नगरीकरण क्या है?
नगरीकरण (urbanisation) यानी ग्रामीण क्षेत्रों (गाँव) की तुलना में नगरीय क्षेत्रों (कस्बे और शहर) में रहने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ना। नगरीय लोग ज़्यादातर उद्योग और सेवाओं में काम करते हैं; ग्रामीण लोग ज़्यादातर खेती में।
हर देश "नगरीय" अलग तरह से परिभाषित करता है: कोई न्यूनतम जनसंख्या (जैसे 2,000 या 5,000) लेता है, कोई घनत्व या काम का प्रकार भी। इसलिए आँकड़े ध्यान से मिलाइए।
विश्व का रुझान
- 1950: दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय।
- 2007: पहली बार आधे से ज़्यादा।
- आज: लगभग 55–57%।
- 2050 (संयुक्त राष्ट्र अनुमान): लगभग 68%।
अमीर क्षेत्र (यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान) दशकों पहले ही 70–80% नगरीय थे और अब धीरे बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ नगरीकरण अफ़्रीका और एशिया में है। भारत लगभग 35% नगरीय है और बढ़ रहा है।
कारण: प्रवास और प्राकृतिक वृद्धि
शहर दो तरह से बढ़ते हैं।
- ग्रामीण-नगरीय प्रवास: लोग गाँव से शहर जाते हैं।
- पुश (प्रतिकर्ष) कारक (गाँव से बाहर धकेलते हैं): कम काम, खेती से कम और अनिश्चित आय, सूखा, बाढ़, ज़मीन की कमी, कमज़ोर स्कूल-अस्पताल, संघर्ष।
- पुल (अपकर्ष) कारक (शहर की ओर खींचते हैं): कारख़ानों, दफ़्तरों और सेवाओं में काम, ज़्यादा मज़दूरी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य, मनोरंजन, पहले से रह रहा परिवार।
- प्राकृतिक वृद्धि: मृत्यु से ज़्यादा जन्म। प्रवासी ज़्यादातर युवा होते हैं, इसलिए शहर में जन्म दर बढ़ती है।
इतिहास में औद्योगीकरण ने नगरीकरण बढ़ाया: 1800 के दशक में औद्योगिक क्रांति ने ब्रिटेन और यूरोप में मज़दूरों को कारख़ाना-नगरों की ओर खींचा। आज खेती की मशीनों को कम मज़दूर चाहिए, जबकि सेवाएँ और उद्योग शहरों में जमा होते हैं।
विकसित और विकासशील देशों में नगरीकरण
| उच्च आय वाले देश | कम आय / उभरते देश | |
|---|---|---|
| नगरीय हिस्सा | ऊँचा (70–90%) | कम पर तेज़ी से बढ़ता |
| गति | धीमी | तेज़ |
| मुख्य बढ़त | उपनगर; कुछ लोग शहर छोड़ छोटे कस्बों-गाँवों में (प्रति-नगरीकरण) | प्रवास + प्राकृतिक वृद्धि; महानगर |
| मुख्य मुद्दे | पुराने घर, भीतरी शहर का पतन, कार ट्रैफ़िक, गाँवों का ख़ाली होना | अनौपचारिक बस्तियाँ, अनौपचारिक काम, पानी, स्वच्छता, ट्रैफ़िक |
महानगर (megacity) में 1 करोड़ या ज़्यादा लोग होते हैं: जैसे टोक्यो, दिल्ली, शंघाई, साओ पाउलो, मेक्सिको सिटी, काहिरा, मुंबई, ढाका और लागोस। ज़्यादातर नए महानगर एशिया और अफ़्रीका में हैं।
कई अमीर देशों में शहर भरे रहते हैं पर कुछ ग्रामीण क्षेत्र ख़ाली होते हैं (ग्रामीण जनसंख्या-ह्रास): युवा चले जाते हैं और गाँव बूढ़े होते जाते हैं।
चरण
नगरीकरण (लोग शहर में आते हैं) → उपनगरीकरण (लोग किनारों पर जाते हैं) → प्रति-नगरीकरण (लोग गाँवों की ओर जाते हैं) → पुनर्नगरीकरण (लोग सुधरे हुए शहर-केंद्र में लौटते हैं)।
नगर का रूप: केंद्र और किनारा
ज़्यादातर शहरों में क्षेत्र होते हैं:
- केंद्रीय व्यापार क्षेत्र (CBD): दफ़्तर, दुकानें, ऊँची इमारतें, महँगी ज़मीन।
- भीतरी शहर: पुराने, भीड़ भरे घर और पुराने उद्योग; सुधर सकता है या गिर सकता है।
- उपनगर: नए घर, ज़्यादा जगह, रोज़ आने-जाने वाले लोग।
- ग्रामीण-नगरीय सीमांत (परिधि): जहाँ शहर गाँव से मिलता है; नई कॉलोनियाँ, मॉल, हवाई अड्डे, और ग़रीब शहरों में अक्सर अनौपचारिक बस्तियाँ।
जब शहर तेज़ी से बाहर फैलता है, उसे नगरीय फैलाव (urban sprawl) कहते हैं। कई शहर आपस में मिलकर सन्नगर (conurbation) या महानगरीय क्षेत्र बनाते हैं। परिधि पर अक्सर सबसे अमीर बंद कॉलोनियाँ और सबसे ग़रीब अनौपचारिक घर, दोनों बनते हैं।
शहरों के बढ़ने के अवसर और चुनौतियाँ
अवसर
- ज़्यादा रोज़गार और आय; स्कूल-अस्पताल तक पहुँचना आसान।
- विचार, व्यापार और संस्कृति तेज़ी से फैलते हैं।
सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ
- अनौपचारिक बस्तियाँ (झुग्गियाँ): बिना अनुमति बने घर, अक्सर साफ़ पानी, शौचालय और बिजली के बिना।
- अनौपचारिक काम: फेरी, दिहाड़ी मज़दूरी, बिना अनुबंध या सुरक्षा।
- असमानता, अपराध, स्कूलों और अस्पतालों पर दबाव।
पर्यावरण की चुनौतियाँ
- ट्रैफ़िक और वायु प्रदूषण।
- कचरा: भारी मात्रा में कूड़ा; खुले में फेंकने से ज़मीन और पानी दूषित। उपाय: कम करना, दोबारा इस्तेमाल, पुनर्चक्रण, खाद, सुरक्षित लैंडफ़िल, कचरे से ऊर्जा।
- नगरीय जल-निकासी और बाढ़: कंक्रीट और सड़कें बारिश को ज़मीन में जाने नहीं देतीं, इसलिए पानी तेज़ी से नालों और नदियों में जाता है और अचानक बाढ़ आती है।
- नगरीय जलवायु: नगरीय ऊष्मा द्वीप (urban heat island)। इमारतें और सड़कें दिन में गर्मी सोखती हैं और रात में छोड़ती हैं; ट्रैफ़िक और एसी भी गर्मी जोड़ते हैं। शहर आसपास के गाँवों से 2–5 °C गर्म हो सकते हैं, ख़ासकर रात में।
अमीर देशों के पुराने औद्योगिक शहर भी मुश्किलें झेलते हैं: ख़ाली कारख़ाने और पुरानी औद्योगिक ज़मीन (ब्राउनफ़ील्ड), घरों की कमी और इलाक़ों के बीच असमानता।
टिकाऊ और आकर्षक शहर
टिकाऊ शहर आज लोगों की ज़रूरतें पूरी करता है और आने वाली पीढ़ियों को नुक़सान नहीं पहुँचाता। काम करने वाले उपाय:
- सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो, बस, साइकिल लेन, पैदल चलने लायक़ सड़कें): कम ट्रैफ़िक और धुआँ।
- हरी जगहें और पेड़: ठंडी हवा, कम बाढ़, बेहतर सेहत।
- पानी: वर्षा जल संचयन, सीवेज उपचार, रिसाव ठीक करना।
- कचरा: स्रोत पर अलग करना, पुनर्चक्रण, खाद बनाना।
- ऊर्जा: सौर छतें, कम बिजली खाने वाली इमारतें।
- आवास: सस्ते घर; झुग्गियों को सिर्फ़ हटाने के बजाय निवासियों के साथ सुधारना (स्व-सहायता योजनाएँ)।
- ब्राउनफ़ील्ड का उपयोग: हरे खेतों के बजाय पुरानी औद्योगिक ज़मीन पर निर्माण।
केस-स्टडी के विचार: बस रैपिड ट्रांज़िट के लिए कुरितिबा (ब्राज़ील); सौर और साइकिल के लिए फ़्राइबर्ग (जर्मनी); हरी इमारतों और जल पुनर्चक्रण के लिए सिंगापुर; कचरा अलग करने के लिए इंदौर (भारत); व्यस्त अनौपचारिक अर्थव्यवस्था और सुधार की बहस के लिए धारावी (मुंबई)।
करके देखिए: अपने शहर के बदलाव लिखिए
घर के किसी बड़े सदस्य से पूछिए कि 20–30 साल पहले आपका क़स्बा या शहर कैसा था। तीन बदलाव लिखिए (नई सड़कें, इमारतें, ग़ायब हुए खेत या तालाब)। हर एक पर लिखिए कि वह अवसर है या समस्या। फिर 3D के खुद-खेलिए चरण में नगरीय हिस्से का स्लाइडर 30% से 70% तक खिसकाइए और बताइए कि आप पहले कौन-सी समस्या सुलझाएँगे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नगरीकरण (%) = नगरीय जनसंख्या ÷ कुल जनसंख्या × 100
- नगरीय वृद्धि = शहरी लोगों की संख्या बढ़ना; नगरीकरण = हिस्सा बढ़ना
- शहर की बढ़त = ग्रामीण-नगरीय प्रवास + प्राकृतिक वृद्धि
- महानगर: 1 करोड़ या ज़्यादा लोग
- चरण: नगरीकरण → उपनगरीकरण → प्रति-नगरीकरण → पुनर्नगरीकरण
- नगरीय ऊष्मा द्वीप: शहर अक्सर आसपास के गाँवों से 2–5 °C गर्म
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में 6 करोड़ लोग हैं; 2.1 करोड़ कस्बों और शहरों में रहते हैं। नगरीकरण का स्तर क्या है?
2.1 ÷ 6 × 100 = 35%।
2. दस साल बाद उसी देश में 7 करोड़ लोग हैं, जिनमें 2.8 करोड़ नगरीय हैं। क्या नगरीकरण बढ़ा? कितना?
2.8 ÷ 7 × 100 = 40%। यह 35% से 40% हुआ, यानी 5 प्रतिशत अंक बढ़ा; नगरीय संख्या 70 लाख बढ़ी।
3. दो साल के सूखे के बाद किसान का बेटा गाँव छोड़कर शहर के कारख़ाने में काम करने जाता है, जहाँ उसका चचेरा भाई पहले से रहता है। पुश और पुल कारक बताइए।
पुश: सूखा, खेती से कम आय। पुल: कारख़ाने का काम, ज़्यादा मज़दूरी, शहर में पहले से परिवार।
4. भारी बारिश के बाद शहर गाँव से जल्दी क्यों डूबते हैं?
कंक्रीट, छतें और सड़कें पानी नहीं सोखतीं, इसलिए बारिश ज़मीन में नहीं जाती। पानी तेज़ी से नालों में बहता है, नाले भर जाते हैं और नदियाँ जल्दी चढ़ती हैं (अचानक बाढ़)। कचरे से बंद नाले हालत और बिगाड़ते हैं।
आम गलतियाँ
- नगरीकरण और नगरीय वृद्धि को एक मानना। अगर ग्रामीण जनसंख्या भी बढ़े तो शहर बढ़ने पर भी देश का नगरीय हिस्सा वही रह सकता है।
- कहना कि सारी नगरीय बढ़त प्रवास से है। प्राकृतिक वृद्धि भी बड़ा कारण है, ख़ासकर अफ़्रीका और एशिया में।
- मानना कि झुग्गियों में कोई अर्थव्यवस्था नहीं। अनौपचारिक बस्तियों में अक्सर बहुत से छोटे धंधे और काम होते हैं; समस्या सुविधाओं और सुरक्षा की कमी है।
- मानना कि अमीर देश अभी भी तेज़ी से नगरीकृत हो रहे हैं। उनका हिस्सा पहले से ऊँचा है और बढ़त धीमी है; कुछ इलाक़ों में तो प्रति-नगरीकरण है।