अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ज़रूरत क्यों?
देश लड़ भी सकते हैं, पर उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरत भी है। अंतर्राष्ट्रीय संगठन देशों द्वारा बनाया गया ऐसा निकाय है जो साझा समस्याएँ सुलझाए: युद्ध, बीमारी, ग़रीबी, व्यापार के झगड़े और जलवायु परिवर्तन। यह देशों को बात करने, नियम बनाने और सहयोग करने में मदद करता है। यह विश्व सरकार नहीं है; यह वही कर सकता है जिसकी सदस्य अनुमति दें।
संयुक्त राष्ट्र का विकास
- 1919: पहले विश्व युद्ध के बाद राष्ट्र संघ बना। वह दूसरा विश्व युद्ध नहीं रोक सका।
- 1941: अटलांटिक चार्टर; 1945: याल्टा और सैन फ़्रांसिस्को सम्मेलन।
- 24 अक्टूबर 1945: 51 सदस्यों के साथ संयुक्त राष्ट्र बना (UN दिवस)।
- आज 193 सदस्य हैं; लगभग हर स्वतंत्र देश सदस्य है।
- लक्ष्य: युद्ध रोकना, मानवाधिकारों की रक्षा, सामाजिक-आर्थिक विकास।
संयुक्त राष्ट्र के मुख्य अंग
- महासभा: सभी सदस्य, हर एक का एक वोट; किसी भी विश्व मुद्दे पर चर्चा।
- सुरक्षा परिषद: 15 सदस्य: 5 स्थायी (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) और 10 अस्थायी, दो साल के लिए चुने जाते हैं। शांति और सुरक्षा बनाए रखती है; फ़ैसले के लिए 9 वोट और किसी स्थायी सदस्य का वीटो नहीं।
- आर्थिक और सामाजिक परिषद: आर्थिक, सामाजिक और विकास के मुद्दे।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय: हेग में; देशों के क़ानूनी विवाद सुलझाता है।
- सचिवालय: कर्मचारी, जिनके प्रमुख महासचिव हैं, UN के मुख्य अधिकारी।
- न्यास परिषद: आज़ादी की ओर बढ़ते इलाक़ों की देखरेख करती थी; अब निष्क्रिय।
विशेष एजेंसियाँ: WHO, UNESCO, UNICEF, FAO, UNDP आदि।
संयुक्त राष्ट्र में सुधार
दो तरह के सुधारों पर चर्चा होती है: ढाँचे और प्रक्रियाओं में सुधार (मुख्यतः सुरक्षा परिषद) और UN जिन मुद्दों पर काम करता है उनकी समीक्षा।
सुधार क्यों?
- सुरक्षा परिषद 1945 की दुनिया दिखाती है, आज की नहीं। एशिया, अफ़्रीका, लातिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व कम है।
- सदस्य 51 से 193 हुए, नई आर्थिक ताक़तें उभरीं।
- वीटो से एक सदस्य कार्रवाई रोक सकता है, भले ज़्यादातर सहमत हों।
- परिषद बंद तरीक़े से काम करती है; उसके फ़ैसले पक्षपाती लग सकते हैं।
शीत युद्ध के बाद
सोवियत संघ टूटा, अमेरिका सबसे ताक़तवर बना, चीन और भारत बढ़े, कई नए देश जुड़े, और नई चुनौतियाँ (आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारी) आईं।
नए स्थायी सदस्य के लिए सुझाए गए मापदंड
बड़ी आर्थिक ताक़त, बड़ी सैन्य ताक़त, UN बजट में बड़ा योगदान, बड़ी आबादी, लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान, और किसी क्षेत्र या सभ्यता का प्रतिनिधित्व।
वीटो पर बहस
कुछ लोग वीटो ख़त्म या सीमित करना चाहते हैं; दूसरे कहते हैं इसके बिना बड़ी ताक़तें UN छोड़ देंगी।
भारत और UN सुधार
- भारत ऐसे सुधार चाहता है जिनसे UN ज़्यादा लोकतांत्रिक बने और विकासशील देशों की आवाज़ मज़बूत हो।
- भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों सीटें बढ़ाना चाहता है।
- स्थायी सीट का भारत का दावा: दूसरी सबसे बड़ी आबादी, सबसे बड़ा लोकतंत्र, तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था, संस्थापक सदस्य, UN शांति सेना में सबसे ज़्यादा सैनिक भेजने वालों में, और नियमित चंदा देने वाला।
- भारत ब्राज़ील, जर्मनी और जापान (G4) के साथ सुधार के लिए काम करता है।
- कुछ देशों की आपत्तियाँ: पाकिस्तान से संबंध, NPT से बाहर परमाणु हथियार, और क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ने का डर।
IMF, विश्व बैंक, WTO, ILO और अन्य
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), 1945: दुनिया की वित्तीय व्यवस्था पर नज़र रखता है, सलाह और संकट में अल्पकालिक ऋण देता है। वोट दिए गए पैसे पर निर्भर, इसलिए अमीर देशों की ज़्यादा चलती है।
- विश्व बैंक, 1944: विकास के लिए ऋण और अनुदान: स्कूल, स्वास्थ्य, सड़क, खेती, पर्यावरण। आलोचना: ऐसी शर्तें जिनसे ग़रीब देशों को ख़र्च घटाना पड़ता है।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO), 1995: विश्व व्यापार के नियम बनाता और व्यापार विवाद सुलझाता है; GATT की जगह आया। फ़ैसले सहमति से, पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का असर ज़्यादा।
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), 1919: मज़दूरों के अधिकार, उचित वेतन और सुरक्षित काम के मानक।
- अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), 1957: परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देती और जाँचती है कि हथियार न बनें।
- अन्य: WHO (स्वास्थ्य), UNESCO (शिक्षा, संस्कृति), UNICEF (बच्चे), UNHRC (मानवाधिकार)।
गैर-सरकारी संगठन (NGO)
गैर-सरकारी संगठन (NGO) नागरिक बनाते हैं, सरकारें नहीं।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल: दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए अभियान चलाता है, रिपोर्ट बनाता है और अंतरात्मा के बंदियों के लिए आवाज़ उठाता है।
- ह्यूमन राइट्स वॉच: अधिकारों के हनन पर शोध और रिपोर्ट करता है और सरकारों व मीडिया पर कार्रवाई का दबाव डालता है, जैसे बाल सैनिकों और बारूदी सुरंगों के मामले में।
NGO स्वतंत्र होते हैं, पर सरकारें कभी-कभी उन पर पक्षपात का आरोप लगाती हैं।
करके देखें
कक्षा में 'सुरक्षा परिषद' बनाइए: 15 विद्यार्थी चुनिए, उनमें 5 स्थायी जिनके पास वीटो कार्ड हो। कोई नियम रखिए (जैसे 'खेल के ज़्यादा पीरियड')। वोट कीजिए। एक स्थायी सदस्य वीटो लगाए। चर्चा कीजिए: क्या यह उचित है? आप इसे कैसे सुधारेंगे?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राष्ट्र संघ: 1919; UN: 24 अक्टूबर 1945, 51 → 193 सदस्य
- छह अंग: महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक-सामाजिक परिषद, न्यायालय, सचिवालय, न्यास परिषद
- सुरक्षा परिषद: 15 = 5 स्थायी (वीटो) + 10 दो साल के लिए चुने
- फ़ैसला: 9 वोट, कोई वीटो नहीं
- IMF 1945, विश्व बैंक 1944, WTO 1995 (GATT के बाद), ILO 1919, IAEA 1957
- G4: भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान
हल किए गए उदाहरण
1. संयुक्त राष्ट्र क्यों बनाया गया?
राष्ट्र संघ दूसरा विश्व युद्ध नहीं रोक सका, इसलिए 1945 में देशों ने युद्ध रोकने और शांति, अधिकार व विकास पर सहयोग के लिए UN बनाया।
2. वीटो शक्ति क्या है?
सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों में से हर एक का यह अधिकार कि वह 'ना' कहकर फ़ैसला रोक दे, भले बाक़ी सभी सहमत हों।
3. सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के तीन तर्क दीजिए।
भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दुनिया की लगभग छठी आबादी यहाँ है; UN शांति सेना में सबसे ज़्यादा सैनिक भेजने वालों में है; बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और नियमित चंदा देता है।
4. WTO और IMF में क्या अंतर है?
WTO अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम बनाता-लागू करता और व्यापार विवाद सुलझाता है; IMF वित्तीय व्यवस्था देखता है और भुगतान संकट वाले देशों को ऋण देता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सुरक्षा परिषद के 15 स्थायी सदस्य हैं। केवल 5 स्थायी हैं; 10 चुने जाते हैं।
- IMF (मुद्रा व्यवस्था, अल्पकालिक मदद) और विश्व बैंक (विकास ऋण) को एक समझना।
- यह लिखना कि UN विश्व सरकार है। यह सदस्य देशों के ज़रिए ही काम करता है।
- यह कहना कि महासभा सुरक्षा पर बाध्यकारी फ़ैसले करती है। शांति पर बाध्यकारी फ़ैसले सुरक्षा परिषद करती है।