संसाधन, भंडार और प्रवाह
प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की कोई भी चीज़ है जिसे लोग इस्तेमाल करते हैं। संसाधनों का विकास चरणों में होता है: पहले खोज, फिर निकालना (खनन या दोहन), फिर साफ़ करना और उपयोग। हर चरण में पैसा, तकनीक और लोग लगते हैं।
- अनवीकरणीय (भंडार): कोयला, तेल, गैस, धातु अयस्क। ये लाखों-करोड़ों सालों में बने। इस्तेमाल हुआ हर टन हमेशा के लिए गया।
- नवीकरणीय (प्रवाह): पानी, जंगल, मछली, मिट्टी, हवा, धूप। ये फिर भरते हैं, पर एक तय रफ़्तार से। उससे तेज़ उपयोग करें तो ये भी खत्म हो जाते हैं।
सतत (टिकाऊ) विकास
टिकाऊ उपयोग आज की ज़रूरतें पूरी करता है, पर आने वाली पीढ़ियों का हिस्सा नहीं घटाता। इसके तीन पहलू हैं: पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज।
पारिस्थितिक पदचिह्न
तुम्हारा पारिस्थितिक पदचिह्न वह ज़मीन और पानी का क्षेत्र है जो तुम्हारा खाना उगाने, सामान देने और कचरा सोखने के लिए चाहिए। इसे ग्लोबल हेक्टेयर (gha) में नापते हैं। दुनिया का औसत लगभग 2.6 gha प्रति व्यक्ति है, पर धरती हर व्यक्ति को लगभग 1.6 gha ही दे सकती है। अमीर देशों का पदचिह्न गरीब देशों से बहुत बड़ा है।
साझी चीज़ों की त्रासदी और ज़्यादा उपयोग
साझा संसाधन (common) वह है जिसे बहुत लोग इस्तेमाल करते हैं पर किसी एक का नहीं: खुला समुद्र, गाँव का चरागाह, हवा, ज़मीन के नीचे का जलभृत। हर उपयोगकर्ता सोचता है: "थोड़ा ज़्यादा लूँ तो पूरा फ़ायदा मेरा, और नुकसान सबमें बँट जाएगा।" जब सब ऐसा सोचते हैं, संसाधन खत्म हो जाता है। इसे साझी चीज़ों की त्रासदी (tragedy of the commons) कहते हैं।
ज़्यादा मछली पकड़ना
दुनिया के लगभग एक-तिहाई मछली भंडार उनके दोबारा बढ़ने से तेज़ पकड़े जा रहे हैं। असर: मछलियाँ छोटी होती हैं, खाद्य श्रृंखला टूटती है, तटीय रोज़गार जाते हैं, और गलती से फँसे जीव (बायकैच) जैसे डॉल्फ़िन, कछुए और शार्क मरते हैं। तलहटी जाल (बॉटम ट्रॉलिंग) समुद्र तल को खुरच देता है।
उपाय
- कोटा: पकड़ की सीमा, अक्सर अधिकतम टिकाऊ उपज (MSY: वह सबसे बड़ी पकड़ जो हर साल ली जा सके और भंडार न घटे) के पास।
- मछली पकड़ने पर मौसमी रोक और समुद्री संरक्षित क्षेत्र।
- परमिट, शुल्क, या उपयोगकर्ताओं के खुद बनाए सामुदायिक नियम।
जल सुरक्षा और सिंचाई
जल सुरक्षा का मतलब है लोगों, खेतों, उद्योग और प्रकृति के लिए आज और कल पर्याप्त सुरक्षित पानी। खतरे: बढ़ती आबादी, प्रदूषण, ज़रूरत से ज़्यादा खींचा गया भूजल, जलवायु परिवर्तन और कई देशों से होकर बहने वाली नदियाँ।
सिंचाई के तरीके
| तरीका | कैसे काम करता है | फ़सल तक पहुँचा पानी |
|---|---|---|
| बाढ़ (flood) | पूरा खेत भर देना | ≈ 50% |
| नाली (furrow) | पंक्तियों के बीच नालियों में पानी | ≈ 65% |
| फव्वारा (sprinkler) | बारिश जैसा छिड़काव | ≈ 75% |
| टपक (drip) | पाइप हर पौधे की जड़ पर बूँद-बूँद पानी देते हैं | ≈ 90% |
ज़्यादा सिंचाई से जलभराव और लवणीकरण (पानी भाप बनकर उड़ने के बाद मिट्टी में नमक जमा होना) होता है।
जल सुरक्षा बढ़ाने के और तरीके
वर्षा जल संचयन, चेक डैम, रिसाव ठीक करना, गंदे पानी का दोबारा उपयोग, समुद्री पानी से नमक हटाना (बहुत ऊर्जा लगती है), और बड़े बाँध या नदी जोड़ योजनाएँ (उपयोगी, पर ज़मीन डूबती है और लोग विस्थापित होते हैं)।
शहर का बहता पानी
छतें और सड़कें कठोर सतहें हैं, इसलिए बारिश तेज़ी से बहती है, तेल और कचरा साथ ले जाती है और बाढ़ लाती है। उपाय: पानी सोखने वाले फ़र्श, रेन गार्डन, हरी छतें, और आर्द्रभूमि बचाना।
ऊर्जा सुरक्षा
ऊर्जा सुरक्षा का मतलब है ऊर्जा की भरोसेमंद और सस्ती आपूर्ति। दुनिया की लगभग 80% ऊर्जा अब भी तेल, कोयले और गैस से आती है। खतरे: खत्म होना, दाम के झटके, युद्ध या राजनीति से आपूर्ति रुकना, और जीवाश्म ईंधन जलाने से जलवायु परिवर्तन।
- ऊर्जा मिश्रण: देश किस स्रोत से कितनी ऊर्जा लेता है। मिश्रण जितना चौड़ा, उतना सुरक्षित।
- आयात पर निर्भरता: भारत अपना लगभग 85% तेल आयात करता है, इसलिए दुनिया के दाम उस पर बहुत असर डालते हैं।
- उपाय: नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल), परमाणु ऊर्जा, दक्षता (कम ऊर्जा में वही काम), ईंधन का रणनीतिक भंडार और बेहतर बिजली ग्रिड।
भूमि उपयोग: खेती, जंगल और खनन
वानिकी
पूरी कटाई (clearcutting) में किसी इलाके का हर पेड़ काट दिया जाता है। यह सस्ता है, पर मिट्टी का कटाव, बाढ़, जीवों का घर छिनना और ज़्यादा CO2 लाता है। टिकाऊ वानिकी में चुनकर कटाई, दोबारा पेड़ लगाना, और पुराने जंगल व नदी किनारों की रक्षा होती है।
कीट नियंत्रण
रासायनिक कीटनाशक कीट जल्दी मारते हैं, पर कीटों में प्रतिरोध आ जाता है, और ज़हर मधुमक्खियों, मछलियों और इंसानों को नुकसान पहुँचाता है। एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) कई तरीके मिलाता है: फ़सल चक्र, प्राकृतिक शिकारी (जैसे लेडीबर्ड जो माहू खाती है), जाल, प्रतिरोधी किस्में, और रसायन सिर्फ़ आखिरी कदम के रूप में।
मांस उत्पादन
फ़ीडलॉट (बहुत से जानवर पास-पास रखकर अनाज खिलाना) सस्ता मांस देते हैं, पर बहुत पानी और अनाज लेते हैं और कचरा व बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। खुली चराई ज़्यादा ज़मीन लेती है और ज़्यादा जानवर होने पर चरागाह उजड़ते हैं। कम मांस खाने से पदचिह्न घटता है।
टिकाऊ खेती
फ़सल चक्र, मिश्रित फ़सल, ढलान पर समोच्च जुताई और सीढ़ीदार खेत, बिना जुताई खेती, कम्पोस्ट और हरी खाद, और हवा रोकने वाली पेड़ पट्टियाँ।
जलकृषि (मछली पालन)
मछली पालन जंगली मछलियों पर दबाव घटाता है और कम लागत में भोजन देता है, पर पानी गंदा कर सकता है, जंगली मछलियों में बीमारी फैला सकता है, और तालाब बनाने के लिए मैंग्रोव काट सकता है।
खनन
खनन से धातु और ईंधन मिलते हैं, पर पट्टी खनन पूरा भूदृश्य हटा देता है, खदान का कचरा नदियों को ज़हरीला बना सकता है (अम्लीय खदान जल), और धूल सेहत खराब करती है। कानून भूमि सुधार (reclamation) माँगता है: बाद में गड्ढे भरना, पेड़ लगाना और ज़मीन साफ़ करना।
संसाधनों का भविष्य और उदाहरण
क्या संसाधन खत्म हो जाएँगे? राय अलग-अलग हैं:
- निराशावादी (माल्थस के विचार) कहते हैं कि आबादी संसाधनों से आगे निकल जाएगी।
- आशावादी (बोसेरप के विचार) कहते हैं कि दबाव लोगों को नए तरीके खोजने पर मजबूर करता है।
आगे के रास्ते: चक्रीय अर्थव्यवस्था (सब कुछ दोबारा इस्तेमाल और रीसायकल), नई तकनीक, उचित व्यापार समझौते, और साझी नदियों व समुद्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम।
छोटे उदाहरण
- अरल सागर (मध्य एशिया): कपास की सिंचाई के लिए नदियाँ मोड़ने से झील लगभग 90% सिकुड़ गई।
- ग्रैंड बैंक्स की कॉड (कनाडा): ज़्यादा मछली पकड़ने से 1992 में भंडार खत्म हुआ; फिर मछली पकड़ने पर रोक लगी।
- भारत का भूजल: पंपों के लिए मुफ़्त बिजली से ज़्यादा उपयोग हुआ; अब टपक योजनाएँ और गाँव के जल बजट फैल रहे हैं।
करके देखो
3D के खुद खेलो चरण में 5 नावों से शुरू करो और एक-एक नाव बढ़ाओ। हर संख्या पर सालाना पकड़ लिखो। नावें (x) और पकड़ (y) का ग्राफ़ बनाओ। वक्र का सबसे ऊँचा बिंदु कहाँ है? वही अधिकतम टिकाऊ उपज है। घर पर: एक दिन में तुम्हारा परिवार कितना पानी इस्तेमाल करता है, बाल्टियाँ गिनकर नापो, और उसे 10% घटाने के दो तरीके लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संसाधन सुरक्षा: भरोसे से, सस्ते दाम पर, पर्याप्त आपूर्ति
- नवीकरणीय संसाधन: सीमित रफ़्तार से अपने आप फिर भरता है
- अनवीकरणीय संसाधन: तय भंडार जो उपयोग से घटता है
- साझी चीज़ों की त्रासदी: हर उपयोगकर्ता के थोड़ा ज़्यादा लेने से साझा संसाधन बर्बाद होना
- अधिकतम टिकाऊ उपज (MSY): हर साल ली जा सकने वाली सबसे बड़ी पकड़, जिससे भंडार न घटे
- पारिस्थितिक पदचिह्न: एक व्यक्ति को सहारा देने के लिए ज़रूरी ज़मीन और पानी, ग्लोबल हेक्टेयर में
- लवणीकरण: सिंचाई का पानी उड़ने के बाद मिट्टी में नमक जमा होना
- एकीकृत कीट प्रबंधन: कीट रोकने के कई तरीके, रसायन सबसे आखिर में
हल किए गए उदाहरण
1. एक खेत की फ़सल तक रोज़ 4,500 लीटर पानी पहुँचना चाहिए। बाढ़ सिंचाई (50% पहुँचता है) और टपक सिंचाई (90%) में कितना पानी देना होगा?
बाढ़: 4,500 ÷ 0.5 = 9,000 L। टपक: 4,500 ÷ 0.9 = 5,000 L। टपक से रोज़ 4,000 L बचते हैं।
2. एक मछली भंडार अपने मौजूदा आकार पर हर साल 12 टन बढ़ता है। अगर नावें हर साल 20 टन पकड़ें तो क्या होगा?
हर साल भंडार 20 − 12 = 8 टन घटेगा। छोटा होने पर वह और कम बढ़ेगा, इसलिए गिरावट तेज़ होगी और भंडार खत्म हो सकता है।
3. समझाओ कि हर परिवार समझदार हो, तब भी गाँव का साझा चरागाह क्यों उजड़ सकता है।
एक और गाय जोड़ने का पूरा फ़ायदा उस परिवार को मिलता है, पर घास का नुकसान सब बाँटते हैं। इसलिए हर परिवार जानवर बढ़ाता है, और मिलकर चरागाह उजाड़ देते हैं। यही साझी चीज़ों की त्रासदी है।
4. दुनिया का औसत पदचिह्न ≈ 2.6 gha प्रति व्यक्ति है; धरती ≈ 1.6 gha प्रति व्यक्ति दे सकती है। हमें कितनी धरतियाँ चाहिए?
2.6 ÷ 1.6 ≈ 1.6 धरती। हम संसाधनों को उनके दोबारा बनने से लगभग 60% तेज़ खर्च कर रहे हैं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि नवीकरणीय का मतलब असीमित है। मछली, जंगल और भूजल दोबारा भरने से तेज़ उपयोग पर खत्म हो जाते हैं।
- यह मानना कि ज़्यादा नावें मतलब हमेशा ज़्यादा मछली। अधिकतम टिकाऊ उपज के बाद ज़्यादा मेहनत से पकड़ घटती है।
- यह कहना कि मछली पालन पर्यावरण के लिए हमेशा अच्छा है। खराब प्रबंधन में वह पानी गंदा करता है और मैंग्रोव नष्ट करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा को सिर्फ़ ईंधन खत्म होने से जोड़ना। दाम के झटके, आयात और राजनीति भी उतने ही ज़रूरी हैं।