर km पर लगभग 6.5 °C ठंडी होती है। महासागर धीरे गर्म-ठंडे होते हैं, इसलिए तटों की जलवायु नरम है, और धाराएँ गर्मी ढोती हैं। पहाड़ नम हवा को ऊपर उठाते हैं: हवा की ओर बारिश, पीछे सूखी वृष्टि छाया। एल नीनो में प्रशांत की व्यापारिक पवनें कमज़ोर होती हैं और गर्म पानी पूर्व की ओर फैलता है, जिससे दुनिया भर में बारिश खिसकती है; ला नीना उल्टा है — तेज़ पवनें और ठंडा पूर्वी प्रशांत।
5. Land and Water Use
The tragedy of the commons · Clearcutting · The Green Revolution · Impacts of agricultural practices · Irrigation methods · Pest control methods · Meat production methods · Impacts of overfishing · Impacts of mining · Impacts of urbanization · Ecological footprints · Introduction to sustainability · Methods to reduce urban runoff · Integrated pest management · Sustainable agriculture · Aquaculture · Sustainable forestry
- संसाधन सुरक्षा और भूमि व जल का टिकाऊ उपयोग – प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की वे चीज़ें हैं जिन्हें लोग इस्तेमाल करते हैं: पानी, मिट्टी, जंगल, मछली, खनिज और ऊर्जा। अनवीकरणीय संसाधन (कोयला, तेल, धातु अयस्क) ऐसे भंडार हैं जो घटते जाते हैं; नवीकरणीय संसाधन (पानी, जंगल, मछली) फिर भरते हैं, पर एक सीमित रफ़्तार से। संसाधन सुरक्षा का मतलब है भरोसे से, सही दाम पर, पर्याप्त संसाधन होना। साझे संसाधन अक्सर "साझी चीज़ों की त्रासदी" झेलते हैं: हर उपयोगकर्ता थोड़ा ज़्यादा लेता है और संसाधन खत्म हो जाता है। जल सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी चिंताएँ हैं; खेती लगभग 70% मीठा पानी लेती है, और दुनिया की लगभग 80% ऊर्जा अब भी जीवाश्म ईंधन से आती है। टपक सिंचाई, एकीकृत कीट प्रबंधन, चुनकर कटाई, सावधानी से मछली पालन, मछली पकड़ने का कोटा, खदान की ज़मीन को फिर हरा करना और शहर का बहता पानी घटाना जैसे टिकाऊ तरीके आज के उपयोग के साथ भविष्य के लिए भी बचाते हैं। पारिस्थितिक पदचिह्न (ecological footprint) बताता है कि हमारी जीवनशैली को कितनी ज़मीन और पानी चाहिए।
- कृषि और पर्यावरण: कृषि-पारितंत्र, हरित क्रांति और टिकाऊपन – खेत एक कृषि-पारितंत्र है: सरल किया हुआ पारितंत्र जहाँ लोग कम प्रजातियाँ उगाते हैं और उपज बढ़ाने के लिए ऊर्जा व सामग्री (उर्वरक, पानी, ईंधन, कीटनाशक) जोड़ते हैं। बेहतर फसल व पशु आनुवंशिकी और हरित क्रांति के पैकेज (HYV बीज, सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक, मशीनें) ने अनाज कई गुना बढ़ाया। पर सघन खेती से सुपोषण, लवणीकरण, मिट्टी का कटाव, कीटों में प्रतिरोध, जैव-विविधता की हानि और ग्रीनहाउस गैसें बढ़ सकती हैं। सामाजिक-आर्थिक ताक़तें भी खेती तय करती हैं। टिकाऊ तरीक़े (फसल चक्र, IPM, कम जुताई, कुशल सिंचाई, कृषि-वानिकी) उपज ऊँची रखते हुए ज़मीन और पानी बचाते हैं।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
6. Energy Resources and Consumption
Renewable and nonrenewable resources · Global energy consumption · Fuel types and uses · Distribution of natural energy resources · Fossil fuels · Nuclear power · Energy from biomass · Solar energy · Hydroelectric power · Geothermal energy · Hydrogen fuel cells · Wind energy · Energy conservation
- ऊर्जा संसाधन: उपयोग, विश्व मिश्रण और टिकाऊ भविष्य – समाज को खाना उगाने, सामान बनाने, लोगों को लाने-ले जाने और घर चलाने के लिए ऊर्जा चाहिए। अमीर देशों में हर व्यक्ति बहुत ज़्यादा ऊर्जा इस्तेमाल करता है। दुनिया की लगभग 80% प्राथमिक ऊर्जा अब भी जीवाश्म ईंधन (तेल, कोयला, गैस) से आती है, जो ख़त्म होने वाले हैं और CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत (सौर, पवन, जल, भू-तापीय, बायोमास) बार-बार मिलते रहते हैं; परमाणु ऊर्जा अनवीकरणीय है पर कम-कार्बन है। ऊर्जा संसाधन धरती पर असमान रूप से फैले हैं, इसलिए देश स्रोत बढ़ाकर, भंडारण, बचत और नई तकनीक (हाइड्रोजन, फ्यूल सेल) से ऊर्जा सुरक्षा पाते हैं।
- रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु – कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।
7. Atmospheric Pollution
Introduction to air pollution · Photochemical smog · Thermal inversion · Atmospheric CO2 and particulates · Indoor air pollutants · Reduction of air pollutants · Acid rain · Noise pollution
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
8. Aquatic and Terrestrial Pollution
Sources of pollution · Human impacts on ecosystems · Endocrine disruptors · Human impacts on wetlands and mangroves · Eutrophication · Thermal pollution · Persistent organic pollutants · Bioaccumulation and biomagnification · Solid waste disposal · Waste reduction methods · Sewage treatment · Lethal dose 50% (LD50) · Dose-response curve · Pollution and human health · Pathogens and infectious diseases
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
9. Global Change
Stratospheric ozone depletion · Reducing ozone depletion · The greenhouse effect · Increases in greenhouse gases · Global climate change · Ocean warming · Ocean acidification · Invasive species · Endangered species · Human impacts on biodiversity
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।