आधुनिक युग से पहले की दुनिया
वैश्वीकरण का मतलब है दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं, लोगों और संस्कृतियों का आपस में जुड़ना। यह बहुत पुराना है।
रेशम मार्ग से जुड़ी दुनिया
रेशम मार्ग ज़मीन और समुद्र के ऐसे रास्ते थे जो ईसा से पहले के समय से लगभग 15वीं सदी तक एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका से जोड़ते थे। चीन का रेशम पश्चिम गया; भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बर्तन, कपड़े और मसाले भी गए; बदले में सोना-चाँदी आया। बौद्ध प्रचारक, ईसाई मिशनरी और बाद में मुसलमान प्रचारक भी इन्हीं रास्तों से गए।
भोजन की यात्रा: स्पैगेटी और आलू
शायद चीन के नूडल्स पश्चिम पहुँचकर स्पैगेटी बने, या अरब व्यापारी पास्ता को सिसली ले गए। कोलंबस के अमेरिका पहुँचने के बाद वहाँ से आलू, सोया, मूँगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च और शकरकंद दुनिया में फैले। साधारण आलू ने यूरोप में लोगों की ज़िंदगी बदल दी; जब आयरलैंड में आलू की फ़सल बीमारी से नष्ट हुई (1845–49), तो लगभग दस लाख लोग भूख से मरे और बहुत से देश छोड़ गए।
जीत, बीमारी और व्यापार
16वीं सदी में यूरोपीय नाविकों ने एशिया का समुद्री रास्ता खोजा और अमेरिका पहुँचे। अमेरिका की चाँदी और फ़सलों से यूरोप अमीर हुआ। स्पेन की जीत में सबसे बड़ा हथियार कीटाणु थे: चेचक ने बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को मार दिया, जिनमें इसके ख़िलाफ़ बचाव नहीं था। 18वीं सदी तक चीन और भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में थे। फिर व्यापार का केंद्र यूरोप बन गया।
उन्नीसवीं सदी (1815–1914)
तीन धाराएँ
अर्थशास्त्री तीन तरह की आवाजाही देखते हैं: व्यापार (कपड़ा, गेहूँ जैसा माल), श्रम (काम के लिए लोगों का जाना) और पूँजी (दूर-दूर लगाया गया पैसा)।
विश्व अर्थव्यवस्था बनती है
ब्रिटेन में कॉर्न लॉ सस्ते विदेशी अनाज को रोकते थे। 1846 में इनके हटने पर अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से सस्ता अनाज आने लगा; ब्रिटिश किसान टिक नहीं पाए और बहुत से गाँव वाले शहरों या विदेश चले गए। 19वीं सदी में लगभग 5 करोड़ लोग यूरोप छोड़कर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया गए।
तकनीक की भूमिका
रेल, भाप के जहाज़ और टेलीग्राफ़ ने माल और ख़बरें तेज़ी से पहुँचाईं। ठंडे (रेफ़्रिजरेटेड) जहाज़ों से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का मांस यूरोप पहुँचने लगा। मांस सस्ता हुआ, ग़रीब भी अच्छा खाने लगे और देश में शांति बढ़ी।
19वीं सदी के आख़िर का उपनिवेशवाद
1885 में यूरोप की बड़ी ताक़तों ने बर्लिन में मिलकर काग़ज़ पर सीधी लकीरें खींचकर अफ़्रीका को आपस में बाँट लिया। यूरोप वाले अफ़्रीका की ज़मीन और खनिज चाहते थे, पर अफ़्रीकी लोगों को मज़दूरी की ज़रूरत नहीं थी। रिंडरपेस्ट (मवेशियों का तेज़ी से फैलने वाला प्लेग) 1880 के दशक के आख़िर में ब्रिटिश एशिया से लाए गए बीमार मवेशियों के साथ आया; 1892 तक यह अफ़्रीका के अटलांटिक तट तक पहुँचा और लगभग 90% मवेशी मर गए। मवेशी खोकर अफ़्रीकी लोग मज़दूरी करने को मजबूर हुए।
भारत से गिरमिटिया मज़दूर
गिरमिट (अनुबंध) मज़दूरी का मतलब है कि मज़दूर एक तय समय तक किसी मालिक के लिए, अक्सर बहुत दूर, काम करने का करार करता है ताकि यात्रा का ख़र्च चुके। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य भारत और तमिलनाडु के सूखे ज़िलों के मज़दूर कैरिबियन (त्रिनिदाद, गयाना, सूरीनाम), मॉरीशस और फ़िजी गए। भर्ती करने वाले अक्सर काम के बारे में झूठ बोलते थे; रहने और काम की हालत कठोर थी। मज़दूरों ने नई संस्कृति बनाई: त्रिनिदाद में होसे (मुहर्रम का उत्सव रूप), "चटनी संगीत"। 1921 में यह व्यवस्था ख़त्म हुई।
भारतीय व्यापारी और व्यापार
शिकारीपुरी श्रॉफ़ और नट्टुकोट्टई चेट्टियार मध्य और दक्षिण-पूर्व एशिया में खेती के लिए कर्ज़ देते थे। ब्रिटेन का सूती माल भारत आने से भारत का कपड़ा निर्यात घटा। भारत कच्चा कपास, नील और अफ़ीम (चीन को) भेजता था। ब्रिटेन का भारत के साथ व्यापार अधिशेष था, जिससे वह दूसरे देशों का घाटा और "होम चार्जेज़" (भारत से दिए जाने वाले पेंशन और कर्ज़) चुकाता था।
दो युद्धों के बीच की अर्थव्यवस्था
युद्ध के समय के बदलाव
पहला विश्व युद्ध (1914–18) पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था: मशीनगन, टैंक, हवाई जहाज़ और रासायनिक हथियार। लगभग 90 लाख लोग मरे और 2 करोड़ घायल हुए। ब्रिटेन ने अमेरिका से कर्ज़ लिया, तो अमेरिका कर्ज़ देने वाला देश बना। युद्ध के बाद ब्रिटेन कर्ज़ में डूबा और भारत जैसे बाज़ार जापान के हाथ चले गए।
अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन
हेनरी फ़ोर्ड ने शिकागो के एक बूचड़खाने से असेंबली लाइन का विचार लेकर टी-मॉडल कार बनाई: हर मज़दूर एक ही काम करता, कुछ मिनटों में कार तैयार होती और सस्ती बिकती। किस्तों (उधार) पर लोगों ने कार, फ़्रिज और रेडियो ख़रीदे।
महामंदी (1929 से 1930 के दशक के बीच तक)
कारण: (1) खेती में ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन से दाम गिरे, तो किसानों ने आमदनी बचाने को और उगाया, जिससे दाम और गिरे; (2) कई देश अमेरिकी कर्ज़ पर चल रहे थे; 1928–29 में अमेरिकी निवेशकों ने पैसा वापस खींचा तो यूरोप के बैंक डूब गए। अमेरिका में बैंकों ने कर्ज़ वापस माँगे, लोगों के घर गए और 1933 तक 4,000 से ज़्यादा बैंक बंद हो गए।
भारत और महामंदी
1928 से 1934 के बीच भारत का आयात-निर्यात लगभग आधा रह गया। गेहूँ के दाम 50% गिरे। किसानों को फिर भी उतना ही लगान देना पड़ा, तो उन्होंने अपनी बचत और गहने बेचे: भारत कीमती धातुओं, ख़ासकर सोने, का निर्यातक बन गया। शहर में तय आमदनी वालों को सस्ते दामों से फ़ायदा हुआ। किसानों का गुस्सा 1931 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में दिखा।
विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण: युद्ध के बाद का दौर
दूसरे विश्व युद्ध (1939–45) में लगभग 6 करोड़ लोग मारे गए। नेताओं ने दो सबक़ लिए: बड़े उत्पादन के लिए बड़े ख़रीदार चाहिए (इसलिए रोज़गार बना रहे), और कोई देश अकेला न रहे।
जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स (न्यू हैम्पशायर) में सदस्य देशों के बाहरी घाटे-अधिशेष सँभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए विश्व बैंक बनाने का फ़ैसला हुआ। इन्होंने 1947 में काम शुरू किया। इस व्यवस्था में स्थिर विनिमय दर थी और डॉलर सोने से जुड़ा था। 1970 के दशक की शुरुआत तक का समय तेज़ विकास का "सुनहरा दौर" कहलाता है।
कई उपनिवेश आज़ाद हुए, पर उन्होंने पाया कि IMF और विश्व बैंक पर अमीर देशों का नियंत्रण है। उन्होंने G-77 बनाकर नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO) माँगी: अपने संसाधनों पर नियंत्रण, सही दाम और बाज़ार तक बेहतर पहुँच। 1970 के दशक से ब्रेटन वुड्स व्यवस्था कमज़ोर हुई, देश निजी बैंकों से कर्ज़ लेने लगे, और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) ने कम मज़दूरी वाले एशियाई देशों, जैसे चीन, में कारख़ाने लगाए।
ध्यान दो: बोर्ड परीक्षा के लिए इस अध्याय के भाग 2 से 4.4 अंतर्विषयक परियोजना के रूप में होते हैं, इसलिए यह हिस्सा समझ और परियोजना के लिए पढ़ो।
ख़ुद करके देखो
रसोई की खोज: रसोई से 5 चीज़ें चुनो (आलू, टमाटर, मिर्च, चाय, चावल…)। अंदाज़ा लगाओ कि कौन-सी अमेरिका से आई, फिर इस पाठ की सूची से जाँचो। 3D के आख़िरी चरण में स्लाइडर खिसकाने से पहले अंदाज़ा लगाओ कि व्यापार का खंभा कब सबसे नीचे होगा।
परीक्षा के लिए सुझाव
बोर्ड के प्रश्न अक्सर आधुनिक युग से पहले की दुनिया से आते हैं: रेशम मार्ग, भोजन की यात्रा, जीत और बीमारी। तीन धाराएँ, तकनीक की भूमिका, रिंडरपेस्ट, गिरमिट, महामंदी और भारत पर असर, और ब्रेटन वुड्स भी पूछे जाते हैं। 3–5 अंक के उत्तरों में कारण → परिणाम लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन धाराएँ = व्यापार (माल) + श्रम (लोग) + पूँजी (पैसा)
- रेशम मार्ग = एशिया, यूरोप और अफ़्रीका को जोड़ते ज़मीनी और समुद्री रास्ते
- महामंदी = खेती में ज़्यादा उत्पादन + अमेरिकी कर्ज़ वापस → गिरावट
- ब्रेटन वुड्स 1944 = IMF + विश्व बैंक + स्थिर विनिमय दर
- गिरमिट = तय सालों के लिए करार वाली मज़दूरी, अक्सर घर से दूर
हल किए गए उदाहरण
1. दो उदाहरण दो जिनसे पता चले कि पुरानी दुनिया जुड़ी हुई थी।
1) रेशम मार्ग पर चीन का रेशम, भारत के मसाले और कपड़े, और बौद्ध-ईसाई प्रचारक भी चले। 2) आलू, मक्का और मिर्च जैसी फ़सलें अमेरिका से यूरोप और एशिया पहुँचीं। (साथ में: चेचक जैसे कीटाणु भी।)
2. रिंडरपेस्ट ने अफ़्रीकी लोगों की ज़िंदगी कैसे बदली?
1890 के दशक में इसने लगभग 90% मवेशी मार दिए। मवेशी ही अफ़्रीकी लोगों की दौलत और रोज़ी थे। उनके बिना लोगों को यूरोपीय खदानों और बाग़ानों में मज़दूरी करनी पड़ी, जो उपनिवेशवादी चाहते थे।
3. महामंदी के दो कारण समझाओ।
1) खेती में ज़्यादा उत्पादन: दाम गिरे, किसानों ने आमदनी बचाने को और उगाया, दाम और गिरे और अनाज बिना बिके सड़ा। 2) कई देश अमेरिकी कर्ज़ पर चलते थे; 1928 के बाद अमेरिकी कर्ज़दाताओं ने हाथ खींचा तो यूरोप के बैंक और मुद्राएँ डूब गईं।
4. IMF और विश्व बैंक का उद्देश्य क्या था?
IMF को सदस्य देशों के बाहरी घाटे और अधिशेष सँभालने थे; विश्व बैंक को युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और बाद में विकास के लिए पैसा देना था।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि वैश्वीकरण 1990 के दशक में ही शुरू हुआ। रेशम मार्ग, भोजन और व्यापार से जुड़ाव हज़ारों साल पुराना है।
- पूँजी और श्रम को मिलाना: पूँजी लगाया गया पैसा है; श्रम काम के लिए जाते लोग हैं।
- यह सोचना कि महामंदी से भारतीय किसानों को फ़ायदा हुआ। दाम गिरे पर लगान वही रहा, इसलिए वे बहुत परेशान हुए।
- यह लिखना कि ब्रेटन वुड्स में संयुक्त राष्ट्र बना। वहाँ IMF और विश्व बैंक बने।