दीर्घकालिक कारण: M-A-I-N
- सैन्यवाद (Militarism): बड़ी शक्तियों ने बड़ी सेनाएँ और नौसेनाएँ बनाईं और युद्ध योजनाएँ तैयार कीं। ब्रिटेन और जर्मनी में युद्धपोत बनाने की होड़ थी।
- गठबंधन (Alliances): यूरोप दो गुटों में बँटा। त्रिगुट संधि (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, इटली) और त्रिदेशीय मैत्री (फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन)। दो देशों का झगड़ा सबको खींच सकता था।
- साम्राज्यवाद (Imperialism): शक्तियाँ अफ़्रीका और एशिया में उपनिवेशों, बाज़ारों और कच्चे माल के लिए होड़ करती थीं। उपनिवेशों पर टकराव (जैसे मोरक्को, 1905 और 1911) से अविश्वास बढ़ा।
- राष्ट्रवाद (Nationalism): अपने राष्ट्र पर गहरा गर्व। बाल्कन के स्लाव जैसे कुछ समूह अपना राष्ट्र चाहते थे; इससे कई राष्ट्रों वाला ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य ख़तरे में था। बाल्कन को "यूरोप का बारूद का ढेर" कहा जाता था।
चिंगारी और युद्ध की शुरुआत (1914)
28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी के युवराज आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड को साराजेवो में एक युवा बोस्नियाई सर्ब राष्ट्रवादी ने गोली मार दी। ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया को दोषी माना और 28 जुलाई को युद्ध घोषित किया। फिर कड़ी जुड़ती गई:
- रूस ने सर्बिया के समर्थन में सेना जुटाई।
- ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथी जर्मनी ने रूस और उसके साथी फ़्रांस पर युद्ध घोषित किया।
- जर्मनी जल्दी फ़्रांस पहुँचने के लिए तटस्थ बेल्जियम में घुसा (श्लीफ़ेन योजना)।
- बेल्जियम की रक्षा का वादा करने वाले ब्रिटेन ने 4 अगस्त को जर्मनी पर युद्ध घोषित किया।
इटली पहले बाहर रहा और 1915 में मित्र राष्ट्रों में शामिल हुआ। ऑटोमन साम्राज्य (1914) और बुल्गारिया (1915) केंद्रीय शक्तियों में आए।
युद्ध के चरण
- 1914: गतिशील युद्ध। जर्मन बढ़त मार्न की लड़ाई में रुकी। दोनों पक्षों ने खाइयाँ खोदीं।
- 1915–1917: स्थिर युद्ध (गतिरोध)। पश्चिमी मोर्चे पर उत्तरी सागर से स्विट्ज़रलैंड तक खाइयों की पंक्ति थी। वर्दाँ और सोम (1916) जैसी बड़ी लड़ाइयों में लाखों मरे और मोर्चा बस कुछ किलोमीटर खिसका। पूर्वी मोर्चे पर लड़ाई ज़्यादा चलती-फिरती थी पर वह भी महँगी थी। मित्र राष्ट्रों का गैलीपोली हमला (1915) विफल रहा।
- 1917: मोड़ का वर्ष। जर्मनी के बेरोकटोक पनडुब्बी युद्ध से अमेरिका युद्ध में आया (अप्रैल)। रूस में क्रांति के बाद रूस युद्ध से बाहर हुआ (ब्रेस्ट-लितोव्स्क संधि, मार्च 1918)।
- 1918: अंत। वसंत में जर्मनी का आख़िरी बड़ा हमला विफल; मित्र राष्ट्र ताज़ा अमेरिकी सैनिकों और टैंकों के साथ आगे बढ़े। जर्मनी के साथी टूट गए, जर्मन सम्राट ने गद्दी छोड़ी और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी।
वैश्विक और संपूर्ण युद्ध: सैनिक और नागरिक
संपूर्ण युद्ध का मतलब है कि सिर्फ़ सेना नहीं, पूरा समाज युद्ध के लिए लगाया जाता है।
- सैनिक: खाइयों में कीचड़, चूहे, ठंड, बीमारी और लगातार ख़तरा। नए हथियारों (मशीनगन, भारी तोपें, ज़हरीली गैस, टैंक, विमान, पनडुब्बी) ने हमलों को बहुत घातक बनाया।
- घरेलू मोर्चा: कारख़ाने हथियार बनाने लगे; सरकारों ने उद्योग और भोजन पर नियंत्रण किया (राशनिंग); महिलाओं ने कारख़ानों, परिवहन और नर्सिंग में बहुत से काम सँभाले।
- प्रचार (propaganda): पोस्टर, फ़िल्में और अख़बार लोगों को सेना में जाने और दुश्मन से नफ़रत के लिए उकसाते थे; ख़बरों पर सेंसर था।
- नागरिक कमी, नाकेबंदी, हवाई हमलों, क़ब्ज़े और जबरन विस्थापन से पीड़ित हुए। ऑटोमन साम्राज्य में 1915 से आर्मेनियाई लोगों को बड़ी संख्या में निर्वासित किया गया और मारा गया।
- विश्व युद्ध: लड़ाई पश्चिम एशिया, अफ़्रीका और समुद्रों तक फैली। उपनिवेशों ने सैनिक, मज़दूर और पैसा भेजा। लगभग 13 लाख भारतीयों ने फ़्रांस, मेसोपोटामिया (इराक़), मिस्र और पूर्वी अफ़्रीका में सेवा दी; भारत ने भारी युद्ध-ख़र्च भी उठाया और महँगाई झेली।
लगभग 90 लाख से 1 करोड़ सैनिक और लाखों नागरिक मारे गए। 1918–1919 की फ़्लू महामारी, जो कुछ हद तक सैनिकों की आवाजाही से फैली, ने इससे भी ज़्यादा जानें लीं।
युद्ध से बाहर: शांति समझौता और नई व्यवस्था
विजेता पेरिस शांति सम्मेलन (1919) में मिले। हर हारी शक्ति से अलग संधि हुई। जर्मनी से वर्साय की संधि (28 जून 1919):
- युद्ध-अपराध धारा: जर्मनी ने युद्ध का दोष माना,
- भारी हर्जाना (reparations),
- छोटी सेना (1,00,000 सैनिक), वायुसेना नहीं, कम जहाज़; राइनलैंड सेना-मुक्त,
- यूरोप में भूमि और सभी उपनिवेश छिने।
परिणाम
- चार साम्राज्य ख़त्म: जर्मन, ऑस्ट्रिया-हंगरी, रूसी और ऑटोमन। मध्य और पूर्वी यूरोप में नए राष्ट्र बने, जैसे पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया और यूगोस्लाविया, और रोमानिया जैसे कुछ राष्ट्र बड़े हुए।
- शांति बनाए रखने के लिए राष्ट्र संघ (League of Nations) (1920) बना, अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन के चौदह सूत्रों के आधार पर, पर अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ।
- पश्चिम एशिया और अफ़्रीका के पुराने ऑटोमन और जर्मन इलाक़े ब्रिटेन और फ़्रांस के मैंडेट बने।
- आर्थिक नुक़सान, क़र्ज़ और हारे राष्ट्रों, ख़ासकर जर्मनी, के ग़ुस्से ने उग्रवादी आंदोलनों को बढ़ाया और दूसरे विश्व युद्ध (1939) की ओर ले गया।
- भारत जैसे उपनिवेशों में स्वशासन के टूटे वादों और युद्ध की कठिनाइयों ने राष्ट्रीय आंदोलन को मज़बूत किया।
करके देखिए: कारण-परिणाम की कड़ी बनाइए
6 डोमिनो (या किताबें) एक पंक्ति में खड़ी कीजिए और नाम लिखिए: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद, साराजेवो, युद्ध। "साराजेवो" वाली को धक्का दीजिए। बाक़ी सिर्फ़ इसलिए क्यों गिरीं कि वे पास-पास और जुड़ी खड़ी थीं? अब 3D के खुद-खेलिए चरण में स्लाइडर खिसकाने से पहले हर वर्ष का अनुमान लगाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कारण = MAIN: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद + चिंगारी (साराजेवो, 28 जून 1914)
- मित्र राष्ट्र: फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस (1917 तक), इटली (1915), अमेरिका (1917), जापान आदि
- केंद्रीय शक्तियाँ: जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य, बुल्गारिया
- मुख्य तिथियाँ: 1914 शुरुआत और मार्न; 1916 वर्दाँ और सोम; 1917 अमेरिका आया, रूस गया; 11 नवंबर 1918 युद्धविराम; 1919 वर्साय की संधि
- संपूर्ण युद्ध: सैनिक + घरेलू मोर्चा (उद्योग, महिलाएँ, राशनिंग, प्रचार) + उपनिवेश
- परिणाम: चार साम्राज्य ख़त्म, नए राष्ट्र, राष्ट्र संघ, हर्जाना, मैंडेट
हल किए गए उदाहरण
1. समझाइए कि गठबंधन व्यवस्था ने एक स्थानीय झगड़े को विश्व युद्ध कैसे बना दिया।
ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर हमला किया। रूस ने सर्बिया का साथ दिया, तो ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथी जर्मनी ने रूस और उसके साथी फ़्रांस पर युद्ध घोषित किया। बेल्जियम से होकर जर्मनी के मार्च ने ब्रिटेन को खींच लिया। हर वादे ने एक और शक्ति को जोड़ा, और बाल्कन का झगड़ा पहले यूरोपीय, फिर वैश्विक युद्ध बन गया।
2. पश्चिमी मोर्चा गतिरोध क्यों बन गया?
बचाव हमले से ज़्यादा मज़बूत था। गहरी खाइयाँ, कँटीले तार और मशीनगनें नो मैन्स लैंड पार करते सैनिकों को रोक देती थीं, और दोनों पक्ष रेल से जल्दी सैनिक पहुँचा सकते थे। इसलिए बड़े हमलों से बहुत कम ज़मीन मिलती थी।
3. 1917 को मोड़ क्यों कहते हैं? दो कारण दीजिए।
1) अमेरिका मित्र राष्ट्रों की ओर से आया, ताज़ा सैनिक और पैसा लाया। 2) रूस की क्रांति ने रूस को युद्ध से बाहर किया, जिससे जर्मनी 1918 में आख़िरी हमले के लिए सैनिक पश्चिम ले जा सका।
4. बहुत से जर्मन वर्साय की संधि को अन्यायपूर्ण क्यों मानते थे?
जर्मनी को बातचीत में नहीं बुलाया गया, उसे युद्ध-अपराध धारा माननी पड़ी, भारी हर्जाना भरना पड़ा, भूमि और उपनिवेश खोने पड़े और सेना छोटी करनी पड़ी। कई लोग इसे "थोपी गई शांति" कहते थे, और बाद में उग्रवादी दलों ने इस ग़ुस्से का इस्तेमाल किया।
आम गलतियाँ
- कहना कि सिर्फ़ हत्या से युद्ध हुआ। वह चिंगारी थी; MAIN कारणों ने तनाव पहले ही बना दिया था।
- पक्ष गड़बड़ करना: युद्ध से पहले इटली त्रिगुट संधि में था, पर 1915 से मित्र राष्ट्रों की ओर से लड़ा।
- मानना कि अमेरिका शुरू से लड़ा। वह अप्रैल 1917 में आया।
- युद्धविराम (11 नवंबर 1918, लड़ाई रुकी) और वर्साय की संधि (जून 1919, शांति की शर्तें) को एक समझना।