France Quatrième History-Geography
अध्याय: 6
1. History 1: 18th century — expansion, Enlightenment, revolutions
Merchant classes, world trade, slave trades and slavery · The Enlightenment in Europe · French Revolution and Empire
- अटलांटिक दास व्यापार, विरोध और दासता का उन्मूलन – लगभग 1500 से 1860 के दशक तक यूरोपीय व्यापारी लगभग 1.25 करोड़ अफ़्रीकी लोगों को ज़बरदस्ती अटलांटिक महासागर पार अमेरिका महाद्वीप ले गए, जहाँ उनसे बिना मज़दूरी बागानों में काम कराया गया। इसने यूरोप, अफ़्रीका और अमेरिका को 'त्रिकोणीय व्यापार' में जोड़ा। दास क़ानून (slave codes) उन्हें संपत्ति मानते थे। ग़ुलाम बनाए लोगों ने रोज़ के छोटे विरोध से लेकर भाग निकलने, आज़ाद 'मरून' बस्तियों और हैती क्रांति जैसे विद्रोहों तक, हर तरह से विरोध किया। लंबे उन्मूलन आंदोलन ने पहले व्यापार और फिर दासता को 1794 से 1888 के बीच देश-दर-देश ख़त्म किया। नस्लवाद और असमानता जैसे इसके असर आज भी दिखते हैं।
- ज्ञानोदय (प्रबोधन युग) – ज्ञानोदय (लगभग 1680–1800) यूरोप का एक आंदोलन था जिसने कहा कि दुनिया को समझने और समाज चलाने में सिर्फ़ परंपरा नहीं, तर्क और सबूत काम में लाओ। यह वैज्ञानिक क्रांति से निकला। लॉक, मॉन्टेस्क्यू, वॉल्टेयर, रूसो, कांट और मैरी वॉल्स्टनक्राफ़्ट जैसे विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, शक्तियों का बँटवारा, बोलने और धर्म की आज़ादी और जनता की सहमति से सरकार की बात की। विचार किताबों, अख़बारों, सैलूनों और विश्वकोश से फैले। कुछ राजाओं ने सुधार किए (प्रबुद्ध निरंकुशता); इन विचारों ने अमेरिकी (1776) और फ़्रांसीसी (1789) क्रांति और बाद में भारत समेत दुनिया भर के सुधारकों को प्रेरणा दी।
2. History 2: Europe and the world in the 19th century
Europe’s Industrial Revolution · Colonial conquests and societies
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
3. History 3: 19th-century French society and politics
Winning the vote, 1815–1870 · The Third Republic · Women’s lives in a changing society
- मताधिकार: वोट के अधिकार की लड़ाई – मताधिकार यानी वोट देने का अधिकार। 1800 के दशक की शुरुआत में ज़्यादातर देशों में केवल अमीर पुरुष वोट देते थे (संपत्ति या कर आधारित मताधिकार)। धीरे-धीरे शर्तें हटीं। फ़्रांस ने 1848 में सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार दिया (और उसी साल दास प्रथा ख़त्म की), पर द्वितीय गणराज्य जल्द ही नेपोलियन तृतीय के द्वितीय साम्राज्य में बदल गया, जिसने वोट रखा पर उस पर नियंत्रण रखा। 1800 के अंत से महिला आंदोलनों ने वोट माँगा: सबसे पहले न्यूज़ीलैंड (1893), फिर 1918 के बाद कई देश, फ़्रांस 1944 में, और भारत ने 1950 से सभी वयस्कों को वोट दिया। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार = हर वयस्क नागरिक, एक व्यक्ति एक वोट, गुप्त मतदान।
- फ़्रांस का तीसरा गणतंत्र (1870-1914) – तीसरा गणतंत्र 1870 में सम्राट के गिरने से शुरू हुआ और 1875 के क़ानूनों से पक्का हुआ। इसने प्रेस, सभा और यूनियन की आज़ादी, मुफ़्त, अनिवार्य और धर्मनिरपेक्ष स्कूल (1881-82) दिए और 1905 में चर्च को राज्य से अलग किया। ड्रेफ़स कांड ने देश को बाँटा, और महिलाओं को 1944 तक वोट नहीं मिला।
- इतिहास में महिलाओं के अधिकार – ज़्यादातर इतिहास में क़ानूनों और रीति-रिवाज़ों ने महिलाओं को राजनीति, उच्च शिक्षा और पैसे पर नियंत्रण से दूर रखा। 1700 के अंत से महिलाओं ने बराबर अधिकार माँगने शुरू किए। पहली लहर (लगभग 1848–1930) ने संपत्ति, शिक्षा और वोट दिलाया। दूसरी लहर (1960–70) ने समान वेतन के क़ानून और काम, पैसे व परिवार में आज़ादी दिलाई। तीसरी और चौथी लहर (1990 से) हिंसा से सुरक्षा, साझी देखभाल और हर महिला से बराबर व्यवहार पर ध्यान देती है। कई देशों में क़ानून बराबर हैं, पर वेतन, देखभाल के काम और सुरक्षा में अंतर बाक़ी है।
4. Geography 1: urbanisation of the world
Urban spaces and landscapes: centres and peripheries · Cities unequally connected to globalisation
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
5. Geography 2: transnational human mobility
A world of migrants · Tourism and its spaces
- प्रवास (Migration) – प्रवास लोगों का एक जगह से दूसरी जगह कुछ समय या हमेशा के लिए रहने जाना है। छोड़ी गई जगह उद्गम है; पहुँचने की जगह गंतव्य। लोग प्रतिकर्ष कारकों (घर की समस्याएँ) और अपकर्ष कारकों (दूसरी जगह का आकर्षण) से जाते हैं, पर खर्च, दूरी और कानून जैसी बाधाएँ कुछ को रोकती हैं। प्रवास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय, अस्थायी या स्थायी, स्वैच्छिक या बलात हो सकता है, और यह उद्गम व गंतव्य दोनों को बदलता है।
- पर्यटन भूगोल: संसाधन, प्रकार, प्रभाव और नियोजन – पर्यटन का अर्थ है घर से दूर कम से कम एक रात के लिए घूमने, व्यापार, इलाज या रिश्तेदारों से मिलने जाना। पर्यटन भूगोल पूछता है कि लोग कहाँ जाते हैं, क्यों, और पर्यटन जगहों पर क्या असर डालता है। जगहें प्राकृतिक संसाधनों (पर्वत, तट, वन्यजीव) और सांस्कृतिक संसाधनों (धरोहर, उत्सव, भोजन) से लोगों को खींचती हैं। लोग घर से धकेले और गंतव्य की ओर खींचे जाते हैं। पर्यटन घरेलू या अंतरराष्ट्रीय होता है, और इसके कई प्रकार हैं: इको, साहसिक, सांस्कृतिक, चिकित्सा और समुद्री। रिसॉर्ट अक्सर खोज से ठहराव और फिर पतन या पुनर्जीवन तक एक जीवन-चक्र से गुज़रते हैं। पर्यटन रोज़गार और पैसा लाता है, पर वहन क्षमता से ज़्यादा पर्यटक प्रकृति और संस्कृति को नुक़सान पहुँचाते हैं, इसलिए अच्छा नियोजन टिकाऊ पर्यटन चाहता है।
6. Geography 3: spaces transformed by globalisation
Seas and oceans in a maritime world · How US territory adapts to globalisation · Dynamics of a major African region
- समुद्र और महासागर वैश्वीकरण में: जहाज़, बंदरगाह, केबल और समुद्री कानून – महासागर पृथ्वी के लगभग 71% हिस्से को ढकते हैं और मात्रा के हिसाब से विश्व व्यापार का लगभग 80% ढोते हैं। कंटेनर जहाज़ बड़े बंदरगाहों के बीच मार्गों पर चलते हैं और जलसंधियों व नहरों से निकलते हैं। समुद्र-तल के केबल महाद्वीपों के बीच लगभग सारा डेटा ले जाते हैं। समुद्री कानून में तटीय देश का 12 समुद्री मील पर प्रादेशिक सागर और 200 समुद्री मील तक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) होता है, जबकि खुले समुद्र में सभी देशों के जहाज़ चल सकते हैं। समुद्र जलवायु नियंत्रित करते हैं, भोजन देते हैं और उन्हें बचाने की ज़रूरत है।
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
- विकास का भूगोल: कोई जगह अमीर या गरीब क्यों? – विकास का मतलब है लोग बेहतर जीवन जिएँ: ज़्यादा आय, अच्छा स्वास्थ्य, ज़्यादा पढ़ाई और चुनने की आज़ादी। इसे सूचकों से नापते हैं, जैसे प्रति व्यक्ति GNI, जीवन प्रत्याशा और स्कूली वर्ष, और मानव विकास सूचकांक (HDI, 0 से 1) से, जो तीनों को जोड़ता है। विकास असमान है: अमीर कोर और गरीब परिधि दुनिया के क्षेत्रों के बीच भी हैं और एक देश के अंदर भी। जहाँ अमीर और गरीब इलाक़े मिलते हैं, वहाँ मज़दूर, सामान, कारख़ाने और पैसे का आना-जाना होता है, जिसके अच्छे और बुरे दोनों असर हैं। विकास का एक ही मॉडल नहीं: देश निर्यात कारख़ानों, सेवाओं, या खनन और खेती से बढ़े हैं, हर रास्ते के अपने जोखिम हैं।