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संसाधन एवं विकास

संसाधन प्रकृति की वह चीज़ है जिसे लोग तकनीक की मदद से उपयोग कर सकें। संसाधनों को उत्पत्ति, ख़त्म होने, स्वामित्व और विकास के आधार पर बाँटा जाता है। भारत को संसाधनों का नियोजन करना, ज़मीन की देखभाल करना और मिट्टी को बहने से बचाना ज़रूरी है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. पेड़ सिर्फ़ प्रकृति है। जब लोग औज़ार से उस पर काम करते हैं, तो वह कुर्सी बनता है। प्रकृति + तकनीक + लोग = संसाधन।
  2. कुछ संसाधन फिर से बन जाते हैं, जैसे पेड़ और पानी। ये नवीकरणीय हैं। कुछ ख़त्म हो जाते हैं, जैसे कोयला। ये अनवीकरणीय हैं।
  3. संसाधन नियोजन के तीन चरण: पता करो क्या है, योजना बनाओ, फिर समझदारी से उपयोग करो।
  4. देखिए भारत अपनी ज़मीन कैसे उपयोग करता है। लगभग आधी पर खेती है। वन लगभग 22% हैं, पर चाहिए 33%।
  5. भारत में छह मुख्य मिट्टियाँ हैं। हर मिट्टी का अपना रंग, जगह और फ़सल है। टैप करके मिट्टी उठाइए।
  6. खुद खेलिए: नंगी ढलान से बारिश मिट्टी बहा ले जाती है। पेड़ और मेड़ लगाइए, देखिए कम मिट्टी बहती है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या पहाड़ संसाधन है?

हाँ, जब लोग उसका उपयोग करें: पर्यटन, नदियाँ, वन या खनिज के लिए। मानव उपयोग से प्रकृति संसाधन बनती है।

पानी सूख सकता है, तो वह नवीकरणीय कैसे?

जल चक्र पानी को वापस लाता है, इसलिए नवीकरणीय है। पर अगर हम उसे लौटने से तेज़ उपयोग या प्रदूषित करें, तो कमी होगी।

भारत की सिर्फ़ आधी ज़मीन पर खेती क्यों?

बाकी पर वन, पहाड़, रेगिस्तान, शहर, सड़कें और परती ज़मीन है। भू-उपयोग के ब्लॉक गिनकर देखिए।

गर्मी में काली मिट्टी में दरारें क्यों पड़ती हैं?

यह बहुत पानी रोककर फूल जाती है। सूखने पर सिकुड़ती है, इसलिए गहरी दरारें बनती हैं। इनसे मिट्टी में हवा जाती है।

क्या पेड़ सच में अपरदन रोकते हैं?

हाँ। जड़ें मिट्टी पकड़ती हैं और पत्तियाँ बारिश की चोट कम करती हैं। आख़िरी चरण में पेड़ लगाकर मिट्टी की गेंदें गिनिए।

संसाधन क्या है?

संसाधन वह हर चीज़ है जिससे हम अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। वह उपलब्ध हो, उसे उपयोग करने की तकनीक हो, और लोगों को स्वीकार हो। नदी तब तक सिर्फ़ पानी है जब तक हम नहर बनाकर उसे खेतों तक न ले जाएँ।

सबसे ज़रूरी हिस्सा इंसान हैं। इंसान के कौशल के बिना प्रकृति की कोई चीज़ काम की नहीं बनती।

संसाधनों के प्रकार

1. उत्पत्ति के आधार पर

जैव: जीवों से (पौधे, जानवर, मछली)। अजैव: निर्जीव चीज़ों से (चट्टान, धातु, पानी)।

2. समाप्यता के आधार पर (क्या ख़त्म होगा?)

नवीकरणीय: फिर से बन जाते हैं (धूप, हवा, वन, पानी)। अनवीकरणीय: बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए ख़त्म हो जाते हैं (कोयला, पेट्रोलियम, खनिज)।

3. स्वामित्व के आधार पर

व्यक्तिगत (अपनी ज़मीन, घर), सामुदायिक (गाँव का तालाब, खेल का मैदान), राष्ट्रीय (खनिज, वन, सड़कें देश की), अंतर्राष्ट्रीय (200 समुद्री मील के बाद का खुला समुद्र)।

4. विकास के स्तर के आधार पर

संभावी: मौजूद हैं पर अभी उपयोग नहीं (राजस्थान की हवा और धूप)। विकसित: सर्वेक्षण हो चुका और उपयोग हो रहा है। भंडार: मौजूद हैं पर तकनीक नहीं (पानी से हाइड्रोजन ईंधन)। संचित कोष: भंडार का वह हिस्सा जिसे अभी उपयोग कर सकते हैं पर भविष्य के लिए रखा है (बाँधों का पानी)।

संसाधन नियोजन क्यों और कैसे

बिना सोचे संसाधन उपयोग करने से तीन समस्याएँ होती हैं: वे ख़त्म होने लगते हैं, कुछ अमीर लोग ज़्यादातर ले लेते हैं, और प्रकृति को नुकसान होता है (ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण)। इसलिए सतत पोषणीय विकास चाहिए: आज ऐसे उपयोग करो कि बच्चों के लिए भी बचे।

भारत में कहीं एक संसाधन ज़्यादा है, कहीं कम (झारखंड में खनिज, राजस्थान में धूप-हवा पर पानी कम)। इसलिए संसाधन नियोजन:

  1. सर्वेक्षण: संसाधन पहचानो, सूची और नक्शे बनाओ, मात्रा नापो।
  2. योजना: सही तकनीक, कौशल और पैसे के साथ मिलाओ।
  3. योजना को राष्ट्रीय विकास योजना से जोड़ो।

रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन (1992) और एजेंडा 21 ने सभी देशों से ग़रीबी और प्रदूषण से मिलकर लड़ने को कहा।

भूमि संसाधन और भू-उपयोग

भारत में मैदान (लगभग 43%, खेती के लिए अच्छे), पर्वत (लगभग 30%, नदियाँ और पर्यटन) और पठार (लगभग 27%, खनिज और वन) हैं।

ज़मीन का उपयोग: वन, खेती के लिए अनुपलब्ध भूमि (बंजर, इमारतें, सड़कें), अन्य बिना जोती भूमि (चरागाह, कृषि योग्य बंजर), परती भूमि (एक मौसम या कुछ साल ख़ाली छोड़ी), और शुद्ध बोया गया क्षेत्र (जिस पर सच में खेती हुई, भारत का आधे से थोड़ा कम)।

वन लगभग 22% हैं। राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार 33% होने चाहिए।

भूमि निम्नीकरण यानी ज़मीन का ख़राब होना। कारण: वन कटाई, अति पशुचारण, खुले छोड़े खनन गड्ढे, ज़्यादा सिंचाई (नमकीन मिट्टी), उद्योगों की धूल। उपाय: पेड़ लगाना, चराई पर रोक, पेड़ों की रक्षक मेखला, खनन कचरे पर नियंत्रण।

भारत की मृदाएँ

मिट्टी चट्टानों के गर्मी, पानी, हवा और जीवों से टूटने पर बहुत धीरे बनती है। छह मुख्य मृदाएँ:

मृदा अपरदन और उसे रोकना

मृदा अपरदन यानी ऊपर की मिट्टी का पानी या हवा से हट जाना। बहता पानी गहरी नालियाँ काटता है जिन्हें अवनालिका कहते हैं; इससे ज़मीन उत्खात भूमि बन जाती है (चंबल के बीहड़)। पानी पूरी परत भी बहा सकता है (परत अपरदन)। रेगिस्तान में हवा ढीली मिट्टी उड़ा ले जाती है।

बचाव के तरीके:

करके देखें

3D के आख़िरी चरण में ढलान नंगी रखिए: 10 मिट्टी की गेंदें बहती हैं। अब पेड़ और मेड़ लगाइए, गिनिए कितनी बचीं। घर पर: दो ट्रे में मिट्टी भरिए, एक नंगी और एक में घास। दोनों को तिरछा करके एक कप पानी डालिए। किस ट्रे से ज़्यादा मिट्टी बही?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. इन्हें बाँटिए: सौर ऊर्जा, कोयला, गाँव का तालाब, खुला समुद्र।

सौर ऊर्जा: नवीकरणीय। कोयला: अनवीकरणीय। गाँव का तालाब: सामुदायिक। 200 समुद्री मील के बाद का खुला समुद्र: अंतर्राष्ट्रीय।

2. पहाड़ पर एक किसान की मिट्टी हर बारिश में बह जाती है। वह क्या करे?

ढलान पर सीढ़ीदार खेत बनाए और समोच्च रेखाओं के साथ जुताई करे, ताकि पानी धीरे बहे और मिट्टी न ले जाए।

3. काली मिट्टी कपास के लिए सबसे अच्छी क्यों है?

यह लंबे समय तक नमी रोकती है, इसलिए सूखे महीनों में भी पौधों को पानी मिलता है। इसमें चूना, पोटाश और मैग्नीशियम भी होते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. इनमें अनवीकरणीय संसाधन कौन-सा है?
2. कपास के लिए सबसे अच्छी मिट्टी:
3. बाँधों में बाद के लिए रखा पानी किसका उदाहरण है?
4. ढलान की रेखाओं के साथ जुताई को कहते हैं:
5. भारत में वन क्षेत्र का लक्ष्य है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 10 में संसाधनों के प्रकार कौन-से हैं?

उत्पत्ति (जैव, अजैव), समाप्यता (नवीकरणीय, अनवीकरणीय), स्वामित्व (व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय) और विकास (संभावी, विकसित, भंडार, संचित कोष)।

भारत में कितनी तरह की मिट्टी है?

छह मुख्य: जलोढ़, काली, लाल-पीली, लैटेराइट, मरुस्थलीय और वन मृदा।

सतत पोषणीय विकास क्या है?

ऐसा विकास जो आज की ज़रूरतें पूरी करे पर पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की ज़रूरतों को नुकसान न पहुँचाए।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

कनाडा (ओंटारियो)Grade 9C. Managing Canada’s Resources and Industries
कनाडा (ओंटारियो)Grade 11C. Sustainability and Stewardship
स्पेन2º ESOGeology
स्पेन3º ESOGeology
स्पेन2º BachilleratoResources and their sustainable management
सीबीएसई (भारत)कक्षा 10भूगोल: समकालीन भारत – II
इंग्लैंडYear 113.2.3 The challenge of resource management
अमेरिकाGrade 9Human–environment interaction
जर्मनीJahrgangsstufe 13Resources and sustainable development
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