प्रवास क्या है?
प्रवास = लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाकर अपना सामान्य निवास बदलना, एक मौसम, कई साल या हमेशा के लिए।
- उद्गम: जो जगह छोड़ी।
- गंतव्य: जहाँ पहुँचे।
- उत्प्रवास: किसी जगह से बाहर जाना (व्यक्ति वहाँ का उत्प्रवासी)।
- आप्रवास: किसी जगह में आना (व्यक्ति वहाँ आप्रवासी)।
- शुद्ध प्रवास = आप्रवासी − उत्प्रवासी।
पर्यटक, तीर्थयात्री या रोज़ काम पर आने-जाने वाला (दैनिक यात्री) प्रवासी नहीं है, क्योंकि उसका घर नहीं बदलता।
लोग क्यों जाते हैं? प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक
प्रतिकर्ष कारक वे समस्याएँ हैं जो लोगों को जाने पर मजबूर करती हैं:
- आर्थिक: काम नहीं, कम मज़दूरी, खराब फसल, कर्ज़।
- पर्यावरणीय: सूखा, बाढ़, बढ़ता समुद्र, बंजर होती ज़मीन।
- सामाजिक-राजनीतिक: संघर्ष, उत्पीड़न, स्कूल या अस्पताल की कमी।
अपकर्ष कारक किसी जगह की ओर खींचते हैं:
- काम और ज़्यादा मज़दूरी, बेहतर स्कूल और इलाज।
- सुरक्षा और स्वतंत्रता।
- पहले से वहाँ बसे परिवार और दोस्त (प्रवास नेटवर्क)।
ज़्यादातर लोग धक्के और खिंचाव के मेल से जाते हैं, और कई देशों में, खासकर महिलाओं के लिए, विवाह प्रवास का बड़ा कारण है।
प्रवास के प्रकार और बाधाएँ
- दूरी से: आंतरिक (एक देश के अंदर: गाँव→शहर, शहर→शहर, गाँव→गाँव, शहर→गाँव) या अंतरराष्ट्रीय (देशों के बीच)।
- समय से: मौसमी/अस्थायी (फसल मज़दूर, विद्यार्थी) या स्थायी।
- इच्छा से: स्वैच्छिक (काम या पढ़ाई) या बलात। शरणार्थी युद्ध या उत्पीड़न से सीमा पार भागते हैं; आंतरिक रूप से विस्थापित लोग मजबूरन घर छोड़ते हैं पर अपने देश में रहते हैं।
बीच की बाधाएँ
यात्रा खर्च, लंबी दूरी, प्रवास कानून और वीज़ा, नई भाषा और जान-पहचान न होना जाने वालों को रोक सकते हैं। इसीलिए ज़्यादातर प्रवासी कम दूरी जाते हैं, और युवा (लगभग 18–35) सबसे ज़्यादा जाते हैं।
प्रवास के प्रभाव
उद्गम पर
- + प्रेषित धन: घर भेजा पैसा भोजन, मकान और स्कूल फ़ीस चलाता है।
- + लौटने वाले नए हुनर और विचार लाते हैं।
- − युवा और कुशल लोग चले जाते हैं (प्रतिभा पलायन); खेतों में मज़दूर कम; बहुत से बुज़ुर्ग और बच्चे पीछे रह जाते हैं।
गंतव्य पर
- + मज़दूर काम भरते हैं; नए भोजन, त्योहार और विचार; युवा कार्यबल।
- − योजना न हो तो भीड़भरे घर और झुग्गियाँ, पानी, परिवहन और स्कूलों पर दबाव।
- प्रवासियों को कम वेतन, असुरक्षित काम या भेदभाव झेलना पड़ सकता है; अच्छे कानून और स्वागत मदद करते हैं।
प्रवास जनसंख्या भी बदलता है: उद्गम की आबादी बूढ़ी होती और घट सकती है; गंतव्य की बढ़ती और युवा होती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: उद्गम, गंतव्य, उत्प्रवास, आप्रवास
- शुद्ध प्रवास = आप्रवासी − उत्प्रवासी
- प्रतिकर्ष कारक (धकेलें) बनाम अपकर्ष कारक (खींचें)
- प्रकार: आंतरिक / अंतरराष्ट्रीय; अस्थायी / स्थायी; स्वैच्छिक / बलात
- शरणार्थी: मजबूरी में सीमा पार भागा व्यक्ति
- प्रेषित धन: प्रवासी का घर भेजा पैसा
- प्रतिभा पलायन: उद्गम से कुशल लोगों का जाना
हल किए गए उदाहरण
1. एक साल में 12,000 लोग कस्बे में आए और 7,500 गए। शुद्ध प्रवास निकालिए।
शुद्ध प्रवास = 12,000 − 7,500 = +4,500। कस्बे को प्रवास से 4,500 लोग मिले।
2. प्रतिकर्ष या अपकर्ष में बाँटिए: सूखा, ज़्यादा मज़दूरी, युद्ध, अच्छे अस्पताल, खेती की ज़मीन नहीं।
प्रतिकर्ष: सूखा, युद्ध, खेती की ज़मीन नहीं। अपकर्ष: ज़्यादा मज़दूरी, अच्छे अस्पताल।
3. बाढ़ से भागकर एक परिवार उसी देश के दूसरे ज़िले के राहत शिविर में जाता है। यह किस प्रकार का प्रवास है?
आंतरिक और बलात: वे आंतरिक रूप से विस्थापित हैं, शरणार्थी नहीं, क्योंकि सीमा पार नहीं की।
4. जिस गाँव से बहुत से युवा चले गए, वहाँ प्रवास का एक अच्छा और एक बुरा प्रभाव बताइए।
अच्छा: प्रेषित धन से मकान बनते हैं और फ़ीस भरी जाती है। बुरा: खेतों में मज़दूर कम और बुज़ुर्गों व महिलाओं पर काम का बोझ बढ़ता है।
आम गलतियाँ
- पर्यटक या रोज़ आने-जाने वाले को प्रवासी कहना। प्रवासी अपना सामान्य निवास बदलता है।
- उत्प्रवासी और आप्रवासी में उलझना। उत्प्रवासी बाहर जाता है; आप्रवासी अंदर आता है।
- हर बलात प्रवासी को शरणार्थी कहना। शरणार्थी सीमा पार करते हैं; बाकी आंतरिक रूप से विस्थापित हैं।
- सोचना कि प्रवास केवल उद्गम को नुकसान देता है। प्रेषित धन और लौटे हुनर उसकी बहुत मदद कर सकते हैं।