महामंदी क्या थी?
आर्थिक मंदी (depression) का मतलब है — किसी देश का उत्पादन, बिक्री और कमाई लंबे समय तक बहुत गिर जाना। दाम गिरते हैं, नौकरियाँ जाती हैं। यह महीनों नहीं, सालों चलती है।
महामंदी 1929 में शुरू हुई और ज़्यादातर देशों में 1930 के दशक के अंत तक चली। व्यापार करने वाला लगभग हर देश इसकी चपेट में आया।
अमेरिका में 1929 से 1932 के बीच औद्योगिक उत्पादन लगभग आधा हो गया और 1930–33 में करीब 9,000 बैंक बंद हुए।
कारण: ऐसा क्यों हुआ?
- ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन: खेत और कारखाने इतना बना रहे थे जितना लोग ख़रीद नहीं सकते थे। खेती के दाम 1920 के दशक के अंत में ही गिरने लगे थे।
- उधार से शेयर ख़रीदना: लोग कर्ज़ लेकर शेयर ख़रीदते थे। दाम थोड़े गिरे तो कर्ज़ देने वालों ने पैसा माँगा, लोगों को शेयर बेचने पड़े और दाम और गिरे।
- कमज़ोर बैंक: हज़ारों छोटे बैंकों का कोई बीमा नहीं था। घबराहट में लोग पैसा निकालने दौड़े (बैंक रन) और बैंक डूब गए।
- असमान आय: कमाई का बड़ा हिस्सा थोड़े लोगों के पास था, आम परिवार ज़्यादा ख़रीद नहीं पाते थे।
- जुड़ी हुई दुनिया: पहले विश्व युद्ध के बाद यूरोप अमेरिकी कर्ज़ों पर टिका था। 1929–31 में कर्ज़ रुके तो ऑस्ट्रिया और जर्मनी के बैंक भी डूबे (1931)।
- स्वर्ण मानक (gold standard): मुद्रा सोने से बँधी थी, इसलिए सरकारें ब्याज घटाने या ख़र्च बढ़ाने से हिचकती थीं।
दुनिया भर में प्रभाव
अमेरिका में
परिवारों के घर और खेत छिन गए। बहुत से लोग झोपड़-बस्तियों में रहने लगे। मैदानी इलाक़ों में सूखे और धूल भरी आँधियों ("डस्ट बाउल") ने किसानों को उजाड़ दिया।
व्यापार की दीवारें
1930 में अमेरिका ने आयात कर बढ़ाए। बाक़ी देशों ने भी जवाब में कर बढ़ाए। 1929 से 1933 तक विश्व व्यापार का मूल्य लगभग दो-तिहाई घट गया।
यूरोप
1932 तक जर्मनी में लगभग 60 लाख बेरोज़गार थे। ग़ुस्से और डर से नाज़ी पार्टी के वोट बढ़े। ब्रिटेन ने 1931 में स्वर्ण मानक छोड़ दिया।
उपनिवेश और भारत
उपनिवेश फ़सलें और कच्चा माल बेचते थे, उनके दाम धड़ाम से गिरे। भारत में खेती के दाम लगभग आधे हो गए, पर औपनिवेशिक सरकार ने लगान कम नहीं किया। किसान कर्ज़ में डूबे, गहने-सोना बेचा — और यह नाराज़गी सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) की ताक़त बनी।
सरकारों का जवाब: न्यू डील और दूसरे रास्ते
न्यू डील (अमेरिका, 1933–1939): राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट ने "राहत, पुनरुद्धार और सुधार" का वादा किया।
- राहत (relief): सड़क, बाँध, स्कूल बनाने जैसे सरकारी कामों में रोज़गार।
- पुनरुद्धार (recovery): किसानों और उद्योग को मदद, ताकि दाम और मज़दूरी बढ़ें।
- सुधार (reform): बैंक जमा बीमा (FDIC, 1933), शेयर बाज़ार के नियम (SEC, 1934), बुढ़ापा पेंशन (सोशल सिक्योरिटी, 1935)।
अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने कहा कि मंदी में सरकार को ज़्यादा ख़र्च करना चाहिए ताकि माँग बने। यह विचार दशकों तक अर्थशास्त्र पर छाया रहा।
दूसरे रास्ते: ब्रिटेन और स्वीडन ने सस्ता कर्ज़ और कल्याण योजनाएँ अपनाईं। जर्मनी और जापान ने हथियार और विस्तार का रास्ता चुना — इसलिए महामंदी दूसरे विश्व युद्ध के कारणों में से एक है।
करके देखिए: डोमिनो की कड़ी
8 डोमिनो (या ताश के पत्ते) एक लाइन में खड़े कीजिए। उन पर लिखिए: शेयर, बैंक, कर्ज़, कारखाने, नौकरी, ख़र्च, व्यापार, दूसरे देश। पहले को धक्का दीजिए। अब "बैंक" वाला डोमिनो हटाकर (यानी बैंक का बीमा करके) फिर कीजिए। गिरना कहाँ रुकता है? जमा बीमा यही काम करता है।
परीक्षा के लिए
- हर कारण को असर से "इसलिए" या "क्योंकि" से जोड़िए।
- 4 आँकड़े याद रखिए: 1929 गिरावट, 1933 में 25% बेरोज़गारी (अमेरिका), व्यापार लगभग 2/3 घटा, 1933 से न्यू डील।
- भारत: फ़सल के दाम गिरे + लगान वही → ग्रामीण संकट → सविनय अवज्ञा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मंदी (depression): उत्पादन, रोज़गार और दामों में लंबी, गहरी गिरावट
- शेयर बाज़ार का गिरना (crash): शेयरों के दामों में अचानक बड़ी गिरावट
- बैंक रन: बहुत से लोग एक साथ पैसा निकालें
- टैरिफ़ (tariff): आयातित माल पर कर
- संरक्षणवाद (protectionism): आयात कर लगाकर अपने उद्योग को बचाना
- न्यू डील: राहत, पुनरुद्धार, सुधार (अमेरिका, 1933–39)
- स्वर्ण मानक: मुद्रा का सोने की तय मात्रा से बँधा होना
हल किए गए उदाहरण
1. शेयर बाज़ार के गिरने से बैंक कैसे डूबे?
बैंकों ने शेयर ख़रीदने वालों को कर्ज़ दिया था और ख़ुद भी शेयर ख़रीदे थे। शेयर गिरे तो कर्ज़ वापस नहीं आया, बैंक को घाटा हुआ। घबराए लोग पैसा निकालने दौड़े, बैंक के पास नकद ख़त्म हो गया और वह बंद हो गया।
2. संकट अमेरिका से यूरोप कैसे पहुँचा?
पहले विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी कर्ज़ों पर निर्भर थे। गिरावट के बाद अमेरिकी बैंकों ने कर्ज़ वापस माँगे। 1931 में यूरोपीय बैंक डूबे, कारखाने बंद हुए, और अमेरिकी टैरिफ़ से यूरोप का निर्यात और घटा।
3. महामंदी का भारतीय किसानों पर क्या असर पड़ा?
भारत गेहूँ, जूट और कपास बेचता था। इनके दाम लगभग आधे हो गए, किसानों की कमाई घटी। पर सरकार ने लगान उतना ही माँगा। किसान कर्ज़ में डूबे और अपना सोना बेचा। इसी ग़ुस्से ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को ताक़त दी।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ शेयर बाज़ार की गिरावट को कारण मानना। वह चिंगारी थी; कमज़ोर बैंक, ज़्यादा उत्पादन और घटती माँग ने उसे महामंदी बनाया।
- सोचना कि मंदी सिर्फ़ अमेरिका में थी। यह लगभग हर व्यापारी देश और उपनिवेशों तक फैली।
- न्यू डील के राहत, पुनरुद्धार और सुधार को मिला देना। राहत = अभी मदद, पुनरुद्धार = अर्थव्यवस्था फिर चालू, सुधार = दोबारा न हो।
- मानना कि टैरिफ़ से फ़ायदा हुआ। थोड़े समय कुछ नौकरियाँ बचीं, पर विश्व व्यापार सिकुड़ा और सबका नुक़सान हुआ।