China 九年级(初三) History
अध्याय: 13
1. Sem.1 U1 Birth of civilisation; ancient Asia and Africa
From primitive to slave society · Mesopotamia · Ancient Egypt · Ancient India
- शुरुआती इंसान से वर्ग और राज्य तक – शुरुआती इंसान छोटे दलों में रहते और खाना बाँटते थे। खेती से अधिशेष (बचा खाना) मिला। अधिशेष से नए काम बने, फिर धन की असमानता, फिर सामाजिक वर्ग, जिनमें ऊपर शासक और नीचे दास थे। व्यवस्था रखने और कर लेने के लिए शासकों ने कानून, सेना और अधिकारियों वाले राज्य बनाए।
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
- भारत में राज्य और समाज (1000 ई. तक) – वेद भारत के सबसे पुराने ग्रंथ हैं, जो सदियों तक याद करके बचाए गए। वैदिक युग में राजन (मुखिया) सभा और समिति की सलाह से शासन करता था। समाज को वर्णों और चार आश्रमों के रूप में बताया गया। छोटे जन बढ़कर जनपद और फिर 16 महाजनपद बने; कुछ में राजा, कुछ में गण (सभा) का शासन था। मगध बढ़कर मौर्य साम्राज्य बना, जो प्रांतों, अधिकारियों, कर और गुप्तचरों से चलता था, जैसा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में है; अशोक ने शिलालेखों से धम्म फैलाया। बाद में गुप्त, चोल आदि राज्य आए; दक्षिण में गाँव की सभाएँ थीं। गुरुकुल, तक्षशिला और नालंदा में शिक्षा बढ़ी। व्यापारी लंबे मार्गों से सामान ले जाते और कारीगर श्रेणियों में संगठित थे।
2. Sem.1 U2 Ancient Europe
Ancient Greece · Ancient Rome
- प्राचीन यूनान: नगर-राज्य, लोकतंत्र और स्थायी विरासत – प्राचीन यूनान ईजियन सागर के आसपास पनपा, पहाड़ों, छोटी घाटियों और ढेरों द्वीपों वाली ज़मीन पर। पहाड़ों ने बस्तियों को अलग रखा, तो यूनानी सैकड़ों स्वतंत्र नगर-राज्यों (पोलिस) में रहते थे, हर एक के अपने क़ानून, सेना और देवता; सागर व्यापार से उन्हें जोड़ता था। सबसे मशहूर थे एथेंस, एक व्यापारी नगर जिसने लगभग 508 ई.पू. में पहला लोकतंत्र बनाया, और स्पार्टा, एक सैनिक राज्य। यूनानियों ने मिलकर 490 और 480 ई.पू. में फ़ारसी हमले हराए, फिर पेलोपोनेसियन युद्ध में आपस में लड़े। बाद में मकदूनिया का सिकंदर सेना लेकर मिस्र और सिंधु तक गया, और हेलेनिस्टिक युग में यूनानी संस्कृति फैली। राजनीति, दर्शन, इतिहास-लेखन, विज्ञान, गणित, नाटक, खेल और वास्तुकला में यूनानी विचार आज भी दुनिया को आकार देते हैं।
- तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य: रोमन साम्राज्य – रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर की ज़मीन पर फैला था: यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के हिस्से। सत्ता तीन के बीच बँटी थी: सम्राट, सीनेट और सेना। अर्थव्यवस्था खेती, नगरों, जहाज़ों, सिक्कों और जैतून तेल, शराब व अनाज के व्यापार पर चलती थी। समाज परतों में बँटा था, ऊपर अमीर सीनेटर और नीचे बहुत सारे दास। रोमन व्यापारी मानसूनी हवाओं से भारत के बंदरगाहों तक आते थे। चौथी सदी से बदलाव आया: ईसाई धर्म मुख्य धर्म बना, कुस्तुंतुनिया नई राजधानी बनी और 476 ई. में पश्चिमी हिस्सा टूट गया। इस बदलाव के दौर को 'उत्तर-पुरातन काल' कहते हैं।
3. Sem.1 U3 Feudal Europe
Frankish kingdom and feudalism · Towns and universities · Byzantine Empire
- तीन वर्ग: यूरोप का सामंती समाज – लगभग 9वीं से 16वीं सदी तक पश्चिमी यूरोप में सामंती समाज था। लोगों को तीन वर्गों में देखा जाता था: प्रार्थना करने वाले पादरी, लड़ने वाले अभिजात और काम करने वाले किसान। लॉर्ड राजा से ज़मीन लेते थे और अपनी जागीर (मेनर) चलाते थे, जहाँ कृषिदास काम करते थे। नए औज़ारों और व्यापार से शहर बढ़े, पर 14वीं सदी में ठंडे मौसम, अकाल और ब्लैक डेथ से संकट आया। इसके बाद फ़्रांस, इंग्लैंड, स्पेन के राजाओं ने स्थायी सेना और कर-व्यवस्था बनाई; यहीं से राष्ट्र-राज्यों की शुरुआत हुई।
- मध्यकालीन यूरोप में शहर और विश्वविद्यालय – लगभग 1000 से 1300 के बीच बेहतर खेती और व्यापार से लोग बाज़ारों के पास बसे। बाज़ार दीवार वाले शहर बने, जहाँ कारीगरों के गिल्ड थे। इन शहरों में शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर पहले विश्वविद्यालय बनाए, जैसे बोलोना, पेरिस और ऑक्सफ़ोर्ड।
- बीज़ान्टिन साम्राज्य – सन् 395 में रोमन दुनिया पश्चिम और पूर्व में बँट गई। पूर्व का हिस्सा बीज़ान्टिन साम्राज्य कहलाया। उसकी राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल थी और वह 1453 तक चला। सम्राट जस्टिनियन (527–565) ने क़ानून इकट्ठे किए, हागिया सोफ़िया बनवाई और खोई ज़मीन वापस जीती। इसकी ग्रीक-ईसाई-कला संस्कृति ने पूर्वी यूरोप को ढाला और पुरानी किताबें बचाईं।
4. Sem.1 U4 Medieval Asia, Africa and the Americas
Feudal Japan · Arab Empire · Medieval Africa and Americas
- सामंती जापान: ताइका सुधार, समुराई और शोगुनेट – 645 में ताइका सुधारों ने जापान की ज़मीन सम्राट के अधीन कर दी। समय के साथ ताक़तवर कुलों और योद्धाओं ने असली ताक़त ले ली। 1192 से कामाकुरा में शोगुन सेनापति के रूप में शासन करने लगा, जबकि सम्राट क्योटो में रहा। दाइम्यो नाम के सामंत समुराई रखते थे और किसान खेती करते थे: यह सामंती पिरामिड था।
- इस्लाम का उदय और अरब साम्राज्य – इस्लाम की शुरुआत अरब में पैग़ंबर मुहम्मद (जन्म लगभग 570 ई.) से हुई। 632 में उनके निधन के बाद ख़लीफ़ाओं के नेतृत्व में तेज़ विस्तार हुआ। उमय्यद दमिश्क़ से (661–750) और अब्बासी बग़दाद से (750–1258) शासन करते थे। व्यापार, अनुवाद और विज्ञान ने इसे ज्ञान का स्वर्ण युग बनाया।
- मध्यकालीन अफ़्रीका और अमेरिका – जब यूरोप और एशिया के अपने साम्राज्य थे, तब अफ़्रीका में सोने, नमक और समुद्री व्यापार पर घाना, माली, स्वाहिली बंदरगाह और ग्रेट ज़िम्बाब्वे जैसे समृद्ध राज्य थे। अमेरिका में माया, एज़्टेक और इंका ने पुरानी दुनिया से संपर्क के बिना नगर, सड़कें, कैलेंडर और गणित बनाए।
5. Sem.1 U5 Towards the modern age
Renaissance · New sea routes · Early colonialism
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
- खोज का युग (लगभग 1400–1600) – लगभग 1400 से 1600 के बीच पुर्तगाल और स्पेन के नाविकों ने, और बाद में दूसरे यूरोपीय देशों ने, दुनिया के महासागरों में नए समुद्री रास्ते खोले। वे बिचौलियों के बिना मसाले और सोना चाहते थे, ईसाई धर्म फैलाना चाहते थे और नाम कमाना चाहते थे। कैरवेल जहाज़, कुतुबनुमा, एस्ट्रोलैब और बेहतर नक्शों ने लंबी यात्राएँ मुमकिन कीं। डियास अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुँचा (1488), कोलंबस अमेरिका पहुँचा (1492), वास्को द गामा भारत पहुँचा (1498) और मैगलन के बेड़े ने दुनिया का चक्कर लगाया (1519–22)। इससे पहले चीन के झेंग हे के बड़े बेड़े अफ़्रीका तक गए थे (1405–33)। इन यात्राओं ने पहली बार पूरी दुनिया को जोड़ा। यूरोप को व्यापार, नई फ़सलें और धन मिला, पर दूसरों को जीत लिया जाना, जानलेवा बीमारियाँ और अटलांटिक दास व्यापार झेलना पड़ा।
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
6. Sem.1 U6 Establishing capitalism
English Revolution · American independence · French Revolution and Napoleon
- अमेरिकी क्रांति (1763–1791) – उत्तरी अमेरिका के अटलांटिक तट पर बसे 13 ब्रिटिश उपनिवेश ब्रिटेन से अलग हुए और संयुक्त राज्य अमेरिका बना। सात वर्षीय युद्ध (1756–63) के बाद ब्रिटेन भारी कर्ज़ में था और उसने नियंत्रण कसा: 1763 की घोषणा ने पश्चिम में बसने पर रोक लगाई, और नए कर (शुगर, स्टाम्प, टाउनशेंड, चाय क़ानून) उस संसद ने लगाए जिसमें उपनिवेशों का कोई सदस्य नहीं था। उपनिवेशियों ने "प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं" का नारा दिया, बहिष्कार किए, और बोस्टन टी पार्टी हुई। ब्रिटेन ने दमनकारी क़ानून लगाए और 1775 में लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड में लड़ाई शुरू हुई। प्राकृतिक अधिकार और जनता की सहमति से सरकार जैसे प्रबोधन विचार, और थॉमस पेन की कॉमन सेंस, 4 जुलाई 1776 की स्वतंत्रता की घोषणा तक ले गए। फ़्रांस, स्पेन और डच गणराज्य की मदद से जॉर्ज वॉशिंगटन की सेना साराटोगा और यॉर्कटाउन में जीती, और पेरिस संधि (1783) ने स्वतंत्रता मानी। कमज़ोर परिसंघ के अनुच्छेदों की जगह 1787 का संविधान आया: शक्तियों का बँटवारा, नियंत्रण और संतुलन, संघवाद, और अधिकार पत्र (1791)। क्रांति ने दूसरों को प्रेरित किया, पर अधिकार सीमित रहे: दासता जारी रही, मूल निवासियों ने ज़मीन खोई और महिलाओं को वोट नहीं मिला।
7. Sem.1 U7 Industrial Revolution and Marxism
First Industrial Revolution · Birth of Marxism; First International and Paris Commune · History skills: horizontal links; reading classics
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
- मार्क्सवाद का जन्म: घोषणापत्र, प्रथम इंटरनेशनल और पेरिस कम्यून – मार्क्सवाद समाज के बारे में विचारों का एक समूह है, जिसे सबसे पहले कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स ने विस्तार से लिखा। उनका कहना था कि कारख़ानों वाले समाज में दो बड़े वर्ग होते हैं जिनके हित उलटे हैं: मालिक और मज़दूर। 1848 में उन्होंने कम्युनिस्ट घोषणापत्र छापा, जिसमें कहा गया कि इतिहास वर्गों के संघर्ष से आगे बढ़ता है और सब देशों के मज़दूरों से एक होने की अपील की गई। 1864 में कई शहरों के मज़दूर संगठनों ने लंदन में प्रथम इंटरनेशनल बनाया ताकि वे सीमाओं के पार मिलकर काम कर सकें। 1871 में पेरिस के मज़दूरों और नागरिकों ने 72 दिन अपना शहर ख़ुद चलाया (पेरिस कम्यून), फिर सरकारी सेना ने उसे कुचल दिया। ये तीनों घटनाएँ दिखाती हैं कि काम, दौलत और सत्ता के बारे में एक नया विचार कारख़ानों के ज़माने से निकलकर दुनिया भर के आंदोलन में कैसे बदला।
8. Sem.2 U1 Colonial resistance and spread of capitalism
Colonial resistance · Russian reform · American Civil War · Meiji Restoration
- औपनिवेशिक प्रतिरोध: भारत का 1857 का विद्रोह और लैटिन अमेरिका की आज़ादी – उपनिवेश वह ज़मीन है जिस पर कोई दूर की ताक़त राज करती है और उसका माल व कर ले जाती है। 1800 के दशक में कई उपनिवेशों के लोगों ने विरोध किया। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के सिपाही 10 मई 1857 को मेरठ में उठ खड़े हुए और बहुत से आम लोग भी जुड़ गए। विद्रोह दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झाँसी और दूसरी जगहों तक फैला, पर उसके पास एक साझा योजना नहीं थी और 1858 तक दबा दिया गया; इसके बाद कंपनी का शासन ख़त्म हुआ और ब्रिटिश ताज सीधे भारत पर राज करने लगा। लैटिन अमेरिका में हैती के ग़ुलाम बनाए गए लोगों ने 1804 में आज़ादी जीती। 1808 में नेपोलियन ने स्पेन पर हमला किया तो स्पेन और पुर्तगाल के साम्राज्य कमज़ोर हो गए, और सिमोन बोलिवार तथा ख़ोसे दे सान मार्टिन जैसे नेताओं की मदद से 1820 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश आज़ाद हो गए। दोनों की तुलना से समझ आता है कि कुछ प्रतिरोध क्यों सफल हुए और कुछ क्यों नहीं।
- अमेरिकी गृहयुद्ध और पुनर्निर्माण (1845–1877) – 1845 से 1877 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका पश्चिम की ओर फैला, गुलामी (दास प्रथा) के सवाल पर बँटा, गृहयुद्ध लड़ा और फिर खुद को दोबारा जोड़ने की कोशिश की। उत्तर में कारखाने और वेतन पाने वाले मज़दूर थे; दक्षिण लगभग 40 लाख गुलाम लोगों से कपास उगवाता था। नई पश्चिमी ज़मीन पर बार-बार एक ही सवाल उठा: नए राज्यों में गुलामी होगी या नहीं? 1820 और 1850 के समझौते टूट गए, और 1860 में अब्राहम लिंकन के चुनाव के बाद 11 दक्षिणी राज्य संघ से अलग हो गए। युद्ध (1861–65) में लगभग 6.2 लाख सैनिक मारे गए। ज़्यादा लोग, कारखाने और रेल होने से उत्तर जीता, और 13वें संशोधन ने गुलामी खत्म की। पुनर्निर्माण (1865–77) में अश्वेत पुरुषों को नागरिकता और वोट मिला, पर 1877 में संघीय सेना हटते ही लगभग सौ साल के लिए कई अधिकार छिन गए।
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।
9. Sem.2 U2 Second Industrial Revolution
Second Industrial Revolution · Social change in industrial countries · Modern science and culture
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
- औद्योगिक क्रांति: कारण, प्रभाव और सुधार (1760–1914) – लगभग 1760 से 1914 के बीच काम घर के हाथ-औज़ारों से हटकर कारख़ानों की मशीनों पर आ गया। पहली लहर (लगभग 1760–1840) ब्रिटेन में कोयला, लोहा, भाप शक्ति और सूती मिलों से शुरू हुई। दूसरी लहर (लगभग 1870–1914) में इस्पात, बिजली, रसायन और तेल आए, और उद्योग पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, जापान और रूस तक फैला। शहर तेज़ी से बढ़े; मज़दूरों को लंबे घंटे, बाल श्रम और गंदे घर मिले। मज़दूरों ने संघ बनाए, नए विचारों (उदारवाद, समाजवाद, रूढ़िवाद) में बहस हुई, और सरकारों ने धीरे-धीरे कारख़ाना, स्वास्थ्य और मताधिकार के सुधार किए।
- आधुनिक विज्ञान और संस्कृति: डार्विन, आइंस्टीन, साहित्य और कला (1830–1920) – 1800 के दशक और 1900 के शुरुआती वर्षों में कारख़ानों, रेलों और बढ़ते शहरों ने जीवन बदल दिया, और लोग प्रकृति और समाज के बारे में नए सवाल पूछने लगे। विज्ञान में चार्ल्स डार्विन ने 1859 में बताया कि जीव प्राकृतिक चयन से धीरे-धीरे बदलते हैं, ग्रेगर मेंडल ने आनुवंशिकता के नियम खोजे, मैरी और पियरे क्यूरी ने रेडियोधर्मिता पर काम किया, और अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 और 1915 में दिखाया कि समय, स्थान, द्रव्यमान और ऊर्जा आपस में जुड़े हैं। साहित्य में चार्ल्स डिकेंस, विक्टर ह्यूगो और लियो टॉल्स्टॉय जैसे लेखकों ने ग़रीबी, न्याय और रोज़ के जीवन को लिखा, और 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य का नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई बने। कला में फ़ोटोग्राफ़ी ने चित्रकारों को रोशनी, भावना और देखने के नए ढंग की ओर धकेला, जिससे इंप्रेशनिज़्म और फिर क्यूबिज़्म आए। इन सबने मिलकर सोचने का आधुनिक ढंग बनाया।
10. Sem.2 U3 WWI and after
World War I · October Revolution · Versailles and Washington treaties · Soviet socialist construction · National movements in Asia, Africa, Latin America
- प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918): कारण, घटनाक्रम और परिणाम – प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मित्र राष्ट्रों (फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, बाद में इटली, अमेरिका आदि) और केंद्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया। चार दीर्घकालिक कारणों ने तनाव बढ़ाया: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद (MAIN)। चिंगारी थी 28 जून 1914 को साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या। पश्चिमी मोर्चे पर युद्ध खाइयों का गतिरोध बन गया; नए हथियारों ने इसे बहुत घातक बनाया। यह संपूर्ण युद्ध था: पूरी अर्थव्यवस्था, महिला कामगार और उपनिवेश लगाए गए, जिनमें लगभग 13 लाख भारतीय भी थे। 1917 की क्रांति के बाद रूस बाहर हुआ, अमेरिका 1917 में आया, और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी। 1919–1920 की शांति संधियों, जिनमें वर्साय भी है, ने यूरोप को नया रूप दिया, चार साम्राज्य ख़त्म किए, राष्ट्र संघ बनाया और ऐसा ग़ुस्सा छोड़ा जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रास्ता बनाया।
- क्रांति और तानाशाही: रूस और स्तालिन का सोवियत संघ (1917–1953) – 1917 में युद्ध की हारों, भूख और ज़ार निकोलस II पर ग़ुस्से से फ़रवरी क्रांति हुई; ज़ार ने गद्दी छोड़ी और कमज़ोर अस्थायी सरकार आई। अक्टूबर में लेनिन के बोल्शेविकों ने सत्ता ले ली। उन्होंने चुनी हुई संविधान सभा बंद की, जर्मनी से शांति की, गोरों (सफ़ेद) के ख़िलाफ़ गृहयुद्ध (1918–21) जीता और गुप्त पुलिस (चेका) वाला एक-दलीय राज्य बनाया। युद्ध साम्यवाद से भूख और विद्रोह हुए, इसलिए 1921 में लेनिन ने नई आर्थिक नीति (NEP) अपनाई। 1924 में लेनिन की मृत्यु के बाद स्तालिन ने महासचिव पद का इस्तेमाल करके 1929 तक त्रॉत्स्की, ज़िनोव्येव, कामेनेव और बुख़ारिन को हराया। फिर पंचवर्षीय योजनाओं से तेज़ औद्योगीकरण और ज़बरन सामूहिक खेती कराई: भारी उद्योग बहुत बढ़ा, पर 1932–33 में भयानक अकाल पड़ा। सफ़ाए, दिखावटी मुक़दमे, महा आतंक (1936–38), गुलाग और व्यक्ति-पूजा से स्तालिन ने डर के बल पर राज किया। 1941 के जर्मन हमले के बाद सोवियत संघ ने भारी क़ीमत पर महान देशभक्ति युद्ध जीता और महाशक्ति बना। 1953 में स्तालिन की मृत्यु तक कड़ा शासन चला।
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
11. Sem.2 U4 Great Depression and WWII
New Deal · Fascist aggression · World War II
- महामंदी (1929–1939) – महामंदी बीसवीं सदी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट था। यह अक्टूबर 1929 में अमेरिका के वॉल स्ट्रीट शेयर बाज़ार के गिरने से शुरू हुई। शेयर गिरे, बैंक डूबे, कारखाने बंद हुए और 1933 तक अमेरिका में हर चार में से एक मज़दूर बेरोज़गार था। देशों ने आयात पर भारी कर (टैरिफ़) लगाए, जिससे दुनिया का व्यापार लगभग दो-तिहाई घट गया और संकट यूरोप, एशिया, अफ़्रीका तक फैल गया। अमेरिका ने न्यू डील अपनाई; जर्मनी और जापान में संकट ने उग्र राष्ट्रवादी दलों को ताक़त दी, जो आगे दूसरे विश्व युद्ध की ओर ले गया।
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
12. Sem.2 U5 Post-war world
Cold War · Changes in capitalism; socialism's development · New development of Asia, Africa, Latin America
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- सोवियत संघ और उसके साम्राज्य का विघटन (1953–2000) – 1953 में स्टालिन की मृत्यु के बाद सोवियत संघ ने नियंत्रण खोए बिना सुधार करना चाहा। ख्रुश्चेव ने स्टालिन की आलोचना की और आतंक कम किया, पर 1956 में हंगरी को कुचला। ब्रेझनेव (1964–82) के समय विकास धीमा हुआ और नेता बूढ़े हो गए: 'ठहराव के साल'। पूर्वी यूरोप के उपग्रह देशों को बल (प्राग 1968) से और पश्चिमी कर्ज़ से ख़रीदे आराम के वादे से काबू में रखा गया। विरोध बढ़ा, ख़ासकर पोलैंड की सॉलिडैरिटी यूनियन (1980)। गोर्बाचेव (1985–91) ने ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका आज़माए और विदेश में बल प्रयोग बंद किया। 1989 में उपग्रह देशों ने साम्यवाद छोड़ा, और 1991 में सोवियत संघ 15 देशों में बँट गया। फिर येल्तसिन के रूस ने दर्दनाक 'शॉक थेरेपी' झेली, और 2000 में पुतिन आए।
- विउपनिवेशीकरण: साम्राज्य कैसे खत्म हुए और नए देश कैसे बने – विउपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपनिवेश स्वतंत्र देश बने। यह ज़्यादातर 1945 से 1970 के दशक तक हुआ। दूसरे विश्व युद्ध ने शासक देशों को कमज़ोर किया, आज़ादी के आंदोलन मज़बूत हुए, और संयुक्त राष्ट्र ने हर जनता के स्वशासन के अधिकार का साथ दिया। कुछ उपनिवेश बातचीत और जन-आंदोलन से आज़ाद हुए (भारत 1947, घाना 1957), कुछ लंबे युद्ध से (अल्जीरिया 1962)। नए देशों के सामने गरीबी, एक फ़सल पर टिकी अर्थव्यवस्था, अनुचित सीमाएँ और शीत युद्ध का दबाव था; कई ने गुटनिरपेक्षता चुनी।
13. Sem.2 U6 A world of peace and development
UN and WTO · Post-Cold War world · Modern society
- अंतर्राष्ट्रीय संगठन – अंतर्राष्ट्रीय संगठन देशों को शांति, पैसे, व्यापार और अधिकारों पर मिलकर काम करने में मदद करते हैं। राष्ट्र संघ की विफलता के बाद 1945 में संयुक्त राष्ट्र बना; इसके छह मुख्य अंग हैं और सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो है। 1945 के बाद दुनिया बदल गई है, इसलिए UN, ख़ासकर सुरक्षा परिषद में सुधार ज़रूरी है, और भारत स्थायी सीट माँगता है। IMF, विश्व बैंक, WTO, ILO और IAEA पैसे, विकास, व्यापार, मज़दूरों और परमाणु सुरक्षा को देखते हैं, और एमनेस्टी जैसे NGO मानवाधिकारों पर नज़र रखते हैं।
- शीत युद्ध के बाद की दुनिया – 1991 में सोवियत संघ टूटा और शीत युद्ध ख़त्म हुआ। कुछ समय एक ही महाशक्ति अकेली रही (एकध्रुवीय विश्व)। फिर यूरोपीय संघ, चीन, रूस, भारत और आसियान जैसे कई शक्ति-केंद्र उभरे और दुनिया बहुध्रुवीय बनी। पुराना तनाव घटा, पर क्षेत्रीय संघर्ष, आतंकवाद और असमान विकास बने रहे। आज शांति व्यापार, बातचीत और साझा नियमों पर टिकी है।
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।