परिवहन जीवन रेखा क्यों है
चीज़ें एक जगह बनती हैं और दूसरी जगह उपयोग होती हैं। परिवहन सामान और लोगों को ले जाता है, संचार संदेश पहुँचाता है, और व्यापार सामान की ख़रीद-बिक्री है। ये मिलकर देश को बढ़ाते हैं, इसलिए अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ कहलाते हैं। परिवहन स्थल (सड़क, रेल, पाइपलाइन), जल और वायु से होता है।
सड़क परिवहन
सड़कें रेल से सस्ती बनती हैं, पहाड़ों और गाँवों तक जाती हैं और घर-घर सेवा देती हैं। ये रेलवे स्टेशनों, पत्तनों और हवाई अड्डों तक भी जोड़ती हैं।
- स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग दिल्ली–कोलकाता–चेन्नई–मुंबई को जोड़ते हैं। उत्तर–दक्षिण गलियारा (श्रीनगर–कन्याकुमारी) और पूर्व–पश्चिम गलियारा (सिलचर–पोरबंदर)।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (केंद्र सरकार), राज्य राजमार्ग, ज़िला सड़कें, ग्रामीण सड़कें (प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना), सीमा सड़कें (सीमा सड़क संगठन) ऊँचे पहाड़ों में।
समस्याएँ: ट्रैफ़िक के मुक़ाबले सड़कें कम, बरसात में ख़राब सड़कें, शहरों में भीड़।
रेल और पाइपलाइन
भारी माल और यात्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने का मुख्य साधन रेल है। उत्तर के समतल मैदानों में पटरी बिछाना आसान है, पर हिमालय, रेगिस्तान, दलदल और पश्चिमी घाट में कठिन। पश्चिमी तट की कोंकण रेलवे ने कई नदियाँ और पहाड़ पार किए।
पाइपलाइन कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और गैस को तेल क्षेत्रों से रिफ़ाइनरी और शहरों तक ले जाती है; ख़र्च और देरी घटती है। उदाहरण: असम के तेल क्षेत्र से कानपुर; सलाया (गुजरात) से जालंधर; हज़ीरा–विजयपुर–जगदीशपुर गैस पाइपलाइन।
जलमार्ग, पत्तन और वायुमार्ग
भारी और भारी-भरकम माल के लिए जल परिवहन सबसे सस्ता है और कम ईंधन लेता है। राष्ट्रीय जलमार्ग: गंगा (हल्दिया–प्रयागराज), ब्रह्मपुत्र (सदिया–धुबरी), केरल की पश्चिमी तट नहर आदि।
भारत का ज़्यादातर विदेशी व्यापार (मात्रा में) पत्तनों से होता है। कांडला (दीनदयाल पत्तन) आज़ादी के बाद पहला पत्तन; मुंबई सबसे बड़ा प्राकृतिक पत्तन; जवाहरलाल नेहरू पत्तन मुंबई का बोझ घटाता है; मर्मागाओ लौह अयस्क निर्यात; न्यू मंगलौर, कोच्चि, तूतीकोरिन, चेन्नई, विशाखापत्तनम (सबसे गहरा स्थलरुद्ध), पारादीप, हल्दिया और कोलकाता (नदी पत्तन)।
वायुमार्ग सबसे तेज़ और आरामदायक है। ऊँचे पहाड़, रेगिस्तान, जंगल और द्वीपों तक पहुँचता है। पवन हंस हेलीकॉप्टर उत्तर-पूर्व और तेल कार्यों में सेवा देते हैं।
संचार
व्यक्तिगत संचार: चिट्ठी (भारतीय डाक), फ़ोन, इंटरनेट। डाक में प्रथम श्रेणी (कार्ड, लिफ़ाफ़े; हवाई और स्थल मार्ग से) और द्वितीय श्रेणी (पुस्तक पैकेट, अख़बार; स्थल और जल मार्ग से)। जन संचार: रेडियो (आकाशवाणी), टीवी (दूरदर्शन), अख़बार, फ़िल्में। भारत का दूरसंचार जाल दुनिया के सबसे बड़े में है। केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड फ़िल्मों की जाँच करता है।
व्यापार और पर्यटन
व्यापार सामान का लेन-देन है। देश के अंदर स्थानीय या राज्य स्तरीय; देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार। निर्यात बाहर जाता है; आयात अंदर आता है। व्यापार संतुलन = निर्यात का मूल्य − आयात का मूल्य। निर्यात ज़्यादा हो तो अनुकूल; आयात ज़्यादा हो तो प्रतिकूल।
भारत रत्न-आभूषण, रसायन, कृषि उत्पाद, वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, सॉफ़्टवेयर निर्यात करता है; पेट्रोलियम, सोना, मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद आयात करता है।
पर्यटन भी व्यापार है: विदेशी मुद्रा कमाता है, लाखों को रोज़गार देता है और हस्तशिल्प व संस्कृति को बढ़ाता है।
करके देखें
3D के आख़िरी चरण में 10 टन को 1,000 किमी सड़क से, फिर जलमार्ग से भेजिए। पहले अनुमान: कौन सस्ता, और कितने गुना? घर पर: रसोई की एक चीज़ चुनिए और अनुमान लगाइए वह किन-किन साधनों से आप तक पहुँची।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- व्यापार संतुलन = निर्यात − आयात
- अनुकूल: निर्यात > आयात · प्रतिकूल: आयात > निर्यात
- भारी माल के लिए सबसे सस्ता: जलमार्ग · सबसे तेज़: वायुमार्ग · घर-घर: सड़क
- स्वर्णिम चतुर्भुज: दिल्ली–कोलकाता–चेन्नई–मुंबई
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश ₹500 करोड़ का निर्यात और ₹650 करोड़ का आयात करता है। व्यापार संतुलन निकालिए।
500 − 650 = −₹150 करोड़, प्रतिकूल संतुलन (व्यापार घाटा)।
2. गोवा से जापान लौह अयस्क भेजने के लिए कौन-सा परिवहन ठीक है?
मर्मागाओ पत्तन से समुद्री परिवहन: लंबी दूरी पर भारी माल के लिए सबसे सस्ता।
3. तेल और गैस के लिए पाइपलाइन अच्छी क्यों है?
यह लगातार तरल और गैस ले जाती है, ट्रक-रेल का ख़र्च और समय बचाती है, रास्ते में नुकसान कम होता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि स्वर्णिम चतुर्भुज राज्यों की राजधानियाँ जोड़ता है। यह चार बड़े महानगर जोड़ता है।
- व्यापार संतुलन को आयात − निर्यात लिखना। यह निर्यात − आयात है।
- वायु परिवहन को सस्ता कहना। यह सबसे तेज़ पर सबसे महँगा है।
- कोलकाता को समुद्र तट का पत्तन कहना। यह हुगली पर अंतःस्थलीय नदी पत्तन है।