संसाधन क्या है?
संसाधन वह हर चीज़ है जिससे हम अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। वह उपलब्ध हो, उसे उपयोग करने की तकनीक हो, और लोगों को स्वीकार हो। नदी तब तक सिर्फ़ पानी है जब तक हम नहर बनाकर उसे खेतों तक न ले जाएँ।
सबसे ज़रूरी हिस्सा इंसान हैं। इंसान के कौशल के बिना प्रकृति की कोई चीज़ काम की नहीं बनती।
संसाधनों के प्रकार
1. उत्पत्ति के आधार पर
जैव: जीवों से (पौधे, जानवर, मछली)। अजैव: निर्जीव चीज़ों से (चट्टान, धातु, पानी)।
2. समाप्यता के आधार पर (क्या ख़त्म होगा?)
नवीकरणीय: फिर से बन जाते हैं (धूप, हवा, वन, पानी)। अनवीकरणीय: बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए ख़त्म हो जाते हैं (कोयला, पेट्रोलियम, खनिज)।
3. स्वामित्व के आधार पर
व्यक्तिगत (अपनी ज़मीन, घर), सामुदायिक (गाँव का तालाब, खेल का मैदान), राष्ट्रीय (खनिज, वन, सड़कें देश की), अंतर्राष्ट्रीय (200 समुद्री मील के बाद का खुला समुद्र)।
4. विकास के स्तर के आधार पर
संभावी: मौजूद हैं पर अभी उपयोग नहीं (राजस्थान की हवा और धूप)। विकसित: सर्वेक्षण हो चुका और उपयोग हो रहा है। भंडार: मौजूद हैं पर तकनीक नहीं (पानी से हाइड्रोजन ईंधन)। संचित कोष: भंडार का वह हिस्सा जिसे अभी उपयोग कर सकते हैं पर भविष्य के लिए रखा है (बाँधों का पानी)।
संसाधन नियोजन क्यों और कैसे
बिना सोचे संसाधन उपयोग करने से तीन समस्याएँ होती हैं: वे ख़त्म होने लगते हैं, कुछ अमीर लोग ज़्यादातर ले लेते हैं, और प्रकृति को नुकसान होता है (ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण)। इसलिए सतत पोषणीय विकास चाहिए: आज ऐसे उपयोग करो कि बच्चों के लिए भी बचे।
भारत में कहीं एक संसाधन ज़्यादा है, कहीं कम (झारखंड में खनिज, राजस्थान में धूप-हवा पर पानी कम)। इसलिए संसाधन नियोजन:
- सर्वेक्षण: संसाधन पहचानो, सूची और नक्शे बनाओ, मात्रा नापो।
- योजना: सही तकनीक, कौशल और पैसे के साथ मिलाओ।
- योजना को राष्ट्रीय विकास योजना से जोड़ो।
रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन (1992) और एजेंडा 21 ने सभी देशों से ग़रीबी और प्रदूषण से मिलकर लड़ने को कहा।
भूमि संसाधन और भू-उपयोग
भारत में मैदान (लगभग 43%, खेती के लिए अच्छे), पर्वत (लगभग 30%, नदियाँ और पर्यटन) और पठार (लगभग 27%, खनिज और वन) हैं।
ज़मीन का उपयोग: वन, खेती के लिए अनुपलब्ध भूमि (बंजर, इमारतें, सड़कें), अन्य बिना जोती भूमि (चरागाह, कृषि योग्य बंजर), परती भूमि (एक मौसम या कुछ साल ख़ाली छोड़ी), और शुद्ध बोया गया क्षेत्र (जिस पर सच में खेती हुई, भारत का आधे से थोड़ा कम)।
वन लगभग 22% हैं। राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार 33% होने चाहिए।
भूमि निम्नीकरण यानी ज़मीन का ख़राब होना। कारण: वन कटाई, अति पशुचारण, खुले छोड़े खनन गड्ढे, ज़्यादा सिंचाई (नमकीन मिट्टी), उद्योगों की धूल। उपाय: पेड़ लगाना, चराई पर रोक, पेड़ों की रक्षक मेखला, खनन कचरे पर नियंत्रण।
भारत की मृदाएँ
मिट्टी चट्टानों के गर्मी, पानी, हवा और जीवों से टूटने पर बहुत धीरे बनती है। छह मुख्य मृदाएँ:
- जलोढ़: नदियों द्वारा उत्तरी मैदानों और डेल्टा में जमा; बहुत उपजाऊ; पुरानी (बांगर) और नई (खादर); चावल, गेहूँ, गन्ना।
- काली (रेगर): दक्कन की लावा चट्टानों से; नमी रोकती है; सूखने पर दरारें; कपास के लिए सबसे अच्छी।
- लाल और पीली: पुरानी रवेदार चट्टानों पर; लोहे से लाल; भीगने पर पीली।
- लैटेराइट: गर्म और बहुत बारिश वाले क्षेत्र; पोषक तत्व बह जाते हैं; खाद डालकर चाय, कॉफी, काजू।
- मरुस्थलीय: रेतीली और नमकीन; सिंचाई से ही खेती।
- वन मृदा: पहाड़ी ढलानों पर; घाटियों में ह्यूमस से भरपूर।
मृदा अपरदन और उसे रोकना
मृदा अपरदन यानी ऊपर की मिट्टी का पानी या हवा से हट जाना। बहता पानी गहरी नालियाँ काटता है जिन्हें अवनालिका कहते हैं; इससे ज़मीन उत्खात भूमि बन जाती है (चंबल के बीहड़)। पानी पूरी परत भी बहा सकता है (परत अपरदन)। रेगिस्तान में हवा ढीली मिट्टी उड़ा ले जाती है।
बचाव के तरीके:
- समोच्च जुताई: ढलान की रेखाओं के साथ जुताई, ऊपर-नीचे नहीं।
- सीढ़ीदार खेती: पहाड़ी ढलान पर सीढ़ियाँ।
- पट्टी कृषि: फ़सलों के बीच घास की पट्टियाँ, ताकि हवा धीमी हो।
- रक्षक मेखला: हवा रोकने के लिए पेड़ों की कतारें।
करके देखें
3D के आख़िरी चरण में ढलान नंगी रखिए: 10 मिट्टी की गेंदें बहती हैं। अब पेड़ और मेड़ लगाइए, गिनिए कितनी बचीं। घर पर: दो ट्रे में मिट्टी भरिए, एक नंगी और एक में घास। दोनों को तिरछा करके एक कप पानी डालिए। किस ट्रे से ज़्यादा मिट्टी बही?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संसाधन = प्रकृति + तकनीक + लोग
- नवीकरणीय: फिर बनते हैं (धूप, पानी, वन)
- अनवीकरणीय: ख़त्म हो जाते हैं (कोयला, तेल, खनिज)
- सतत पोषणीय विकास: आज की ज़रूरत, कल को नुकसान पहुँचाए बिना
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र: साल में सच में जोती गई ज़मीन
- मृदा अपरदन: पानी या हवा से ऊपरी मिट्टी का हटना
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें बाँटिए: सौर ऊर्जा, कोयला, गाँव का तालाब, खुला समुद्र।
सौर ऊर्जा: नवीकरणीय। कोयला: अनवीकरणीय। गाँव का तालाब: सामुदायिक। 200 समुद्री मील के बाद का खुला समुद्र: अंतर्राष्ट्रीय।
2. पहाड़ पर एक किसान की मिट्टी हर बारिश में बह जाती है। वह क्या करे?
ढलान पर सीढ़ीदार खेत बनाए और समोच्च रेखाओं के साथ जुताई करे, ताकि पानी धीरे बहे और मिट्टी न ले जाए।
3. काली मिट्टी कपास के लिए सबसे अच्छी क्यों है?
यह लंबे समय तक नमी रोकती है, इसलिए सूखे महीनों में भी पौधों को पानी मिलता है। इसमें चूना, पोटाश और मैग्नीशियम भी होते हैं।
आम गलतियाँ
- हर प्राकृतिक चीज़ को संसाधन मानना। वह तभी संसाधन है जब लोग उसे उपयोग कर सकें।
- भंडार और संचित कोष को मिलाना। भंडार: अभी उपयोग नहीं कर सकते। संचित कोष: कर सकते हैं पर बचाकर रखा है।
- लैटेराइट मिट्टी को बहुत उपजाऊ बताना। भारी बारिश पोषक तत्व बहा देती है; खाद चाहिए।
- वन का लक्ष्य 22% लिखना। 22% अभी है; लक्ष्य 33% है।