वन और वन्य जीव क्यों ज़रूरी हैं
वन हमें साफ़ हवा, बारिश, मिट्टी, लकड़ी, फल, दवाइयाँ और जानवरों को घर देते हैं। भारत जैव विविधता में दुनिया के सबसे अमीर देशों में है: यहाँ हज़ारों तरह के पौधे और जानवर हैं। ये सब एक जाल में जुड़े हैं। एक कड़ी टूटे तो बाकी भी दुखी होते हैं।
वन क्यों घट रहे हैं
- खेती का फैलाव: खेतों के लिए वन साफ़; औपनिवेशिक काल में रेल और बाग़ानों के लिए भी।
- स्थानांतरी खेती (झूम) कुछ क्षेत्रों में।
- बड़े बाँध बड़े वन डुबो देते हैं।
- खनन: जैसे डोलोमाइट खनन से बक्सा टाइगर रिज़र्व को ख़तरा।
- शिकार, प्रदूषण और जंगल की आग।
जो ग़रीब लोग भोजन, ईंधन और दवा के लिए वन पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज़्यादा नुकसान होता है।
जातियों की श्रेणियाँ
- सामान्य: संख्या सुरक्षित (मवेशी, साल, चीड़)।
- संकटग्रस्त: ख़त्म होने के ख़तरे में (काला हिरण, मगरमच्छ, भारतीय जंगली गधा, शेर-पूँछ बंदर)।
- सुभेद्य: संख्या घट रही है, जल्दी संकटग्रस्त हो सकती हैं (नीली भेड़, गंगा डॉल्फ़िन)।
- दुर्लभ: बहुत कम संख्या (हिमालयी भूरा भालू, जंगली एशियाई भैंसा)।
- स्थानिक: सिर्फ़ एक क्षेत्र में (अंडमान टील, निकोबार कबूतर, अरुणाचल का मिथुन)।
- लुप्त: अब नहीं मिलतीं (एशियाई चीता, गुलाबी सिर वाली बतख)।
सरकार वन और वन्य जीवों की रक्षा कैसे करती है
भारतीय वन्य जीव (रक्षण) अधिनियम, 1972 ने सुरक्षित जानवरों के शिकार पर रोक लगाई और उनकी सूची बनाई। राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य बने। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ; कॉर्बेट, सुंदरबन, बांधवगढ़ जैसे बाघ रिज़र्व बने।
- आरक्षित वन: कुल वन का आधे से ज़्यादा; सबसे सुरक्षित।
- रक्षित वन: लगभग एक-तिहाई; आगे नुकसान से बचाए जाते हैं।
- अवर्गीकृत वन: बाकी; सरकार, लोगों या समुदायों के।
संरक्षण में समुदाय की भूमिका
- सरिस्का (राजस्थान): गाँव वालों ने वन्य जीव अधिनियम के सहारे खनन का विरोध किया।
- भैरोंदेव डाकव सोंचुरी (अलवर): पाँच गाँवों ने 1,200 हेक्टेयर वन के लिए अपने नियम बनाए, शिकार बंद किया।
- चिपको आंदोलन (हिमालय): लोग पेड़ों से लिपट गए ताकि उन्हें काटा न जाए।
- बीज बचाओ आंदोलन (टिहरी) और नवदान्य: किसान बिना रसायन कई फ़सलें उगाते हैं।
- संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): 1988 में ओडिशा से शुरू; गाँव ख़राब वन की रक्षा करते हैं और लाभ बाँटते हैं।
- पवित्र उपवन: कई जनजातियाँ और गाँव पेड़ों (महुआ, कदंब, पीपल) की पूजा करते हैं और उन्हें कभी नहीं काटते।
करके देखें
3D के आख़िरी चरण में कटाई 12 करें, रक्षक 0: सब पेड़ और जानवर गायब। अब एक-एक रक्षक जोड़िए। कितने रक्षक सारे पेड़ बचाते हैं? घर पर: अपने घर की पाँच चीज़ें लिखिए जो जंगल से आईं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जैव विविधता: किसी क्षेत्र में पौधों और जानवरों की विविधता
- स्थानिक: सिर्फ़ एक क्षेत्र में मिलने वाली
- आरक्षित > रक्षित > अवर्गीकृत (सुरक्षा)
- वन्य जीव अधिनियम 1972; प्रोजेक्ट टाइगर 1973; JFM 1988 (ओडिशा)
हल किए गए उदाहरण
1. अंडमान टील सिर्फ़ अंडमान द्वीपों पर रहती है। यह किस श्रेणी में है?
स्थानिक, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से सिर्फ़ एक क्षेत्र में मिलती है।
2. एक गाँव ख़राब वन की रखवाली करता है और उसकी उपज का हिस्सा पाता है। यह कौन-सी योजना है?
संयुक्त वन प्रबंधन (JFM), जो 1988 में ओडिशा में शुरू हुई।
3. एशियाई चीता भारत में लुप्त क्यों कहलाता है?
यह अब भारत के जंगलों में नहीं मिलता; आख़िरी चीते लगभग 1952 के आसपास दिखे थे।
आम गलतियाँ
- दुर्लभ और संकटग्रस्त को मिलाना। दुर्लभ: संख्या कम; संकटग्रस्त: ख़त्म होने के क़रीब।
- अवर्गीकृत वन को बिना मालिक की ज़मीन मानना। ये सरकार, लोगों या समुदायों के हैं।
- प्रोजेक्ट टाइगर का साल 1972 लिखना। अधिनियम 1972 का है; प्रोजेक्ट टाइगर 1973 का।
- यह मानना कि सिर्फ़ सरकार वन बचाती है। समुदायों (चिपको, पवित्र उपवन, JFM) की बड़ी भूमिका है।