Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II Geography
अध्याय: 7
1. VII. Political division and development levels of the world
Integration and conflicts · Development indicators
- राजनीतिक भूगोल: भूमि, लोग और सत्ता कैसे जुड़ते हैं – राजनीतिक भूगोल बताता है कि लोग ज़मीन को कैसे बाँटते और चलाते हैं। राज्य के लिए चार चीज़ें चाहिए: भूमि (क्षेत्र), जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। सीमाएँ नदी-पहाड़ जैसी प्राकृतिक हो सकती हैं या सीधी खींची गई कृत्रिम रेखाएँ। देश के अंदर सत्ता कई स्तरों में बँटी है। देश संगठनों में मिलकर सहयोग करते हैं, पर पानी, खनिज, ज़मीन या पहचान पर विवाद भी होते हैं। बातचीत और समझौते विवाद को सहयोग में बदलते हैं।
2. VIII. Demographic and social change and settlement
Population distribution and change · Migration and refugees · Religion, culture and settlement
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- प्रवास (Migration) – प्रवास लोगों का एक जगह से दूसरी जगह कुछ समय या हमेशा के लिए रहने जाना है। छोड़ी गई जगह उद्गम है; पहुँचने की जगह गंतव्य। लोग प्रतिकर्ष कारकों (घर की समस्याएँ) और अपकर्ष कारकों (दूसरी जगह का आकर्षण) से जाते हैं, पर खर्च, दूरी और कानून जैसी बाधाएँ कुछ को रोकती हैं। प्रवास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय, अस्थायी या स्थायी, स्वैच्छिक या बलात हो सकता है, और यह उद्गम व गंतव्य दोनों को बदलता है।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
3. IX. Factors in world economic development
Sectors, globalisation and trade · Knowledge economy
जल्द आ रहा है
4. X. Agriculture, forestry and fishing
Farming · Forests and fisheries
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
- वन संसाधन – वन पृथ्वी की लगभग 31% भूमि पर हैं। ये लकड़ी, जलावन, काग़ज़ की लुगदी, भोजन, दवाएँ और रेशे देते हैं, और हवा साफ़ करते हैं, कार्बन जमा रखते हैं, मिट्टी थामते हैं, बाढ़ रोकते हैं और ज़्यादातर थलीय जीवों का घर हैं। वानिकी (forestry), यानी वनों का प्रबंधन और कटाई, प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा है। जब पेड़ उगने से तेज़ कटते हैं, तो वनोन्मूलन से मिट्टी का कटाव, बाढ़, जीवों का नुकसान और हवा में ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होता है। टिकाऊ वानिकी हर साल उतना ही काटती है जितना जंगल बढ़ता है और दोबारा पेड़ लगाती है; संरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक वन और कृषि-वानिकी भी वन बचाते हैं।
5. XI. Industry
Industrial location and change · Energy
- विनिर्माण उद्योग – विनिर्माण कच्चे माल को ज़्यादा क़ीमती चीज़ों में बदलता है। यह रोज़गार देता है, खेती पर निर्भरता घटाता है और निर्यात से पैसा कमाता है। उद्योगों को कच्चे माल, भूमिका, पूँजी, स्वामित्व और भार के आधार पर बाँटा जाता है। उनकी जगह कच्चे माल, बिजली, श्रम, पूँजी, परिवहन और बाज़ार पर निर्भर है। उद्योग हवा, पानी, ज़मीन को प्रदूषित करते और शोर करते हैं, पर इसे रोका जा सकता है।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
6. XII. Services
Services, transport and tourism
- राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ – परिवहन, संचार और व्यापार उत्पादकों को उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं और देश को एक करते हैं, जैसे शरीर में नसें। भारत में सड़कें, रेल, पाइपलाइन, जलमार्ग, पत्तन और वायुमार्ग हैं। संचार संदेश पहुँचाता है; व्यापार देश के अंदर और देशों के बीच सामान का लेन-देन है। पर्यटन भी एक व्यापार है जो पैसा और रोज़गार देता है।
- विश्व में परिवहन एवं संचार – परिवहन लोगों और सामान को ले जाता है; संचार संदेश ले जाता है। सड़कें कम दूरी और घर-घर तक के लिए सबसे अच्छी हैं, और राजमार्ग दूर के शहरों को जोड़ते हैं। पार-महाद्वीपीय रेलमार्ग, जैसे ट्रांस-साइबेरियन, पूरे महाद्वीप को पार करते हैं। ज़्यादातर विश्व व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, और स्वेज़ व पनामा जैसी नहरें लंबे चक्कर बचाती हैं। राइन और सेंट लॉरेंस समुद्री मार्ग जैसे आंतरिक जलमार्ग भारी माल को ज़मीन के अंदर तक ले जाते हैं। वायु परिवहन सबसे तेज़ पर महँगा है, पाइपलाइन तेल और गैस लगातार ले जाती है, और उपग्रह व इंटरनेट सूचना को सेकंडों में दुनिया भर पहुँचाते हैं।
7. XIII. People and environment – conflicts of interest
Human impacts · Planning and solutions
- चयनित मुद्दों और समस्याओं पर भौगोलिक परिप्रेक्ष्य (कक्षा 12) – प्रदूषण का मतलब है हवा, पानी, ज़मीन या आवाज़ में हानिकारक चीज़ें मिलना। वायु प्रदूषण ईंधन जलाने, कारख़ानों और गाड़ियों से; जल प्रदूषण सीवेज, उद्योग और खेत के रसायनों से; भूमि प्रदूषण कूड़े और रसायनों से; ध्वनि प्रदूषण ट्रैफ़िक और लाउडस्पीकर से होता है। शहर बहुत ठोस कचरा बनाते हैं जिसे अलग करना, पुनर्चक्रित करना और सुरक्षित निपटाना चाहिए। लोग प्रतिकर्ष कारकों (गरीबी, काम नहीं) और अपकर्ष कारकों (नौकरी, सुविधाएँ) से गाँव से शहर जाते हैं; बहुत से गंदी बस्तियों में रहते हैं। कटाव, जलाक्रांति, लवणता, खनन और अति चराई से हुआ भूमि निम्नीकरण ठीक हो सकता है, जैसा झाबुआ के जलसंभर कार्य ने दिखाया।
- स्थानिक नियोजन: सीमित ज़मीन को न्याय से बाँटना – स्थानिक नियोजन तय करता है कि ज़मीन का हर हिस्सा किस काम आएगा और सेवाएँ कहाँ होंगी। ज़मीन सीमित है, पर घर, खेती, प्रकृति, पानी और ऊर्जा सबको जगह चाहिए, और कुछ जगहों पर सेवाएँ बहुत कम हैं। योजनाकार ज़ोनिंग, यातायात और नई सेवाओं जैसे औज़ार अपनाते हैं, सबके हितों को तौलते हैं और भविष्य के परिदृश्य सोचते हैं।